चर्चित मजीठिया क्रांतिकारी शशिकांत सिंह को एनयूजे (महाराष्ट्र) ने बनाया मजीठिया सेल का समन्यवयक

(शशिकांत सिंह)

दो कद्दावर मजीठिया क्रांतिकारियों ने महाराष्ट्र के मीडिया कर्मियों को उनका अधिकार दिलाने के लिए हाथ मिलाया है। देश के जाने माने मजीठिया क्रांतिकारी शशिकांत सिंह को नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट के अध्यक्ष डॉ उदय जोशी और महाराष्ट्र की जनरल सेक्रेटरी शीतल करदेकर ने महाराष्ट्र का मजीठिया सेल का समन्यवक बनाया है। शीतल करदेकर महाराष्ट्र सरकार द्वारा बनाई गई जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की त्रिपक्षीय कमेटी में भी मीडिया कर्मियों का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

मजीठिया मामले में काश सुप्रीमकोर्ट ऐसा कर देता!

देश के अधिकांश अखबार मालिकों के खिलाफ माननीय सुप्रीमकोर्ट में अवमानना का केस चल रहा है। इस मामले में सुप्रीमकोर्ट में अभी डेट नहीं पड़ पा रही है। अगर माननीय सुप्रीमकोर्ट कुछ चीजें कर दे तो सभी अखबार मालिकों की नसें ना सिर्फ ढीली हो जायेंगी बल्कि देश भर के मीडिया कर्मियों को इंसाफ भी मिल जायेगा। इसके लिये सबसे पहले जिन समाचार पत्रों की रिपोर्ट कामगार आयुक्त ने सुप्रीमकोर्ट में भेजी है उसमें जिन अखबार मालिकों ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश नहीं लागू किया है या आंशिक रुप से लागू किया है ऐसे अखबारों के मैनेजिंग डायरेक्टर, डायरेक्टर, पार्टनर और सभी पार्टनरों को अदालत की अवमानना का दोषी मानते हुये उनके खिलाफ कामगार आयुक्त को निर्देश दें कि उनके खिलाफ पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करा दें और सभी जिलाधिकारियों, तहसीलदारों को निर्देश दें कि उनके खिलाफ रिकवरी कार्रवाई शुरू की जाये। उनको जमानत भी माननीय सुप्रीमकोर्ट से तभी प्राप्त हो जब वे मीडियाकर्मियों को उनका पूरा बकाया एरियर वेतन तथा प्रमोशन दें।

डीबी कॉर्प ने मुंबई के ब्यूरो चीफ सहित कई पत्रकारों को बनाया मैनेजेरियल और एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ!

मुंबई से शशिकांत सिंह की रिपोर्ट…

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में सबसे ज्यादा शिकायत डीबी कॉर्प लिमिटेड के अखबारों- दैनिक भास्कर, दिव्य भास्कर और दिव्य मराठी आदि के मीडियाकर्मियों ने कर रखी है। इस संस्थान के पत्रकारों ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय सहित महाराष्ट्र के लेबर डिपार्टमेंट और मुंबई के लेबर कोर्ट में तमाम शिकायतें कर रखी हैं। एक तरफ जहां डी बी कॉर्प का दावा है कि वह खूब लाभ कमा रहा है, वहीं जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के मानकों के मुताबिक वेतन न देना पड़े, इसके लिए इस कंपनी ने अपने मुंबई के माहिम दफ्तर में कार्यरत कई सीनियर पत्रकारों को मैनेजेरियल और एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ बना दिया है। पत्रकारों को इस बात की भनक तक नहीं लगी कि उन्हें संपादकीय में नहीं बल्कि मैनेजर और एडमिन स्टाफ में रख कर काम लिया जा रहा है।

मजीठिया वेज बोर्ड : अखबार मॉलिकों के खिलाफ 24 आरसी जारी, भास्कर में हड़कंप

मध्यप्रदेश के श्रम विभाग कार्यालय के काम करने के तरीके से दूसरे राज्यों के कामगार आयुक्त कार्यालयों को भी सीख लेनी चाहिए। पिछले दिनों श्रम विभाग द्वारा मध्यप्रदेश के विभिन्न समाचार पत्रों में कार्यरत पत्रकार एवं गैर पत्रकार कर्मचारियों के वेतन के मामलों का निराकरण कर 24  आर.आर.सी. जारी की गई। इनमें सबसे ज्यादा आर सी दैनिक भास्कर प्रबंधन के खिलाफ काटी गयी।

मजीठिया मांगने के बाद हुआ है ट्रांसफर तो मीडियाकर्मी इस मेल पर सूचित करें

देश भर के मीडियाकर्मियों के लिए एक और अच्छी खबर आई है। जिन मीडिया कर्मियों ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के तहत माननीय सुप्रीमकोर्ट में या देश के किसी भी कामगार न्यायालय अथवा कामगार आयुक्त कार्यालय में अपना क्लेम, मुकदमा या लिखित सूचना दिया है और लिखित सूचना देने, क्लेम लगाने या मुकदमा करने के बाद अखबार मालिकों ने उनका ट्रांसफर, टर्मिनेशन या सस्पेंशन किया है तो ऐसे सभी मीडियाकर्मी अपना नाम, पोस्ट, अखबार का नाम, अखबार की कंपनी का नॉम, क्लेम करने की तिथि या मुकदमा करने की तिथि, कहां से कहां ट्रांसफर किया गया और किस तारीख को ट्रांसफर या टर्मिनेशन या सस्पेंशन किया गया का पूरा विवरण जल्द से जल्द दें.

‘प्रातःकाल’ अखबार कर्मचारियों का नाम छिपा रहा है

मुम्बई से प्रकाशित गोयल फैमिली के अखबार प्रातःकाल में बड़े गड़बड़झाले की खबर सामने आ रही है। चर्चा है कि प्रातःकाल अखबार के सर्वेसर्वा गोयल फैमिली के चाचा- भतीजे ने अपने यहाँ कार्यरत मीडियाकर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ ना देना पड़े, इसके लिए दर्जनों मीडियाकर्मियों का नाम झटके से अपने रजिस्टर से बाहर कर दिया है। जब लेबर विभाग की ओर से दबाव पड़ा तो इन्होंने जो नाम दिया उसमे वर्किंग जर्नलिस्ट कैटेगरी में सिर्फ दो नाम हैं- पहला नाम था सुरेश गोयल जो कि मुख्य संपादक हैं और दूसरा महीप गोयल जो स्थानीय संपादक हैं।

मजीठिया समिति की महिला सदस्य को सम्पादक ने दी धमकी

माननीय सुप्रीमकोर्ट के दिशा निर्देश पर जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में महाराष्ट्र सरकार द्वारा गठित त्रिसदस्यीय निरीक्षण समिति में पत्रकारों का प्रतिनिधित्व करने वाली महिला सदस्य और नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट की महाराष्ट्र महासचिव शीतल करदेकर ने मराठी दैनिक आपला वार्ताहार के कार्यकारी संपादक राजेंद्र चव्हाण के खिलाफ धमकी देने की लिखित शिकायत दादर के सहायक पुलिस आयुक्त के यहां दी है।

बिना अथॉरिटी लेटर सुनवाई में आने पर श्री अम्बिका प्रिंटर्स के पर्सनल आफिसरों को पड़ी फटकार

मुंबई : जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में कामगार आयुक्त कार्यालय में दाखिल 17 (1) के क्लेम मामले की सुनवाई के दौरान प्रबंधन की तरफ से अथारिटी लेटर लिए बगैर सुनवाई में आ रहे श्री अम्बिका प्रिंटर्स एन्ड पब्लिकेशंस के पर्सनल आफिसरों ज्ञानेश्वर रहाणे और अशरफ शेख को सहायक कामगार आयुक्त ने कड़ी फटकार लगाई। पिछले चार माह से ज्यादा समय से इस मामले की सुनवाई सहायक कामगार आयुक्त सीए राउत के यहाँ चल रही है। इस सुनवाई में कंपनी के अथारिटी लेटर के बगैर आने वाले लीगल एडवाइजर श्रीकांत गोसावी का कर्मचारियों ने विरोध किया था जिसके बाद सहायक कामगार आयुक्त ने उन्हें सुनवाई से बाहर कर दिया।

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में डीबी कॉर्प सहित 7 मीडिया कंपनियों ने नहीं जमा कराया एफिडेविट

23 अखबार कंपनियों को दिया गया था आदेश…

मुंबई : मीडिया कर्मियों के वेतन, एरियर्स और प्रमोशन्स से जुड़े जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में मुम्बई के कामगार उपायुक्त कार्यालय द्वारा 13 अक्टूबर 2016 को पत्र लिखकर एफिडेविट देने का निर्देश मुम्बई के 23 अखबार कंपनियों को दिया गया था। ये एफिडेविट 300 रुपये के स्टाम्प पेपर पर देना था जिसमें साफ़ तौर पर लिखना था कि आपने मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश पूरी तरह लागू कर दिया है। इस एफिडेविट को जमा करने की अंतिम तिथि थी 19 अक्टूबर 2016। मगर आज भी मुम्बई में डीबी कॉर्प सहित 7 अखबार मालिकों ने एफिडेविट नहीं जमा किया।

सादे कागज पर पर साइन करने वालों के लिए मजीठिया का लाभ पाना चुनौती भरा काम होगा!

श्री अम्बिका प्रिंटर्स के कर्मचारियों के गंभीर आरोप और पर्सनल आफिसर ज्ञानेश्वर रहाणे का बेतुका जवाब…

मुंबई : जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में महाराष्ट्र के लेबर कमिश्नर ऑफिस में चल रहे 17(1) के रिकवरी क्लेम मामले में श्री अम्बिका प्रिंटर्स एन्ड पब्लिकेशंस के पर्सनल आफिसर ज्ञानेश्वर रहाणे ने ऐसा बेतुका जवाब सुनवाई के दौरान लिखकर दिया है जो किसी को हजम नहीं होगा। इस सुनवाई के दौरान पिछली बार उन कर्मचारियों को जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार प्रमोशन देने की लिखित रूप से मांग की गयी थी जो 10 साल से या उससे ऊपर समय से काम कर रहे हैं। इस सवाल पर सुनवाई के दौरान ज्ञानेश्वर रहाणे ने साफ़ तौर पर लिख कर दिया है कि प्रमोशन के मामले में कार्य संतोषजनक होने पर ही प्रमोशन दिया जाता है, ऐसा वेज बोर्ड में लिखा है।

सिर्फ दो पत्रकार निकाल रहे हैं 12 पेज का हिंदी दैनिक ‘प्रातःकाल’!

मुम्बई में रहने वाले मारवाड़ी और राजस्थानी समाज के लोगों के मुखपत्र हिंदी दैनिक प्रातःकाल में सिर्फ 2 मीडियाकर्मी काम करते हैं! 12 पेज के इस अखबार में न तो मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू है और न ही इस अखबार का मालिक कभी श्रम विभाग को कोई दस्तावेज दे रहा है. यहां मणिसाना वेज बोर्ड भी नहीं लागू किया गया था. ये खुलासा हुआ है आरटीआई के जरिये. मुम्बई के निर्भीक पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट शशिकान्त सिंह ने मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश प्रातःकाल अखबार में लागू है या नहीं, इसकी जानकारी श्रम आयुक्त कार्यालय महाराष्ट्र से मांगी थी.