Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

टीवी

‘जी मप्र को बर्बाद करने में आशुतोष गुप्ता का अहम रोल’

जी मप्र छग न्यूज़ चैनल में सभी रिपोर्टर ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से काम कर रहे थे। आशुतोष गुप्ता के आने के बाद इनपुट हेड और आशुतोष गुप्ता ने अपने लोगों को रखने के लिए भोपाल रिपोर्टर सहित 26 स्टिंगरों की हटाने की लिस्ट भेजी। उन्हें हटाया गया जो ईमानदारी से चैनल को शिखर पर ले गए थे। इनके करियर और अरमान को आशुतोष गुप्ता ने चनाचूर कर दिया और भोपाल ऑफिस में पैर रखते ही शीत युद्ध शुरू हुआ। इसमे भोपाल के तीन रिपोर्टर और 26 स्टिंगर बाहर हुए।

जी मप्र छग न्यूज़ चैनल में सभी रिपोर्टर ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से काम कर रहे थे। आशुतोष गुप्ता के आने के बाद इनपुट हेड और आशुतोष गुप्ता ने अपने लोगों को रखने के लिए भोपाल रिपोर्टर सहित 26 स्टिंगरों की हटाने की लिस्ट भेजी। उन्हें हटाया गया जो ईमानदारी से चैनल को शिखर पर ले गए थे। इनके करियर और अरमान को आशुतोष गुप्ता ने चनाचूर कर दिया और भोपाल ऑफिस में पैर रखते ही शीत युद्ध शुरू हुआ। इसमे भोपाल के तीन रिपोर्टर और 26 स्टिंगर बाहर हुए।

आशुतोष गुप्ता मप्र ब्यूरो बनते ही अपने आप को मालिक समझ बैठ और स्टिंगरों से घटिया व्यवहार करने लगा। कई नए स्टिंगर रखे जो जी मप्र में आने की जुगत में थे। लेकिन जिन 26 स्टिंगरों की रोजी रोटी छीनी गयी थी उनका श्राप लगा आशुतोष को और अपने साथ शरद व्यास जी को भी ले डूबा। चैनल हेड दिलीप तिवारी जी ने सही वक्त पर सही फैसला लिया और सही रास्ता दिखलाया।

एक कहावत है जो दूसरो के लिए गड्डा खोदता है वह भी खुद उसी गड्ढे में गिरता है। 26 स्टिंगरों और रिपोर्टरों की हाय आशुतोष गुप्ता को ले डूबी। अब जी की पुरानी टीम फिर से चैनल को बुलंदी तक पहुंचायेगी और विश्वास है कि सभी स्टिंगरों की धीरे धीरे वीपसी होगी। एक स्टिंगर का विश्वास और उनके बच्चों की हाय का नतीजा सही है।

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

मूल खबर….

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
1 Comment

1 Comment

  1. anant maheshwari

    July 22, 2016 at 12:34 pm

    कटु सत्य
    खबर तो यह भी चर्चित रही की , इन्होने जो स्ट्रिंगर रखे , उसकी एवज में खूब पैसा लिया। जिसकी जानकारी चैनल हैड को भी नहीं है। अब इन आरोपों में सत्यता कितनी है , यह तो हटाये गए ब्यूरों ही बता सकते है। लेकिन किसी का बुरा करने वाले का देर-सबेर बुरा जरूर होता है। बुरा करने वाले का बुरा हुआ। किन्तु शरद व्यास जैसे होनहार पत्रकार के साथ ऐसा नहीं होना था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन