छुट्टी मांगने पर उस हृदयहीन संपादक ने कहा- ‘किसी के मरने जीने से मुझे कोई मतलब नहीं है’

Jaleshwar Upadhyay : निष्ठुर प्रबंधन और बेशर्म संपादकों के कारण एचटी बिल्डिंग के सामने धरनारत कर्मचारी की मौत पर मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ। मैंने अपनी जिंदगी में ऐसे बेगैरत और हृदयहीन संपादक देखे हैं कि नाम याद कर घिन आती है। नाम नहीं लूंगा, लेकिन जब मेरी पत्नी मृत्युशैया पर थीं तो मैंने अपने संपादक से छुट्टी मांगी।

उसने कहा किसी के मरने जीने से मुझे कोई मतलब नहीं है। मजबूरन मुझे इस्तीफा देना पड़ा और पत्नी भी कुछ दिन बाद नहीं रहीं। इस वाकये को 11- 12 साल हो गए, लेकिन कभी चर्चा नहीं की। आज एचटी कर्मी की धरने पर मौत के घटनाक्रम को सुन कर खुद को रोक न सका। माफ़ी चाहता हूं।

अमर उजाला, बनारस में लंबे समय तक कार्यरत रहे वरिष्ठ पत्रकार जलेश्वर उपाध्याय के उपरोक्त स्टेटस पर आए ढेर सारे कमेंट्स में से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं….

Rakesh Vats Sir sorry to say but disclose that blady and heartless man who is not socially

Yashwant Singh उसका नाम खोलना चाहिए सर. अब काहे का डर. ऐसे लोगों के खिलाफ आनलाइन निंदा अभियान चलाना चाहिए.

Jaleshwar Upadhyay He is very well known figure. Actually a big name in hindi journalism. यशवंत जी, काफी वक्त बीत गया। इस एक घटना ने मेरी जिंदगी बदल दी। आप सब जानते हैं। अब निंदा से क्या फायदा? जो गया, वह लौट नहीं सकता।

राकेश चौहान प्रणाम सर लेकिन उसका नाम आप बताये हैम उसके खिलाफ अभियान चलाना ही चाहिए

Mamta Kalia निर्दय होते जाते समय का यथार्थ है यह।यह सवाल उठता है कि क्या वह पत्रकार freelancing नही कर सकता था।एक ही नौकरी के पीछे क्यों पड़ा रहा।

Smita Dwivedi ममता जी यही तो विडंबना है इस देश की जो जेहन से कर्मठ और ईमानदार पत्रकार उससे नौकरी छीन ली जाती हैं।

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