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सादे कागज पर पर साइन करने वालों के लिए मजीठिया का लाभ पाना चुनौती भरा काम होगा!

श्री अम्बिका प्रिंटर्स के कर्मचारियों के गंभीर आरोप और पर्सनल आफिसर ज्ञानेश्वर रहाणे का बेतुका जवाब…

मुंबई : जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में महाराष्ट्र के लेबर कमिश्नर ऑफिस में चल रहे 17(1) के रिकवरी क्लेम मामले में श्री अम्बिका प्रिंटर्स एन्ड पब्लिकेशंस के पर्सनल आफिसर ज्ञानेश्वर रहाणे ने ऐसा बेतुका जवाब सुनवाई के दौरान लिखकर दिया है जो किसी को हजम नहीं होगा। इस सुनवाई के दौरान पिछली बार उन कर्मचारियों को जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार प्रमोशन देने की लिखित रूप से मांग की गयी थी जो 10 साल से या उससे ऊपर समय से काम कर रहे हैं। इस सवाल पर सुनवाई के दौरान ज्ञानेश्वर रहाणे ने साफ़ तौर पर लिख कर दिया है कि प्रमोशन के मामले में कार्य संतोषजनक होने पर ही प्रमोशन दिया जाता है, ऐसा वेज बोर्ड में लिखा है।

श्री अम्बिका प्रिंटर्स के कर्मचारियों के गंभीर आरोप और पर्सनल आफिसर ज्ञानेश्वर रहाणे का बेतुका जवाब…

मुंबई : जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में महाराष्ट्र के लेबर कमिश्नर ऑफिस में चल रहे 17(1) के रिकवरी क्लेम मामले में श्री अम्बिका प्रिंटर्स एन्ड पब्लिकेशंस के पर्सनल आफिसर ज्ञानेश्वर रहाणे ने ऐसा बेतुका जवाब सुनवाई के दौरान लिखकर दिया है जो किसी को हजम नहीं होगा। इस सुनवाई के दौरान पिछली बार उन कर्मचारियों को जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार प्रमोशन देने की लिखित रूप से मांग की गयी थी जो 10 साल से या उससे ऊपर समय से काम कर रहे हैं। इस सवाल पर सुनवाई के दौरान ज्ञानेश्वर रहाणे ने साफ़ तौर पर लिख कर दिया है कि प्रमोशन के मामले में कार्य संतोषजनक होने पर ही प्रमोशन दिया जाता है, ऐसा वेज बोर्ड में लिखा है।

आपको बता दें कि इस कंपनी ने आजतक किसी को प्रमोशन शायद ही दिया हो। यानी ज्ञानेश्वर रहाणे की बात मानें तो 5 डेली अखबार निकालने वाले श्री अम्बिका प्रिंटर्स एन्ड पब्लिकेशंस में संपादक से लेकर वर्कर तक सबकी सेवा संतोष जनक नहीं। क्या ये माना जा सकता है कि किसी भी कंपनी में संपादक से लेकर सब के सब प्रमोशन लायक नहीं हों। तब तो इस कंपनी का नाम गिनीज बुक में जाना चाहिए।

अब आईये ज्ञानेश्वर रहाणे के दूसरे जवाब पर नजर डालें। श्री अम्बिका प्रिंटर्स की तरफ से अपने कर्मचारियो को जो सेलरी स्लिप दी जाती है उसमें कर्मचारियों का पोस्ट गायब रहता है और स्टाम्प भी नहीं लगाकर दिया जाता है। ज्ञानेश्वर रहाणे ने इसके लिए एक तरीके से कम्प्यूटर बाबा को दोष दिया है। वैसे आपको बता दूँ कि यह कम्पनी अपने कर्मचारियों को जो आईकार्ड दे रही है उसमें भी कर्मचारियों का पोस्ट गायब है। यानि कंपनी कुछ बड़ी खिचड़ी पका रही है। इस कंपनी में कर्मचारियों को लोन के रूप में कुछ माह का एडवांस वेतन देने पर कर्मचारियों से साइन कराकर उनसे ब्लैंक चेक लिया जाता है। अधिकांश कर्मचारियो ने एचडीएफसी बैंक का ब्लैंक चेक कम्पनी को दिया है।

इस मामले की तरफ जब लिखित रूप से शिकायत की गयी तो ज्ञानेश्वर रहाणे ने लिखकर दे दिया है कि कंपनी ने किसी भी कर्मचारी से किसी तरह का ब्लैंक चेक आज तक नहीं लिया है। ज्ञानेश्वर रहाणे का एक और झूठ देखिये। सुनवाई के दौरान जब लिखित रूप से सहायक कामगार आयुक्त सीए राउत को कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें आज तक 10 साल से ऊपर हो गए, इस कम्पनी ने किसी भी कर्मचारी को नियुक्ति पत्र नहीं दिया तो इस अधिकारी ने इस आरोप को लिखित रूप से हास्यास्पद बताया। ज्ञानेश्वर रहाणे की मानें तो सभी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र कम्पनी ने दिया है। इस कम्पनी के कर्मचारियों ने सुनवाई में यह भी आरोप लगाया कि 15 मिनट देर से ऑफिस आने पर या 15 मिनट से ज्यादा खाना खाने या दूसरे काम से बाहर जाने पर आधी पगार काट ली जाती है।

इस पर भी ज्ञानेश्वर रहाणे ने लिख कर दिया है कि कम्पनी ऐसा नहीं करती बल्कि शिकायत करने वाले झूठ बोल रहे हैं। वैसे आपको बता दूँ कि इस कम्पनी ने अपने कर्मचारियों को धमकी दे कर सादे कागज पर साइन भी करा लिया था। सूत्र बताते हैं कि कम्पनी अब इस फिराक में है कि सादे कागज पर कराये गए साइन का इस्तेमाल 20-जे के रूप में करे। अगर ऐसा हुआ तो उन कर्मचारियों के लिए मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ पाना काफी चुनौती भरा काम होगा जिन्होंने सादे कागज पर साइन किया है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
समन्यवक, मजीठिया सेल
9322411335

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