अंग्रेज़ी पत्रकार Jug Suraiya का ये व्यंग्य छापने की हिम्मत न दिखा सका Times of India!

शीतल पी सिंह-

Jug Suraiya व्यंग्य के एक मशहूर अंग्रेज़ी पत्रकार हैं । देश के सबसे बड़े अंग्रेज़ी अख़बार Times of India में उनका प्रसिद्ध व्यंग्य कालम छपता है। आज उनका कालम एक जमाने बाद प्रिंट एडीशन में जाने से रोक दिया गया।

द वायर ने उनकी सहमति लेकर उसे प्रकाशित कर दिया है । मैं यहाँ संलग्न कर रहा हूँ। व्यंग्य की कंटेंट स्वयं बयान कर रही है कि किसको ख़फ़ा न करने के लिए अख़बार ने यह निर्णय लिया!

The Supreme Leader and his Supreme Sidekick in a huddle trying to figure out what to do to counter the increasingly bad press they’re getting amid the rising tide of Covid cases in the country.

Supreme Leader: More and more people are blaming me for having single-handedly – or, rather, single-mindedly – turned our country from the universal saviour in the pandemic by being the biggest vaccine produce on Earth and having the fewest cases of the virus to now being a basket case needing help from everyone, including our arch adversaries, China and Pakistan. It’s not fair! It’s not my fault all this has happened. It’s the fault of the system.
Supreme Sidekick: But, Boss, you are the system.

SL: I am? Golly, I never thought of that. In fact, I never thought of much at all except drumming up as many people as I could to all those rallies we held in that place whose name I forget now, except that it begins with a B, and a fat lot of good that did us.
SS: Boot begins with a B. Maybe that’s the name you can’t remember. Anyway, critics are saying that instead of rallying in this B place you should have been rallying round getting more vaccines and oxygen produced, both of which we desperately need.

SL: So what do we do now?
SS: What we do now is practice frequent hand washing.
SL: Frequent hand washing to protect against the coronavirus?
SS: No. Frequent handwashing to protect against the worse virus: the virus of blame. We wash our hands frequently of the whole thing. We also maintain social distancing.
SL: Social distancing from people who can infect us?
SS: No. Social distancing from any policies which can infect us. We must distance ourselves from all policies, past, present and future. That way we remain escape goats.
SL: You mean scapegoats.
SS: No. I mean escape goats. We escape by making others into scapegoats.
SL: Where’ll we find these scapegoats?
SS: No problem. Hasn’t the country been turned into a nation of 1.3 billion bakras…?

Suresh Shukla ने इसका हिंदी मेंअनुवाद कर दिया है, देखें-

सर्वोच्च नेता और उनके सर्वोच्च सलाहकार के बीच देश में कोरोना के संक्रमित लोगों की बाढ़ के समय मीडिया में नेतृत्व की नाकामी पर हो रही बुरी आलोचना से निपटने के लिए परिचर्चा।

सर्वोच्च नेता- मेरी अकेले के नेतृत्व ने विश्व मे देश में सबसे कम कोरोना के केस पर रोक सकने, व विश्व में सबसे अधिक कोरोना की वैक्सीन का उत्पादन करने और विश्व को कोरोना संकट से बचाने वाले नेता की छवि को धूमिल करते हुए दुनिया से, यहां तक कि चीन वो पाकिस्तान जैसे दुश्मन देशों से भी भीख का कटोरा लेकर सहायता मांगने बदनामी की जा रही है।

यह सही नही है! यह सब मेरी गलती से नही हुआ है। यह सिस्टम/ व्यवस्था का सारा दोष है।

सर्वोच्च सलाहकार- लेकिन श्रीमान सिस्टम तो आप ही हैं।

सर्वोच्च नेता- मैं हूं? ओह मैंने तो ऐसा सोचा ही नही था। वास्तव में, मैं इतना अधिक सोचता भी नही हूं, सिवाय इसके कि रैलियों में उस जगह, जिसका नाम मैं अभी भूल रहा हूं, पर वो ब अक्षर से शुरु होती है, अधिक से अधिक लोगों की भीड़ इकट्ठा कर उनको भरमाता हूं, जो हमारी मोटी पूंजी है।

सर्वोच्च सलाहकार- बूट भी ब अक्षर से शुरु होता है। हो सकता है यह नाम आप को याद नही आ रहा है। छोड़िए आलोचक कह रहे हैं कि आपको ब स्थान पर रैलियां करने की जगह, ज्यादा से ज्यादा वैक्सीन प्रबंध करने में और अधिक से अधिक आक्सीजन उत्पादन करवाने की व्यवस्था करनी चाहिए थी जिनकी बुरी तरह से आवश्यकता है।

सर्वोच्च नेता- तो अब हमें क्या करना चाहिए ?
सर्वोच्च सलाहकार- हमें अब जो करना चाहिए वो ये कि जल्दी से हाथ सफाई करने की कोशिश करना है।

सर्वोच्च नेता- जल्दी से हाथ सफाई कोरोनावायरस से सुरक्षा के लिए ?
सर्वोच्च सलाहकार- नही जल्दी से हाथ सफाई और भी खराब वाइरस: बदनामी के वाइरस से। हमको इस सभी से जल्दी ही अपने हाथ साफ कर लेने चाहिए। हमको सोशल डिस्टैंसिंग भी बना कर रखनी चाहिए।

सर्वोच्च नेता- सोशल डिस्टैंसिंग उन लोगों से जो हमें संक्रमित कर सकते हैं ?
सर्वोच्च सलाहकार- नही सोशल डिस्टैंसिंग किन्हीं भी भूतकाल, वर्तमान की, व भविष्य की नीतियों से जो हमें संक्रमित/बदनाम कर सकती हैं। इसी तरीके से हम बकरा बनने से बचे रह सकेंगे।

सर्वोच्च नेता- तुम्हारा मतलब है बलि का बकरा।
सर्वोच्च सलाहकार- नही मेरा मतलब है बकरा/ दोषी होने से बचना। हम दूसरों को बलि का बकरा बना कर खुद बचते हैं।

सर्वोच्च नेता- हम इन बलि के बकरों को कहां ढूंढेंगे ?
सर्वोच्च सलाहकार- इसमें कोई समस्या नही है। क्या देश को 130 करोड़ बकरों के राष्ट्र में नही बदल दिया है…?

सही है अभी नीचे आ जा मीठी ईद के बहाने,
फिर बक़रीद पर हलाल करेंगे।

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