कोर्ट से वाड्रा को गिरफ्तार कर पूछताछ करने की इजाजत ईडी को नहीं मिली

जेपी सिंह

मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में रॉबर्ट वाड्रा को स्पेशल सीबीआई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। वाड्रा की अग्रिम जमानत याचिका कोर्ट ने मंजूर कर ली है और उन्हें 5लाख के निजी मुचलके पर अग्रिम जमानत दी गई है। वाड्रा के करीबी सहयोगी मनोज अरोड़ा को भी अग्रिम जमानत मिल गई है।कोर्ट की अनुमति के बिना वाड्रा देश नहीं छोड़ सकते और उन्हें जांच में सहयोग का निर्देश दिया गया। साथ ही चेतावनी दी गई कि सबूत या गवाहों के साथ कोई छेड़छाड़ न की जाए।

वाड्रा से मनी लॉन्ड्रिंग और जमीन खरीद के मामले में अब तक कई राउंड पूछताछ हो चुकी है। दोनों ही अभी अंतरिम जमानत पर हैं। मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशों में शेल कंपनियों के जरिए संपत्ति खरीदने का आरोप वाड्रा पर है। इससे एक तथ्य और उभरकर सामने आ रहा है कि अभी तक कोई ठोस सबूत ईडी के हाथ नही लगा है। उच्चतम न्यायालय कई बार व्यवस्था दे चुका है कि सुनी सुनाई बात अथवा नैतिकता के अधार पर किसी को दंडित नहीं किया जा सकता, इसके लिए संदेह से परे ठोस सबूत होने चाहिए। इस प्रकार वाड्रा को गिरफ्तार करके पूछताछ की इजाजत ईडी को नहीं मिली।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा और उनके सहयोगी को कोर्ट ने 5 लाख के निजी मुचलके पर जमानत दे दी है। बता दें कि जमीन खरीद और शेल कंपनियों के जरिए विदेशों में (लंदन और दुबई में) संपत्ति खरीदने के मामले में वाड्रा से अब तक प्रवर्तन निदेशालय कई बार लंबी पूछताछ कर चुका है।

सीबीआई की विशेष अदालत ने कुछ शर्तों के साथ अग्रिम जमानत दी है। कोर्ट ने वाड्रा और उनके सहयोगी मनोज अरोड़ा के देश छोड़ने पर पाबंदी लगाई है। दोनों कोर्ट की अनुमति के बाद ही विदेश जा सकेंगे। साथ ही कोर्ट ने बुलाए जाने पर जांच के लिए मौजूद रहने का और जांच में सहयोग का भी निर्देश दिया है। कोर्ट ने सबूतों को प्रभावित करने या उनके साथ छेड़छाड़ नहीं करने का निर्देश भी वाड्रा और अरोड़ा को दिया है।

इससे पहले पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) राबर्ट वाड्रा की कस्टडी रिमांड चाहता है और इसी वजह से उसने जमानत का विरोध किया था। अदालत में ईडी के वकील ने कहा था कि वाड्रा के खिलाफ सबूत पर्याप्त हैं और उससे हिरासत में लेकर पूछताछ की जानी चाहिए। जांच एजेंसी का दावा है कि दोनों आरोपियों ने पेट्रोलियम और रक्षा सौदों में रिश्वत ली है।

यह है पूरा मामला

ईडी एक पेट्रो-केमिकल कॉम्पलेक्स की जांच कर रहा है। इसे ओएनजीसी ने विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाने का निर्णय लिया था। सैमसंग इंजीनियरिंग को इसका हिस्सा बनाने के लिए ओएनजीसी ने पैसे दिए थे। इसके बाद सैमसंग ने संजय भंडारी की दुबई स्थित कंपनी इंटरनेशनल एफजेडसी को काम दिया।यह अनुबंध सैमसंग को दिसंबर 2008 में मिला था और कंपनी ने इसके बाद सेंटेक को 49,90,000 अमेरीकी डॉलर का भुगतान किया था। भंडारी की सेंटेक ने जून 2009 को लंदन के12 ब्रायनस्टन स्क्वायर में संपत्ति खरीदी थी। यह संपत्ति वर्टेक्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर पंजीकृत थी।

सेंटेक ने वर्टेक्स के खाते में 17 करोड़ रुपये के स्टर्लिंग स्थानांतरित किए। वर्टेक्स प्राइवेट लिमिटेड ने अपने सारे शेयर स्काई लाइट इनवेस्टमेंट एफजेडईऊ दुबई ने खरीद लिया था जिसका पूरा नियंत्रण लंदन में सी थम्पी करते थे। रिपोर्ट्स के अनुसार सी थम्पी रॉबर्ट वाड्रा के करीबी माने जाते हैं।

संजय भंडारी, सुमित चढ्डा (स्जय का लंदन स्थित रिश्तेदार), मनोज अरोड़ा और रॉबर्ट वाड्रा के बीच ईमेल के जरिए हुई बातचीत से पता चला है कि उन्हें वाड्रा की संपत्ति में गहरी रुची थी और वे इसके नवीकरण को लेकर किए जा रहे कामों को जानना चाहते थे।ईडी का दावा है कि भंडारी ने स्टर्लिंग का 59 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च वहन किया। इसके बावजूद मेयफेयर एफजेडई शारजाह दुबई को 17 करोड़ रुपये स्टर्लिंग के लिए 12 ब्रायनस्टन स्क्वायर की संपत्ति बेच दी गई।

हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहता है ईडी

दरअसल ईडी मनी लॉन्ड्रिंग केस में वाड्रा को हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहता है। ईडी को आशंका है कि इस केस में साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। जांच एजेंसी का कहना है कि आर्थिक अपराध को गंभीरता पूर्वक देखे जाने की जरूरत है। जांच एजेंसी पहले भी वाड्रा को अग्रिम जमानत दिए जाने का विरोध कर चुकी है। मनी लॉन्ड्रिंग केस में रॉबर्ट वाड्रा से 7फरवरी को नई दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय के दफ्तर में करीब 6 घंटे पूछताछ हुई थी। उसके बाद करीब दो दिनों तक उनसे पूछताछ हुई। इस दौरान ईडी के अधिकारियों ने कोर्ट से कहा कि वाड्रा पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे हैं। इसलिए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत है। ईडी के इस अनुरोध को पटियाला हाउस कोर्ट ने ठुकरा दिया था। हालांकि कोर्ट ने वाड्रा को पूछताछ में अधिकारियों का सहयोग करने का निर्देश दिया।इसके बाद 12 फरवरी को जयपुर में बीकानेर लैंड डील केस में प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के सामने पेश होना पड़ा। उस पेशी में रॉबर्ट वाड्रा की मां भी शामिल थी।फरवरी में ईडी अधिकारियों ने जब पूछताछ की थी।

मनी लॉन्ड्रिंग क्या है?

अमेरिका के माफिया ग्रुप्स के चलते यह शब्द पहली बार सामने आया था। काले धन को वैध बनाना ही मनी लॉन्ड्रिंग कहलाता है। इसमें आपराधिक तरीके से जुटाए पैसों को वैध बनाकर दिखाया जाता है। भ्रष्टाचार, बैंक खातों और वित्तीय दस्तावेजों में अनियमितता, अवैध सौदेबाजी (संपत्ति या किसी अन्य स्रोत) से मिला धन शामिल किया जाता है। 1990 में हवाला कारोबार के रूप में यह सबसे पहले भारत में सामने आया था, जिसमें कुछ बड़े नेताओं के नाम उजागर हुए थे।

भारत में मनी लॉन्ड्रिंग कानून

भारत में मनी-लॉन्ड्रिंग निरोध अधिनियम, 2002 एकजुलाई 2005 को प्रभाव में आया था। इसमें 3 बार संशोधन (2005, 2009 और 2012) किया जा चुका है। इसके बाद से ही अवैध लेनदेन को इस कानून के दायरे में लाया गया। मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए ही दस्तावेजों में वित्तीय लेनदेन की पूरी जानकारी (जो सही हो) देना अनिवार्य किया गया है। इसी के तहत केवाईसी डिटेल भरनी होती है।

लेखक जेपी सिंह इलाहाबाद के वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं.

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