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400 वंदे भारत ट्रेन चलाने का मतलब आप जानते हैं?

यूसुफ़ किरमानी-

बजट पर सभी चैनलों ने एक सुर में जो विश्लेषण किया है, उसमें 400 वंदे भारत ट्रेन चलाने के मतलब और मकसद पर किसी ने चर्चा नहीं की।

400 वंदे भारत ट्रेन चलाने का मतलब आप जानते हैं?

देश के सभी शहर से वंदे भारत चलाने का मतलब ये है कि धीरे धीरे रेलवे के निजीकरण की तरफ़ कदम तेज बढ़ाना। जिनके पास पैसा है, साधन संपन्न हैं, उन्हें यह ट्रेन ज़रूर पसंद आएगी, लुभाएगी। लेकिन कम पैसे में जीने वाले आम भारतीयों को रेलवे का निजीकरण परेशान और हताश करेगा।

भारतीय रेल दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क है। उसे खुद अपनी संपत्तियों का पता नहीं है। आम लोगों ने भारतीय रेल को लोकप्रिय बनाया। आम लोगों के पैसे से रेलवे का साम्राज्य खड़ा हुआ। यही वजह है कि अब प्राइवेट प्लेयर तेज़ी से देश की इस संपदा पर भी क़ब्ज़ा करना चाहते हैं। तमाम आँकड़े हैं जो दिए जा सकते हैं लेकिन इस पोस्ट को जबरन गंभीर बनाने की कोशिश मैं नहीं करना चाहता।

एक लाइन में वो बात भी दोहरा दूँ कि बैंकों और टेलीकॉम कंपनियों का निजीकरण के नतीजे हम देख सकते हैं।

दरअसल, केंद्रीय बजट में आज डिजिटल रूपया लाने की घोषणा की गई है। इसके आने के बाद सरकारी बैंकों का रहा-सहा दम और निकल जाएगा। इससे प्राइवेट बैंकों, पेटीएम, रिलायंस और अडानी जैसी कंपनियों को सीधा फ़ायदा होगा, जो इस धंधे में उतर चुके हैं। सरकारी बैंकों का बचा हुआ बिज़नेस भी वहाँ चला जाएगा।

हम यह नहीं कह रहे कि सरकारी क्षेत्र की कंपनियाँ बहुत अच्छी हैं या उनमें सुधार की गुंजाइश नहीं है। लेकिन इन सबका असर जनता की जेब पर पड़ने वाला है।

बजट में बहुत सी बातें और इशारे हैं। आपको समझना चाहिए, न की टीवी चैनलों से अपनी राय बनाइए।

बहरहाल, आप लोग देख लें कि क्या करना है? आपकी समझदारी का पता 10 मार्च को पूरी दुनिया को चल जाएगा। 1 अप्रैल से या तो बहुत कुछ झेलने के लिए तैयार हो जाइए या फिर 2024 से पहले उनकी गाड़ी रिवर्स गियर में चलने लगेगी।

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1 Comment

1 Comment

  1. Prashant Pandey

    February 2, 2022 at 9:22 am

    janab Digital currency ko lekar aapka gyan bahut hi adhkachara hai.
    Theek se samjhne ke liye Bhadas par hi Girish Malviya ji ki post ka adhyayan kariye.

    Baaki aapne theek kaha, Sarkari compnies achchi hai ya nahi eeski accountibility Government ki hi hai. Agar halat theek nahi to theek bhi govt ko hi karna hai. Agar sab kuch private hi karna hai to hum (Public) sarkar ko kyon chunate hai. Fir ham Government ko Tax kyon de ?

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