सूरत के हीरा व्यापार की हकीकत भी जान लीजिए

Prakash K Ray : सूरत के हीरा कारोबारी सावजी भाई ढोलकिया ने फिर अपने कर्मचारियों को कार और मकान दिवाली बोनस के रूप में दिया है. ढोलकिया ने इस बार 400 फ्लैट और 1,260 कारें कर्मचारियों गिफ्ट की हैं. साल 2014 में ढोलकिया ने 1300 से ज्यादा कर्मचारियों को कार, मकान और ज्वैलरी दी थी. साल 2015 ढोलकिया ने 491 कारें और 200 फ्लैट गिफ्ट किए थे. यह उपहार पाने वालों में अनेक का वेतन तो सिर्फ दस हज़ार है. सूरत के इस हीरा व्यापारी द्वारा अपने कर्मचारियों को घर और कार बाँटने की ख़बर सोशल मीडिया पर ख़ूब चल रही है.

बहरहाल, आम तौर पर किसी तरह जीने भर कमानेवाले लोगों के लिए निश्चित रूप से ऐसी ख़बरें रूचिकर लगती हैं. यह टिप्पणी उस व्यापारी पर नहीं है, मैंने ख़बर को पढ़ा भी नहीं. लेकिन, भारत के सूरत शहर के हीरा कारोबार पर कुछ कहने से अपने को रोक नहीं पा रहा हूँ.

1. दुनिया के 90 फ़ीसदी से अधिक हीरा सूरत में चमकाया जाता है जहाँ भयावह स्थितियों में बेहद कम मज़दूरी (अधिकतर लोग दो डॉलर से भी कम पर काम करते हैं) पर लोग काम करते हैं जिनमें बच्चे भी हैं. वर्ष 2007 के एक आकलन के मुताबिक, तब 30 हज़ार से अधिक बच्चे इस काम में लगे हुए थे.

2. सूरत आनेवाला अनपॉलिश्ड हीरा अधिकतर अफ़्रीका (लाइबेरिया, सियरालियोन, आइवरी कोस्ट आदि) से आता है और अवैध होता है. इस कारोबार से अफ़्रीका के ब्लड डायमंड धंधे को मदद मिलती है और वहाँ के भयानक युद्धों को फंडिंग मिलती है. कुछ पत्थर ऑस्ट्रेलिया और कनाडा से भी आते हैं. औने-पौने पर ख़रीदे गये इन पत्थरों को चमका कर/सोने में मढ़ कर भारी मुनाफ़े पर बेचा जाता है.

3. पिछले साल एचएसबीसी के स्विस अकाउंट में जिन 1195 लोगों के नाम थे, उनमें से 77 हीरा कारोबार से थे. इन 77 में से 64 मात्र 12 परिवारों के हैं.

4. कोई आदमी बिना किसी पहले से स्थापित कारोबारी की कृपा के हीरा व्यवसाय में नहीं घुस सकता है.

पत्रकार Prakash K Ray की एफबी वॉल से.

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