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पुलिस के दूत बने पत्रकारों ने पूर्व विधायक से की बदसलूकी, फिर महिला कांवरियों से जमकर पिटे

औरंगाबाद। मुफसिल थाना क्षेत्र के एनएच-2 पर स्थित फार्म के समीप एक सड़क हादसे में दस कांवरियों की मौत हो गई और एक दर्जन से ज्यादा घायल हो गए। देवघर से जल चढ़ाकर लौटा कांवरियों का जत्था बस को खड़ा करके सड़क के किनारे सोया हुआ था पीछे से आ रही एक बड़ी ट्रॉली ने किनारे खड़ी कावरियों के बस में जोरदार टक्कर मार दी और बस सोये हुए कावरियों को रौंदते हुए सड़क के किनारे खड़ी हो गई। सभी कांवरिये रोहतास के डिहरी ऑन सोन, अकोढीगोला, तेतराधी एवं आसपास के क्षेत्रो के है।

औरंगाबाद। मुफसिल थाना क्षेत्र के एनएच-2 पर स्थित फार्म के समीप एक सड़क हादसे में दस कांवरियों की मौत हो गई और एक दर्जन से ज्यादा घायल हो गए। देवघर से जल चढ़ाकर लौटा कांवरियों का जत्था बस को खड़ा करके सड़क के किनारे सोया हुआ था पीछे से आ रही एक बड़ी ट्रॉली ने किनारे खड़ी कावरियों के बस में जोरदार टक्कर मार दी और बस सोये हुए कावरियों को रौंदते हुए सड़क के किनारे खड़ी हो गई। सभी कांवरिये रोहतास के डिहरी ऑन सोन, अकोढीगोला, तेतराधी एवं आसपास के क्षेत्रो के है।

घटना के बाद पुलिस की सुस्ती को लेकर ग्रामीणों ने डेहरी के पूर्व विधायक प्रदीप जोशी और विधायक ज्योति रश्मि के नेतृत्व में सड़क पर जाम लगा दिया। यह जाम सुबह के 4 बजे से दोपहर के 11 बजे तक रहा। इन सबके बीच हुआ कुछ यूँ की औरंगाबाद के जिलाधिकारी नविन चन्द्र झा और पुलिस कप्तान उपेन्द्र शर्मा अपने दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और एनएच-2 पर लगे जाम को खुलवाने का भरपूर प्रयास किया। जाम खुलता न देख पुलिस के अधिकारियों ने पत्रकारों का सहारा लिया।

पत्रकार भी अपना धर्म भूलकर पुलिस की ओर से कांवरियों, विधायक और पूर्व विधायक से वार्ता करने गए। पत्रकारों ने पुलिस के द्वारा किये जा रहे कार्य में जी जान से अपना सहयोग दिया। हद तो तब हो गई जब जाम लगा रहे पूर्व विधायक प्रदीप जोशी पर औरंगाबाद जिले के वरिष्ठ पत्रकार और आज अखबार से जुड़े रविन्द्र कुमार रवि सिंह ने थप्पड़ जड़ दिया। उसके बाद महिला कांवरिये आक्रोशित हो गयीं। और उन्होने पत्रकार रविन्द्र कुमार रवि, औरंगाबाद प्रभात खबर के ब्यूरो चीफ गोपाल सिंह, दैनिक जागरण से जुड़े निखिल कुमार, ईटीवी रिपोर्टर के सहयोगी रूपेश कुमार की पिटाई कर दी।

बाद में मुख्यमंत्री के आश्वासन पर जाम ख्त्म किया गया। लेकिन बड़ा सवाल यह है की क्या पत्रकारों ने अपनी दलाली का स्तर इतना गिरा लिया है कि प्रशासन की ओर से आंदोलनकारियों का आंदोलन कुचलने का काम करेंगे।

 

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित।

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