Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

झारखंड

झारखंड में क्रांतिकारी नारे लगाने पर 800 अज्ञात और 12 को नामजद कर एफआईआर दर्ज

विशद कुमार,  गिरिडीह से

गिरिडीह : जनता से आखिर इतना डर क्यों? यह सवाल मजदूर संगठन समिति के केंद्रीय महासचिव बच्चा सिंह उस वक्त कर रहे हैं जब पिछले 7 नवंबर को महान बोल्शेविक क्रान्ति के सौवें वर्षगांठ पर झारखंड के गिरिडीह जिला के मुफस्सिल थाना अन्तर्गत चतरो में “महान बोल्शेविक क्रान्ति की शताब्दी समारोह समिति” झारखंड, के तत्वावधान में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें क्षेत्र के लगभग 10 हजार लोगों ने भाग लिया। मंचीय कार्यक्रम के पूर्व एक रैली निकाली गई जो काफी शांतिपूर्ण तरीके से लगभग 5-6 कि.मी. की दूरी तय करते हुए वापस कार्यक्रम स्थल पर पहुंची और आयोजित समारोह भी काफी शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हुआ, जिसे सभी समाचार-पत्रों ने सहजता से छापा भी। बावजूद जिला प्रशासन ने रैली में शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है जिसमें 800 अज्ञात तथा 12 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है।

विशद कुमार,  गिरिडीह से

गिरिडीह : जनता से आखिर इतना डर क्यों? यह सवाल मजदूर संगठन समिति के केंद्रीय महासचिव बच्चा सिंह उस वक्त कर रहे हैं जब पिछले 7 नवंबर को महान बोल्शेविक क्रान्ति के सौवें वर्षगांठ पर झारखंड के गिरिडीह जिला के मुफस्सिल थाना अन्तर्गत चतरो में “महान बोल्शेविक क्रान्ति की शताब्दी समारोह समिति” झारखंड, के तत्वावधान में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें क्षेत्र के लगभग 10 हजार लोगों ने भाग लिया। मंचीय कार्यक्रम के पूर्व एक रैली निकाली गई जो काफी शांतिपूर्ण तरीके से लगभग 5-6 कि.मी. की दूरी तय करते हुए वापस कार्यक्रम स्थल पर पहुंची और आयोजित समारोह भी काफी शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हुआ, जिसे सभी समाचार-पत्रों ने सहजता से छापा भी। बावजूद जिला प्रशासन ने रैली में शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है जिसमें 800 अज्ञात तथा 12 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है।

अपने ही सवाल के जवाब में वे कहते हैं कि जहां वामपंथ धारा के पक्षधरों द्वारा 7 नवंबर 1917 को रूस में हुई ऐतिहासिक परिवर्तन को प्रतीकात्मक रूप से बोल्शेविक क्रांति के सौवें वर्षगांठ को पूरे देश में मनाया जा रहा है वहीं हमारे द्वारा मनाये जा रहे कार्यक्रम के खिलाफ प्रशासन का यह रवैया इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की आजादी पर एक खतरनाक हमला है। जिसका कारण मात्र यह है कि पिछले दिनों मजदूर संगठन समिति द्वारा राज्य के तीन जगहों मधुबन, चन्द्रपुरा और बोकारो थर्मल में मजदूरों के सवालों को लेकर जोरदार आंदोलन किया गया, परिणामस्वरूप इन तीनों जगहों के प्रबंधन को मजदूरों के आन्दोलन के सामने झुकना पड़ा और मजदूर की ताकत बढ़ी।

जाहिर है यह फासीवादी रघुवर की सरकार मजदूरों की बढ़ती ताकत को बर्दाश्त नहीं कर पा रही है। चूंकि “महान बोल्शेविक क्रांति की शताब्दी समारोह समिति” झारखंड, में शामिल 13 संगठनों में मजदूर संगठन समिति भी शामिल है अतः मसंस के बहाने मजदूरों कों मुकदमे में फंसाने की धमकी से डरा कर उन्हें चुप रखने की एक साजिश है और समारोह समिति द्वारा घोषित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित बोल्शेविक क्रांति के कार्यक्रमों को भी रोकने की साजिश का भी यह एक हिस्सा है, मगर मजदूर चुप नहीं रहने वाले हैं और न ही “महान बोल्शेविक क्रांति की शताब्दी समारोह समिति” झारखंड, के कार्यक्रमों में कोई बदलाव करने वाला है, हम इस फासीवादी रघुवर सरकार की किसी भी साजिश को सफल नहीं होने देंगे।

उल्लेखनीय है कि अक्टूबर में 13 संगठनों की एक बैठक करके बोल्शेविक क्रांति के सौवें वर्षगांठ पर पूरे झारखंड में कार्यक्रम मनाने की सहमति बनी और उक्त कार्यक्रम को “महान बोल्शेविक क्रांति की शताब्दी समारोह समिति” झारखंड, का नाम दिया गया, जिसमें ‘मजदूर संगठन समिति’ (झारखंड), ‘मेहनतकश महिला संघर्ष समिति’ (बोकारो), ‘आदिवासी, मूलवासी अधिकार मंच’ (बोकारो), ‘तेनुघाट विस्थापित बेरोजगार संघर्ष समिति’ (ललपनिया, बोकारो), ‘आदिवासी, मूलवासी विकास मंच’ (बोकारो), ‘उलगुलान बेरोजगार मंच’ (गिरिडीह), ‘भारतीय आदिम जनजाति परिषद’ (गढ़वा), ‘भारतीय भूईंया विकास परिषद’ (गढ़वा), ‘भारतीय आदिवासी विकास परिषद’ (गढ़वा), ‘जल, जंगल, जमीन रक्षा समिति’ (दुमका), ‘जन जागरण वनाधिकार संघर्ष समिति’ (गुमला, सिमडेगा), ‘भारत नौजवान सभा’ (गिरिडीह) , ‘महिला उल्गुलान संघ ‘(रांची) शामिल हुए। कार्यक्रम 7 नवंबर को गिरिडीह से शुरू करते हुए 30 नवम्बर को रांची में समाप्त करना तय हुआ। कार्यक्रम राज्य के विभिन्न स्थलों में में होना तय हुआ।

इसी संदर्भ में समारोह समिति के आयोजन कर्ताओं द्वारा अक्टूबर में ही गिरिडीह के बरवाडीह करबला मैदान मैनेजिंग कमिटी, गिरिडीह को एक पत्र देकर कार्यक्रम के लिए करबला मैदान को बुक करवा लिया गया था। मगर जब जिला प्रशासन के पास कार्यक्रम करने की अनुमति पत्र के लिए जब संपर्क किया गया, तब जिला प्रशासन द्वारा अनुमति पत्र को स्वीकृति देने के बजाय करबला मैदान मैनेजिंग कमिटी को ही कारण बताओ नोटिस भेज दिया कि वह बिना प्रशासन की अनुमति पत्र के मैदान आवंटित कैसे कर दिया ? परिणामत: जैसा होना लाजिमी था करबला मैदान मैनेजिंग कमिटी का प्रबंधन प्रशासन की घुड़की से डर कर आवंटित मैदान को रद्द कर दिया।

प्रशासन के इस हरकत से आक्रोशित ‘महान बोल्शेविक क्रांति की शताब्दी समारोह समिति’ के आयोजकों ने तय किया कि कार्यक्रम जिले के चतरो अवस्थित मजदूर संगठन समिति के शाखा कार्यालय के मैदान में मनाया जायगा और इसी तयशुदा कार्यक्रम के तहत समिति ने 7 नवंबर को कार्यक्रम मनाया जिसमें 10 हजार के करीब लोग शामिल हुए। कार्यक्रम के पूर्व एक रैली निकाली गई जो लगभग 7 कि0मी0 की दूरी तय करते हुए अजीडीह के चक्रव्यूह मैदान से वापस कार्यक्रम स्थल तक आई।

सबकुछ काफी शान्ति से सम्पन्न हुआ और कार्यक्रम के बाद काफी शान्ति के साथ सारे लोग अपने अपने घर वापस हो गए। एक बात उल्लेखनीय रही कि कार्यक्रम की समाप्ति तक जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा और इस कोशिश में लगा रहा कि कार्यक्रम अव्यवस्थित हो जाय, मगर आयोजकों की सावधान मुस्तैदी ने प्रशासन की हर कोशिश पर पानी फेर दिया जिसका इजहार प्रशासन ने दूसरे दिन 8 नवंबर को समारोह में शामिल लोगों और आयोजकों पर एफआईआर दर्ज करके किया। जिला के मुफस्सिल थाना में प्रशासन ने जिला उद्योग केंद्र के उद्योग विस्तार पदाधिकारी परमेश्वर सिंह द्वारा शिकायत दर्ज करवाते हुए 800 अज्ञात एवं 12 नामजद लोगों के खिलाफ भदवि की धारा 147, 148, 149, 341, 342, 323, 504, 506, 353 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

गिरिडीह से विशद कुमार की रिपोर्ट.

Local News Community
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन