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उत्तर प्रदेश

रिवर फ्रंट घोटाला : ईडी राडार पर पूर्व सीएम से लेकर आईएएस और इंजीनियर तक!

खनन घोटाले के बाद अब गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में जांच एजेंसियों ने तेजी दिखा दी है. आज प्रवर्तन निदेशालय की टीमें कई राज्यों में छापेमारी कर रहीहैं. ईडी ने गोमती रिवर फ्रंट घोटाला मामले में यूपी, हरियाणा, राजस्थान और राजधानी दिल्ली में छापेमारी की है. इसमें सिंचाई विभाग के कुछ पूर्व अधिकारियों और गैमन इंडिया के अधिकारियों के कई ठिकानों को खंगाला गया है. नोएडा के भी कुछ ठिकानों पर छापेमारी की गई है. राजस्थान के भिवाड़ी और हरियाणा के गुरुग्राम में भी ईडी के अधिकारियों ने छापेमारी की है.

बताया जाता है कि ईडी के राडार पर पूर्व सीएम अखिलेश यादव के अलावा कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और ढेर सारे इंजीनियर हैं. ये मामला अखिलेश यादव सरकार के दौर का है. इसलिए इस मामले में अखिलेश यादव समेत कई अफसरों पर ईडी शिकंजा कस सकती है. फिलहाल ईडी पूरे घोटाले में करोड़ों रुपये की हेरा-फेरी का पता लगाने में जुटी है. सबूत हाथ लगते ही बड़ी कार्रवाई हो सकती है.

गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में छह बड़ी कंपनियों को सम्मन जारी किया गया था. ईडी की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि जो कंपनियां ब्लैक लिस्टेड थीं, उन्हें रिवर फ्रंट के काम के ठेके दिए गए और जिस राशि पर ठेका दिया गया, उससे अधिक भुगतान किया गया. कई राज्यों में ब्लैक लिस्टेड हो चुकी गैमन इंडिया को दो ठेके दिए गए, वह भी सबसे ऊंचे रेट 665 करोड़ पर. इस कंपनी को भी काम से ज्यादा भुगतान किया गया. केके स्पून कंपनी टेंडर के लिए योग्य नहीं थी. यह कंपनी मूल योग्यताएं पूरी नहीं कर रही थी, जैसे सिंचाई विभाग में पंजीकरण। लेकिन कंपनी को ठेका पहले दे दिया गया और बाद में कंपनी सिंचाई विभाग में पंजीकृत हुई. ईडी ने बीते सितंबर महीने में गैमन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, केके स्पून पाइप प्राइवेट लिमिटेड, रिशु कंस्ट्रक्शन, हाइटेक कम्पेटेंट बिल्डिर्स प्राइवेट लिमिटेड और तराई कंस्ट्रक्शन को सम्मन जारी किया था.

सिंचाई विभाग के तत्कालीन चीफ इंजिनियर गुलेश चंद्रा (रिटायर्ड), एसएन शर्मा, काजिम अली, तत्कालीन सुपरिटेंडेंट इंजीनियर (रिटायर्ड) शिव मंगल यादव, अखिल रमन (रिटायर्ड), रूप सिंह यादव (रिटायर), कमलेश्वर सिंह और एक्जिक्यूटिव इंजीनियर सुरेंद्र यादव के खिलाफ गबन, धोखाधड़ी, जालसाजी, घूसखोरी, भ्रष्टाचार और सरकारी पद के दुरुपयोग के आरोप में सबसे पहली एफआईआर दर्ज हुई थी.

गोमती रिवर फ्रंट घोटाला मामले में कई इंजीनियरों की संपत्ति की जांच चल रही है. ईडी सभी के खातों की जांच कर रही है. ईडी की तरफ से इस घोटाले से जुड़े सभी अधिकारियों और इंजीनियरों से उनकी संपत्ति, फ्लैट, जमीन आदि का ब्यौरा मांगा गया था. अब इसके बाद यह छापेमारी इन सभी अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ा सकती है. अब ईडी ने खुद मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर सभी की संपत्ति की जांच करना शुरू कर दिया है.

लखनऊ में ईडी की टीमों ने गोमती नगर के विशालखंड और राजाजीपुरम इलाके में छापा मारा. गोमती नगर के विशालखंड स्थित मकान नंबर 3/332 में ईडी की टीम पहुंची. इस विशाल घर के बाहर शिवांश नाम लिखा है. ईडी ने इस मकान को अंदर से बंद कर लिया है. किसी के भी अंदर जाने और बाहर आने पर रोक है. यह मकान ठेकेदार अखिलेश सिंह का है. बताया जा रहा है कि अखिलेश संतकबीरनगर के मेहंदावल से बीजेपी विधायक राकेश सिंह के भाई हैं.

गोमती रिवर फ्रंट का काम अखिलेश सरकार में 2015 में शुरू हुआ था. शुरुआती बजट 550 करोड़ का था जिसे बढ़ाकर 1467 करोड़ रुपये कर दिया गया. योगी सरकार आने तक परियोजना पर 1427 करोड़ रुपये खर्च हो चुके थे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा बैठक की तो परियोजना पूरी करने के लिए 1500 करोड़ से ज्यादा का अतिरिक्त बजट और बताया गया. इस पर सीएम की नाराजगी के बाद जांच शुरू हुई. पहले एक जज की कमेटी ने जांच की. उसके बाद नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई. इसके बाद सीबीआई जांच की सिफारिश हुई. माना जा रहा है कि इसमें अखिलेश यादव समेत कई आएएस अफसर और इंजीनियर लपेटे में आ सकते हैं.

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