काश! हिन्दी के संपादक भी इसे टेलीग्राफ की तरह ही देखते, समझते और बताते!

सौमित्र रॉय-

धर्म की तुला पर राजनीति का सौदा करने में माहिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल यूपी के चुनाव में औरंगज़ेब की भी एंट्री करवा दी।

उन्होंने कहा कि “जब औरंगज़ेब आता है तो शिवाजी भी उठ खड़े होते हैं,” जो उनकी इच्छानुसार आज अख़बारों की सुर्खी भी है।

उनका संबोधन उन संघियों को ध्यान में रखकर है, जिन्हें आरएसएस रात-दिन शिवाजी माने ‘हिंदू’ और औरंगज़ेब माने ‘मुसलमान’ पढ़ाता रहता है।

मोदी जी को जानना चाहिए कि औरंगज़ेब जब आता है तो मिर्ज़ा राजा जय सिंह और जसवंत सिंह की ताक़त पर आता है और जब शिवाजी उठते हैं तो इब्राहिम ख़ान जैसे तोपची और दौलत खां जैसे नौसेनाध्यक्ष को साथ लेकर उठते हैं।

शिवाजी हिंदू थे, हिंदुत्ववादी नहीं! (राहुल गांधी के शब्दों में)

शिवाजी का ‘हिंदवी साम्राज्य’ बीजापुरी मुस्लिम सिपाहियों समेत तमाम मुस्लिम सेनानायकों की कुर्बानियों से बना था।

अफ़सोस कि औरंगज़ेब और शिवाजी की लड़ाई को हिंदू- मुस्लिम संघर्ष के रुप में दुष्प्रचारित करने के अभियान को भारत का प्रधानमंत्री हवा दे रहा है।

काशी की पवित्र ज़मीन पर यह घिनौना काम उनके अलावा और कौन कर सकता है?

जिन्होंने कभी इतिहास पढ़ा नहीं, उनके मुंह से ऐसी बातें मूर्खतापूर्ण हैं।

(शीर्षक सौजन्य- संजय कुमार सिंह)



 

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