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सुख-दुख

यशवंत जी, ‘होली पर इंडिया टुडे में तुगलकी फरमान’ शीर्षक वाली खबर का प्रकाशन आपने भड़ास पर क्यों नहीं किया?

हलो यशवंत जी, बहुत पहले आपको एक खबर मेल से प्रेषित किया था. आपने ये खबर नहीं छापी. मुझे और मेरे बहुत से मित्रों को दुख हुआ. हम सब इंतजार कर रहे थे कि इस खबर का प्रकाशन भड़ास पर होगा. पर आपने जाने क्यों नहीं किया. जबकि हम लोग सुनते हैं कि आप किसी से दबते नहीं, किसी से डरते नहीं, बावजूद इसके आपने इंडिया टुडे की दोगली मानसिकता वालों के चेहरे का पर्दाफाश करने वाली खबर का प्रकाशन नहीं किया. कृपया एक बार फिर देख लें और अगर सही लगे तो छाप दें.

खबर ये है-

हिन्दू त्योंहारों पर कैसी गिद्ध जैसी नज़र रहती है एक खास कौम की, इसे जानने के लिए ये उदाहरण काफी है. इंडिया टुडे में बॉस रेहान द्वनारा जारी किए गए इस मेल (फरमान) से अंदाजा लग जायेगा कि ये लोग हिंदू त्योहारों के प्रति क्या नजरिया रखते हैं.

ये कोई पहली बार भी नही हैं. नौकरी करनी है और आजतक में काम करने के रुतबे के साथ जीना है तो इस सब को झेलना तो पड़ेगा.

इस मेल में होली न खेलने का जिक्र है. बढ़ते कोरोना मामलों के चलते शबे बारात के नमाज या ईद के जलसे में शिरकत नहीं करने का मेल बॉस कभी जारी नहीं कर पाएंगे.

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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