दिल्ली हाईकोर्ट में जज गीता मित्तल की सीजेआई से शिकायत- ‘लेटलतीफ हैं और काम में रुचि नहीं लेती’

 

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नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर से पीड़ित वादियों ने दिल्ली हाईकोर्ट के जज की शिकायत की है। इसमें कहा गया है कि जस्टिस गीता मित्तल मामलों की सुनवाई बहुत धीमी गति से कर रही हैं जिसकी वजह से उनके केस की सुनवाई में देरी हो रही है। पीड़ित वादियों ने दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति गीता मित्तल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अप्रैल माह में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों को एक पत्र पहुंचाया गया था जिसमें यह कहा गया था कि सैकड़ों लोगों के केस का न्यायमूर्ति गीता मित्तल की लेटलतीफी और उनके काम में रुचि न लेने की वजह से निस्तारण नहीं हो रहा है।

वादी राम प्रसाद ने आरोप लगाया है कि न्यायमूर्ति गीता मित्तल कोर्ट के काम में रूचि नहीं लेती हैं। वह कोर्ट को उतना समय भी नहीं देतीं, जितना देना चाहिए। कोर्ट में एक घंटे के लिए आती हैं और उसमें भी वह मामलों की सुनवाई न कर वकीलों और वादियों को सामाजिक व्याख्यान देने में गवां देती हैं। जब से वह जज बनी हैं उनके द्वारा निस्तारित मुकदमों की संख्या दिल्ली हाई कोर्ट के सभी जजों की अपेक्षा सबसे कम है। राम प्रसाद के अनुसार गीता मित्तल की काम में रूचि ने लेने की वजह से ही सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश से दखल देने की गुजारिश की है।

मुख्य न्यायाधीश से मांग की गई है कि श्री ठाकुर, न्यायमूर्ति गीता मित्तल के लिए सुनिश्चित करें कि वह कोर्ट में कम से कम पांच घंटे बैठें और मुकदमों के निस्तारण में रूचि लें। पत्र में यह भी लिखा गया है कि जनवरी माह में न्यायमूर्ति गीता की अध्यक्षता में उनकी बेंच ने मात्र 9 मामलों का निस्तारण किया है, जिसमें दो मामले डिसमिस हो गए थे। दो साधारण मामले थे जिनकी सुनवाई की गई। न्यायमूर्ति गीता द्वारा जिन चार मामलों की सुनवाई की गई उनमें एक 10 पेज का, दूसरा 4 पेज का, तीसरा 11 पेज का और चौथा 33 पेज का था। जिन दो मामलों को आदेश देकर निस्तारित किए गए वह दो तीन पेज में ही सिमटे हैं।

कुल मिलाकर पूरे महीने में उन्होंने 63 पेज लिखवाया है। पत्र में यह भी लिखा गया है कि फरवरी माह में मात्र 7 मामलों की निस्तारण हुआ। न्यायमूर्ति गीता द्वारा दिए गए 5 जजमेंट और एक आर्डर का ब्योरा 48 पेज में है। पत्र में जो भी ब्योरा दिया गया है वह दिल्ली हाईकोर्ट की वेबसाइट पर है।

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