दोनों डोज लगवाने के बावजूद पद्मश्री डॉक्टर केके अग्रवाल का कोरोना से निधन

अरविंद कुमार सिंह-

जनता के डॉक्टर को सादर नमन…. मैने डॉ. बिधान चंद्र राय को नहीं देखा। लेकिन उनके बारे में अनगिनत किस्से सुने। वे डॉ. राय नहीं थे लेकिन उनके बहुत से गुण उनमें मैने देखे। मैं बात कर रहा हूं जनता के डॉक्टर के.के. अग्रवालजी का जिनके निधन के साथ एक अध्याय समाप्त हो गया।

मेरा उनसे परिचय शायद 1991-92 के दौरान हुआ था। डॉक्टरों से मेरा अधिक साबका नही पड़ा लेकिन पत्रकारिता के आरंभिक दिनों में मैने जनता को लूटने वाले कुछ नामी डॉक्टरों और नरसिंग होमों पर हमला किया तो कुछ मुकदमेबाजी भी झेली। लेकिन अग्रवाल साहब के माध्यम से मैने कितने लोगों की मदद की होगी याद नहीं। खास तौर पर ह्रदय रोग के मामले में बहुत से मित्रों की मदद उन्होंने की। अन्य मामलों में भी। उनके अलावा डॉ. अशोक वालिया थे जिनसे कुछ कहता तो तत्काल सहयोग मिलता।

कोरोना संकट के दौरान लोगों को यथासंभव जिस तरह डॉ. के के अग्रवाल ने सलाह और परामर्श दिया वह अनूठा था। वे चाहते तो आपदा में अवसर तलाश सकते थे, देश की नामी गिरामी हस्ती थे। लेकिन यह काम उन्होंने कभी नहीं किया। एम्स में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भी उनको बचा नहीं सकी, इसका बहुत अफसोस है।

2010 में उनको पद्मश्री मिला। वे इससे बहुत के हकदार थे लेकिन नेताओं के पीछे भागते नहीं थे। वे लेखक और मोटिवेशनल स्पीकर थे। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर भी उन्होंने अनूठा काम किया। लेकिन हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया नामक जिस संगठन की उन्होने स्थापना की थी, उसके माध्यम से उन्होंने जागरूकता प्रसार में वह काम किया जो सरकार के संगठन भी नहीं कर सके। वे एक अच्छे लेखक भी थे और चिकित्सा लेखन के क्षेत्र में योगदान के लिए विश्व हिंदी सम्मान भी उनको मिला था।

यह भी विचित्र संयोग है कि डॉ. अग्रवाल कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीन की दोनों डोज भी लगवा चुके थे। हाल में यथावत संवाददाता विजय कुमार राय से एक बातचीत में उन्होंने बेबाकी से कहा था कि कोरोना की दूसरी लहर के बारे में हम लोगों ने समझा नहीं कि यह आ सकती है। हमने दुनिया से नहीं सीखा। देश में बाहर के देशों से न्यू स्ट्रेन आ सकता है और अगर न्यूस्ट्रेन आ गया तो कितनी अधिकता से आ सकता है यह हमने सोचा ही नहीं। नया म्यूटेशन अगर आया है तो कहीं ना कहीं हमसे चूक हुई है। वे यह भी मानते थे कि देश की अर्थव्यवस्था बेहद ज़रूरी है इसलिए पर्सनल लॉकडाउन बेटर देन नैशनल लॉकडाउन।

भड़ास की खबरें व्हाट्सअप पर पाएं
  • भड़ास तक कोई भी खबर पहुंचाने के लिए इस मेल का इस्तेमाल करें- bhadas4media@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *