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घर लौटे नवीन, फेफड़े में अभी 65 फीसदी इनफेक्शन! देखें तस्वीरें-वीडियो

Navin Kumar-

20 स्याह रातों के बाद अस्पताल से मुक्ति। एक नई सुबह। नया दिन। नई शुरुआत। नई उम्मीद। संघर्ष जारी है। मनुष्यता जीतेगी। लोकतंत्र जीतेगा। वैज्ञानिक चेतना जीतेगी। जीतेंगी वो आवाज़ें जो नफरतों के खिलाफ सम्राटों से मुखातिब हैं। पूरी तरह ठीक होने में और समय लगेगा। फेफड़े का संक्रमण अभी भी 65 फीसद से ज्यादा है। आवाज इसके बाद लौटेगी। धैर्य और इंतजार। इंकलाब जिंदाबाद!

अस्पताल में रहते हुए नवीन ने फेसबुक पर एक पोस्ट पब्लिश किया, देखें इसे-

Navin Kumar-

आपके नायक बार बार आपके पास आते हैं। याद दिलाते हैं कि मनुष्यता, न्याय और बंधुत्व को बचाने के लिए इतिहास में सतत कोशिशें हुई हैं। वो याद दिलाते हैं कि यह कड़ी टूटनी नहीं चाहिए। आज अस्पताल में 16 दिन हुए। सांस सामान्य होने में समय लगे शायद लेकिन बेहतर हो रहा हूं। कुछ देर उठकर बैठ भी पा रहा हूं। ऐसे में अक्रियता खलती है। मैने डॉक्टरों से कुछ देर पढ़ने देने की इजाजत मांगी थी। आंख की रोशनी थोड़ी धुंधली लगती है। लेकिन उन्होंने आधे आधे घंटे दो बार पढ़ने की इजाजत दे दी।

मैने DrSonu Kumar Bhardwaj से कुछ पढ़ने को भेजने का अनुरोध किया। उन्होने थोड़ी ही देर बाद दो किताबें, एक नोट बुक और एक कलम भेजी। दोनो ही किताबें मेरी पसंदीदा किताबें रही हैं। इन्हे पढ़ना अपने नायकों से बात करने जैसा है।

हम यूनिवर्सिटी में नारा लगाते थे हो हो हो ची मिन्ह वी शैल फाइट वी शैल विन। वो नारा एक बार फिर से अस्पताल के बिस्तर पर आकर मुस्कुरा रहा है। जिजीविषा को चुनौती दे रहा है। मनुष्यता की संभावनाएं सिर्फ जिदों से जिंदा बचती हैं। हम सब मिलकर इसे बचाएंगे। बचाना ही होगा। मुझे विश्वास है यह दौर बहुत कुछ बदलेगा। हमें उदार बनाएगा, जिम्मेदार बनाएगा और नई नस्लों को सुंदर दुनिया देने के लिए हमें सहेजेगा।

जो सबसे सुखद है हमारी नौजवान पीढ़ी के डॉक्टर ऐसी खूबसूरत किताबें पढ़ रहे हैं। यह उनकी संवेदना को गहरा करेगा। नागरिकता के बोध को मजबूत करेगा। यह बहुत बड़ी आशा बंधाता है। डॉक्टर सोनू पेरियार फुले अंबेडकर के लिखे में गहरी दिलचस्पी रखते हैं। ऐसे मुश्किल दौर में दवा के साथ अस्पताल में किताब और कलम बिना देरी उपलब्ध कराने की ये कहानी क्या प्यारी नहीं?

हम लड़ेंगे साथी
उदास मौसम के खिलाफ

आपकी अनंत और अनमोल शुभकामनाओं के लिए शुक्रिया एक तुच्छ शब्द होगा। मेरा रोम रोम इसे सिर्फ महसूस कर सकता है।

यह उदास ईद फिर से मुस्कुराएगी। उस रोज की शुभकामनाएं। बधाई

मुबारकबाद!


नवीन किसके लिए रोए, अपने लिए? नहीं… सुनिए एक एक शब्द….

(ये वीडियो नवीन कुमार के अस्पताल में भर्ती होने से ठीक पहले का है जिसे सोशल मीडिया पर कुछ लोग रोहित सरदाना का वीडियो बताकर वायरल करते रहे)

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