पत्रकारों के लिए छत्तीसगढ़ और पंजाब बेहद खतरनाक जगह, फिर हुई गिरफ्तारी, फिर हुआ हमला

छत्तीसगढ़ और पंजाब पत्रकारों के लिए बेहद खतरनाक जगह साबित होते जा रहे हैं. बिना किसी आधार पर छत्तीसगढ़ में पत्रकार गिरफ्तार कर जेलों में डाले जा रहे हैं. पंजाब में न्यूज चैनलों के प्रसारण पर पूरी तरह राज्य सरकार के खासमखास लोगों का कब्जा है जिसके कारण सरकार विरोधी प्रसारण को तत्काल प्रभाव से राज्य में रुकवा दिया जाता है. यही नहीं, कवरेज करने वाले पत्रकारों पर आए दिन हमले होते रहते हैं. छत्तीसगढ़ और पंजाब से आज जो दो खबरें आई हैं, उसमें बताया गया है कि छत्तीसगढ़ में एक और पत्रकार गिरफ़्तार कर लिया गया है. वहीं पंजाब में सत्ताधारी नेता के स्टाफ के लोगों ने पत्रकार हमला कर दिया है.

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में पुलिस ने दीपक जायसवाल नाम के एक ‘पत्रकार’ को गिरफ़्तार किया है. उन पर पिछले साल कुछ शिक्षकों से बुरे बरताव का आरोप है. हालांकि पुलिस का कहना है कि दीपक पत्रकारिता के पेशे से जुड़े हुए नहीं हैं लेकिन दक्षिण बस्तर पत्रकार संघ का कहना है कि दीपक पत्रकार हैं और दैनंदिन नाम के एक अख़बार से जुड़े हैं. दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक कमलोचन कश्यप ने कहा, दीपक जायसवाल मूलतः एक छोटा-मोटा होटल चलाने का काम करता रहा है. उन्हें शनिवार को गिरफ़्तार किया गया है. पुलिस का कहना है कि पिछले साल जून में दीपक जायसवाल ने एक परीक्षा केंद्र में जा कर परीक्षार्थियों की तस्वीरें खींचीं और उन्होंने परीक्षा केंद्र में मौजूद प्राचार्य और शिक्षकों से दुर्व्यवहार किया. प्राचार्य ने इसकी रिपोर्ट पिछले साल ही कराई थी लेकिन गिरफ्तारी अब हुई. इस गिरफ़्तारी के बाद दक्षिण बस्तर पत्रकार संघ की दंतेवाड़ा इकाई के पत्रकारों ने पुलिस और माओवादियों से संबंधित सभी तरह की ख़बरों के बहिष्कार का निर्णय लिया है. संघ के अध्यक्ष बापी राय ने कहा, “हमें पत्रकार के बजाय पक्षकार बनाने की कोशिश हो रही है और जिस तरीके से यह गिरफ्तारी हुई है, उससे हम सब बेहद दुखी हैं. ऐसी हालत में पत्रकारिता करना मुश्किल है.”

इसी सप्ताह व्हाट्सऐप पर कथित रुप से अश्लील टिप्पणी करने के आरोप में एक पत्रकार प्रभात सिंह को भी गिरफ़्तार किया गया है. लेकिन पत्रकारों का आरोप है कि राज्य में मीडियाकर्मियों को बेवजह परेशान किया जा रहा है. दोनों पत्रकारों के परिवार वालों का आरोप है कि दीपक और प्रभात जिस परीक्षा केंद्र में पहुंचे थे, वहां प्राचार्य के संरक्षण में परीक्षार्थी नकल कर रहे थे. इसकी उन्होंने लगातार खबर भी प्रकाशित की थी. यहां तक कि उस मामले में शिक्षा विभाग ने केंद्राध्यक्ष को नकल करवाने के आरोप में निलंबित भी किया है. बस्तर में किसी पत्रकार की यह चौथी गिरफ्तारी है. पिछले साल जुलाई में एक अख़बार के प्रतिनिधि सोमारु नाग को और अक्टूबर में पत्रकार संतोष यादव को माओवादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था और दोनों पत्रकार तब से जेल में हैं. इसके बाद प्रभात सिंह और दीपक जायसवाल को इस सप्ताह गिरफ़्तार किया गया है.

पंजाब से खबर है कि बादल की बस के स्टाफ ने फिर किया पत्रकार पर हमला. तीन हफ्ते में दूसरी घटना. तीन सप्ताह में यह ऐसी दूसरी घटना है, इससे पहले बादल की दूसरी ट्रांसपोर्ट कंपनी की बस के स्टॉफ ने एक अन्य पत्रकार के साथ एक मार्च को रोपड़ में मारपीट की थी. पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की ट्रांसपोर्ट कंपनी डबवाली बस सर्विस के स्टाफ ने एक अन्य बस के ड्राइवर, कंडक्टर और अंग्रेजी अखबार द ट्रिब्यून के स्टाफ रिपोर्टर के साथ कथित तौर पर मारपीट की. घटना शुक्रवार रात 8.15 बजे जालंधर के पीएपी चौक की है, तीन सप्ताह में यह ऐसी दूसरी घटना है, इससे पहले बादल की दूसरी ट्रांसपोर्ट कंपनी की बस के स्टॉफ ने एक अन्य पत्रकार के साथ एक मार्च को रोपड़ में मारपीट की थी.

पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक लुधियाना में कार्यरत चरणजीत सिंह तेजा पीएपी चौक पर बस का इंतजार कर रहे थे. सिंह ने बताया कि उसी दौरान उन्होंने देखा कि डबवाली ट्रांसपोर्ट का स्टाफ सवारी उठा रही अन्य बस कहलोन बस सर्विस के स्टाफ के साथ मारपीट कर रहा है. साथ ही सिंह ने बताया कि कहलोन बस के कंडक्टर के सिर में ईंट फेंककर मारी गई, जिससे उसके सिर से खून बहने लगा. जब दूसरी ईट उसके पैरों के पास मारी गई तो मैंने उन्हें टोका. सिंह ने साथ ही बताया कि मैंने पुलिस को दोनों बसें अपनी हिरासत में लेने के लिए कहा, लेकिन पुलिस ने केवल कहलोन बस को अपनी हिरासत में लिया. साथ ही आरोप लगाया कि डबवाली ग्रुप के तीन लोगों ने उसके साथ मारपीट की और उसका कैमरा छीनने की कोशिश की.



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