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मीडिया का बाजारीकरण लोकतंत्र के लिए खतरनाक : प्रो.नामवर सिंह

नई दिल्ली : हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध आलोचक प्रो. नामवर सिंह ने कहा है कि मीडिया का बाजारीकरण किया जाना देश और समाज दोनों के लिए खतरे का संकेत है। यह लोकतंत्र के एक स्तंभ के रूप में जाना जाता है। इसका बाजारीकरण होता है तो लोकतंत्र भी कमजोर होगा। 

नई दिल्ली : हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध आलोचक प्रो. नामवर सिंह ने कहा है कि मीडिया का बाजारीकरण किया जाना देश और समाज दोनों के लिए खतरे का संकेत है। यह लोकतंत्र के एक स्तंभ के रूप में जाना जाता है। इसका बाजारीकरण होता है तो लोकतंत्र भी कमजोर होगा। 

यह बात उन्होंने आत्माराम सनातन धर्म महाविद्यालय में गत दिवस ‘मीडिया का बाजारीकरण और लोकतंत्र’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहीं। इसमें शिक्षा जगत से जुड़े लोगों के साथ ही पत्रकारिता से जुड़े लोग भी शामिल हुए। उपस्थित लोगों ने माना कि आज मीडिया का बाजारीकरण हुआ है। भारतीय मीडिया नूतन की ओर बढ़ते हुए पुरातन को भुला रहा है, ऐसे समय में इस विषय पर मंथन की जरूरत है। संगोष्ठी में वक्ता के रूप में भाजपा नेता प्रभात झा, प्रोफेसर गिरीश्वर मिश्र, प्रोफेसर पुष्पेंद्र पाल सिंह, पत्रकार अरविंद मोहन, प्रोफेसर शंभुनाथ सिंह, पत्रकार उर्मिलेश व प्रोफेसर श्याम कश्यप उपस्थित थे। कार्यकम का संचालन संयोजक प्रोफेसर संजय सिंह बघेल ने किया।

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