प्रांशु मिश्रा जी, आपके धमकियाने का अंदाज़ भी निराला है!

”…Holi tak Sehat aur Iradon ka dhyan rakhiye… …Is season main bimar hoten hain to lumba jhelena padta hai…”

उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति पार्ट 2 के अध्यक्ष प्रांशु मिश्रा के नाम खुला पत्र….

दुनिया भर में मनाया गया प्यार का दिन कहे जाने वाला दिन वैलेंटाइन डे. ऐसे में आपकी धमकियाना का जवाब तो प्यार ही होगा…आप चाहे जान ले लो या लंबा झिला दो लेकिन बदलता मौसम भी ये कह रहा है चलो नफरतो को हम भुला दे…

तेरा रुतबा, तेरा ओहदा तेरी कुर्सी  का गुरूर ..
मेरी हिम्मत, मेरा जज्बा मेरे मेकसद का सुरूर…

चलो हम अपनी जिदे भुला दे, चलो तुम अपना घमंड मिटा दो…हम अपना सिर झुका दे तुम अपना रुतबा बढ़ा लो …

समाचार पत्र और टीवी चैनल की ख़बरों में धमकियानो की ख़बरों को सुनकर देखकर कितने दिनों से यही तमन्ना थी काश मुझे भी कभी कोई धमकी दे। आख़िरकार वो दिन आ ही गया, हालाँकि इसका अहसास मुझे हो गया था लेकिन मेरी ख्वाइश को भाई प्रांशु मिश्रा की झल्लाहट ने पूरा कर दिया । मौसम का भी बदलाव था और प्रांशु मिश्रा की बौखलाहट ने उनकी मानसिकता को whatsapp group पर धमकी का रूप अख्तियार करा ही दिया। धमकी क्या दिया धमकी देकर, किया अपना ही खुलासा क्योंकि सबको पता हैं आजकल कौन है इनका आका । अरे शर्म करों नेताजी, आपकी महत्वकांछाओं ने आपकी आँखों का पानी भी मार दिया है।

ये तो देख लो किसको धमकिया रहे हों। हम भी औरों के तरह आपको 100 रूपये देकर आपकी समिति के सदस्य बने और आपको ही वोट देकर अध्यक्ष बनाया, इसका ये मतलब तो नहीं की हम आपसे सवाल भी नही कर सकते, सवाल व्यक्तिगत हो तो जवाब न दीजिये लेकिन सवाल पत्रकारों के हितों में हो तो जवाब देना होगा। आप तो स्वयं पत्रकार हैं, मुख्यमंत्री से भी सवाल करते हैं तो आज क्यों भाग रहे है, क्यों भगा रहें हैं, क्यों धमकिया रहें है । धमकी की ख्वाइश तो मेरी थी लेकिन जब पूरी हुई तो डरना भी स्वाभाविक था और धमकी देने वाला भी कोई कमज़ूर नही था, पढ़ा लिखा बुद्धिजीवी वर्ग से ताल्लुक रखने वाला था जो अपनी बुद्धि से जान माल के आलावा भी मुझे नुक्सान पंहुचा सकता था । अभी अपनेआप को हिम्मत दे ही पाया था की सुल्तानपुर में पत्रकार की निर्मम हत्या का समाचार ने और डरा दिया लेकिन आभार आप सभी भाई बंधू पत्रकार साथियों का जिन्होंने मुझे इन विषम परिस्थितयों में फिर से साहस बंधाया। आपकी धमकियाना दहशत से बहार आने पर यही सवाल था क्यों, ऐसा क्या हुआ , हम तो आपकी प्रशंसा कर रहे थे, जब हमने बात उठाई तो आपको ये डर कही आपको इसका क्रेडिट न मिला तो क्या होगा, जब हमने आपके प्रयासों की सराहना की तो आप धमकियाने लगे।

प्रेस क्लब की सदस्यता केवल एक मुद्दा ही नहीं जो आपकी पोल खोलता है ऐसे अनेक मुद्दे है जिनसे आप भागते नज़र आ रहे है । पत्रकार नावेद के सवालों से आप भाग रहे है । प्रेस क्लब की सदस्यता के मामले में आप जो प्रशंसा और प्रशस्ति पत्र बटोर रहे है उसकी सच्चाई कही खुल न जाये ये उसकी बौखलाहट है। प्रेस क्लब जिसका सञ्चालन UPWJ करता है जो IFWJ की प्रदेश इकाईं है उस पर दबाव बनाकर आप बैंगलोर अधिवेशन में अपने साथियों को IFWJ के पदों पर बैठने की बिसात तो बिछा ही चुके हैं। आपको और आपके साथियों को बधाई । प्रेस क्लब की सदस्यता का आप द्वारा कोई मांग पत्र भी प्रेस क्लब के अध्यक्ष या सचिव को नही दिया गया है जबकि इसके विपरीत वरिष्ठ पत्रकार दीपक गिडवानी शरत प्रधान से प्रशंसा पत्र बटोर लिए, समाचार पत्रों में अपनी प्रशंसा छपवायी और सोशल मीडिया पर वाह वाही भी करा ली और बैंगलोर तक प्रचार भी किया। खुश हो जाइये भाई लोग, खुल सकते हैं प्रेस क्लब के दरवाज़े, दिल को बहलाने के लिए ये ख्याल अच्छा है।

सवाल बहुत थे, बातें बहुत थी और आपकी गीदड़ भमकियों का ज़्यादा देर तक मुझपर असर भी नही होने वाला था लेकिन परिवार के साथ साथ घर की ज़िम्मेदारियों ने कहीं न कहीं मेरी क्रांतिकारी विचारधाराओं को ठहराव दे दिया और टकराहट से दूर कर दिया है । थोड़ी देर के लिए ही सही अगर आपकी बातों को सच मान लिया जाये तो होली से पहले मुझे लंबा झेलना पड़ सकता है । कौन झेलना चाहेगा होली मना लेने दीजिये तब तक आप को यदि मेरे कोई अलफ़ाज़ या मेरी बात अनुचित लगी हों तो उसके लिए मैं आपसे क्षमाप्रार्थी हूँ । आपसे निवेदन हैं आप मुझे माफ़ कर दें और होली मनाने दीजिये और गुझिया खिला कर गले से लगाइये । आप तरक़्क़ी करें –आज आप प्रदेश के पत्रकारों के नेता है कल IFWJ के नेता बनकर पूरे भारत के पत्रकारों के नेता बने यही दुआ है मेरी।

क्या खूब कहा है…

तुम करोगे याद एक दिन इस प्यार के ज़माने को…
चले जायेंगे जब हम कभी न वापस आने को…
करेगा महफ़िल में जब ज़िक्र हमारा कोई …
तो तुम भी तन्हाई ढूँढोगे आंसूं बहाने को …

आपका भाई
मोहम्मद कामरान
पत्रकार, लखनऊ
indiankamran@gmail.com

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Comments on “प्रांशु मिश्रा जी, आपके धमकियाने का अंदाज़ भी निराला है!

  • Juber Ahamad says:

    [quote][b]अब चिल्लाने से कुछ नहीं होगा. किए हो तो भरो कैमरामैन मोहम्मड. और बनाओ पार्ट-२. अभी तो ये शुरूवात है. दौड़ा दौड़ा कर मारे ना जाओ तो नयी समिति बनाने का फयडा ही क्या?[/b][/quote]

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