योगी राज में प्रोफेसर का मकान ज़मींदोज़

प्रोफेसर डॉ.अली अहमद फ़ातमी का मकान ज़मींदोज़ किए जाने के खिलाफ़ बयान

इलाहाबाद ज़िला प्रशासन और विकास प्राधिकरण ने उर्दू के बड़े लेखक-आलोचक डॉ. अली अहमद फ़ातमी का घर जिस तरह ज़मींदोज़ किया है, उससे हम स्तब्ध हैं।

प्रोफेसर डॉ. अली अहमद फ़ातमी इलाहाबाद विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त हैं। लूकरगंज स्थित उनके मकान को खाली करने के लिए प्रशासन ने सिर्फ़ एक दिन का नोटिस दिया और अगले दिन उसे ज़मींदोज़ कर पूरी बेरहमी से उन्हें सड़क पर ला खड़ा किया।

आसपास के छह-सात और भी मकान गिराए गए हैं जिनमें फ़ातमी साहब की बेटी का मकान भी शामिल है। एक बुज़ुर्ग लेखक, उनकी बीमार पत्नी और बेटी के साथ प्रशासन का यह बरताव बेहद आपत्तिजनक और शर्मनाक है। जिस शासन-प्रशासन को फ़ातमी साहब जैसे लेखकों पर गर्व करना चाहिए और साहित्य की दुनिया में उनका अधिक अवदान सुनिश्चित करने के लिए सुविधाएँ मुहैया करानी चाहिए, वह उन्हें एक झटके में सड़क पर ला खड़ा करने की शर्मनाक हरकत कर रहा है, इससे ज़्यादा अफ़सोस की बात और क्या होगी!

जनवादी लेखक संघ इस कार्रवाई की पुरज़ोर भर्त्सना करता है और प्रशासन से यह माँग करता है कि फ़ातमी साहब को अविलंब वैकल्पिक आवास मुहैया कराने के साथ-साथ उनके नुकसान का पूरा-पूरा मुआवज़ा दे।

जनवादी लेखक संघ

मुरली मनोहर प्रसाद सिंघ (महासचिव)

राजेश जोशी (संयुक्त महासचिव)

संजीव कुमार (संयुक्त महासचिव)

प्रेस रिलीज

भड़ास की खबरें व्हाट्सअप पर पाएं, क्लिक करें-

https://chat.whatsapp.com/Bo65FK29FH48mCiiVHbYWi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *