रायटर्स के दो रिपोर्टर्स की मान्यता रद्द कराना चाहती थीं मेनका गांधी!

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को लिखा था पत्र, मंत्रालय का इंकार ऐसा कोई नियम नहीं, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में रिपोर्टर अमिताव रंजन ने किया खुलासा

-दीपक खोखर-

नई दिल्ली, 12 अप्रैल। केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी को इंटरनेशनल न्यूज एजेंसी रायटर्स की एक रिपोर्ट रास नहीं आई और उन्होंने रायटर्स के दो पत्रकारों आदित्य कालड़ा व एंड्रयू मैकआसकिल की सरकारी मान्यता खत्म करने के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिख दिया था। लेकिन मंत्रालय ने ऐसा कोई नियम होने से इंकार करते हुए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के पास जाने की नसीहत दी है। दरअसल मेनका गांधी अपने मंत्रालय से संबंधित प्रकाशित की गई एक रिपोर्ट में संशोधन चाहती थी, पर एजेंसी ने साफ तौर पर मना कर दिया।  इंडियन एक्सप्रेस की 12 अप्रैल की रिपोर्ट में रिपोर्टर अमिताव रंजन ने यह खुलासा किया है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक रायटर्स ने 19 अक्टूबर 2015 को एक खबर प्रकाशित की थी। जिसमें मेनका गांधी का हवाला देते हुए कुपोषण संबंधी बजट कम करने की बात कही गई थी। इसमें स्पष्ट तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की आलोचना की गई थी। रायटर्स ने मेनका के हवाले से कहा था कि उनके मंत्रालय का बजट आधा कर दिया गया है। इससे कुपोषण के खिलाफ उनकी लड़ाई पर असर पड़ेगा।

यह खबर चर्चित होते ही मेनका गांधी के मंत्रालय ने कड़ा खंडन किया और कहा कि मेनका के व्यतव्य को गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया है। रायटर्स ने मंत्रालय के इंकार को 20 अक्टूबर को प्रस्तुत किया, लेकिन साथ ही इस बात का जिक्र किया कि वे अपनी निष्पक्षता व स्टीकता पर अब भी कायम हैं। इसी दिन निजी सचिव मनोज ए अरोड़ा ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखा कि उन्हें निर्देश मिला है कि आपसे अनुरोध किया जाए कि आदित्य कालड़ा व एंड्रयू मैकआसकिल की पीआईबी मान्यता रद्द कर दी जाए। यह भी कहा गया कि रायटर्स से बार-बार अनुरोध के बावजूद खबर में संशोधन नहीं किया गया। रायटर्स की खबर को अनैतिक व शरातपूर्ण करार दिया गया।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 7 मार्च को यह मामला पीआईबी को सौंपते हुए कहा कि वह मान्यता वापस नहीं ले सकती क्योंकि केंद्रीय प्रेस मान्यता के निर्देशों के मुताबिक गलत और शरारतपूर्ण रिपोर्टिंग के आधार पर मान्यता वापस लेने का कोई नियम नहीं है। इसके बावजूद पीआईबी ने केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय को सलाह दी कि वह इस मुद्दे को प्रेस काउंसिल के सामने उठाए। इंडियन एक्सप्रेस ने इस संबंध में मेनका और उनके मंत्रालय का पक्ष जानना चाहा, लेकिन फोन काल्स व मैसेज का कोई जवाब नहीं मिला।

लेखक दीपक खोखर से 09991680040 के जरिए संपर्क किया जा सकता है.

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