प्रवीण खारीवाल जैसे कई बिचौलिए पत्रकार हैं इंदौर में!

धोखाधड़ी के मामले में इंदौर प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल की गिरफ़्तारी ने इंदौर की पत्रकारिता को बुरी तरह कलंकित कर दिया। राजेंद्र माथुर, प्रभाष जोशी, वेदप्रताप वैदिक, अभय छजलानी और राजेश बादल जैसे बड़े हिंदी पत्रकार इस शहर से निकले हैं। इस शहर को हिंदी पत्रकारिता का गढ़ माना जाता है और उसी शहर में प्रवीण खारीवाल जैसा नाम भी है जिसने यहाँ की पत्रकारिता को कलंकित कर दिया। लेकिन, खारीवाल-प्रकरण ने इसी तरह के धंधे में लगे कुछ और पत्रकारों को सचेत कर दिया है.

इस तरह का गोरखधंधा करने वाला प्रवीण खारीवाल अकेला पत्रकार नहीं है. पिछले 15 सालों में इंदौर प्रेस क्लब में जो भी कार्यकारिणी बनी है. उनमें अधिकांश पदाधिकारी इसी तरह के कामकाज में लगे हैं. इसलिए कि प्रेस क्लब की राजनीति से जुड़े अधिकांश कथित पत्रकार किसी बड़े संस्थान से सम्बद्ध नहीं हैं. प्रवीण खारीवाल तो इस भरोसे में फँस गया कि उसने जिस तरह की सेटिंग की थी, वो सफल हो जाएगी पर हुई नहीं. ख़बरें बताती है कि प्रवीण को फंसाने में प्रेस क्लब के ही उसके एक प्रतिद्वंदी की भूमिका प्रमुख रही है. ये प्रतिद्वंदी पुलिस और प्रशासनिक परिवार से जुड़ा है. पहले ये खारीवाल के साथ ही था, पर अब दोनों में प्रतिद्वंदिता है.

खारीवाल की गिरफ़्तारी से कई पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी डरे हुए हैं! क्योंकि, छब्बू को गिरफ़्तारी से बचाने की कोशिश की साजिश में जो लोग लगे थे, वे घबराए हुए हैं। प्रवीण खारीवाल ने हवा में ही छब्बू की पत्नी से ये वादा नहीं किया था कि उनके पति की गिरफ़्तारी नहीं होगी. इसके लिए कुछ छोटे अफसरों ने साथ देने का आश्वासन दिया होगा, पर बड़े अफसरों का नाम आने से योजना ध्वस्त हो गई. ये पहला मामला है, ऐसा भी नहीं है. प्रवीण जैसे कई पत्रकार बिचौलिए का काम कर रहे हैं। इंदौर में जमीन के गोरखधंधे से कई पत्रकार जुड़े हैं। वे विवादस्पद जमीनों के सौदे से लगाकर उनके निपटारे तक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

एक जानकारी ये भी है कि भोपाल के सांध्य कालीन अखबार ‘प्रदेश टुडे’ के मालिक हृदेश दीक्षित भी उन लोगों में हैं जिनके प्रवीण खारीवाल से नजदीकी संबंध हैं. ये भी उन पत्रकारों में एक हैं जो उलझे मामले सुलझाने में नेताओं और अफसरों के साथ बिचौलिए का काम करने के लिए बदनाम हैं. इस अखबार मालिक के हर छोटे बड़े कार्यक्रम में अफसरों और नेताओं की धूम रहती है। हाल ही में हृदेश दीक्षित ने अपनी शादी की 25वीं सालगिरह का आलीशान जश्न किया था जिसमें भोपाल से कई नेता और अफसर ख़ास तौर पर आए गए थे. फ़िल्मी दुनिया के कई कलाकारों को भी पैसे देकर बुलाया गया था। ये जिक्र इसलिए कि ये अखबार मालिक उन चंद नव धनाढ्यों में से है जिन्होंने अखबार के नाम से नया साम्राज्य खड़ा किया है।

‘दबंग दुनिया’ कहाँ और कैसे शामिल हुआ खारीवाल मामले में!

प्रवीण खारीवाल ‘दबंग दुनिया’ में बड़ी सम्पादकीय पोस्ट पर था, वही अखबार अब खारीवाल के खिलाफ सबसे ज्यादा छाप रहा है? दरअसल, इसके पीछे भी एक अजब कहानी है! 10 दिन पहले ‘दबंग दुनिया’ के क्राइम रिपोर्टर संतोष सितोले को अखबार के मालिक किशोर वाधवानी ने छब्बू की खबर न देने के आरोप में निकल दिया था! जबकि, रिपोर्टर ने समय पर खबर दे दी थी, लेकिन संपादक पंकज दीक्षित ने इसलिए रोक दी थी कि उस खबर में किसी पुलिस अधिकारी ने गिरफ़्तारी की पुष्टि नहीं की थी! अगले दिन सभी अखबारों में खबर देखकर ख़बरों से नासमझ किशोर वाधवानी ने संतोष सितोले को बाहर का रास्ता दिखा दिया.

अब कहा जा रहा है कि प्रवीण खारीवाल, पंकज दीक्षित और ‘दबंग दुनिया’ का ही एक रिपोर्टर विवान राजपूत सब छब्बू को गिरफ्तारी से बचाने में लगे थे! संतोष सितोले की सही खबर से इन तीनों की सेटिंग बिगड़ जाती, इसलिए उन्होंने संतोष को ही निशाने पर ले लिया और बाहर निकला दिया! लेकिन, ‘दबंग दुनिया’ में प्रवीण खारीवाल के खिलाफ लगातार खबर छपने की एक और कहानी है.

जिस रात प्रवीण को पुलिस ने गिरफ्तार किया, उस रात किशोर वाधवानी ने संपादक को बता दिया था कि प्रवीण खारीवाल की गिरफ़्तारी की खबर अखबार में नहीं छपेगी. फिर वे एक वकील के साथ सादर बाजार थाने पहुंचे और दबाव बनाने की कोशिश की. टीआई को एक अखबार मालिक की तरह डाँट भी लगाई, पर थोड़ी देर में मामला उल्टा हो गया! इलाके के सीएसपी को जब ये पता चला तो वो थाने आए और किशोर वाधवानी को कड़क भाषा में चमकाया कि आप पुलिस पर दबाव डालने की कोशिश मत करें! यदि 5 मिनट में थाने से बाहर नहीं निकले तो आपको भी प्रवीण खारीवाल के साथ बंद करना पड़ेगा, हमारे पास आपके खिलाफ भी सबूत है. सीएसपी की इस चेतावनी के बाद किशोर वाधवानी उल्टे पैर बाहर आए और सीधे दफ्तर पहुंचे और खारीवाल के खिलाफ बड़ी खबर लगवाई. उसके बाद लगातार फॉलोअप दिया जा रहा है.

इंदौर से एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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