देवरिया के खरवनिया गांव में क्यों जुटते है बड़े-बड़े आईएएस और आईपीएस अधिकारी?

अफसरों को नतमस्तक करने वाली कौन सी जादू की छड़ी है नन्द लाल जायसवाल और रामजी जायसवाल के पास?  देवरिया 17 नवम्बर : एक तरफ प्रदेश के मुखिया अखिलेश यादव जहां प्रशासनिक अधिकारियों को ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता का पाठ पढ़ाने में सदैव आगे रहते है वहीं प्रशासनिक वरिष्ठ अधिकारी मुख्यमंत्री के उक्त आदेश को ठेंगा दिखाने में पीछे नहीं रहते है। वे भूमाफिया और अनेकों आरोपों से घिरे विवादित धन्ना सेठों के यहां पहुंच कर उनका महिमा मंडन करते हैं तथा उपकृत होते है। यहीं नहीं, ये प्रशासनिक अधिकारी जहां आम जनता से बड़ी मुश्किल मिलते हैं वहीं धन कुबेरों के घरों पर जाकर घण्टों बैठकर आनन्दित होते रहते है तथा महफिल सजाते हैं। 

वह जगह है देवरिया जिला मुख्यालय से लगभग 65 कि मी दूर खरवनिया गांव। जहां लगभग हर बड़ा अधिकारी जाने के लिए लालायित रहता है तथा जायसवाल बन्धुओं का अतिथि बनने का मोह नहीं त्याग पाता है। शहर और गांव की आम जनता आज तक यह नहीं समझ पाई कि आखिर उस गांव में पिछले एक दशक से बड़े बड़े अधिकारी और नेता किस तिलिस्म के तहत एक़त्रित होते हैं। बात हो रही है मंगलवार को गोरखपुर मण्डल के लभगग सभी आला अधिकारियों का देवरिया जिले के खरवनिया गांव में एकत्रित होने एवं प्रभावती देवी महावि़द्यालय के वार्षिक समारोह में उपस्थित होने के सम्बन्ध में।

कमाल यह देखिये कि सरकारी वरिष्ठ अधिकारियों ने आम जनता को धोखा देने के उददेश्य से भाटपाररानी तहसील दिवस मे शामिल का होने का बहाना खोज लिया। तहसील दिवस में एक साथ गोरखपुर के मण्डलायुक्त अनिल कुमार, गोरखपुर जोन के पुलिस महानिरीक्षक मोहित अग्रवाल, पुलिस उप महानिरीक्षक शिव सागर सिंह, जिलाधिकारी देवरिया अनिता श्रीवास्तव व पुलिस अधीक्षक मोहम्मद इमरान सहित लगभग पांच दर्जन अन्य सरकारी अधिकारी और उनके मातहत उपस्थित हुए तथा एसडीएम व सीओ आदि तहसील दिवस की खाना पूर्ति करने के बाद सभी अधिकारी जायसवाल बन्धुओं का आतिथ्य स्वीकार करने के लिए खरवनिया गांव पहुंच गए।

इन अधिकारियों ने खरवनिया गांव में पहुंच कर किया क्या। कुछ नहीं। गांव के विकास से कोई मतलब नहीं। जायसवाल बन्धुओं के निजी विद्यालय के वार्षिक समारोह में भाग लिया तथा वहां उपस्थित लोगों को सम्बोधित करने का कोरम पूरा किया। तत्पश्चात जायसवाल बन्धुओं द्वारा दिए गए विशेष सम्मानों को तहे दिल से स्वीकार कर लिया। आम लोगों को घोर आश्चर्य होता है कि राम जी जायसवाल, नन्द लाल जायसवाल, आदि बन्धुओं का ऐसा कौन सा सामाजिक कृत्य है कि आला अधिकारी इन जायसवाल बन्धुओं का एक तरह से तलवे चाटने के लिए तैयार रहता हैं। इनके घर का कोई व्यक्ति दुश्मन देशों से युद्ध में लड़ते हुए न तो शहीद हुआ है और न ही इन लोगों ने समाज सेवा का कोई बड़ा कोई काम किया है। जबकि लोगों का आरोप है कि इन जायसवाल बंधुओं की एक गुटखा कम्पनी है जिसमें एमडी की हैसियत से जायसवाल बन्धु कार्यरत हैं तथा करोड़ों का व्यापार करते है एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को हर तरह का शारीरिक, मानसिक और आर्थिक सुख उपलब्ध कराते रहते हैं।

कहा जाता है कि इन अधिकारियों को नोएडा में बुलाकर खूब मेहमान नवाजी कराया जाता है जबकि दिखावे के लिए इन जायसवाल बन्धुओं का एकाध विद्यालय और फर्नीचर की दुकानें आदि हैं। बाकी भू माफिया के रूप में जमीनों को कब्जा करने तथा खुल कर दंबगई करना और अधिकारियों का ट्रान्सफर / पोस्टिंग इनका असली खेल है। इन जायसवाल बन्धुओं के अति घनिष्ठ सम्बन्ध लगभग सभी राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं के साथ भी है। चाहे वह सत्ताधारी दल सपा हो या विपक्ष की भाजपा या बसपा। आम लोगों के दिमाग में उक्त प्रकरण में सदैव यह प्रश्न बना रहता है कि नन्द लाल जायसवाल, रामजी जायसवाल आदि के पास ऐसी कौन सी जादू की छड़ी है कि बड़े-बड़े आईएएस और आईपीएस अधिकारी इनके आगे नतमस्तक बने रहते हैं? लोगों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से इसकी जांच कराने की मांग की है कि आखिर खरवनिया गांव में ऐसा क्या है कि शासन प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी वहां पिछले एक दशक जुटते चले आ रहे है।

देवरिया से ओपी श्रीवास्तव की रिपोर्ट.

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