जानिए ट्विटर पर जंता ‘गायत्री मंत्र’ क्यों ट्रेंड करा रही है!

दिलीप खान-

निकम्मी मदारी सरकार के मूर्ख फ़ैसलों को याद करके लोग आज ट्विटर पर ‘गायत्री मंत्र’ ट्रेंड करवा रहे हैं. इस दौर को भूलिएगा मत. मार्च महीने की बात है. वैज्ञानिकों ने जब पूरे देश में कोरोना की दूसरी लहर की चेतावनी दी थी, तो मोदी सरकार ने AIIMS को एक अजूबा ठेका दिया था. गायत्री मंत्र से कोरोना ठीक करने के ट्रायल का ठेका.

देश में जादू-टोना मंत्रालय है नहीं, तो उसका काम भी साइंस मिनिस्ट्री को ही देखना पड़ता है. विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पैसों से हो रहे इस ट्रायल को ICMR ने मंजूरी भी दे दी. ऋषिकेश का AIIMS इस नौटंकी में दो महीने से जुटा है. ध्यान दीजिए- AIIMS, ICMR और विज्ञान मंत्रालय!

इन तीनों संस्थाओं का काम है देश में वैज्ञानिक चेतना का विकास करना, विज्ञान को समृद्ध करना, चिकित्सा को समृद्ध करना. लेकिन जब देश की बागडोर किसी मदारी के हाथ में हो तो वही होगा, जो हो रहा है.

इस बीच AIIMS के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने टीवी पर आकर कहा कि एक CT Scan सामान्य X-ray से 300 से 400 गुना ज़्यादा रेडिएशन आपके शरीर में पहुंचाता है. रेडियोलॉजी की सर्वोच्च इकाई ने इसे झूठ करार दिया है. IRIA ने कहा कि 5 से 10 गुना को गुलेरिया ने जिस तरह 300 से 400 गुना बता दिया, वह बेहद निराशाजनक है.

गुलेरिया इस वक़्त मोदी सरकार के सेफ़्टी वॉल्व की तरह व्यवहार कर रहे हैं. उनकी बातों में निरंतरता नहीं रहती. कई भ्रामक बयान वह पहले भी दे चुके हैं.

जिस AIIMS के वह निदेशक हैं, उसमें 65 विदेश डॉक्टरों को बीते एक साल से कोई तनख़्वाह नहीं दी गई है. वे मुफ़्त में खटे जा रहे हैं. डॉक्टरों को बयान जारी करना पड़ा है. कितनी बेरहम सरकार है कि कोरोना के इस भीषण काल में भी डॉक्टरों को पैसे नहीं दे रही है. पैसे दे रही है गायत्री मंत्र के लिए.

देश के डॉक्टर ख़ुद की जान ख़तरे में डालकर लगे पड़े हैं. अस्पताल की व्यवस्था चरमराई हुई है. फिर भी पैसे नहीं हैं. हां, इस बीच योगी आदित्यनाथ ने फ़ोटो खिंचवाने का एक ज़बर्दस्त मौक़ा ज़रूर पा लिया. DRDO के एक अस्पताल का उद्घाटन करने पहुंचे, तो सैकड़ों भगवा बैलून टंगवाकर फीता काटा. कुछ दिन पहले ही इस आदमी ने नाइट्रोजन से ऑक्सीजन बनाने का थेथरई भरा मूर्खतापूर्ण बयान दिया था.

आप लोग तड़पते रहिए. मोदी तब तक संसद भवन और अपना आसियाना बनाने में हज़ारों करोड़ फूंक रहे हैं.


गिरीश मालवीय-

इंडियन रेडियोलॉजिकल एंड इमेजिंग एसोसिएशन ( IRIA ) ने बुधवार को बयान जारी करके यह साफ कर दिया डॉ रणदीप गुलेरिया का बयान लोगों को गुमराह करने वाला और कन्फ्यूजन को और बढ़ाने वाला बयान है और उसका कोई ठोस वैज्ञानिक आधार भी नहीं है। सीटी स्कैन से इतना डरने या घबराने की जरूरत नहीं है। कुछ दिन पहले एम्स के डायरेक्टर डॉ रणदीप गुलेरिया ने चेतावनी दी थी कि इससे कैंसर होने का खतरा पैदा हो सकता है, क्योंकि एक सीटीसी स्कैन कराना 300-400 एक्स-रे एक साथ कराने के समान है, जिसका शरीर पर विपरीत असर पड़ सकता है।

IRIA ने कहा है कि ऐसा नहीं है। …..छाती के एक सीटी स्कैन को 300-400 एक्स-रे के बराबर बताना और उसकी वजह से कैंसर का खतरा पैदा होने की चेतावनी देना पूरी तरह गलत और आउटडेटेड है। बयान में कहा गया है कि यह बहुत पुरानी बात है। ऐसी स्थिति 30-40 साल पहले हुआ करती थी, जबकि आज के आधुनिक युग में जिन सीटी स्कैनरों का उपयोग जांच के लिए किया जाता है, उनमें अल्ट्रा लो डोज यानी बेहद कम या हल्की रेडिएशन का इस्तेमाल किया जाता है, जो तुलनात्मक रूप से केवल 5-10 एक्स-रे के बराबर होती है। इसलिए इससे किसी तरह का खतरा होने या कैंसर की संभावना बढ़ने की संभावना बहुत कम होती है।

अब बताइये क्या ऐसा बयान देने की जरुरत भी थी डॉ रणदीप गुलेरिया को? क्या बिना डॉक्टर की सलाह के लोग CT स्कैन अपनी मर्जी से करवा रहे है ? और ये मान भी लिया जाए कि यदि वो बिना डॉक्टर के पर्चे के करवा रहे है तो क्या उनमे इतनी बुद्धि भी है कि उस रिपोर्ट में मेडिकल लेंग्वेज में जो लिखा रहता है जो एक्सरे रहता है उसे वो खुद पढ़कर समझ लेंगे ?

अंततः रिपोर्ट लेकर वह डॉक्टर के पास ही जाएंगे न? डॉ गुलेरिया जैसे सीनियर डॉक्टर से यह उम्मीद नहीं थी।


पत्रकार परीक्षित निर्भय ने फ़ेसबुक पर अमर उजाला अख़बार की एक कटिंग डालकर मोदी सरकार की पोल खोली है-

आज की ताजा खबर…हर बार झूठी निकली सरकार…मोदी सरकार का हरेक वो दावा फेल, जिसमें कहा सब ठीक है, विदेशी ताकत अफवाह फैला रही हैं। भारत में ऐसा कुछ नहीं हुआ और न होने देंगे…

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