आयकर वालों ने कनिमोझी के घर गलत सूचना पर छापा मारा, कुछ नहीं मिला

अखबारों में छापे की खबर है, कुछ नहीं मिला यह बहुत कम – अब क्या करेगा चुनाव आयोग

चुनाव के दौरान आयकर छापों से यह संदेश जाता ही है कि जो राजनीतिक दल सत्ता में है वह पहले की सरकारों के मुकाबले ‘अच्छी’ या ‘निष्पक्ष’ कार्रवाई कर रहा है। इसमें सत्तारूढ़ दल पर छापे नहीं पड़ने या उसकी खबर अपेक्षाकृत कम छपने की संभावना शामिल है। चूंकि पहले चुनाव के दौरान छापे कम (या नहीं के बराबर) पड़ते थे इसलिए अब छापे पड़ रहे हैं उसका भी मतलब है। 2019 चुनाव के दौरान पूर्व में पड़े छापों और उसपर प्रभावित दलों की प्रतिक्रिया के साथ-साथ राजस्व सचिव को पत्र, जवाब और चुनाव आयोग की कार्रवाई के बारे में मैं लिख चुका हूं। आज के समय में जब सूचनाएं (और अफवाह) तेजी से फैलती हैं तो इन छापों पर रोक लगना जरूरी है। इसलिए भी कि छापों में बरामद धन की राशि के अनुसार यह राय बनती है कि अमुक दल ज्यादा भ्रष्ट है और चुनाव के बाद पता चलता है कि धन सही तरीकों से इकट्ठा किया गया था जबकि इसका नुकसान हो चुका होता है।

आज के अखबारों में खबर छपी है कि तमिलनाडु में डीएमके [द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (शाब्दिक अर्थ.”द्रविड़ प्रगति संघ”) या द्रमुक] नेता कनिमोझी के घर पर आयकर छापा पड़ा। लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से पहले दक्षिण भारत में आयकर विभाग की यह बड़ी कार्रवाई इलाके में चुनाव प्रचार की अवधि खत्म होने के बाद शुरू हुई और ज्यादातर अखबारों में यह नहीं बताया गया है कि बरामद क्या हुआ या कितनी राशि बरामद हुई। यह छापा कहीं गलत सूचना पर तो नहीं था इसकी जांच करने पर पता चला कि मेरी आशंका सही है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर इसी तरह लिखी गई है पर ज्यादातर अखबारों में छापा पड़ा – यही सूचना है। मेरा मानना है कि चुनाव के समय में अव्वल तो छापे पड़ने नहीं चाहिए और पड़े तो ऐसी आधी-अधूरी खबर बिल्कुल नहीं छपनी चाहिए। इसके लिए किसी कानून या निर्देश की जरूरत नहीं है। इतना संपादकीय विवेक होना चाहिए और इसका उपयोग भी किया जाना चाहिए। लेकिन अखबार वाले ऐसा नहीं करें तो सरकारी कार्रवाई पर शक होता है।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर

आप जानते हैं कि तमिलनाडु में विधान सभा के चुनाव भी हो रहे हैं और मतदान से दो दिन पहले, पूर्व मुख्यमंत्री, दिवंगत एम करुणानिधि की बेटी और राज्यसभा सदस्य कनिमोझी के घर पर छापे का राजनीतिक मतलब है। इसीलिए यह खबर उत्तर भारत के हिन्दी अखबारों में भी प्रमुखता से है। कनिमोझी तूतीकोरन लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार भी हैं। तूतिकोरिन के उनके किराए के घर में आयकर का छापा नकद होने की सूचना पर डाला गया और तलाशी ली गई। कनिमोझी उस समय घर पर थीं। द्रमुक के कार्यकर्ताओं ने आयकर विभाग की इस कार्रवाई का विरोध किया पर नुकसान तो जो होना था वह हुआ ही। दिल्ली के अखबारों में यह खबर प्रमुखता से है। हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने पर कनिमोझी की फोटो के साथ बॉक्स है। यह बॉक्स, “नेताओं के खिलाफ चुनाव आयोग की कार्रवाई के बाद उल्लंघन के कई मामले” शीर्षक खबर में है।

राजस्थान पत्रिका – वेलोर में चुनाव रद्द होने से बड़ी खबर है या छापे में कुछ नहीं मिलना

टाइम्स ऑफ इंडिया में पहले पन्ने पर सूचना है कि खबर अंदर के पन्ने पर है। अंदर पेज 10 पर इस खबर का शीर्षक है, “मतदान से ठीक पहले आईटी और ईसी ने कनिमोझी के घर की तलाशी ली”। उपशीर्षक है, “चुनाव आयोग डीएमके को निशाना बना रहा है”। खबर के मुताबिक यह छापा जिला कलेक्टर की सूचना पर मारा गया। अखबार ने खबर में अंदर लिखा है, “….. हालांकि, चुनाव आयोग या आयकर अधिकारियों ने तलाशी के दौरान नकदी या दस्तावेज जब्त करने की कोई सूचना नहीं दी है।” हालांकि, इसका मतलब यह नहीं हुआ कि छापे में कुछ नहीं मिला।

इंडियन एक्सप्रेस ने इस खबर को लीड बनाया है। फ्लैग शीर्षक है, “फेज टू के लिए 95 सीट्स पर कल मतदान”। मुख्य शीर्षक है, “तमिलनाडु में चुनाव प्रचार कड़वी सूचना के साथ पूरा हुआ : टैक्सवालों ने कनिमोझी के घर छापा मारा, कुछ नहीं मिला”। इंट्रो है, स्टालिन ने कहा, “भाजपा, एआईएडीएमके (एआईए – ऑल इंडिया अन्ना अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) विपक्ष को निशाना बना रहे हैं क्योंकि उन्हें हार का डर है।” एमके स्टालिन कनिमोझी के भाई और पार्टी प्रमुख हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चुनाव आयोग की मदद से डीएमके की छवि को खराब करने का काम कर रहे हैं (नवोदय टाइम्स)।

मेरा मानना है कि भाजपा सरकार इन छापों से अब यह साबित करने की कोशिश कर रही है कि 2014 से पहले उसने जिन दलों पर भ्रष्ट होने का आरोप लगाया था वह निराधार नहीं था। और भ्रष्ट व सुस्त मीडिया इसमें उसका साथ दे रहा है। अगर यह खबर सभी अखबारों में इंडियन एक्सप्रेस या राजस्थान पत्रिका की ही तरह छपी होती तो छापे से कोई राजनीतिक हित नहीं सधता। मैं जो हिन्दी अखबार देखता हूं उनमें राजस्थान पत्रिका में ही यह खबर इस सूचना के साथ छपी है कि छापे में कुछ नहीं मिला। फ्लैग शीर्षक है, “सियासत गरम : कनीमोझी के घर पर कुछ नहीं मिला तो बोले गलत सूचना दी गई”। मुख्य शीर्षक है, “तमिलनाडु -कर्नाटक में कांग्रेस के सहयोगी नेताओं पर आयकर छापे”। अखबार ने इसके साथ वेल्लोर में चुनाव रद्द और कनिमोझी के घर आयकर छापों का दोनों राज्यों में तीखा विरोध हुआ शीर्षक खबर छापी है।

नवभारत टाइम्स में यह खबर पहले पन्ने पर तो नहीं है, अंतिम पन्ने पर सिंगल कॉलम में है। दैनिक हिन्दुस्तान में पहले पन्ने पर आधा विज्ञापन है फिर भी यह खबर पहले पन्ने पर दो कॉलम में है। नवोदय टाइम्स ने वेल्लोर में चुनाव रद्द किए जाने की चुनाव आयोग की कार्रवाई को ऐतिहासिक बताया है और इसे लीड बनाया है। इस खबर के साथ ही बताया गया है कि कनिमोझी के घर पर आयकर छापा पड़ा। असल में इससे पहले की कार्रवाई में डीएमके उम्मीदवार के घर 11.53 करोड़ रुपए नकद मिलने (अमर उजाला) पर वेल्लोर का चुनाव रद्द किया गया है। दैनिक भास्कर में भी यह खबर पहले पन्ने पर है।

अमर उजाला में यह खबर पहले पन्ने पर तो नहीं है लेकिन देश विदेश की खबरों के पन्ने पर तीन कॉलम में दो लाइन के शीर्षक के साथ छपी है। उपशीर्षक है, कार्रवाई के विरोध में कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया पर खबर में नहीं बताया गया है कि क्या बरामद हुआ या यह भी कि पता नहीं चला। चेन्नई डेट लाइन की इस खबर का स्रोत नहीं बताया गया है और इसके साथ, राज्य में अब तक 135.42 करोड़ रुपए जब्त, चुनावी उड़न दस्ते से भिड़े एएमएमके कार्यकर्ता, पैसे बांटते अन्नाद्रमुक के पांच कार्यकर्ता गिरफ्तार , पूर्व पीएम देवेगौड़ा के पौत्रों के चुनाव क्षेत्र में आयकर छापे जैसी खबरें छापी हैं। अखबार ने स्टालिन का यह आरोप छापा है कि भाजपा उम्मीदवार, तमिलसाई के घर भारी मात्रा में रुपए रखे हैं, आयकर विभाग वहां छापा क्यों नहीं मारता।

दैनिक जागरण ने भी कनिमोझी के घर पर झापे की खबर को पहले पन्ने पर छापा है और यह वेल्लोर का चुनाव वोटरों को पैसा बांटने के संदेह में रद्द शीर्षक के तहत प्रकाशित खबर में बॉक्स है।

वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट

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