एक समय था जब पत्रकार होने का मतलब एक तरह से जज होना होता था : हर्षा भोगले

अरनब-बरखा की लड़ाई के बीच क्रिकेट एक्‍सपर्ट हर्षा भोगले ने समझाया पत्रकारिता का मतलब : टीवी पत्रकार अरनब गोस्‍वामी और बरखा दत्‍त की लड़ाई में क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले ने भी फेसबुक पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लिखा है-

‘एक समय था जब पत्रकार होने का मतलब एक तरह से जज होना होता था। मतलब आप पर एक जिम्‍मेदारी होती थी। लोग आप पर भरोसा करते थे। आपको उस भरोसे पर हर समय खरा उतरना पड़ता था। लेकिन न्‍यूज भी आखिर एक कॉम्‍प्‍टीशन ही था इसलिए आपको औरों से आगे रहना जरूरी था। आपने खबरें जल्‍दी लाकर वहीं किया, लेकिन आप तब भी सच दिखाते थे। कम से कम ज्‍यादातर लोगों को तो यही लगता था। फिर सोशल मीडिया आया और ट्विटर, फेसबुक और व्‍हाट्सएप जैसी चीजों के साथ अब हर कोई पत्रकार बन गया है, बिना कोई जिम्‍मेदारी लिए। तो गरिमामय और सच्चाई, उत्तेजक और झूठ के बीच में छानने-बीनने की जिम्‍मेदारी प्रसार करने वाले की नहीं, उसे पाने वाले ही है। लेकिन सोशल मीडिया कम से कम एक निजी प्‍लेटफॉर्म है। जब मॉस मीडिया अपनी जिम्‍मेदारी से भागता है, जब खबरें देने वाला खबर बनने की कोशिश करता है और ध्‍यान खींचने के लिए भड़काऊ व्‍यवहार (‍इससे उन्‍हें जल्‍द मुक्ति पा लेनी चाहिए) करता है, तो हम वा‍कई एक खतरनाक दौर में पहुंच जाते हैं।’



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