उमेश कुमार के अखबार ‘मिड-डे एक्टिविस्ट’ पर तालाबंदी की तलवार

लखनऊ से आ रही पुष्ट खबर के मुताबिक सांध्य दैनिक अखबार ‘मिड-डे एक्टिविस्ट’ का अस्तित्व खतरे में है। पिछले 12 दिनों से ये अखबार छापा नहीं जा सका है। आर्थिक संकट की वजह से ऐसा हुआ है। कर्मचारियों को 2 महीने से वेतन नहीं दिए जाने के कारण उन्होने ‘पेन-डाऊन’ यानि काम करना बंद कर दिया है। ‘मिड-डे एक्टिविस्ट’ अखबार के मालिक उमेश कुमार शर्मा हैं जो यूपी-उत्तराखंड के क्षेत्रीय चैनल ‘समाचार प्लस’ के सीईओ हैं। कर्मचारियों को समझाने-बुझाने के लिए उमेश कुमार लखनऊ आए थे और उनको महज डेढ़ लाख रूपए देकर गए थे लेकिन अखबार के स्टाफ ने अपना पूरा वेतन मिले बगैर काम करने से इंकार कर दिया है।

नौसिखिया अखबार होने और दूरदर्शिता के आभाव के चलते ‘मिड-डे एक्टिविस्ट’ के पास अपनी खुद की प्रिंटिंग प्रेस नहीं है। इसीलिए इसे अंग्रेजी अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की प्रिंटर्स की प्रेस से छपवाया जाता है। मगर उसने भी पिछले 2 महीने का बकाया भुगतान प्राप्त ना होने की वजह से छपाई बंद कर दी है। मतलब ये हुआ कि अखबार बंद होने की कगार पर आ चुका है और कर्मचारी हलकान हो रहे हैं।  जब तक तेजतर्रार पत्रकार श्री संजय शर्मा ‘मिड-डे एक्टिविस्ट’ के पार्टनर थे तब तक तो ये बहुत तेजी से तरक्की करता रह था। मगर अखबार की आड़ में दिनोंदिन बढ़ती उमेश की धंधेबाजी को जैसे ही संजय ने काबू करने की कोशिश की तो अखबार के बुरे दिन शुरू हो गए। उमेश कुमार की ऊलजुलूल हरकतें ईमानदार पत्रकार संजय शर्मा को सख्त नागवार गुजरीं और उन्होने उमेश कुमार से नाता तोड़ लिया था। इसके 15 दिनों के भीतर ही श्री संजय शर्मा ने अपना खुद का चमचमाता सांध्य दैनिक अखबार ‘4 PM’ छापना शुरू कर दिया था जो आज राजधानी लखनऊ का चर्चित अखबार बन चुका है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. पत्रकार का कहना है कि उपरोक्त खबर एक ह्वाट्स ग्रुप पर किसी निशांत ने पोस्ट किया था, जिसके प्रतिक्रिया स्वरूप किन्हीं डा. बदी उज्जमा ने इन आरोपों का खंडन किया था. खंडन वाली ह्वाट्स ग्रुप पोस्ट का स्क्रीनशाट नीचे दिया जा रहा है ताकि दोनों पक्ष सामने आ सकें>>



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Comments on “उमेश कुमार के अखबार ‘मिड-डे एक्टिविस्ट’ पर तालाबंदी की तलवार

  • umesh ke rang dhang says:

    उमेश कुमार को लेकर कुछ खास सूचनाएं…
    अब खबरें मिल रही हैं कि उमेश कुमार ने बिहार वि.स. चुनावों के मद्देनजर राजधानी पटना का रुख किया है जिससे चुनावी चकल्लस में बंटने वाली रेवड़ियों को लूटा जा सके।
    इसके पहले वो उत्तराखंड में कई लोगों का सच्चा-झूठा स्टिंग आपरेशन कर के जबर्जस्त कमाई कर चुके हैं।
    ‘समाचार प्लस’ चैनल पर अपने निजी स्वार्थ के चलते उन्होने पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक जी का अपमान किया। निशंक जी के खिलाफ खूब ऊलजुलूल खबरें प्रसारित करवाईं और बाद में निशंक जी से माफी माँग कर फिर से सेटिंगबाजी में लग गया।
    इस स्टिंगबाज उमेश के चैनल समाचार प्लस के महिला बाथरूम में एक खुफिया कैमरा भी पकड़ा जा चुका है जिसको लेकर भी खूब बवाल हुआ था।
    समाचार प्लस चैनल की कमान इसने अपने 2 सगे भांजों प्रवीन साहनी और सौरभ साहनी को सौंपी है। ये दोनों भी अपनी बदजुबानी और बदमिजाजी के लिए खासे बदनाम हैं।
    उमेश ने यूपी में पहले तो अपने चैनल और अखबार का हौव्वा खड़ा किया और फिर यूपी के प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल से गलबहियाँ कर के करीब 6 करोड़ रूपए की डॅाक्यूमेंटरी बनाने का ठेका हथिया लिया। यानि अपना उल्लू सीधा कर के अखबार को बंदी की कगार पर ला खड़ा किया।

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  • lucknow se khabar says:

    समाचार प्लस के करता धर्ता आजकल लखनऊ में अपनी और अपने चैनल की जमकर फजीहत कराने में जुटे है . चैनल के व्यूरो चीफ आलोक पाण्डेय के किस्से आजकल रोज नई कहानी लिख रहे है . आज का किस्सा तो सबसे मजेदार हुआ जब इनके चैनल पर एक घंटे तक ब्रेकिंग न्यूज़ के नाम पर फर्जी खबर चलती रही . इस खबर में भी खुद को दमदार बताने का नाटक चलता रहा . जब हकीकत पता चली तो आलोक को अपनी किरकिरी का अहसास हुआ . हुआ यूँ कि आलोक अपने बिल्डर भाई की जमीन की हेराफेरी के सिलसिले में कई दिनों से लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष सत्येन्द्र सिंह के दफ्तर के चक्कर काट रहा था . सत्येन्द्र सिंह ने साफ़ कह दिया कि वो जमीन का परिवर्तन नहीं कर सकते . जब आलोक ने उन पर रौब दिखाना चाहा तो उन्होंने आलोक को दफ्तर से बाहर का रास्ता दिखा दिया . इस पर आलोक भड़क गया और उसने अपने अखबार में सत्येन्द्र सिंह के घोटाले के नाम से फर्जी खबर छापी और कैमरा लेकर प्राधिकरण के दफ्तर पहुँच गया इस पर वीसी ने सुरक्षा गार्ड से कैमरों के घुसने पर प्रतिबन्ध लगा दिया . इस बेइजजती से आलोक और बौखला गया .आज रात अचानक आठ बजे समाचार प्लस पर ब्रेकिंग न्यूज़ में चलने लगा हमारी खबर से हटाया गया लखनऊ विकास प्राधिकरण के वीसी को . हमारी खबर का असर हटे सत्येन्द्र सिंह ..हकीकत यह है कि सरकार ने कानपुर, मथुरा और वाराणसी के वीसी को हटाया था . लखनऊ का नाम आलोक पाण्डेय ने अपनी निजी खुन्नस में जोड़ दिया . सभी को पता था कि तीन वीसी हटे है पर समाचार प्लस पर चार वीसी हटे चलते रहे . इन्ही हरकतों के चलते कई महीनो से यूपी में चैनल चौथे नंबर पर चल रहा है . कुछ दिन पहले संजीव रतन ने भी आलोक का साथ इसलिए छोड़ दिया क्योकि आलोक अपने बिल्डर भाई के लिए जमीनों की दलाली का दवाव बना रहा था . जबकि संजीव रतन ने चैनल के लिए काफी मेहनत की थी .

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  • यसवतं जी, आप से फिजूल की खबरों में पड़ने की उम्मीद नही थी।

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