यूपी में अब ‘भू-जेहाद’ का फलसफा

अजय कुमार, लखनऊ

सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा। कुछ दशकों पूर्व यह एक समस्या भर थी, लेकिन अब यह समस्या नासूर बन गई है। पहले तो शहर-गांव में छोटी-छोटी जमीन कब्जाई जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे यह संगठित अपराध बन गया। हर शहर और गांव में भू-माफिया पैदा हो गये। कुछ सरकारी कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों ने इन भू-माफियाओं के मंसूबों को ‘चार चांद’ लगाने का काम किया। फिर तो सरकारी-नजूल की जमीन पर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट तक खड़े होने लगे। यह भूमाफिया कब्जाई हुई जमीन के ले-देकर फर्जी कागम तैयार करके, ऐसे प्रोजेक्ट की सम्पतियों को ऊंचे दामों में बेच देते थे। बाद में खरीददार कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाते रहते थे।

इसी प्रकार सरकारी जमीन को कब्जाने का धर्म आधारित एक और तरीका भी मौजूद है। धर्म की आड़ में भी सरकारी जमीनों पर खूब कब्जा किया जाता है, तो ऐसी जमीनें सरकार खाली भी कराती है,भले ही खाली कराने का प्रतिशत चाहें जितना कम रहता हो। जमीन पर कब्जा करने वाले किसी धर्म विशेष से आते हैं,ऐसा नहीं कहा जा सकता है,लेकिन विश्व हिन्दू परिषद को ऐसा ही लगता है। खासकर मेरठ विश्व हिन्दू परिषद के ऊपर तो यह बात सौ फीसदी स्टीक बैठती है क्योंकि उसे लगता है कि सरकारी या नजूल की जमीन पर कब्जा करने वालों अथवा ऊंचे दाम देकर किसी हिन्दू परिवार की  जमीन को अपने नाम करा लेने वालों में एक वर्ग विशेष के लोग सुनियोजित तरीके से भू-जेहाद चला रहे हैं। इसीलिये लव जिहाद के विरोध की तर्ज पर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) जमीन के मोह में फंसे ‘जिहादियों’ के खिलाफ अभियान छेड़े हुए है। वीएचपी को लगता है कि वर्ग विशेष के लोग जो लव जेहाद को पनाह देते हैं,वहीं लोग भू-जिहाद के भी पीछे खड़े हैं।

वीएचपी को लगता है कि कुछ मुसलमानों द्वारा सरकारी जमीन पर धर्म की आड़ में कब्जा करके देश विरोधी गतिविधि चलाई जाती है। यह मुसलमान बहुसंख्यकों के रिहायशी इलाके में उनके  मकानों और जमीनों को मोटे दाम पर खरीदकर सुनियोजित तरीके से हिन्दू बाहुल्य इलाकों में ‘घुसपैठ’ करते हैं, जिससे सामाजिक तानाबांना बिगड़ता है। मेरठ गत दिनों भू-जेहाद को लेकर चर्चा में रहा । भू-जेहाद मेरठ में तब सुर्खियांे में आया जब भू-जेहाद के मुद्दे पर विरोध के बाद एक संप्रदाय विशेष के व्यक्ति को खरीदा हुआ मकान वापस करना पड़ गया। अभी तक मुस्लिम युवकों पर हिंदू लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाकर शादी करने और धोखा देने के आरोप लगते रहे थे अब भू-जेहाद का शायद यह पहला मामला सामने आया होगा।

वीएचपी, बजरंग दल समेत कई हिंदूवादी संगठनों ने इसको भू-जिहाद (लैंड जेहाद) का नाम देने में जरा भी देरी नहीं की। वीएचपी मेरठ सहित कई अन्य जिलों में भी भू-जिहाद के मुद्दे को जोर-शोर से उठा रही है। वीएचपी के सह प्रांत संगठन मंत्री सुदर्शन चक्र कहते कि साजिश के तहत सरकारी जमीन, पार्क, चौराहे और हाइवे पर मजार बनाकर धार्मिक आयोजन की आड़ में कीमती जमीनों पर कब्जा किया जाता है। कुछ दिन बाद ऐसी कब्जाई जमीनों पर देश विरोधी गतिविधियों का संचालन किया जाता है। बिजनौर में ऐसे दो मामले पकड़ में आ चुके हैं।

वीएचपी अब प्रशासन और सरकार को जानकारी मुहैया करवाकर ऐसी कब्जाई गई जमीन को मुक्त कराने की कोशिश कर रही है। वीएचपी नेता की तरह की बजरंग दल के प्रांतीय संयोजक बलराज डूंगर भी कहते हैं कि भू-जिहाद के नाम पर हिंदू बाहुल्य क्षेत्रों में एक-दो मुस्लिम साजिश के तहत बाजार दाम से अधिक के पैसे का लालच देकर हिन्दुओं का मकान, दुकान या जमीन खरीद लेते हैं। बाद में अपने संप्रदाय के और लोगों को भी वहीं पर मकान/जमीन दिला देते हैं। बाद में सोची समझी रणनीति के तहत विवाद खड़ा किया जाता हैं। इसके बाद हिंदुओं को वहां से भाग जाने को मजबूर होना पड़ जाता है। कैराना जैसे कई इलाके इसकी मिसाल हैं,जहां हिन्दू पलायन को मजबूर हो गये थे। इसी तथाकथित जेहाद को लेकर पिछले दिनों मेरठ में हिन्दूवादी संगठनों का सम्मेलन भी हुआ, जिसमें भू-जिहाद का खुल कर विरोध किया गया। इस  विरोध का असर भी हुआ और शहर में ऊंची कीमत पर मकान खरीदने वाले एक शख्स को खरीदा गया मकान वापस करना पड़ गया।

खैर, उक्त हिन्दूवादी नेताओं की बातों में कितनी सच्चाई है यह बात तो दावे से नहीं कही जा सकती है, लेकिन मुस्लिम बाहुल्य कई इलाकों में यह समस्या कई शहरों में देखने को मिलती है। बात लखनऊ की ही कि जाये तो लखनऊ में शायद ही कोई हिन्दू खरीददार मुसलमान का मकान खरीदने की हिम्मत जुटा पता हो,लेकिन मुसलमनों को इसमें बिल्कुल भी गुरेज नहीं रहता है। वैसे जानकार इसकी दूसरी वजह बताते हैं। जानकारों का कहना है कि आजदी के समय मुस्लिमों की आबादी कुल आबादी का 3-4 प्रतिशत हुआ करती थी,जो अब बढ़कर 20-25 प्रतिशत तक और कहीं-कहीं तो इससे भी ऊपर पहुंच गई, इसके अलावा आमादनी भी बढ़ी है। ऐसे में मुसलमानों को जमीन/मकान आदि की और जरूरत पड़ती, इसीलिये वह जमीन खरीद रहे हैं,इसे भू-जेहाद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

उधर, जमीयत उलेमा हिंद, मेरठ का इस संबंध में कहना था कि भू-जिहाद नाम कहां से आया, हमें नहीं पता। जो लोग ऐसा कह रहे हैं उनको जिहाद का सही मतलब भी पता है। धार्मिक स्थल की स्थापना बिना सरकार और प्रशासन की इजाजत के नहीं हो सकती है। ऐसे में अगर कोई भू-जिहाद होने की अर्थहीन बात कर रहा है तो यह माहौल खराब करने के अलावा कुछ नहीं है। वैसे, कुछ लोग भू-जेहाद के फलसफे पर चुटकियां भी ले रहे हैं।

लेखक अजय कुमार लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं.

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