कासगंज : एक बंटे हुए समाज को मीडिया की एकतरफा रिपोर्टिंग ने और बांट दिया है

Abhishek Srivastava : कल रात तक अपनी समझ पर बीस परसेंट शंका थी। आज साफ हो गयी जब मृतक नौजवान चंदन के एक अनन्य मित्र ने भारी मन और भरी आंखों से बताया, “भैया, आप नहीं जानते यूपी का हाल। जब से मोदीजी ने नेतानगरी को एक फुलटाइम काम कहा है, यहां की हर गली में हर लौंडा मोदी बनने की इच्छा पाल बैठा है। कासगंज के हर मोहल्ले से एक मोदी निकल रहा है।”

यह युवा भाजपा का समर्थक है, चंदन जैसे लड़कों का बौद्धिक संरक्षक और बीटेक पास है। अंग्रेज़ी बोलता है। मॉडर्न है। चंदन को शहीद मानता है लेकिन इस शहादत के पीछे हर लड़के के मन में पनपी नेता बनने को ख्वाहिश को ज़िम्मेदार मानता है। ये लड़का आजतक की कवरेज को सही मानता है लेकिन ABP News को दुश्मन। आज इसी तरह के लोगों ने पंकज झा का जीना हराम किया हुआ है और पूरे पुलिस बल और आरएएफ के सामने ABP की ओबी वैन को उठा लिया और बोनट खोल दिया।

ठीक यही स्थिति मुसलमान इलाके में है। वहां एबीपी को गले लगाया जा रहा है लेकिन आजतक के खिलाफ मन में द्वेष है। आजतक की समझदारी थी कि उसने अपनी वैन हिन्दू मोहल्ले में पार्क की थी वरना उनके रिपोर्टर का हाल भी मुस्लिम लड़के पंकज झा जैसा कर देते। कुल मिला कर एक बंटे हुए समाज को मीडिया की एकतरफा रिपोर्टिंग ने और बांट दिया है। ऐसे में कासगंज हमें दोहरे खतरे के प्रति आगाह करता है।

पहला, राजनीतिक महत्वाकांक्षा पाले भाजपा समर्थक बेरोजगार लड़के भाजपा के लिए भस्मासुर हैं जबकि बिल्कुल इसी स्थिति में जो मुसलमान युवा हैं, वे अपनी ही कौम के लिए भस्मासुर साबित होंगे। दूसरे, टीआरपी और स्वामिभक्ति के चक्कर में लगे टीवी चैनल सच के अलावा बाकी सब रिपोर्ट करने के चक्कर में अपना ही गला घोंट लेंगे। अपने ऊपर हमले की सूरत में रिपोर्टर बेचारा अभिव्यक्ति की आज़ादी चिल्लाएगा और जनता मौज लेगी।

कासगंज गए वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव की जमीनी रिपोर्ट का एक अंश.

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