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उत्तर प्रदेश

दुर्गा शक्ति नागपाल बनाम शबीना खान: जरूरत है निरंकुश सिस्टम को बदलने के लिए न्यायपालिका के साथ सरकार भी रिव्यू करे!

Side-by-side portrait of two women with captions in Hindi beneath each image; left woman in black top, right woman in green traditional attire with white scarf.

आशीष माहेश्वरी-

IAS अफसर की हनक और भौकाल वहां खत्म होता है जहां से न्यायपालिका की शक्तियां और मर्यादाओं की लक्ष्मण रेखा शुरू होती है, ये बात शायद आईएएस अधिकारी और देवीपाटन की डिवीजनल कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल को उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट के सख्त रवैए से समझ आ गई होगी….

बीते कुछ सालों में जिस तरह से आईएएस और आईपीएस अधिकारियों में तानाशाही रवैया सामने आने लगा है, और नौकरशाह अपनी ड्यूटी ईमानदारी के साथ कर ले और जनता से प्यार से बात कर ले तो मीडिया की सुर्खियां ऐसे मिलती हैं जैसे अफसर ने कोई ड्यूटी न करके जनता पर कोई एहसान किया हो, हाल ही में मेरठ के पूर्व एसएसपी अविनाश पांडेय जिस तरह से कैदी वाहन के अंदर घुसकर आंदोलनकारी को पीटते हुए दिखाई दिए और हाल ही में मेरठ पुलिस पर जिस तरह से पुलिस हिरासत में किसान नेता दिग्विजय भाटी के साथ अमानवीयता की हदें पार करने के आरोप लगे हैं, उस दौर में साफ माना जा सकता है ब्यूरोक्रेसी का एक बड़ा तबका बेलगाम और निरंकुश होकर हिटलरशाही पर उतर आया है….

पिछले दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस श्री अरुण कुमार सिंह देशवाल ने टिप्पणी करके कहा कि आईपीएस अधिकारी CJM और दूसरे न्यायिक अधिकारियों पर दबाव डालकर मनमाफिक फैसला लिखवाने की कोशिश करते हैं, इस परिपाटी को सख्ती कर साथ बदलने की आवश्यकता है…

हाल ही में सबसे अधिक चर्चा गोंडा की सिविल जज शबीना खान के उन आरोपों की है जिनमें उन्होंने देवीपाटन की डिवीजनल कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल के ऊपर न्यायिक कार्यों में दखल देकर अभद्रता करने के आरोप लगाए हैं, ये वास्तव में एक बेहद ही गंभीर मामला जान पड़ता है,

माना जा सकता है कि देश के संवैधानिक सिस्टम में आईएएस होने का मतलब काफी शक्तिशाली, पॉलिसी मेकर, सर्वसाधन सम्पन्न माना जाता है, माना जा सकता है कि न्यायिक अधिकारियों को मिलने वाले आवास, सुविधाएं और दूसरे लाभ एक आईएएस अधिकारी की तुलना में काफी कम हो सकते हैं लेकिन शायद दुर्गा शक्ति नागपाल ने शायद संविधान और कानून का वो चैप्टर नहीं पढ़ा जिसमे स्पष्ट है कि कोई भी न्यायिक अधिकारी किसी आईईएस अधिकारी का मातहत नहीं है और नौकरशाह को।किसी न्यायिक प्रक्रिया में सीधे दखल देने का कोई अधिकार प्राप्त नहीं है,

हाईकोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाने का इशारा कर दिया है लेकिन अब जरूरत है निरंकुश हो चुके सिस्टम को बदलने के लिए सिर्फ न्यायपालिका ही नहीं बल्कि सरकार के स्तर पर भी रिव्यू किया जाय….

मूल खबर…

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
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