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गाज़ा में मौत के तांडव पर क्यों मौन है भारत सरकार?

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गाज़ा में हिंसा और मौत का तांडव जारी है. यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. सैन्य अभियान में मृतकों की संख्या बढ़ गई है, वहीं घायल भी काफी संख्या में हैं. मानवीय मामलों का समन्वय करने वाले संयुक्त राष्ट्र के संगठन ओसीएचए की रिपोर्ट में 21 जुलाई की दोपहर तीन बजे से 22 जुलाई की दोपहर तीन बजे तक मारे गए बच्चों के आंकड़े दिए गए हैं. ओसीएचए के मुताबिक़ इस दौरान कुल 120 फिलिस्तीनी लोग मारे गए. इनमें 26 बच्चे और 15 महिलाएं थीं. संगठन के मुताबिक़ जुलाई के पहले हफ़्ते में गाज़ा में संघर्ष की शुरुआत होने के बाद से अब तक कुल 599 फिलिस्तीनी मारे गए हैं. इनमें से 443 आम लोग हैं. मरने वाले आम नागरिकों में 147 बच्चे और 74 महिलाएं शामिल हैं.

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गाज़ा में हिंसा और मौत का तांडव जारी है. यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. सैन्य अभियान में मृतकों की संख्या बढ़ गई है, वहीं घायल भी काफी संख्या में हैं. मानवीय मामलों का समन्वय करने वाले संयुक्त राष्ट्र के संगठन ओसीएचए की रिपोर्ट में 21 जुलाई की दोपहर तीन बजे से 22 जुलाई की दोपहर तीन बजे तक मारे गए बच्चों के आंकड़े दिए गए हैं. ओसीएचए के मुताबिक़ इस दौरान कुल 120 फिलिस्तीनी लोग मारे गए. इनमें 26 बच्चे और 15 महिलाएं थीं. संगठन के मुताबिक़ जुलाई के पहले हफ़्ते में गाज़ा में संघर्ष की शुरुआत होने के बाद से अब तक कुल 599 फिलिस्तीनी मारे गए हैं. इनमें से 443 आम लोग हैं. मरने वाले आम नागरिकों में 147 बच्चे और 74 महिलाएं शामिल हैं.

इस संघर्ष में 28 इस्राइली भी मारे गए हैं, जिनमें दो आम नागरिक और 26 सैनिक शामिल हैं. इस संघर्ष में 3504 फिलिस्तीनी घायल हुए हैं. इनमें 1,100 बच्चे और 1,153 महिलाएं शामिल हैं. इन आंकड़ों में उन मामलों को शामिल नहीं किया गया है, जिनकी पुष्टि नहीं हो पाई है. घायलों की संख्या फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर आधारित है. इस्राइल की ओर से ज़मीनी कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद से गाज़ा से एक लाख 20 हज़ार लोग पलायन कर चुके हैं. इस्राइल ने गाज़ा में तीन किलोमीटर की एक पट्टी को ‘बफ़र ज़ोन’ घोषित किया है.

इस संघर्ष की वजह से एक लाख 17 हज़ार फिलिस्तीनियों को अपना घर छोड़ना पड़ा है. इन लोगों ने संयुक्त राष्ट्र की ओर से चलाए जा रहे 80 स्कूलों में शरण ली है. इसके अलावा कई हज़ार लोगों ने शिक्षा मंत्रालय की ओर से चलाए जा रहे स्कूलों में भी शरण ली है. ओसीएचए की रिपोर्ट बताती है कि 21 जुलाई को शाम चार बजे के क़रीब चार बजे दक्षिण गाज़ा के एक आवासीय परिसर पर इसराइली हवा हमले में अल क़ैसर परिवार के दस लोगों की मौत हो गई. इनमें से छह बच्चे थे. इनकी उम्र तीन से 13 साल के बीच थी. उसी दिन रात आठ बजे मध्य ग़ज़ा के एक घर पर हुए इस्राइली हवाई हमले में 10 लोगों की मौत हो गई, इनमें तीन बच्चे थे.

ग़ाज़ा में इसराइली सैन्य कार्रवाई के ख़िलाफ़ पश्चिमी तट में भारी प्रदर्शन हो रहे हैं। वहाँ पुलिस-प्रदर्शनकारियों के बीच हुए टकराव में दो फ़लस्तीनी मारे गए हैं और अनेक घायल हुए हैं। इस्राइली सेना ने कहा है कि वेस्ट बैंक में प्रदर्शनकारियों ने उसके जवानों पर पत्थर फेंके और टायर जलाकर सड़क पर अवरोध पैदा किया तो जवानों ने भीड़ को तीतर-बितर करने के लिए कार्रवाई की है. गाज़ा में संयुक्त राष्ट्र की ओर से संचालित एक स्कूल पर हुए हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक घायल हो गए। ग़ाज़ा में आठ जुलाई से जारी इसराइली सैन्य अभियान में मृतकों की संख्या बढ़कर क़रीब 800 हो गई है. इसमें 32 इसराइली सैनिक और तीन आम नागरिक भी मारे गए हैं.

इस बीच, हमास के हथियारबंद गिरोह अल-कासम ब्रिगेड्स तथा अन्य गिरोहों ने इजरायल के उत्तरी, मध्य एवं दक्षिणी शहरों तथा कस्बों में रॉकेट दागने की जिम्मेदारी ली है. इन गिरोहों का कहना है कि उन्होंने गाज़ा पट्टी से इजरायल में 700 से अधिक रॉकेट दागे, जबकि इजरायल ने पिछले सात दिन के भीतर 1,000 से अधिक हवाई हमले किए। इजरायल की सरकार ने गाज़ा पट्टी में शांति बहाल होने तक हवाई हमले जारी रखने का फैसला किया है.

इधर ‘गाजा और फिलिस्तीन के पश्चिमी तटीय क्षेत्र में हिंसा में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी और इसके कारण कई नागरिकों की मौत’ पर भारतीय उच्च सदन में हुई चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने एक स्वर में गाजा में हिंसा की निंदा की और इस संबंध में संकल्प पारित करने की मांग की. उन्होंने इस्राइल से हथियारों की खरीद रोकने की मांग भी की और कहा कि भारत को संयुक्त राष्ट्र में यह मुद्दा उठाना चाहिए.

संकल्प पारित करने की विपक्ष की मांग खारिज करते हुए उप-सभापति पीजे कुरियन ने कहा कि यह चर्चा नियम 176 के तहत हुई है जिसके तहत संकल्प पारित करने या मतदान का कोई प्रावधान नहीं है. उन्होंने हालांकि कहा कि सरकार संकल्प पारित करने के लिए सहमत नहीं है और न ही इस बारे में आम सहमति है, इसलिए वह कुछ नहीं कर सकते. ध्यातव्य है कि भारत की हमेशा से यह स्थापित नीति रही है कि वह कमजोर देश के साथ रहा है और वह उसके पक्ष में आवाज उठाता रहा है. लेकिन आज विश्व में आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा भारत तमाशाई बन कर बैठा है. इस्राइल से मित्रता का दम भरने वाले लोग खामोश क्यों हैं. क्या यह ज्यादती सिर्फ़ तटस्थ होकर देखी जा सकती है?

 

शैलेन्द्र चौहान। संपर्क: 34/242, प्रताप नगर, सैक्टर-3, जयपुर- 302033 (फोटोः यूएन स्कूल पर हुए इस्राइली हमले, 25 जुलाई, में मृत एक वर्षीय बालक, नोहा मेस्लेह के शव को पकड़े एक फिलिस्तीनी व्यक्ति।)

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