काशी से मुंबई… पत्रकारीय जीवन के तीन दशक यूं हुए पूरे… किन-किन का नाम हूं, किस-किस को धन्यवाद कहूं…

आज मुझे तीस साल पूरे हो गए पत्रकारिता करते हुए। आज के दिन ही बनारस से प्रकाशित ‘लोकइच्छा’ अखबार में नगर संवाददाता के रूप में जुड़ा था, वो भी आश्चर्यजनक तरीके से। आश्चर्य इस मामले में कि किसी साथी के साथ ‘जयदेश’ अखबार में एक विज्ञप्ति लेकर गया था। काशी पत्रकार संघ के ठीक सामने मैदागिन में ‘जयदेश’ और ‘सन्मार्ग’ दोनों का ऑफिस था। नीचे ‘सन्मार्ग’, ऊपर ”जयदेश’। Continue reading

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

भोजपुरी एक्टर निरहुआ ने दी पत्रकार शशिकांत सिंह को जान से मारने की धमकी

कॉमेडियन कपिल शर्मा के बाद एक और सेलीब्रिटी के आपा खोने की खबर मिली है… कपिल ने जहां पत्रकार विकी लालवानी के साथ गाली-गलौच की थी, वहीं इस बार भोजपुरी फिल्मों के एक्टर दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’ ने पत्रकार शशिकांत सिंह को न सिर्फ गालियां दी हैं, अपितु मुंबई पहुंचते ही उन्हें टुकड़ा-टुकड़ा काटने और घर में घुस कर जान से मारने की धमकी दी है। Continue reading

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

दैनिक भास्कर के जालंधर आफिस की कुर्की का आदेश

BHASKAR

मजीठिया वेजबोर्ड का बकाया ना देने के कारण होगी कार्रवाई… ए.एल.सी. द्वारा पास किया 23.52 लाख का क्लेम ब्याज सहित अदा ना किया तो होगी भास्कर कार्यालय की नीलामी…

पंजाब के फिरोजपुर से एक बड़ी खबर आ रही है। यहां सहायक लेबर कमिश्रर फिरोजपुर की कोर्ट द्वारा भास्कर कर्मी राजेन्द्र मल्होत्रा को 23 लाख 52 हजार 945 रुपये 99 पैसे की राशि देने के आदेश के बाद भास्कर प्रबंधन द्वारा आनाकानी करने के उपरांत भास्कर के जालंधर कार्यालय की संपत्ति की कुर्की का आदेश हो गया है। भास्कर की प्रॉपर्टी अटैच करके वहां नोटिस भेज दी गयी है। जल्दी ही नीलामी की कार्यवाही शुरू कर कोर्ट राजेन्द्र मल्होत्रा को उसका बकाया हक दिलवाएगी। Continue reading

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

भास्कर ग्रुप को धूल चटाने वाली इस लड़की का इंटरव्यू देखें-सुनें

मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ने में बहुत बड़े बड़े पत्रकारों की पैंट गीली हो जाती है लेकिन भास्कर समूह में रिसेप्शनिस्ट पद पर कार्यरत रही एक लड़की ने न सिर्फ भास्कर ग्रुप से कानूनी लड़ाई लड़ी बल्कि अपना हक हासिल करने की अग्रसर है.

कोर्ट के आदेश पर भास्कर ग्रुप ने मजीठिया वेज बोर्ड के तहत इसे मिलने वाले लाखों रुपये अदालत में जमा करा दिए हैं. लतिका चह्वाण नामक यह लड़की डीबी कार्प के मुंबई आफिस में रिसेप्शनिस्ट हैं. इनसे बातचीत की आरटीआई एक्सपर्ट और मजीठिया क्रांतिकारी शशिकांत सिंह जी ने.

इंटरव्यू देखने सुनने के लिए नीचे दिए वीडियो पर क्लिक करें :

संबंधित खबरें….

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

कोर्ट ने मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर हिन्दुस्तान टाईम्स से वसूली किए जाने पर लगी रोक हटायी

टर्मिनेट कर्मचारी पुरुषोत्तम सिंह के मामले में शोभना भरतिया को लगा तगड़ा झटका, एडवोकेट उमेश शर्मा ने लगातार दो दिन की थी जोरदार बहस….  जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में हिन्दुस्तान टाईम्स की मालकिन शोभना भरतिया को एक बार फिर मंगलवार १९ /२/२०१८ को दिल्ली उच्च न्यायलय में मुंह की खानी पड़ी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मजीठिया वेज बोर्ड मामले से जुड़े वसूली मामले में लगायी गयी रोक को हटा लिया। इससे हिन्दुस्तान प्रबंधन से मजीठिया वेज बोर्ड मामले में लगाये गये १७ (१) के मामले में वसूली का रास्ता साफ हो गया है।

१७ (१) का यह क्लेम हिन्दुस्तान टाईम्स दिल्ली से जबरन टर्मिनेट किये गये डिप्टी मैनेजर पुरुषोत्तम सिंह ने लगाया था जिस पर कंपनी को बकाया देने के लिये नोटिस गयी तो हिन्दुस्तान प्रबंधन ने उस नोटिस पर स्टे ले लिया। लगभग तीन साल तक चली लंबी लड़ाई के बाद आखिर दिल्ली हाईकोर्ट ने नोटिस पर लगी रोक को हटा लिया है। पुरुषोत्तम सिंह का मामला जाने माने एडवोकेट उमेश शर्मा ने रखा। उन्होंने लगातार दो दिन तक बहस किया और यह रोक हटवा लिया।

बताते हैं कि हिन्दुस्तान टाईम्स दिल्ली में डिप्टी मैनेजर पद पर कार्यरत पुरुषोत्तम सिंह को वर्ष २०१५ में कंपनी ने टर्मिनेट कर दिया। उसके बाद उन्होंने  एडवोकेट उमेश शर्मा से मिलकर अपने टर्मिनेशन के खिलाफ एक केस लगवाया। पुरुषोत्तम सिंह ने २०१५ में ही दिल्ली सेंट्रल के डिप्टी लेबर कमिश्नर लल्लन सिंह के यहां १७(१)का केस लगाया जिस पर पदाधिकारी ने २१ लाख की रिकवरी का नोटिस भेजा। उसके बाद कंपनी दिल्ली हाईकोर्ट गयी और वहां दिल्ली हाईकोर्ट की जज सुनीता गुप्ता ने इस नोटिस पर एकतरफा कारवाई करते हुये रोक लगा दिया।

इस मामले में पुरुषोत्तम सिंह ने देश भर के मीडियाकर्मियों की तरफ से माननीय सुप्रीमकोर्ट में लड़ाई लड़ रहे एडवोकेट उमेश शर्मा से अपना पक्ष रखने का अनुरोध किया। लगभग तीन साल तक चले इस केस में १९ फरवरी को दिल्ली हाईकोर्ट में उमेश शर्मा ने पुरुषोत्तम सिंह का पक्ष जोरदार तरीके से रखा। न्यायाधीश विनोद गोयल के सामने हमेशा की तरह हिन्दुस्तान प्रबंधन नई तारीख लेने के प्रयास में जुटा लेकिन उमेश शर्मा ने विद्वान न्यायाधीश से निवेदन किया कि इस बहस को लगातार जारी रखा जाये क्योंकि नोटिस पर स्टे देना पूरी तरह गलत है। मजीठिया वेज बोर्ड मामले में माननीय सुप्रीमकोर्ट सबकुछ क्लीयर कर चुका है।

इसके बाद विद्वान न्यायाधीश ने सुनवाई अगले दिन भी जारी रखने का आदेश दिया। २० फरवरी को फिर दिल्ली हाईकोर्ट में बहस हुयी और उसके बाद न्यायाधीश विनोद गोयल ने नोटिस पर लगी रोक हटा लिया। यानि अब हिन्दुस्तान प्रबंधन के खिलाफ आरआरसी जारी होने का रास्ता साफ हो गया है। इस मामले में पुरुषोत्तम सिंह ने हिन्दुस्तान टाईम्स की मालकिन शोभना भरतिया और एचआर डायरेक्टर शरद सक्सेना को पार्टी बनाया था। पुरुषोत्तम सिंह को मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ रहे देश भर के मीडियाकर्मियों ने बधाई दी है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टीविस्ट
९३२२४११३३५

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

फिरोजपुर से भास्कर कर्मी राजेन्द्र मल्होत्रा के पक्ष में जारी हुयी साढ़े बाईस लाख की आरसी

पंजाब के फिरोजपुर से एक बड़ी खबर आ रही है। यहां दैनिक भास्कर में कार्यरत ब्यूरो चीफ राजेन्द्र मल्होत्रा के आवेदन को सही मानते हुये फिरोजपुर के सहायक कामगार आयुक्त सुनील कुमार भोरीवाल ने दैनिक भास्कर प्रबंधन के खिलाफ २२ लाख ५२ हजार ९४५ रुपये की वसूली के लिये रिकवरी सार्टिफिकेट जारी की है। राजेन्द्र मल्होत्रा ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में अपने बकाये की रकम के लिये सुप्रीम कोर्ट के वकील उमेश शर्मा की देख-रेख में फिरोजपुर के सहायक कामगार आयुक्त के समक्ष १७ (१) का क्लेम लगाया था।

इसके बाद कंपनी को नोटिस मिली तो दैनिक भास्कर की प्रबंधन कंपनी डीबी कार्प ने राजेन्द्र मल्होत्रा का ट्रांसफर बिहार के दरभंगा में कर दिया। उसके बाद राजेन्द्र मल्होत्रा ने एडवोकेट उमेश शर्मा के बताये रास्ते पर चलते हुये फिरोजपुर के इंडस्ट्रीयल कोर्ट में केस लगाया और ट्रांसफर पर स्टे की मांग की। इंडस्ट्रीयल कोर्ट के स्थानीय एडवोकेट ने राजेन्द्र मल्होत्रा का मजबूती से पक्ष रखा और इंडस्ट्रीयल कोर्ट ने राजेन्द्र के ट्रांसफर पर रोक लगा दी।

इसके बाद राजेन्द्र कंपनी में ज्वाईन करने गये तो उन्हे कंपनी ने ज्वाईन नहीं कराया। इसके बाद भी राजेन्द्र मल्होत्रा ने हिम्मत नहीं हारी तथा डीबी कार्प के मैनेजिंग डायरेक्टर सुधीर अग्रवाल, स्टेट हेड बलदेव शर्मा, कार्मिक विभाग के हेड मनोज धवन, एडिटर नरेन्द्र शर्मा और रोहित चौधरी सहित पांच लोगों के खिलाफ अदालत की अवमानना का केस फाईल किया। इसकी सुनवाई चल रही है।

उधर राजेन्द्र मल्होत्रा के मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार मांगे गये दावे को सही मानते हुये फिरोजपुर के सहायक कामगार आयुक्त सुनील कुमार भोरीवाल ने दैनिक प्रबंधन के खिलाफ २२ लाख ५२ हजार ९४५ रुपये की वसूली के लिये रिकवरी सार्टिफिकेट जारी कर दी है। राजेन्द्र मल्होत्रा दैनिक भास्कर में पहले स्ट्रिंगर थे। बाद में उन्हें रिपोर्टर बनाया गया। उसके बाद उन्हें चीफ रिपोर्टर बनाया गया। चीफ रिपोर्टर बनने के बाद उन्हें ब्यूरो चीफ बना दिया गया। मगर जैसे ही उन्होंने प्रबंधन से मजीठिया वेज बोर्ड की मांग की, उनका ट्रांसफर बिहार के दरभंगा में कर दिया गया। मगर अब कंपनी के पास बकाया देने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टीविस्ट
९३२२४११३३५

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में दैनिक भास्कर के खिलाफ एक और आरसी जारी

मुंबई से खबर आ रही है कि यहां दैनिक भास्कर की प्रबंधन कंपनी डी. बी. कॉर्प लिमिटेड में कार्यरत सिस्टम इंजीनियर अस्बर्ट गोंजाल्विस के पक्ष में जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में 26 लाख 38 हजार 203 रुपए 98 पैसे का रिकवरी सर्टीफिकेट (आरसी) जारी किया गया है। इस आरसी को मुंबई (उपनगर) के कलेक्टर को भेज कर आदेश दिया गया है कि वह आवेदक के पक्ष में कंपनी से भू-राजस्व की भांति वसूली करें और आवेदक अस्बर्ट गोंजाल्विस को यह धनराशि प्रदान कराएं। आपको बता दें कि इस मामले में अस्बर्ट गोंजाल्विस ने अपने एडवोकेट एस. पी. पांडे के जरिए मुंबई उच्च न्यायालय में कैविएट भी लगवा दी है।

डी. बी. कॉर्प लि. के मुंबई स्थित बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स वाले कार्यालय में कार्यरत सिस्टम इंजीनियर अस्बर्ट गोंजाल्विस का कंपनी ने अन्यत्र ट्रांसफर कर दिया था। इसके बाद अस्बर्ट गोंजाल्विस ने अदालत की शरण ली और उधर जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के तहत अपने बकाये की रकम और वेतन-वृद्धि के लिए उन्होंने माननीय सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट उमेश शर्मा के दिशा-निर्देश पर चलते हुए मुंबई के कामगार विभाग में क्लेम भी लगा दिया था।

करीब एक साल तक चली सुनवाई के बाद लेबर विभाग ने अस्बर्ट गोंजाल्विस के पक्ष को सही पाया तथा कंपनी को नोटिस जारी कर साफ कहा कि वह आवेदक को उसका बकाया 26 लाख 38 हजार 203 रुपए 98 पैसे जमा कराए, परंतु दुनिया के चौथे सबसे बड़े अखबार होने के घमंड में चूर दैनिक भास्कर की प्रबंधन कंपनी डी. बी. कॉर्प लि. ने जब यह पैसा नहीं जमा किया तो सहायक कामगार आयुक्त वी. आर. जाधव ने अस्बर्ट गोंजाल्विस के पक्ष में आरसी जारी कर दी और कलेक्टर को आदेश दिया कि वह डी. बी. कॉर्प लि. से भू-राजस्व नियम के तहत उक्त राशि की वसूली करके अस्बर्ट गोंजाल्विस को दिलाएं।

गौरतलब है कि इसके पहले डी. बी. कॉर्प लि. के समाचार-पत्र दैनिक भास्कर के प्रिंसिपल करेस्पॉन्डेंट धर्मेन्द्र प्रताप सिंह के साथ रिसेप्शनिस्ट लतिका चव्हाण और आलिया शेख के पक्ष में भी कामगार विभाग ने आरसी जारी की थी… यह संपूर्ण महाराष्ट्र राज्य में जारी हुई पहली आरसी थी, मगर आरसी का विरोध करने के लिए संबंधित कंपनी जब मुंबई उच्च न्यायालय गई तो माननीय उच्च न्यायालय ने डी. बी. कॉर्प लि. को निर्देश दिया कि वह तीनों आवेदकों के बकाये रकम में से सर्वप्रथम 50 प्रतिशत रकम कोर्ट में जमा करे।

मुंबई उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद डी. बी. कॉर्प लि. सर्वोच्च न्यायालय चली गई, जहां सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट तौर पर कह दिया कि मुंबई उच्च न्यायालय के इस आदेश पर उसे दखल देने की आवश्यकता नहीं है, अत: डी. बी. कॉर्प लि. के अनुरोध को खारिज किया जाता है। ऐसे में इस कंपनी के पास और कोई विकल्प नहीं बचा था, लिहाजा डी. बी. कॉर्प लि. पुन: मुंबई उच्च न्यायालय आई और धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, लतिका चव्हाण और आलिया शेख के बकाये में से 50 फीसदी की राशि वहां जमा करा दिया। सो, माना जा रहा है कि अस्बर्ट गोंजाल्विस के मामले में भी अब डी. बी. कॉर्प लि. को जल्दी ही उनके बकाये की 50 प्रतिशत रकम मुंबई उच्च न्यायालय में जमा करानी होगी।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
9322411335

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

महाराष्ट्र के चार मीडिया कर्मियों का बकाया न देने पर भास्कर समूह के खिलाफ आरसी जारी

अपने कर्मियों का हक मारने के कारण दैनिक भास्कर को झटके पर झटका लग रहा है. भास्कर अखबार की प्रबंधन कंपनी डीबी कॉर्प द्वारा संचालित मराठी अखबार दैनिक दिव्य मराठी के अकोला एडिशन से खबर आ रही है कि यहां के ४ मीडिया कर्मियों के आवेदन पर भास्कर के खिलाफ आरसी जारी हुई है. इन मीडियाकर्मियों के पक्ष में सहायक कामगार आयुक्त अकोला श्री विजयकांत पानबुड़े ने रिकवरी सार्टिफिकेट आदेश जिलाधिकारी अकोला को दिया है।

मीडियाकर्मियों ने मजीठिया वेज बोर्ड के पैरामीटर के अनुरूप बकाया न दिए जाने की शिकायत की थी. साथ ही अपना पूरा बकाया क्लेम किया था. दिव्य मराठी (मराठी) अखबार महाराष्ट्र  के इन  चारों मीडियाकर्मियों के नाम हैं दीपक वसंतराव मोहिते, राजू रमेश बोरकुटे, संतोष मलन्ना पुटलागार और रोशन अम्बादास पवार। रोशन अम्बादास डीटीपी इंचार्ज हैं. बाकी तीनों पेजमेकर हैं. इनमें से पेज मेकर  दीपक वसंतराव मोहिते ने कुल रिकवरी राशि १३ लाख ३५ हजार २५२ रुपये का क्लेम किया है. पेजमेकर राजू रमेश बोरकुटे की रिकवरी राशि १२ लाख ६६ हजार २७५ रुपये है. पेजमेकर संतोष मलन्ना पुटलागार की रिकवरी राशि ११ लाख ९८ हजार ५६५ रुपये है. डीटीपी इंचार्ज रोशन अम्बादास पवार ने ६ लाख १७ हजार ३०८ रुपये का अपना बकाया मांगा है. 

इसके लिए सहायक कामगार आयुक्त ने १८ अगस्त २०१७ को एक आर्डर डी बी कॉर्प प्रबंधन को भेजा था। इस आर्डर की एक-एक कापी दैनिक भास्कर के चेयरमैन रमेशचंद्र अग्रवाल, पूरा पता प्लाट नंबर ६, द्वारिका सदन, प्रेस काम्प्लेक्स, मध्य प्रदेश नगर भोपाल (मध्य प्रदेश), प्रबंध निदेशक सुधीर अग्रवाल (पता उपरोक्त), निशिकांत तायड़े स्टेट हेड, दैनिक दिव्य मराठी, डीबी कोर्प लिमिटेड जिला अकोला को भी प्रेषित किया गया।

इस नोटिस के बाद भी डीबी कॉर्प कंपनी ने इन चारों मीडियाकर्मियों  को उनका बकाया नहीं दिया ।  उसके बाद १२ दिसंबर  २०१७ को मा. सहायक कामगार आयुक्त अकोला श्री विजयकांत पानबुड़े ने अपने विभाग से जिलाधिकारी अकोला को एक वसूली लेटर जारी कर कलेक्टर को भू राजस्व की भांति वसूली करके  बकायेदारों को देने का निर्देश दिया है।
इन सभी कर्मचारियों ने अपने एडवोकेट के जरिये हाईकोर्ट में कैविएट भी लगा दिया है जिससे कंपनी प्रबंधन को स्टे आसानी से नहीं मिल सके।

रिकवरी सर्टिफिकेट जारी होने से डीबी कार्प प्रबंधन में हड़कंप का माहौल है। ये सभी साथी हिम्मत नहीं हारे और लेबर विभाग, हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट तक अपने अधिकार के लिये लड़ाई लड़ते रहे। इन कर्मचारियों ने डी बी कार्प के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी है। आपको बता दें कि गुजरात के अहमदाबाद से भी डी बी कार्प के दैनिक दिव्य भास्कर अखबार से १०६ लोगों के पक्ष में रिकवरी सार्टिफिकेट जारी किया गया है। इससे कंपनी प्रबंधन में हड़कंप का माहौल है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
९३२२४११३३५

इसे भी पढ़ें…

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

महाराष्ट्र के लेबर कमिश्नर का निर्देश- ठेका कर्मचारियों को भी मजीठिया वेजबोर्ड का लाभ देना जरूरी

सभी अखबारों की होगी फिर से जांच…  महाराष्ट्र के लेबर कमिश्नर द्वारा बुलाई गई त्रिपक्षीय समिति की बैठक में लेबर कमिश्नर यशवंत केरुरे ने अखबार मालिकों के प्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि आपको माननीय सुप्रिमकोर्ट के आदेश का पालन करना ही पड़ेगा। श्री केरुरे ने कहा कि वेज बोर्ड का लाभ ठेका कर्मचारियों को भी देना अनिवार्य है। मुम्बई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स के लेबर कमिश्नर कार्यालय में बुलाई गई इस बैठक में  राज्यभर के विभागीय अधिकारियों को भी आमंत्रित किया गया था।

इस बैठक में सवाल उठाया गया कि जस्टिस मजिठिया वेजबोर्ड के अनुसार अपने बकाये का क्लेम लगाने में मीडिया कर्मियों में डर का माहौल क्यों है। अखबार मालिक लोगों को परेशान क्यों कर रहे हैं। ट्रांसफर टर्मिनेशन क्यों कर रहे हैं। नौकरी से निकालने या पेपर बन्द करने की धमकी देकर सादे कागज पर साइन क्यों कराया जा रहा है। कई अखबार मालिक अपने समाचार पत्र के कर्मचारियों से त्यागपत्र लेकर नई कंपनी में ठेके पर ज्वाइन करा रहे हैं। कई अखबार मालिक अपने कर्मचारियों को डिजिटल में ज्वाइन करा रहे हैं। ये मुद्दा नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट महाराष्ट्र की पत्रकार प्रतिनिधि शीतल करंदेकर ने उठाया।

इस पर लेबर कमिश्नर ने कहा कि मीडियाकर्मियों को घबड़ाने की कोई जरूरत नहीं है। मजीठिया वेजबोर्ड का लाभ मीडियाकर्मियों को मिलेगा। इसमें संदेह नहीं किया जाना चाहिए। उन्हें इसका लाभ जरूर मिलेगा। माननीय सर्वोच्च न्यायालय का आदेश न मानने वालों के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना का मामला चलेगा और जहां भी मीडियकर्मियोंको परेशान किया जा रहा है, वे शिकायत करें। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों का तीन महीने में निस्तारण किया जाए।

एनयूजे महाराष्ट्र ने सभी अखबारों के फिर से सर्वे करने की मांग की जिस पर सहमति बनी। इस पर अखबार मालिकों के प्रतिनिधियों ने एतराज जताया और कहा कि फिर से जांच की कोई जरूरत नही है। इस दौरान ये मुद्दा भी उठा कि अखबार मालिक सरकारी विज्ञापन लेते समय खुद को नंबर वन का ग्रेड बताकर विज्ञापन लेते हैं जबकि मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू करते समय खुद को निचले ग्रेड का बताते हैं। आयुक्त ने जनवरी तक सभी समाचार पत्रों की जांच करने का आदेश दिया। इस जांच की डेट सभी पत्रकार प्रतिनिधियों को भी बताने की मांग की गई जिसे आयुक्त ने मान्य कर लिया।

इस अवसर पर बी यू जे के इन्दर जैन ने फिक्सेशन सार्टिफिकेट प्रत्येक कर्मचारी को देने का निवेदन किया। इस अवसर पर एनयूजे महाराष्ट्र ने मांग की कि समिति के कई सदस्य बैठक में नहीं आते। उनकी जगह मजीठिया के जानकार लोगों को सदस्य बनाया जाए। इस दौरान शीतल करंदेकर ने ये भी मुद्दा उठाया कि लेबर विभाग ने सुप्रीम कोर्ट को जो रिपोर्ट भेजा है, उसमें कई अखबारों में दिखाया गया है कि इन अखबारों में माणिसना वेज बोर्ड की सिफारिश लागू है। इसकी भी जांच कराई जाए। इस बैठक में लेबर डिपार्टमेंट के उपसचिव कार्णिक भी मौजूद थे। बैठक का संचालन ड्यूपीटी लेबर कमिश्नर श्री बुआ ने किया।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आर टी आई एक्सपर्ट
एनयूजे महाराष्ट्र मजीठिया वेज बोर्ड समन्यवयक
9322411335

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया मामला : दैनिक भास्कर मुंबई के सुनील कुकरेती ने भी लगा दिया क्लेम

डी बी कॉर्प लिमिटेड द्वारा संचालित दैनिक भास्कर समाचार-पत्र के प्रिंसिपल करेस्पॉन्डेंट धर्मेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा मजीठिया वेज बोर्ड मामले में कंपनी को धूल चटाए जाने के बाद ‘भास्कर’ के मुंबई ब्यूरो में बागियों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। अपने बकाए की वसूली के लिए श्रम विभाग पहुंचने वालों में अब नया नाम जुड़ा है सुनील कुकरेती का। सुनील इस संस्थान में बतौर सीनियर रिपोर्टर कार्यरत हैं।

आपको बता दें कि धर्मेन्द्र प्रताप सिंह के बाद रिसेप्शनिस्ट लतिका चव्हाण और आलिया शेख ने भी बगावत का बिगुल बजाया था, जिसके परिणाम स्वरूप श्रम विभाग से कटी आरसी पर स्टे लेने के लिए ‘भास्कर’ प्रबंधन बॉम्बे हाई कोर्ट गया। इस पर न्यायालय ने जब आदेश दिया कि आरसी में उल्लेख की गई रकम की आधी धनराशि पहले कोर्ट में जमा की जाए, तब प्रबंधन ने माननीय सुप्रीम कोर्ट में जाकर हाई कोर्ट के इस आदेश को चुनौती दी। यह बात और है कि सुप्रीम कोर्ट से इन्हें बैरंग लौटना पड़ा… आखिर हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक, प्रबंधन ने सिंह और चव्हाण के साथ ही आलिया की आरसी का आधा पैसा माननीय अदालत में जमा करवा दिया है।

‘भास्कर’ प्रबंधन की हुई इस फजीहत का नतीजा यह हुआ है कि पहले जहां सिस्टम इंजीनियर ऐस्बर्ट गोंजाल्विस और ब्यूरो चीफ अनिल राही ने क्लेम लगाया, वहीं हालिया डेवलपमेंट को देखते हुए अब हिम्मत का परिचय सुनील कुकरेती ने दिया है… कुकरेती ने भी कंपनी के खिलाफ बगावत का झंडा उठा लिया है! जी हां, सुनील कुकरेती ने मुंबई के श्रम आयुक्त कार्यालय में 7 नवंबर, 2017 को 35 लाख रुपए का क्लेम लगा कर अपने बकाया की मांग की है, जिसके तहत कंपनी को नोटिस जारी हुआ और विगत 27 नवंबर से सुनवाई भी शुरू हो चुकी है। इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख 15 दिसंबर है। यहां बताना आवश्यक है कि मजीठिया क्रांतिकारियों के संपर्क में ‘भास्कर’ के दो और कर्मचारी हैं, जो जल्द ही क्लेम लगाने जा रहे हैं। जाहिर है कि ‘भास्कर’ संस्थान में बागियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है तो देश के सबसे बड़े और विश्वसनीय अखबार में इन दिनों हड़कंप का माहौल है!

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट
एनयूजे मजीठिया सेल समन्वयक
9322411335

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

लोकमत प्रबंधन को तगड़ा झटका, नौकरी से निकाले २४ मीडियाकर्मियों को काम पर रखने का निर्देश

महाराष्ट्र से प्रकाशित मराठी दैनिक लोकमत को तगड़ा झटका लगा है। ७ नवंबर को  नागपुर की इंडस्ट्रीयल कोर्ट नंबर ४ ने एक आदेश जारी कर लोकमत से निकाले गये २४ स्थायी कर्मचारियों को वापस काम पर रखने का निर्देश दिया है। इस बारे में जानकारी देते हुये लोकमत श्रमिक संगठन के संजय येवले पाटिल ने बताया कि इंडस्ट्रीयल कोर्ट ने सभी २४ स्थायी कर्मचारियों को ४ सप्ताह के अंदर काम पर रखने का निर्देश कंपनी प्रबंधन को दिया है।

बताते हैं कि लोकमत प्रबंधन ने 12 नवंबर २०१३ को यूनियन की गोवा के एक पदाधिकारी को काम से निकाल दिया था जिसके बाद यूनियन के सदस्यों ने असहयोग आंदोलन शुरू कर दिया था और प्रबंधन के सामने शर्त रख दिया कि या तो निकाले गये कर्मचारी को काम पर रखें नहीं तो असहयोग आंदोलन जारी रहेगा। इसके बाद  कंपनी प्रबंधन ने १५ नवंबर से २१ नवंबर २०१३ के बीच यूनियन के कुल ६१ लोगों को काम से निकाल दिया था। इसमें ३० स्थायी कर्मचारी थे और बाकी ३१ ठेका कर्मी थे।

इन ३० स्थायी कर्मचारियों में से २४ ने इंडस्ट्रीयल कोर्ट की शरण ली।  कंपनी ने २१ नवंबर २०१३ को ही एक दिन में २४ कर्मचारियों को निकाला  था। जिन लोगों को काम से निकाला गया था उसमें लोकमत श्रमिक संगठन के अध्यक्ष संजय येवले पाटिल, महासचिव चंद्रशेखर माहुले सहित  लगभग पूरे पदाधिकारियों को निकाल दिया गया था। संजय येवले पाटिल के मुताबिक कंपनी ने २१ नवंबर २०१३ को ही एक प्रस्ताव लाकर पाकिट यूनियन बनायी। इसमें सिटी संपादक गजानन जानभोर को अध्यक्ष बनाया गया। उसके बाद मशीन के सुपरवाईजर  प्रदीप कावलकर को जनरल सेक्रेटरी बनाया। बाकी मैनेजरियल लोगों को पदाधिकारी बना दिया।

उसके बाद इस यूनियन को इंडस्ट्रीयल कोर्ट में चैलेंज किया गया। इसमें इंडस्ट्रीयल कोर्ट ने नयी यूनियन को अवैध माना और पुरानी यूनियन को मान्यता दी। ये यूनियन आज भी बरकरार है। लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने वाली कर्मचारियों की यूनियन ने अदालत से गुहार लगायी कि जिन लोगों को काम से निकाला गया है उनको वापस काम पर रखा जाये और बकाया वेतन दिलाया जाये। इसके बाद  ७ नवंबर को  नागपुर की इंडस्ट्रियल कोर्ट नंबर ४ के विद्वान न्यायाधीश श्रीकांत देशपांडे ने  लोकमत से निकाले गये २४ स्थायी कर्मचारियों को वापस काम पर रखने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने यह भी कहा है कि या तो इन २४ लोगों को वापस नौकरी पर रखा जाये नहीं अन्यथा जब से इनको काम से निकाला गया है तब से  मामले के निस्तारण तक उनको इनके वेतन का ७५ प्रतिशत प्रत्येक माह वेतन दिया जाये। फिलहाल कर्मचारियों ने ८ नवंबर को कंपनी में ज्वाइनिंग कराने के लिये पत्र तो दे दिया है लेकिन लोकमत प्रबंधन के पास अभी निर्णय लेने के लिए चार सप्ताह का समय है। अब लोकमत प्रबंधन को फैसला करना है कि इन कर्मचारियों को ज्वाईन कराया जाए या घर बैठे जब तक मामले का निस्तारण नहीं होता तब तक ७५ प्रतिशत हर माह वेतन दिया जाए। फिलहाल इस मुद्दे पर लोकमत श्रमिक यूनियन मुंबई उच्च न्यायालय की शरण में भी जा रही है। यूनियन की डिमांड है कि उन्हें ज्वाईन कराया जाये अन्यथा केस के निस्तारण तक पूरा वेतन दिया जाये।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
९३२२४११३३५

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

निष्ठुर एचटी प्रबंधन ने नहीं दिया मृतक मीडियाकर्मी के परिजनों का पता, अब कौन देगा कंधा!

नई दिल्ली। अपने धरनारत कर्मी की मौत के बाद भी निष्ठुर हिन्दुस्तान प्रबंधन का दिल नहीं पिघला और उसने दिल्ली पुलिस को मृतक रविन्द्र ठाकुर के परिजनों के गांव का पता नहीं दिया। इससे रविन्द्र को अपनों का कंधा मिलने की उम्मीद धूमिल होती नजर आ रही है।

न्याय के लिए संघर्षरत रविन्द्र के साथियों का आरोप है कि संस्थान के गेट के बाहर ही आंदोलनरत अपने एक कर्मी की मौत से भी प्रबंधन का दिल नहीं पसीजा और उसने प्रेस परिसर में शुक्रवार को आई दिल्ली पुलिस को रविन्द्र के गांव का पता मुहैया नहीं कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन के पास रविन्द्र का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है, उसने जानबूझकर बाराखंभा पुलिस को एड्रेस नहीं दिया। उन्होंने बताया कि किसी भी नए भर्ती होने वाले कर्मी का HR पूरा रिकॉर्ड रखता है। उस रिकॉर्ड में कर्मी का स्थायी पता यानि गांव का पता भी सौ प्रतिशत दर्ज किया जाता है। रविन्द्र के पिता रंगीला सिंह भी हिन्दुस्तान टाइम्स अखबार से 1992 में सेवानिवृत्त हुए थे। ऐसे में उनके गांव का पता न होने का तर्क बेमानी है। रंगीला सिंह भी इसी संस्थान में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में कार्यरत थे, जबकि रविन्द्र डिस्पैच में।

रविन्द्र के साथियों ने बताया कि रविन्द्र अपने बारे में किसी से ज्यादा बात नहीं करता था। बस इतना ही पता है कि वह हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले का रहनेवाला है और उसका घर पंजाब सीमा पर पड़ता है। वह दिल्ली में अपने पिता, भाई-भाभी आदि के साथ 118/1, सराय रोहिल्ला, कच्चा मोतीबाग में रहता था। कई साल पहले उसका परिवार उस मकान को बेचकर कहीं और शिफ्ट हो गया था। रविन्द्र की मौत के बाद जब उनके पड़ोसियों से संपर्क किया तो वे उनके परिजनों के बारे में कुछ भी नहीं बता पाए। उनका कहना था कि वे कहां शिफ्ट हुए, उसकी जानकारी उन्हें भी नहीं है। रविन्द्र के परिजनों ने शिफ्ट होने के बाद से आज तक उनसे कोई संपर्क नहीं किया है। रविन्द्र के संघर्षरत साथियों का कहना है प्रबंधन के असहयोग के चलते कहीं हमारा साथी अंतिम समय में अपने परिजनों के कंधों से महरूम ना हो जाए।

उन्होंने देश के सभी न्यायप्रिय और जागरूक नागरिको से रविन्द्र के परिजनों का पता लगाने के लिए इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर और फारवर्ड करने की अपील की। उनका कहना है कि अखबार कर्मी के दुःखदर्द को कोई भी मीडिया हाउस जगह नहीँ देता, ऐसे में देश की जनता ही उनकी उम्मीद और सहारा है। यदि किसी को भी रविन्द्र के परिजनों के बारे कुछ भी जानकारी मिले तो उनके इन साथियों को सूचना देने का कष्ट करें…
अखिलेश राय – 9873892581
महेश राय – 9213760508
आरएस नेगी – 9990886337

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आर टी आई एक्सपर्ट
9322411335

मूल खबर…

xxx

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया मामला : प्रभात खबर के खिलाफ मिथलेश कुमार के रिव्यू पिटीशन पर सुप्रीमकोर्ट में 5 को सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी खबर आ रही है। जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की मांग को लेकर प्रबंधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे प्रभात खबर के आरा (बिहार) के ब्यूरो चीफ मिथिलेश कुमार बनाम प्रभात खबर मामले में दायर रिव्यू पिटीशन पर 5 अक्टूबर को सुनवाई होगी। यह सुनवाई विद्वान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायाधीश नवीन सिन्हा द्वारा की जाएगी।

मजीठिया वेज बोर्ड के लिए प्रबंधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे प्रभात खबर के आरा (बिहार) के ब्यूरो चीफ मिथिलेश कुमार का प्रबंधन ने तबादला कर दिया तो मिथिलेश कुमार ने सीधे सुप्रीम कोर्ट में अपने एडवोकेट दिनेश तिवारी के जरिये गुहार लगा दी थी। इस मामले में मजीठिया वेज बोर्ड की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट के विद्वान न्यायाधीश रंजन गोगोई और नागेश्वर राव की खंड पीठ ने मिथिलेश कुमार के पक्ष में कदम उठाते हुये उनके ट्रांसफर पर अंतरिम रोक लगा दिया था। मगर फिर भी प्रभात खबर प्रबंधन ने उन्हें ज्वाईन नहीं कराया।

इसके बाद यह मामला ३ मई २०१७ को मिथिलेश कुमार के अधिवक्ता दिनेश तिवारी ने सुप्रीमकोर्ट में न्यायाधीश रंजन गोगोई के सामने रखा था। 19 जून 2017 को जस्टिस मजीठिया वेजबोर्ड का जो निर्णय आया उस पर मिथलेश कुमार का कहना है कि मेरे मामले पर स्पष्ट पक्ष नहीं रखा गया। इसके बाद मिथलेश कुमार ने अपने एडवोकेट दिनेश तिवारी के जरिये सुप्रीमकोर्ट मे रिव्यू पिटीशन दायर किया। इस पर 5 अक्टूबर को सुनवाई होगी। इस सुनवाई पर देश भर के मीडियाकर्मियों की नजर होगी।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
९३२२४११३३५

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया मामला : डीबी कॉर्प के 5 मीडियाकर्मियों के पक्ष में आरसी जारी करने की प्रक्रिया शुरू

दैनिक भास्कर की प्रबंधन कंपनी डीबी कॉर्प के मराठी अखबार दैनिक दिव्य मराठी के महाराष्ट्र के अकोला एडिशन से खबर आ रही है कि यहां 5 मीडियाकर्मियों के पक्ष में आरसी जारी करने के लिए  अंतिम प्रक्रिया शुरू करने का सहायक कामगार आयुक्त अकोला श्री विजयकांत पानबुड़े ने अपने विभाग को निर्देश दिया है। ये मीडियाकर्मी हैं इस मराठी अखबार के पेज मेकर दीपक वसंतराव मोहिते (रिकवरी राशि 13 लाख 35 हजार 252 रुपये), पेजमेकर राजू रमेश बोरकुटे (रिकवरी राशि 12 लाख 66 हजार 275), डिजाइनर मनोज रामदास वाकोडे (११ लाख 75 हजार 654 रुपये), पेजमेकर संतोष मलनन्ना पुटलागार (११ लाख 98 हजार 565 रुपये) और डिटीपी इंचार्ज रोशन अम्बादास पवार (6 लाख 17 हजार 308 रुपये)।

इसके लिए सहायक कामगार आयुक्त ने 18 अगस्त को एक नोटिस डी बी कॉर्प प्रबंधन को भेजा है जिसमें दैनिक भास्कर के चेयरमैन रमेशचंद्र अग्रवाल, पूरा पता प्लाट नंबर 6, द्वारिका सदन, प्रेस काम्प्लेक्स, मध्य प्रदेश नगर भोपाल (मध्य प्रदेश), प्रबंध निदेशक सुधीर अग्रवाल (पता उपरोक्त), निशिकांत तायड़े स्टेट हेड, दैनिक दिव्य मराठी, डीबी कोर्प लिमिटेड अकोला, जिला अकोला को भी नोटिस की कॉपी भेजी गई है। इस नोटिस के बाद भी अगर डीबी कॉर्प कंपनी इन पांचों मीडियाकर्मियों को उनका बकाया नहीं देती है तो आरसी जारी कर कलेक्टर को भू राजस्व की भांति वसूली करके बकायेदारों को देने का निर्देश दिया जाएगा।

मुंबई से पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट शशिकांत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क : 9322411335

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

हड़ताल से उड़ान, बढ़ो बहु, चिड़ियाघर, नामकरण आदि की शूटिंग बंद

मुख्यमंत्री ने बुलाई फेडरेशन और प्रोड्यूसरों की बैठक… फ़िल्म और टीवी कामगार तथा महिला कलाकार और टेक्नीशियन पिछले 7 दिन से हड़ताल पर… अपनी विभिन्न मांगो को लेकर मुम्बई के गोरेगांव पूर्व स्थित फिल्मसिटी स्टूडियो के बाहर भारी बारिश में आमरण अनशन और हड़ताल पर बैठे फ़िल्म और टीवी कामगारों की यूनियनों को नेतृत्व करने वाली फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉयज और प्रोड्यूसरों की संस्था को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बैठक के लिए आमंत्रित किया है।

माना जारहा है कि इस बैठक में फेडरेशन की 22 यूनियनों के ढाई लाख सदस्यों के पक्ष में राहत भरी खबर आ सकती है। उधर फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉयज के प्रेजिडेंट बी एन तिवारी और जनरल सेक्रेटरी दिलीप पिठवा ने दावा किया कि रविवार को उड़ान, बढ़ो बहु, चिड़ियाघर, राजश्री प्रोडक्शन के एक सीरियल की भी शूटिंग बंद करके टेक्नीशियन, कामगार सेट से बाहर आ गये और हड़ताल में शामिल हो गए। फ़िल्म और टीवी कामगार तथा महिला कलाकार और टेक्नीशियन पिछले 7 दिन से हड़ताल पर हैं।

एन्ड टीवी के शो बढ़ो बहु की शूटिंग बंद हो गयी। सब टीवी के शो चिड़ियाघर की शूटिंग भी बंद करके शनिवार को ही कामगार सेट छोड़कर बाहर आये और हड़ताल में शामिल हो गए। फेडरेशन की पहल पर वैनिटीवेंन और इक्यूपमेंट वाले भी हड़ताल में शामिल हुए। कलर्स के शो उड़ान की भी आज शूटिंग कैंसिल हुई है। इस सभी शो के टेक्नीशियन शो छोड़कर बाहर आगये और हड़ताल में शामिल हो गए जबकि स्टारप्लस के शो नामकरण की 65 परसेंट टीम हड़ताल में शामिल हो गयी। इस शो की शूटिंग भी होना मुश्किल लग रहा है।

इस अनिश्चितकालीन हड़ताल के बारे में श्री तिवारी और पिठवा के मुताबिक फेडरेशन की इस अनिश्चित कालीनहड़ताल के पीछे उद्धेश्य है कि फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्रीज के सभी कामगारों, टैक्निशियनों और कलाकारों के साथ जो बरसों से वायदाखिलाफी और नाइंसाफी हो रही है उसको हमेशा के लिये समाप्त किया जाये। फेडरेशन लंबे समय से मांग करता रहा है कि आठ घंटे की शिफ्ट हो और हर अतिरिक्त घंटे के लिये डबल पेमेंट हो। हर क्राफ्ट के सभी कामगारों, टैक्निशियनों और कलाकारों आदि की चाहे वह मंथली हो या डेलीपैड, पारिश्रमिक में तत्काल वाजिब बढ़ेत्तरी, बिना एग्रीमेंट के काम पर रोक, मिनीमम रेट से कम पर एग्रीमेंट नहीं माना जायेगा। साथ ही जॉब सुरक्षा, उत्तम खानपान और सरकार द्वारा अनुमोदित सारी सुविधायें और ट्रेड यूनियन के प्रावधान हमारी प्रमुख मांग है। मगर निर्माता हमारी मांग को लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं।

बॉलीवुड में काम कर रहे ये कामगार अपना नया एमओयू साइन करवाना चाहते हैं, जिसकी मियाद पिछली फरवरी में खत्म हो चुकी है। ये एमओयू  हर ५ साल में साइन होता है।इस बार नए एग्रीमेंट में कामगारों की मांगों में उनका मेहनताना, सुरक्षा, समय पर भुगतान, काम करने की समय सीमा और बीमा शामिल हैं। इनके मुताबिक, इनका मेहनताना ३ से ६ महीने बाद मिलता है। १८-१८ घंटे काम करवाया जाता है।  इस हड़ताल को भाजपा की चित्रपट सेना का भी समर्थन मिला है।

मुंबई से शशिकांत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क : shashikantsingh2@gmail.com

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

फिल्म और टीवी कामगारों की हड़ताल शुरू, 40 टीवी सीरियल्स और 10 फिल्मों की शूटिंग ठप

मुंबई : अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सिनेमा और टेलीविजन इंडस्ट्रीज के कामगार और टेक्निशियन 14 अगस्त की रात से हड़ताल पर चले गये हैं। फेडरेशन आफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लॉयज संगठन के बैनर तले हो रही इस हड़ताल में २२ यूनियन शामिल हुयी हैं। फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में काम करने वाले 2.50 लाख कर्मचारी हड़ताल पर गये हैं। हड़ताल की वजह से फिल्म की शूटिंग के लिए स्टूडियो बुकिंग भी बंद हो गई है। जहां हमेशा चहलपहल रहती थी उन स्टूडियो में अब सन्नाटा पसर गया है।

१४ अगस्त की रात १२ बजकर एक मिनट पर फेडरेशन आफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लॉयज संगठन के 22 यूनियन के सदस्य सेट से बाहर आ गये। फेडरेशन के प्रेसिडेंट बी.एन. तिवारी और जनरल सेक्रेटरी दिलीप पिठवा के मुताबिक इस हड़ताल के कारण लगभग 40 टीवी धारावाहिकों और 10 फिल्मों की शूटिंग ठप हो गयी है। साथ ही मराठी और भोजपुरी फिल्मों की शूटिंग पर भी असर पड़ा है। हड़ताल के कारण मुबई के फिल्म सिटी स्टुडियो, फिल्मीस्तान के अलावा मडआईलैंड के बंगलों और नायगांव के स्टुडियो में भी सन्नाटा पसर गया है। अधिकांश जगह डबिंग और रिकार्डिंग स्टुडियो भी बंद हो गये हैं।

फेडरेशन आफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लॉयज के प्रेसिडेंट बीएन तिवारी और जनरल सेक्रेटरी दिलीप पिठवा का कहना है कि हमारी फिल्म और टेलीविजन शो निमार्ताओं से मांग मजदूरों के लिए है। ये फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्रीज के सभी कामगारों, टैक्निशियनों और कलाकारों के हक की मांग है। इन लोगों की सबसे बड़ी मांग ये है कि जहां पर फिल्म की शूटिंग होती है वहां पर साफ सफाई नहीं रहती, शौचालय की सुविधा नहीं रहती, बहुत गंदगी रहती है। फिल्म इंडस्ट्री में बड़े बड़े लोग प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छता अभियान का समर्थन करते हैं लेकिन जहां पर फिल्म की शूटिंग होती है वहां पर स्वच्छता कोई नहीं देखता। साफ-सफाई और सुरक्षा की मांग के अलावा आठ घंटे की शिफ्ट हो और हर अतिरिक्त घंटे के लिए डबल पेमेंट होनी चाहिए। हर क्राफ्ट के सभी कामगारों, टैक्निशियनों और कलाकारों आदि की चाहे वह मंथली हो या डेलीपैड, पारिश्रमिक में तत्काल वाजिब बढ़ोत्तरी, बिना एग्रीमेंट के काम पर रोक, मिनीमम रेट से कम पर एग्रीमेंट नहीं माना जाएगा, साथ ही जॉब सुरक्षा, उत्तम खानपान और सरकार द्वारा अनुमोदित सारी सुविधायें और ट्रेड यूनियन के प्रावधान हमारी प्रमुख मांग है।

फेडरेशन का कहना है की फिल्म निमार्ता कोशिश कर रहे हैं हमारे लोगों को तोड़ने के लिए लेकिन हम टूटने वाले नहीं हैं। जब तक हमारी मांग फिल्म निमार्ता और निर्देशक लिखित रूप से नहीं मानेंगे तब तक ये हड़ताल खत्म नहीं होगी। हमारे साथ पूरी टेक्निकल यूनियन है। फेडरेशन में जो २२ यूनियन शामिल हैं उसमें द साउंड एशोसिएशन आॅफ इंडिया, कैमरा एशोसिएशन , डायरेक्टर एशोसिएशन , आर्ट्स डायरेक्टर एशोसिएशन, स्टिल फोटोग्राफर एशोसिएशन, म्यूजिक डायरेक्टर एशोसिएशन, म्यूजिशियन एशोसिएशन, सिंगर एशोसिएशन, वाइसिंग एशोसिएशन, डांस मास्टर एशोसिएशन, डांसर एशोसिएशन, फाइटर एशोसिएशन , डमी एशोसिएशन , राइटर एशोसिएशन , प्रोडक्शन एशोसिएशन, एडिटर एशोसिएशन, जूनियर आर्टिस्ट एशोसिएशन, महिला कलाकार एशोसिएशन , मेकअप और ड्रेस डिपार्टमेंट एशोसिएशन, एलाइड मजदूर एशोसिएशन और जूनियर आर्टिस्ट सप्लायर एशोसिएशन प्रमुख है। माना जा रहा है कि इस हड़ताल के कारण कई धारावाहिकोें के नये एपिसोड का प्रसारण भी खटाई में पड़ेगा और लोगो को अपने टीवी स्क्रीन पर पुराना एपिसोड ही देखने को मजबूर होना पड़ सकता है।

मुंबई से शशिकांत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क : ९३२२४११३३५

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

बनारस में मजीठिया मामले में मीडियाकर्मियों के मुकदमों की फास्ट ट्रैक कोर्ट की तरह होगी सुनवाई

मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी से एक बड़ी खबर आ रही है। यहां जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर को लेकर पत्रकारों व गैर पत्रकारों की लड़ाईं लड़ रहे समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन व काशी पत्रकार संघ की पहल पर अब डीएलसी स्तर तक के सभी तरह के मुकदमों की सुनवाई निर्धारित समय के भीतर पूरी होगी। इस आशय का आदेश जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने शनिवार को समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन व काशी पत्रकार संघ के संयुक्त प्रतिनिधिमण्डल की बातों को सुनने के बाद दी।

प्रतिनिधि मण्डल में शामिल पत्रकारों ने डीएलसी स्तर पर मुकदमों की सुनवाई में अत्यधिक विलम्ब पर नाराजगी जतायी। डीएम ने वार्ता के दौरान मौजूद डीएलसी के प्रतिनिधि से साफ तौर पर कहा कि पत्रकारों से सम्वन्धित मुकदमों की सूची तैयार कर उनमें हो रही कार्यवाही का पूरा विवरण उन्हें उपलब्ध करायें। उन्होंने कहा कि इसकी हर हफ्ते वे समीक्षा करेंगे। इस क्रम में डीएम ने कहा कि आठ अगस्त को वे खुद डीएलसी कार्यालय में एक घंटे बैठकर मुकदमों के प्रगति की समीक्षा करेंगेI

डीएम ने यह भी निर्देश दिया कि मुकदमों में तीन दिन से ज्यादा की डेट न दी जाए। तीन से चार डेट में मुकदमों का निस्तारण हर हाल में सुनिश्चित किया जाय। प्रतिनिधिमण्डल ने श्रम न्यायालयों में सम्बन्धित मुकदमों की जल्द सुनवाई के लिए “फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की प्रदेश सरकार से मांग से सम्बन्धित ज्ञापन डीएम के माध्यम से सीएम योगी आदित्यनाथ को भेजा’। इस सम्बन्ध मे पत्रकारों का प्रतिनिधिमण्डल मुख्यमंत्री से मिलने के लिए लखनऊ जाने वाला है।

प्रतिनिधिमण्डल में समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के मंत्री अजय मुखर्जी, काशी पत्रकार संघ अध्यक्ष सुमाष सिंह, महामंत्री अत्रि भारद्वाज, पूर्व अध्यक्ष विकास पाठक, पूर्व महामंत्री राजेन्द्र रंगप्पा के अलावा एके लारी,  रमेश राय, मनोज श्रीवास्तव, लक्ष्मी कांत द्विवेदी, जगाधारी, सुधीर गरोडकर, संजय सेठ आदि शामिल थे।

शशिकांत सिंह

पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट

9322411335

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

अखबार मालिकों को मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू करना ही होगा : कामगार आयुक्त

मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश महाराष्ट्र में लागू कराने के लिये बनायी गयी त्रिपक्षीय समिति की बैठक में महाराष्ट्र के कामगार आयुक्त यशवंत केरुरे ने अखबार मालिकों के प्रतिनिधियों को स्पष्ट तौर पर कह दिया कि 19 जून 2017 को माननीय सुप्रीमकोर्ट के आये फैसले के बाद अखबार मालिकों को बचने का कोई रास्ता नहीं बचा है। अखबार मालिकों को हर हाल में जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू करनी ही पड़ेगी। श्री केरुरे ने कहा कि माननीय सुप्रीमकोर्ट ने जो आदेश जारी किया है उसको लागू कराना हमारी जिम्मेदारी है और अखबार मालिकों को इसको लागू करना ही पड़ेगा। इस बैठक की अध्यक्षता करते हुये कामगार आयुक्त ने कहा कि अवमानना क्रमांक ४११/२०१४ की सुनवाई के बाद माननीय सुप्रीमकोर्ट ने 19 जून 2017 को आदेश जारी किया है जिसमें चार मुख्य मुद्दे सामने आये हैं। इसमें वर्किंग जर्नलिस्ट की उपधारा २०(जे), ठेका कर्मचारी, वेरियेबल पे, हैवी कैश लॉश की संकल्पना मुख्य थी।

कामगार आयुक्त ने कहा कि अखबार मालिक २० (जे) की आड़ में बचते रहे हैं जबकि १९ जून २०१७ के आदेश में सुप्रीमकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि सभी श्रमिक पत्रकार और पत्रकारेत्तर कर्मचारी आयोग की तरह वेतन पाने के पात्र हैं। सुप्रीमकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस आयोग का अधिक लाभ यदि एकाद कर्मचारी को मिल रहा हो तो भी अधिक से अधिक कर्मचारी इसके लाभ के पात्र हैं। ठेका कर्मचारी के मुद्दे पर उन्होने कहा कि सुप्रीमकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उक्त अधिनियम की धारा २(सी), २ (एफ) और २(डीडी ) में दिये गये वर्किंग जर्नलिस्ट एंड नान जर्नलिस्ट न्यूज पेपर इम्पलाईज की व्याख्या के अनुसार तथा मजीठिया वेतन आयोग की शिफारिश के अनुसार स्थायी और ठेका कामगार में फर्क नहीं है।  सुप्रीमकोर्ट का मानना है कि सभी ठेका कर्मचारी  को मजीठिया वेतन आयोग की शिफारिश के अनुसार वेतन देने की सीमा में शामिल नहीं किया गया है।  वेरियेबल पेय के मुद्दे पर उन्होने कहा कि माननीय सुप्रीमकोर्ट ने इस मुद्दे पर स्पष्ट किया है कि केन्द्र शासन ने केन्द्र शासन के कर्मचारियोें के लिये ६ वें वेतन आयोेग की तर्ज पर मजीठिया वेतन आयोग ने देश के श्रमिक पत्रकार और पत्रकारेत्तर कर्मचारियों के लिये वेरियेबल पे की संकल्पना की है। भारी वित्तीय घाटे के मुद्दे पर श्री केरुरे ने माननीय सुप्रीमकोर्ट द्वारा लिये गये निर्णय को त्रिपक्षीय समिति को बताया।

इस दौरान नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट (एनयूजे) महाराष्ट्र की महासचिव शीतल करंदेकर ने अध्यक्ष यशवंत केरुरे का ध्यान दिलाया कि अखबार मालिक फर्जी एफीडेविट दे रहे हैं। साथ ही लोकमत और सकाल अखबारों में अखबार मालिक मजीठिया वेज बोर्ड मांगने वालों की छंटनी कर रहे हैं। इस पर यशवंत केरुरे ने तीखी नाराजगी जतायी और कहा कि अखबार मालिक ऐसा नहीं कर सकते। मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन हर मीडियाकर्मी का अधिकार है और ये अधिकार उन्हें सुप्रीमकोर्ट ने दिया है। उन्होंने कहा कि कई अखबार मालिकों की ऐसी शिकायतें आ रही हैं कि वे मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन मांगने वाले कर्मचारियों को शोषण कर रहे हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। इस बैठक में कामगार आयुक्त ने कहा कि किसी भी मीडियाकर्मी को मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन मागने पर अगर तबादला या परेशान किया गया तो वे इस मामले को निजी तौर पर भी गंभीरता से लेंगे।

शीतल करंदेकर ने इस दौरान एक अन्य मुद भी उठाया जिसमें अखबार मालिकों द्वारा जानबूझ कर मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू ना करना शामिल है। कामगार आयुक्त ने इस दौरान मालिकों के प्रतिनिधियों की बातों को भी समझा और आदेश दिया कि वे प्रेस रीलिज जारी करने जारहे हैं ताकि हर अखबार मालिक मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू करें। इस बैठक में बृहन्मुंबई जर्नलिस्ट यूनियन (बीयूजे) के एम जे पांडे, इंदर जैन आदि के अलावा वरिष्ठ लेबर अधिकारी श्री बुआ और सहायक कामगार आयुक्त शिरिन लोखंडे आदि भी मौजूद थीं। कामगार आयुक्त ने इस दौरान यह भी कहा कि अखबार मालिक अपनी अलग अलग यूनिट दिखा रहे हैं और बचने का रास्ता खोज रहे हैं तथा २ डी एक्ट का उलंघन कर रहे हैं। यह नहीं चलेगा। सुप्रीमकोर्ट ने इसपर भी व्याख्या कर दी है।   बीयूजे के एम जे पांडे ने कहा कि आज अखबार मालिक क्लासिफिकेशन के नाम पर बचते आरहे हैं और उनकी आयकर विभाग से  बैलेंससीट मंगाने की जरुरत है इस पर उन्होने कहा कि हम इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इंदर जैन ने भी मीडियाकर्मियों का पक्ष रखा।

शशिकांत सिंह
पत्रकार, आरटीआई एक्सपर्ट और मजीठिया सेल समन्वयक (एनयूजे महाराष्ट्र)
९३२२४११३३५

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

चर्चित मजीठिया क्रांतिकारी शशिकांत सिंह को एनयूजे (महाराष्ट्र) ने बनाया मजीठिया सेल का समन्यवयक

(शशिकांत सिंह)

दो कद्दावर मजीठिया क्रांतिकारियों ने महाराष्ट्र के मीडिया कर्मियों को उनका अधिकार दिलाने के लिए हाथ मिलाया है। देश के जाने माने मजीठिया क्रांतिकारी शशिकांत सिंह को नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट के अध्यक्ष डॉ उदय जोशी और महाराष्ट्र की जनरल सेक्रेटरी शीतल करदेकर ने महाराष्ट्र का मजीठिया सेल का समन्यवक बनाया है। शीतल करदेकर महाराष्ट्र सरकार द्वारा बनाई गई जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की त्रिपक्षीय कमेटी में भी मीडिया कर्मियों का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

श्री शशिकांत सिंह के मुताबिक देश भर की कई पत्रकार यूनियन मुझे अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर रहीं थीं मगर मैं हमेशा इनकार करता रहा मगर मैं खुद मुम्बई का हूं, इसलिए मैंने महाराष्ट्र में इस संस्था नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट की महासचिव शीतल करदेकर के साथ महाराष्ट्र में मीडियाकर्मियों की लड़ाई में उनका साथ देना तय किया है। उधर शीतल करदेकर ने शशिकांत सिंह को मजीठिया सेल का समन्यवयक बनाये जाने पर खुशी जताई है और कहा है कि मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई में शशिकांत सिंह एक जाना माना नाम हैं। उनके साथ महाराष्ट्र में मीडिया कर्मियों को उनका अधिकार जरूर मिलेगा।

महिला पत्रकार शीतल करदेकर महाराष्ट्र में पत्रकारों के अधिकार की लड़ाई लड़ने वाली एक जाना माना नाम हैं। वे देश में पहली बार महिला पत्रकारों का दो दिवसीय महिला सम्मेलन भी 29 और 30 जुलाई को मुम्बई से सटे पनवेल में करने जा रही हैं। शशिकांत सिंह ने महाराष्ट्र के सभी मीडियाकर्मियों से अपील की कि वे मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई में शामिल होकर अपना हक अधिकार हासिल करें। मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई से संबंधित अधिक जानकारी के लिए शशिकांत सिंह से उनके मोबाइल नंबर 9322411335 पर सम्पर्क किया जा सकता है।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया पर नए कोर्ट आर्डर के बाद लोकमत प्रबंधन ने 2400 मीडियाकर्मियों का कांट्रेक्ट रिनुअल लटकाया

मजीठिया वेज बोर्ड पर सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के बाद महाराष्ट्र में सबसे बड़ा झटका लोकमत अखबार को लगा है। सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा लोकमत समूह में ठेका कर्मचारी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने 19 जून 2017 के आदेश में साफ कर दिया है कि ठेका कर्मचारियों को भी मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ मिलेगा। अब लोकमत प्रबंधन सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद सबसे ज्यादा सांसत में फंस गया है।

लोकमत श्रमिक संगठन के अध्यक्ष संजय पाटिल येवले ने इस खबर की पुष्टि करते हुए एक नई जानकारी दी है कि लोकमत समूह में लगभग 3000 कर्मचारी काम करते हैं जिनमे सिर्फ 20 प्रतिशत परमानेंट हैं, बाकी 80 परसेंट कांट्रेक्ट पर हैं। सुप्रीमकोर्ट के नए आदेश के बाद कंपनी ने अधिकांश कांट्रेक्ट कर्मचारियों का कांट्रेक्ट नवीनिकरण नहीं किया है। संजय पाटिल येवले के मुताबिक इन कांट्रेक्ट कर्मचारियों का कांट्रेक्ट 30 जून को खत्म हो गया मगर कंपनी एक सप्ताह बाद तक किसी का कांट्रेक्ट रिनुअल नही कर रही है बल्कि मजीठिया का लाभ देने से कैसे बचा जाए और नया कांट्रेक्ट किस तरीके का हो, इस पर कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रही है। उसके बाद ही नया कांट्रेक्ट किया जाएगा।

लोकमत समूह से उड़ती खबर ये भी आ रही है कि लोकमत ने कई कर्मचारियों को नए आदेश के बाद छुट्टी भी कर दिया है। अब इनमें से कई कर्मचारी मजीठिया की जंग में कूदने की तैयारी कर रहे हैं ताकि उनको उनका अधिकार मिले। आपको बता दें कि संजय पाटील येवले लोकमत श्रमिक संघटना के अध्यक्ष हैं और पिछले तीन साल से यह अखबार से बाहर हैं। यूनियन का मैटर लेबर, इंडस्ट्रीयल और हाइकोर्ट मे चल रहा है।

संजय पाटिल जब लोकमत में काम पर थे तो उन्होंने सिर्फ एक कर्मचारी को निकाले जाने पर दो दिन का असहयोग आंदोलन किया था। आपको बता दें कि लोकमत समूह मराठी दैनिक लोकमत, हिंदी दैनिक लोकमत समाचार और अंग्रेजी दैनिक लोकमत टाइम्स का प्रकाशन करता है। लोकमत समूह की यूनियन लोकमत श्रमिक संगठना ने ‘एक्चुअल वर्क एक्चुअल पे’ की मांग को लेकर प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा भी कर रखा है। फिलहाल सुप्रीमकोर्ट के नए आदेश के बाद प्रबंधन की सांस गले में अटक गई है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
मुंबई
9322411335

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

इसी 19 जून को आएगा मजीठिया वेज बोर्ड मामले में सुप्रीमकोर्ट का एतिहासिक फैसला

मीडिया मालिकों की नींद उड़ी, मीडियाकर्मियों में खुशी की लहर…

https://4.bp.blogspot.com/-11QAAaKIo5A/WUP3F17STeI/AAAAAAAALuI/MxkfrYUAcJYH0yXjCxWVviTbEWc8yeY6wCLcBGAs/s1600/apnacourt.jpg

इंतजार की घड़ी खत्म होने को है. देश भर के प्रिंट मीडिया के कर्मियों के लिये न्याय का दिन आ गया है.  सुप्रीमकोर्ट की तरफ से 19 जून को फैसला सुनाया जाएगा. जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में आर-पार का दिन होगा 19 जून 2017 की तारीख. अखबार मालिकों ने जो लंबे जुल्म ढाए हैं अपने मीडियाकर्मियों पर, जो भयंकर शोषण किया है, उसका हिसाब आने वाला है. इसी तारीख को तय हो जाएगा कि यह देश कानून, संविधान और नियम से चलता है या फिर कुछ मीडिया मालिकों, सत्तासीन नेताओं और भ्रष्ट नौकरशाहों की मिलीभगत से.

पहले तो मीडिया मालिक सुप्रीम कोर्ट इसलिए गए कि मजीठिया वेज बोर्ड से उनका धंधा तबाह हो जाएगा. कोर्ट में लंबी चली सुनवाई के बाद मालिकों के खिलाफ फैसला आया कि तुम लोगों को हर हाल में अपने कर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से लाभ देना ही पड़ेगा. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद जब मीडिया मालिकों ने अपनी मोटी चमड़ी दिखाते हुए मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ तरह तरह के बहानों के जरिए नहीं दिया तो सैकड़ों मीडियाकर्मियों ने अपने अपने संस्थानों के खिलाफ अवमानना याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में डालीं. उन्हीं याचिकाओं का निबटारा 19 जून को होना है. 

19 जून को अवमानना मामले में सुप्रीमकोर्ट की तरफ से ऐतिहासिक फैसला सुनाया जाएगा. यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के विद्वान न्यायाधीश रंजन गोगोई और नवीन सिन्हा की खंडपीठ सुनायेगी. यह ऐतिहासिक फैसला 19 जून दिन सोमवार को सुप्रीमकोर्ट में दोपहर तीन बजे कोर्ट नंबर तीन में सुनाया जायेगा. देश भर के मीडियाकर्मियों के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे एडवोकेट उमेश शर्मा ने भी मीडियाकर्मियों के पक्ष में फैसला आने की उम्मीद जताई है.

सुप्रीमकोर्ट के फैसले की तिथि की घोषणा होते ही देश भर के मीडियाकर्मियों में खुशी की लहर है. वहीं अखबार मालिकों के खेमें में बेचैनी बढ़ गयी है. इस मामले की सुनवाई में मीडियाकर्मियों की तरफ से वरिष्ठ एडवोकेट कोलिन गोंसाल्विस, उमेश शर्मा, परमानंद पांडे और दिनेश तिवारी ने मीडियाकर्मियों का जोरदार तरीके से पक्ष रखा. अब सबकी नजरें 19 जून को सुप्रीमकोर्ट के एतिहासिक फैसले पर होगी. इस फैसले की तिथि की जानकारी पाते ही देश भर के पत्रकार नयी दिल्ली के लिये कूच करने की तैयारी कर रहे हैं.

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
९३२२४११३३५

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर त्रिपक्षीय कमेटी दिल्ली, बिहार, हरियाणा समेत कई राज्यों ने नहीं गठित की

देश भर के प्रिंट मीडिया कर्मियों के वेतन, एरियर और प्रमोशन के लिए गठित जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में त्रिपक्षीय समिति गठित करने का आदेश दिया गया था मगर देश की राजधानी दिल्ली सहित कई राज्यों में त्रिपक्षीय कमेटी का गठन नहीं किया गया। जिन राज्यों में त्रिपक्षीय कमेटी का गठन नहीं किया गया वे राज्य हैं- दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, सिक्किम, दमन दीव, पांडिचेरी, लक्ष्य दीप, बिहार तथा हरियाणा।

आपको बता दें कि त्रिपक्षीय समिति में अखबार मालिक, पत्रकार और उनके यूनियन के सदस्य तथा कामगार आयुक्त या उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी शामिल होते हैं। इस समिति का काम होता है आपस में तालमेल कर वेज बोर्ड लागू किए जाने से संबंधित माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेशों का पालन कराना। मगर जब कमेटी ही नहीं गठित हुयी तो तालमेल कैसा। राज्य स्तर पर बनाई जाने वाली ये कमेटी केंद्र सरकार द्वारा गठित सेन्ट्रल मॉनिटरिंग कमेटी को रिपोर्ट करती है।

आइये अब जिन राज्यों में ये कमेटी गठित की गयी है, वहां ये त्रिपक्षीय कमेटी क्या करती हैस ये भी बता दें। इस कमेटी को कोई भी वैधानिक पावर नहीं है। सो ये कमेटी चाहकर भी कोई ठोस कदम नहीं उठा सकती। जब भी इन त्रिपक्षीय कमेटी की कामगार आयुक्त कार्यालय में मीटिंग होती है तो कमेटी मेम्बरों को प्रगति रिपोर्ट बतायी जाती है। उनका पक्ष समझा जाता है और चाय नाश्ते के बाद ये मीटिंग ख़त्म हो जाती है। सो आप समझ सकते हैं इस त्रिपक्षीय कमेटी का होना न होना लगभग बराबर की बात है। कई राज्यों का तो दावा है कि उनके यहाँ मजीठिया वेज बोर्ड के लागू होने के पहले से त्रिपक्षीय कमेटी बन चुकी है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
9322411335


इसे भी पढ़ें….

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

जागरण के पत्रकार पंकज के ट्रांसफर मामले को सुप्रीमकोर्ट ने अवमानना मामले से अटैच किया

दैनिक जागरण के गया जिले (बिहार) के मीडियाकर्मी पंकज कुमार के ट्रांसफर के मामले पर आज सोमवार को माननीय सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई हुई। इस मुकदमे की सुनवाई कोर्ट नम्बर 4 में आयटम नम्बर 9, सिविल रिट 330/2017 के तहत की गई। न्यायाधीश रंजन गोगोई ने सुनवाई करते हुए इस मामले को भी मजीठिया वेज बोर्ड के अवमानना मामला संख्या 411/2014 के साथ अटैच कर दिया है। माननीय न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे ही अन्य मामलों पर निर्णय आने वाला है, लिहाजा याचिका का निपटारा भी इसी में हो जाएगा।

पत्रकार पंकज कुमार के ट्रांसफर मामले में उनका पक्ष सुप्रीमकोर्ट में पटना हाई कोर्ट के रिटायर मुख्य कार्यकारी न्यायाधीश नागेंद्र राय ने रखा और राज्य सरकार के साथ साथ दैनिक जागरण को भी इस मामले में पार्टी बनाया गया। यह सुनवाई सुप्रीमकोर्ट में न्यायाधीश रंजन गोगोई की अदालत में हुई। उन्होंने मजीठिया वेज बोर्ड की सुनवाई को पूरा करके इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा हुआ है। बिहार गया के वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुमार का तबादला मजीठिया मांगने के कारण दैनिक जागरण प्रबन्धन द्वारा जम्मू कर दिया गया था। इसके खिलाफ भड़ास4मीडिया में विस्तृत रिपोर्ट का प्रकाशन किया गया जिसके बाद पूरे देश में खलबली मची।

पंकज कुमार सामाजिक सरोकार के व्यक्ति हैं और गया जिले में मगध सुपर थर्टी के संचालन से जुड़े हैं। इसमें प्रतिभावान गरीब छात्र छात्राओं को गुरुकुल परंपरा के तहत निशुल्क आवास, भोजन तथा पठन पाठन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इस संस्थान से निकले सैकडों छात्र छात्राएं आईआईटी, एनआईटी तथा अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी शिक्षण संस्थाओं में पढ़ रहे हैं या नौकरी कर रहे हैं।

उग्रवाद प्रभावित मगध क्षेत्र से आने वाले युवा भी इसके माध्यम से आज अपना जीवन संवार रहे हैं और समाज को राह दिखा रहे हैं। पंकज कुमार के साथ दैनिक जागरण द्वारा किये गए व्यवहार की खबर जैसे ही भड़ास पर प्रकाशित हुई, इन सैकडों युवाओं तथा पंकज कुमार के परिचितों ने भड़ास का लिंक लगाकर पीएम तथा केन्द्रीय मंत्रियों को टैग करके ट्वीट किया। पंकज कुमार की इमानदारी का ही फल था कि उच्चतम न्यायालय में बिहार पटना उच्च न्यायालय के रिटायर्ड कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश श्री नागेन्द्र राय जी उनसे बिना कोई फीस लिए मुकदमा लड़ने के लिए तैयार हो गए।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आर टी आई एक्सपर्ट
9322411335

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

सुप्रीम कोर्ट के आदेश ठेंगे पर रखते हैं अखबार मालिक, विशाखा समिति कहीं पर गठित नहीं

मुंबई : देश भर के अखबार मालिक माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ठेंगे पर रखते हैं. ये खुद को न्याय, संविधान और कानून से उपर मानते हैं. इसीलिे ये जिद कर के बैठे हैं कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं मानेंगे तो नहीं मानेंगे। पहले जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का आदेश अखबार मालिकों ने नहीं माना और अब माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा निजी और सरकारी संस्थानों में काम करने वाली महिला कर्मचारियों के सम्मान से जुड़ी विशाखा समिति की स्थापना के लिये दिये गये आदेश को भी मानने से मुंबई के अखबार मालिकों ने मना कर दिया है.

साफ कहें तो सुप्रीमकोर्ट के आदेश को एक बार फिर से ठेंगा दिखा दिया है. ये खुलासा हुआ है आरटीआई के जरिये. मुंबई की जानी महिला पत्रकार और एनयूजे की महाराष्ट्र की महासचिव शीतल करंदेकर ने जिलाधिकारी कार्यालय (मुंबई शहर) की जनमाहिती अधिकारी से आरटीआई के जरिये १८ जनवरी २०१७ को जानकारी मांगी थी कि माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेशानुसार मुंबई शहर के कितने अखबार मालिकों ने अपने यहां विशाखा समिति की सिफारिश लागू की है, इसकी पूरी जानकारी उपलब्ध कराईये। अगर इन अखबार मालिकों ने अपने यहां ये सिफारिश नहीं लागू की है तो उनके खिलाफ क्या क्या कार्रवाई की गयी, उसका पूरा विवरण दीजिये।

शीतल करंदेकर की इस आरटीआई को जिलाधिकारी और जिलादंडाधिकारी कार्यालय मुंबई शहर ने ९ फरवरी २०१७ को जिला महिला व बाल विकास अधिकारी कार्यालय को भेज दिया। जिला महिला व बाल विकास अधिकारी कार्यालय मुंबई की जनमाहिती अधिकारी तथा जिला महिला व बाल विकास अधिकारी एन.एम. मस्के ने २९ मार्च २०१७ को भेजे गये जबाव में शीतल करंदेकर को जानकारी दी है कि उनके कार्यालय में इससे संबंधित कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है.

यानि साफ तौर पर कहें तो जिला महिला व बाल विकास अधिकारी कार्यालय में भी ये जानकारी नहीं होना कि कितने अखबारों ने विशाखा समिति की सिफारिश लागू किया है, साबित करता है कि असल में अखबार मालिकों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को कतई गंभीरता से नहीं लिया है. इसी कारण विशाखा समिति का गठन नहीं किया, न ही इससे संबंधित जानकारी संबंधित विभाग को दी. आपको बता दें कि यह रोजगार प्रदाता का दायित्व है कि वह यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायतों के निवारण के लिए कंपनी की आचार संहिता में विशाखा समिति के गठन को जोड़े. मीडिया हाउसों को अनिवार्य रूप से विशाखा समिति के हिसाब से शिकायत समितियों की स्थापना करनी चाहिए, जिसकी प्रमुख महिलाओं को बनाया जाना चाहिए.

शशिकांत सिह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
9322411335

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

महाराष्ट्र के कामगार आयुक्त ने दिए ‘प्रात:काल’ के फर्जीवाड़े की जांच के आदेश

महाराष्ट्र के कामगार आयुक्त ने मुंबई सहित देश के पांच अन्य शहरों से प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक प्रात:काल द्वारा अपने यहाँ कार्यरत पत्रकारों, गैर-पत्रकारों और अन्य विभागों के कर्मचारियों से सम्बंधित गलत एफिडेविट देने की शिकायत पर जाँच करने के आदेश दिए हैं। जांच का दायित्व कामगार उपायुक्त श्री बागल को सौंपा गया है। हिंदी दैनिक प्रात:काल द्वारा श्रम आयुक्त को दिए एफिडेविट में फर्जीवाड़े के पुख्ता सबूत मिले हैं। इस जांच के आदेश के बाद ‘प्रात:काल’ प्रबंधन को फर्जी एफिडेविट देने के मामले में जेल भी हो सकती है।

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ रहे ‘मजीठिया संघर्ष मंच’ के पदाधिकारियों ने 13 अप्रैल 2017 को आरटीआई एक्सपर्ट पत्रकार शशिकांत सिंह के नेतृत्व में महाराष्ट्र के कामगार आयुक्त यशवंत केरूरे से उनके कार्यालय में जाकर मुलाकात की और प्रात:काल हिन्दी दैनिक द्वारा दिए गए फर्जी एफिडेविट मामले को उनके संज्ञान में लाया। साथ ही इसी समाचार पत्र के मुख्य उपसंपादक द्वारा दिए गए शिकायती पत्र की प्रति सौंपी। इस शिकायती पत्र के साथ एफिडेविट फर्जी होने के पूरे पुख्ता सबूत दिए गए। जिसके बाद कामगार आयुक्त ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच करने का आदेश उपायुक्त श्री बागल को दिया। आपको बता दें कि प्रात:काल द्वारा दिए गए एफिडेविट में निम्नलिखित फजीर्वाड़े के पुख्ता सबूत मिले हैं-

1- प्रात:काल ने अपने एफिडेविट में बताया है कि उसके पास कुल आठ कर्मचारी हैं, जिसमें दो श्रमिक पत्रकार एक प्रधान संपादक सुरेश गोयल और एक स्थानीय संपादक महीप गोयल हैं। एक डीटीपी हेड और 5 प्रबंधन के सदस्य हैं। जबकि प्रात:काल समाचार पत्र के कार्यरत पत्रकार के रूप में शिरीष गजानन चिटनिस प्रतिनिधि (मुंबई/१४१६), महीप गोयल-स्थानीय संपादक (मुंबई/१४१७), विष्णु नारायण देशमुख छायाचित्रकार (मुंबई/१६७४), हरिसिंह राजपुरोहित चीफ कोरेस्पोंडेंट  (मुंबई/१८१९) को महाराष्ट्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त अनुभवी पत्रकारों को दिया जाने वाला अधिस्वीकृति पत्र (एक्रिडेशन कार्ड) प्रदान किया गया है। यह पत्र संबंधित संस्थान द्वारा प्रदत्त दस्तावेजों (जैसे- नियुक्ति पत्र, अनुभव प्रमाण, सेलरी स्लीप, पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र, संकलित / लिखित समाचारों एवं फोटो आदि कटिंग, शैक्षणिक डाक्यूमेंट्स आदि) की पुष्टि तथा पुलिस वेरिफिकेशन के बाद ही जारी किए जाते हैं।

2- मुम्बई श्रम आयुक्त को दिए एफिडेविट में प्रात:काल अखबार ने शिरीष गजानन चिटनीस और हरिसिंह राजपुरोहित को अपना कर्मचारी ही नहीं बताया है जबकि इन्हें अपना प्रतिनिधि दिखाकर सरकार से इन दोनों को एक्रिडेशन दिलवाया है। 12 पृष्ठों के इस अखबार में न तो कोई रिपोर्टर, न कोई समाचार संपादक, मुख्य उप संपादक, उपसंपादक, प्रूफ रीडर और न ही कोई दूसरा डीटीपी आॅपरेटर बताया गया है। एफिडेविट के अनुसार ‘प्रात:काल’ में आउट सोर्सिंग और ठेके से काम भी नहीं कराया जाता है।

3- ‘प्रात:काल’ द्वारा श्रम आयुक्त कार्यालय में दिए गए एफिडेविट में विष्णु नारायण देशमुख को मैनेजर बताया गया है तथा उनकी नियुक्ति तिथि १२.११.२०१४ को बताई गई है। जबकि ‘प्रात:काल’ ने ही इनको अपने यहां छाया चित्रकार बताकर 2013 से पहले ही अधिस्वीकृत पत्र (एक्रिडेशन कार्ड नं.- मुंबई/१६७४) दिलवाया है।

4- प्रात:काल ने श्रम आयुक्त कार्यालय में एफिडेविट देकर बताया है कि उस समाचार पत्र के मालिक 72 वर्षीय सुरेश गोयल हैं। आश्चर्य की बात है कि इसी एफिडेविट में उन्हें इसी संस्थान में वेतनभोगी संपादक भी बताया गया है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
09322411335

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

लोेकसभा और राज्यसभा में उठी मजीठिया वेज बोर्ड लागू करने की मांग (देखें वीडियो)

देश भर के अखबार मालिकों द्वारा अपने कर्मचारियों का किए जा रहा शोषण और मजीठिया वेज बोर्ड लागू किए जाने की मांग आज संसद में उठी। २४ घंटे के अंदर मीडियाकर्मियों के साथ अन्याय और वेज बोर्ड न लागू कर मीडिया मालिकों द्वारा की जा रही मनमानी का मसला राज्यसभा और लोकसभा दोनों जगहों में उठाया गया। बुधवार को राज्यसभा में जहां जाने माने नेता जदयू के शरद यादव ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश अभी तक लागू ना किए जाने का सवाल जोरशोर से उठाया वहीं मंगलवार को कोडरमा के सांसद डाक्टर रविंद्र कुमार राय ने इस मुद्दे को लोकसभा में जमकर उठाया।

अखबार मालिकों की मनमानी का मुद्दा राज्य सभा में दूसरे नेताओं ने भी उठाया और वे अखबार मालिकों पर जमकर बिफरे। चुनाव सुधार पर उच्च सदन में हुयी अल्पकालिक चर्चा में भाग लेते हुए जदयू के शरद यादव ने मीडिया में सुधारों की वकालत की और कहा कि अगर मीडिया पर पूंजीपतियों का नियंत्रण हो जाएगा तो इससे लोकतंत्र ही खतरे में पड़ जाएगा। शरद यादव ने कहा कि पत्रकारों को ठेके पर रखा जा रहा है। उन्होंने मांग की कि समाचार पत्रों के लिए मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों को लागू किया जाना चाहिए। यादव ने कहा कि उन्होंने खुद ही पेड न्यूज की आयोग से शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को सही खबरें नहीं मिल रही हैं। पत्रकार ईमानदार हैं लेकिन वे अपने मालिकों के कारण सही खबरें नहीं लिख पाते। उन्होंने कहा कि अब पूंजीपति मीडिया घरानों के मालिक हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय पर विस्तार से चर्चा किये जाने की आवश्यकता है क्योंकि पत्रकार जो लोकहित के संदेशों का प्रमुख वाहक और प्रहरी होता था, वह पूंजीपतियों के मीडिया में बढ़ते वर्चस्व के कारण ठेके पर रखे जाते हैं और हायर एंड फायर के खतरे से जूझते हैं। उन्होंने कहा कि आज मीडिया को आम जनता से काट दिया गया है।

शरद यादव का पूरा भाषण सुनने के लिए नीचे क्लिक करें : 

https://www.youtube.com/watch?v=L_cGrOGKhWY

उधर कोडरमा के सांसद डॉ रविंद्र कुमार राय ने मंगलवार को लोकसभा में नियमावली 377 के अंतर्गत पत्रकारों को मिलने वाले वेतन और सुविधाओं का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र में अपनी बड़ी भूमिका निभाते हैं, कुछ पत्रकारों को जीवन यापन करने लायक वेतन भी नहीं मिलता। देश में पत्रकारों के वेतन व सुविधाओं में वृद्वि हेतु जस्टिस जी आर मजीठिया वेज बोर्ड का गठन किया गया था। बोर्ड ने सभी तथ्यों को देखकर अपनी सिफारिशे सरकार को दी और 11 नवम्बर 2011 को अधिसूचित कर दिया गया।

बड़े खेद का विषय है कि आज तक भी अखबार मालिको द्वारा पत्रकारो को उनका हक नही दिया जा रहा है, इस तरह की अवमानना के कई मामले माननीय सर्वोच्य न्यायालय में विचाराधीन है । डॉ रविंद्र कुमार राय ने सरकार से अनुरोध किया कि देश के सभी पत्रकारो को मजीठिया बोर्ड की सिफारिशो अनुसार सुविधाएं तत्काल दी जाए और मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशे न मामने वालो के विरूद्व कार्यवाही की जाए ताकि पत्रकारो को उनका हक मिल सकें।  उन्होंने कहा की माननीय मोदी जी के नेतृत्व में चल रही सरकार में हर वर्ग की चिंता हुई है, पत्रकारों के साथ अनदेखी न की जाये।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
९३२२४११३३५

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

‘हिंदुस्तान’ अखबार के खिलाफ आरसी जारी, 6 करोड़ वसूल कर 16 पत्रकारों में बंटेगा

लखनऊ से बड़ी ख़बर है। मजीठिया वेतनमान प्रकरण में दैनिक समाचार पत्र हिंदुस्तान की अब तक की सबसे बड़ी हार हुई है। कम्पनी का झूठ भी सामने आ गया है। यह भी सामने आया है कि मजीठिया की सिफ़ारिश से बचने के लिए कम्पनी ने तरह तरह के षड्यंत्र किए। लखनऊ के श्रम विभाग ने हिंदुस्तान के 16 पत्रकारों व कर्मचारियों को क़रीब 6 करोड़ रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया है। लखनऊ के एडिशनल कमिशनर बी.जे. सिंह व सक्षम अधिकारी डॉ. एम॰के॰ पाण्डेय ने ६ मार्च को हिंदुस्तान के ख़िलाफ़ आरसी जारी कर दी और पैसा वसूलने के लिए ज़िलाधिकारी को अधिकृत कर दिया है।

श्रम अधिकारी ने ज़िलाधिकारी को भेजी रिकवरी-आरसी की धनराशि हिंदुस्तान से वसूल कर श्रम विभाग को देने को कहा है। डीएम की अब यह ज़िम्मेदारी होगी की वह हिंदुस्तान से पैसा वसूल के श्रम विभाग को दें और फिर श्रम विभाग यह राशि मुक़दमा करने वाले 16 कर्मचारियों को देगा। श्रम विभाग के इस आदेश से यह भी साबित हो गया है कि हिंदुस्तान मजीठिया वेज बोर्ड के मुताबिक़ वेतनमान नहीं दे रहा है। जबकि हिंदुस्तान प्रबंधन ने श्रम विभाग को यह लिखित जानकारी दी थी कि कम्पनी मजीठिया वेज बोर्ड के मुताबिक़ वेतन दे रही है।

इसी आधार पर श्रम विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में यह ग़लत हलफ़नामा लगा दिया कि हिंदुस्तान मजीठिया के अनुसार वेतनमान कर रहा है। अब इस प्रकरण में ग़लत हलफ़नामा देने पर कम्पनी के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी का मुकदमा भी चल सकता है। ख़ुद श्रम विभाग ने यह लिखकर दिया है कि हिंदुस्तान मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतनमान नहीं दे रहा और न ही विभाग को काग़ज़ उपलब्ध करा रहा है।

ग़ौरतलब है कि सितम्बर २०१६ को हिंदुस्तान व हिंदुस्तान टाइम्स के पत्रकारों व ग़ैर पत्रकारों ने प्रमुख सचिव श्रम के यहाँ शिकायत कर कहा था कि प्रबंधन मजीठिया वेतनमान के अनुसार वेतन नहीं दे रहा है। इसके बाद प्रबंधन उत्पीड़न पर उतर आया। आठ पत्रकारों को नौकरी से निकाल दिया गया। इसके बाद श्रम विभाग में सभी पत्रकारों ने नौकरी से निकाले जाने और नवम्बर २०११ से २०१६ के बीच मजीठिया वेतनमान का डिफरेंस दिए जाने का वाद दायर किया। बर्ख़ास्तगी का केस अभी विभाग में लम्बित है जबकि ६ मार्च को श्रम विभाग ने पत्रकारों के पक्ष को सही मानते हुए कम्पनी के ख़िलाफ़ फ़ैसला दिया।

रिकवरी केस फ़ाइल करने में कुल 16 कर्मचारी शामिल थे। इन सभी को श्रम विभाग ने उनके वेतन के हिसाब से 10 लाख रुपए से 60 लाख रुपए तक भुगतान करने का आदेश दिया है। श्रम विभाग ने डीएम को जारी आरसी में कहा है कि यदि कम्पनी इस राशि का भुगतान तत्काल नहीं करती है तो कम्पनी की सम्पत्ति कुर्क कर राशि का भुगतान कराया जाए। हिंदुस्तान प्रबंध तंत्र का झूठ इसी से समझा जा सकता है कि चार महीने की सुनवायी के बावजूद हिंदुस्तान प्रबंध तंत्र अपनी ओर से एक भी लिखित जवाब दाख़िल नहीं कर पाया।

कर्मचारियों ने मुक़दमे में साक्ष्यों के साथ यह तर्क दिया कि हिंदुस्तान अखबार एक नम्बर कैटगरी में आता है और इसी हिसाब से भुगतान किया जाना चाहिए। प्रबंधन ने इसके ख़िलाफ़ कोई तर्क नहीं दिया जिससे यह साबित हुआ कि कम्पनी कैटगरी नंबर वन की है और मजीठिया का भुगतान इस कैटगरी के हिसाब से नहीं दिया जा रहा है। कर्मचारियों के वक़ील शरद पाण्डेय ने श्रम विभाग में अपने तर्कोंं से साबित किया कि हिंदुस्तान ने अब तक मजीठिया वेतनमान नहीं दिया है और पूर्व में जो भी पत्र दिए वह झूठे थे।

अनुभवी वक़ील शरद ने कम्पनी के नामी-गिरामी वकीलों की फ़ौज को अपने तर्कों से अनुत्तरित कर दिया। यह भी पता चला है कि हिंदुस्तान प्रबंध तंत्र पूर्व में जालसाज़ी करते हुए कोर्ट में इतने झूठे काग़ज़ात लगाए हैं कि आगे कोई भी वक़ील इनका केस लड़ने को तैयार नहीं हो रहा है। जिन १६ लोगों ने श्रम विभाग में वाद दायर किया था उनमें संजीव त्रिपाठी, प्रवीण पाण्डेय, संदीप त्रिपाठी, आलोक उपाध्याय, प्रसेनजीत रस्तोगी, हैदर, लोकेश त्रिपाठी, आशीष दीप, हिमांशु रावत, एलपी पंत, जितेंद्र नागरकोटी, आरडी रावत, बीडी अग्रवाल, सोमेश नयन, रामचंदर, पंकज वर्मा शामिल है।

पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट शशिकांत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क : 9322411335

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

दिल्ली की श्रम अदालत ने दैनिक जागरण पर ठोंका दो हजार रुपये का जुर्माना

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले से जुड़े दिलीप कुमार द्विवेदी बनाम जागरण प्रकाशन मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा श्रम न्यायालय ने दैनिक जागरण पर दो हजार रुपये का जुर्माना ठोंक दिया है। इस जुर्माने के बाद से जागरण प्रबंधन में हड़कंप का माहौल है। बताते हैं कि गुरुवार को दिल्ली की कड़कड़डूमा श्रम न्यायालय में दैनिक जागरण के उन 15 लोगों के मामले की सुनवाई थी जिन्होंने मजीठिया बेज बोर्ड की मांग को लेकर जागरण प्रबंधन के खिलाफ केस लगाया था। इन सभी 15 लोगों को बिना किसी जाँच के झूठे आरोप लगाकर टर्मिनेट कर दिया गया था। गुरुवार को जब न्यायालय में पुकार हुयी तो इन कर्मचारियों के वकील श्री विनोद पाण्डे ने अपनी बात बताई।

इस पर जागरण प्रबंधन के वकील श्री आर के दुबे ने कहा कि मेरे सीनियर वकील कागजात के साथ आ रहे हैं, अभी रास्ते में हैं। माननीय जज ने कहा कि अगली तारीख पर दे देते हैं। इस पर वकील विनोद पांडेय ने कहा कि हुजूर, ये लोग मामले को लटकाना चाहते हैं, संबंधित डाक्यूमेंट्स नहीं देना चाहते हैं, वैसे ही हम बहुत लेट हो चुके हैं, आज हम देर से ही सही, आपके सामने इनका जवाब लेंगे। इस पर माननीय जज साहब ने पासओवर दे दिया और कहा कि 12 बजे आइये। तय समय पर वर्कर अपने वकील के साथ हाजिर हुए, तो मैनेजमेंट की ओर से कोई नहीं आया। जज ने फिर वर्कर को साढ़े बारह बजे आने के लिए कहा। फिर सभी उक्त समय पर हाजिर हुए, तब भी मैनेजमेंट के लोग गायब रहे। इसी बात पर और कानून के हिसाब से जागरण पर 2000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। इस मामले की अगली तारीख 4 मई की लगी है।

सूत्रों के हवाले से दैनिक जागरण से जुड़ी एक और चर्चा भी यहां चल रही है कि प्रबंधन अब वर्करों से हारने वाला है। ऐसा कई मोर्चों पर हो रहा है। सूत्र कहते हैं कि एक ओर जहां अदालत में जागरण प्रबंधन की किरकिरी हुयी है वहीं उनमें अब हार का डर भी समाने लगा है। दैनिक जागरण में एक और चर्चा है कि जागरण में एक बड़ी मीटिंग हुई है, जिसमें यह बात भी सामने आयी कि जितने भी वर्कर बाहर हों, सबको जल्दी अंदर लिया जाये।

खबर है कि मालिकानों में अब हर जगह हो रही फजीहत की वजह से आपस में ही जूतमपैजार होने की नौबत आ गई है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि मजीठिया मामले को लेकर जागरण का पूरा घराना एक तरफ और संजय गुप्ता अकेले एक तरफ हैं। दूसरी ओर माननीय सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस में भी अब मालिकानों को हार नजर आ रही है, इसलिए भी परेशान हैं। जागरण के मालिक संजय गुप्ता की बात करें तो उन्होंने अपने वर्करों से मजीठिया की मांग करने के दौरान यह कहा था कि नौकरी हम देते हैं, सुप्रीम कोर्ट नहीं, हम जैसे चाहेंगे, वैसे काम कराएँगे, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यह तब की बात है, लेकिन आज ऊंट पहाड़ के नीचे आ गया है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
मुंबई
९३२२४११३३५

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

हिंदुस्तान बरेली से तीन लोगों ने उप श्रमायुक्त के कोर्ट में किया मजीठिया का क्लेम

बरेली से खबर आ रही है कि हिंदुस्तान अखबार के सीनियर कॉपी एडिटर मनोज शर्मा ने 33,35,623 रुपये, सीनियर सब एडिटर निर्मल कान्त शुक्ला ने 32,51,135 रुपये और चीफ रिपोर्टर डॉ. पंकज मिश्रा ने 25,64,976 रुपये का मजीठिया वेज बोर्ड के वेतनमान के अनुसार एरियर का क्लेम उप श्रमायुक्त बरेली के यहाँ ठोंक दिया है। तीनों ने उपश्रमायुक्त बरेली से शिकायत की है कि हिंदुस्तान प्रबंधन मजीठिया के अनुसार वेतन और बकाया देय मांगने पर उनको प्रताड़ित कर रहा है। साथ ही आये दिन धमका रहा है।

बरेली हिंदुस्तान के सीनियर सब एडिटर निर्मल कान्त शुक्ला ने उप श्रमायुक्त से लिखित शिकायत की है कि तीन माह पहले श्रमायुक्त कानपुर को भेजी गई जिस शिकायत पर उनके (उपश्रमायुक्त) द्वारा सुनवाई की जा रही है, उस शिकायत को वापस लेने के लिए हिंदुस्तान प्रबंधन लगातार दबाव बनाता रहा। हिंदुस्तान बरेली के एच आर हेड और मेरठ से आकर रीजनल एचआर हेड ने धमकाया कि यदि शिकायत वापस नहीं लोगे तो तुमको संस्थान से बाहर कर दिया जायेगा, तुम्हारा ट्रांसफर इतनी दूर कर देंगे, जहाँ से साल-साल भर अपने घर नहीं आ सकोगे।

निर्मल कान्त शुक्ला ने डीएलसी से कहा कि वह इन धमकियों से भयभीत हैं। ये दोनों उनके साथ कोई भी अनहोनी कारित करा सकते हैं। इन दोनों पर सख्त कार्रवाई की जाय। डीएलसी ने प्रबंधन से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई की तिथि 3 मार्च नियत की है।

दरअसल यूपी के श्रमायुक्त से मजीठिया के अनुसार वेतन न मिलने की बरेली हिंदुस्तान से चीफ कॉपी एडिटर सुनील कुमार मिश्रा, सीनियर सब एडिटर रवि श्रीवास्तव, सीनियर सब एडिटर निर्मल कान्त शुक्ला, चीफ रिपोर्टर पंकज मिश्रा, पेजिनेटर अजय कौशिक ने शिकायत भेजी थी। श्रमायुक्त ने बरेली डीएलसी को प्रकरण निस्तारित करने का आदेश दिया, जिस पर डीएलसी बरेली सुनवाई कर रहे हैं। प्रबंधन के लोगों ने सुनील मिश्रा और रवि श्रीवास्तव को पहली ही सुनवाई पर डीएलसी के यहां ले जाकर ये लिख लिया और फाइल पर चस्पा करा दिया कि हमको मजीठिया के समस्त लाभ मिल रहे हैं, हमें संस्थान से कोई शिकायत नहीं है। हालांकि डीएलसी ने इस तरह स्टेनो की पास ले जाकर फाइल में कागज चस्पा कराने को मानने से इनकार कर दिया और रवि व सुनील को फिर नोटिस भेजकर बुलवाने और उन दोनों के खुद बयान लेने की बात कही है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आर टी आई एक्सपर्ट
9322411335

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया मामले में काश सुप्रीमकोर्ट ऐसा कर देता!

देश के अधिकांश अखबार मालिकों के खिलाफ माननीय सुप्रीमकोर्ट में अवमानना का केस चल रहा है। इस मामले में सुप्रीमकोर्ट में अभी डेट नहीं पड़ पा रही है। अगर माननीय सुप्रीमकोर्ट कुछ चीजें कर दे तो सभी अखबार मालिकों की नसें ना सिर्फ ढीली हो जायेंगी बल्कि देश भर के मीडिया कर्मियों को इंसाफ भी मिल जायेगा। इसके लिये सबसे पहले जिन समाचार पत्रों की रिपोर्ट कामगार आयुक्त ने सुप्रीमकोर्ट में भेजी है उसमें जिन अखबार मालिकों ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश नहीं लागू किया है या आंशिक रुप से लागू किया है ऐसे अखबारों के मैनेजिंग डायरेक्टर, डायरेक्टर, पार्टनर और सभी पार्टनरों को अदालत की अवमानना का दोषी मानते हुये उनके खिलाफ कामगार आयुक्त को निर्देश दें कि उनके खिलाफ पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करा दें और सभी जिलाधिकारियों, तहसीलदारों को निर्देश दें कि उनके खिलाफ रिकवरी कार्रवाई शुरू की जाये। उनको जमानत भी माननीय सुप्रीमकोर्ट से तभी प्राप्त हो जब वे मीडियाकर्मियों को उनका पूरा बकाया एरियर वेतन तथा प्रमोशन दें।

जिन मीडियाकर्मियों ने मजीठिया का क्लेम लगाया या याचिका दायर की ऐसे जितने मीडियाकर्मियों का प्रबंधन ने ट्रांसफर या टर्मिनेशन किया है ऐसे मीडियाकर्मियों के ट्रांसफर और ट्रमिनेशन पर रोक लगा दे। अब बाकी बचे ऐसे अखबार मालिक जिन्होंने कामगार आयुक्त को पटा कर यह रिपोर्ट लिखवा लिया कि उनके यहां मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू है ऐसे अखबारों की स्कूटनी करायी जाये। इसके लिये प्रदेश स्तर पर एक जांच कमेटी बनायी जाये। इस कमेटी में आयकर विभाग के अधिकारी, हाईकोर्ट के सेवानिवृत जज, पत्रकारों द्वारा प्रत्येक राज्य में चुने गये उनके प्रतिनिधि और सुप्रीमकोर्ट के एडवोकेट हो।

यह कमेटी सभी अखबारों में यह विज्ञापन जारी करे कि इन अखबारों ने दावा किया है कि ये अपने कर्मचारियों को जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश दे रहे हैं। अखबार मालिकों के एक दावे की जांच के लिये तीन दिवसीय एक कैंप लगाया जा रहा है। अगर किसी भी कर्मचारी को जो इन अखबारों में काम करते हैं उनको वेज बोर्ड के अनुसार वेतन नहीं मिल रहा है तो वे इस कैंप में संपर्क करें। इस कैंप में आयकर अधिकारी अखबारों और उनके प्रबंधन की सहयोगी कंपनियों के २००७ से १० तक की बैलेंससीट और दूसरे कागजात लेकर आयें।

इस कैंप में कामगार आयुक्त इस दावे की पुष्टि के सभी कागजात प्रमोशन लिस्ट लेकर आयें जिसकी एक सीए भी जांच करे और मीडियाकर्मियों की सेलरी स्लीप तथा दूसरे संबंधित कागजातों की उसी समय जांच कर अखबार के मैनेजिंग डायरेक्टर, डायरेक्टर, पार्टनर और सभी पार्टनरों को अदालत की अवमानना का दोषी मानते हुये उनके खिलाफ कामगार आयुक्त को निर्देश दे कि उनके खिलाफ पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करा दें और  सभी जिलाधिकारियों, तहसीलदारों को निर्देश दे कि उनके खिलाफ रिकवरी कार्रवाई शुरू की जाये। उस अखबार के सभी मीडियाकर्मियों को उनका अधिकार दिलाया जाये। साथ ही इसकी पूरी रिपोर्ट माननीय सुप्रीमकोर्ट में भेजी जाये। इसके बाद जितने मामले १७. २ के लेबर कोर्ट में चल रहा हैं वे खुद ब खुद मीडियाकर्मी वापस ले लेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में ६ माह से ज्यादा का समय ना लगे। साथ ही जो मीडियाकर्मी २००७ से २०११ तक जिस पद पर था उसी पद को आधार माना जाये और उनका पद या विभाग या कंपनी ना बदला जाये।  काश सुप्रीमकोर्ट ऐसा कर देता।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
९३२२४११३३५

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें: