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उत्तर प्रदेश

दोषी तक पहुंचने में नाकाम पुलिस ने निदोर्षों को जेल में ठूंसा

बघौली : बीते वर्ष 2014 में हुए पिपरीडीह हत्याकाण्ड में कई थानेदारों की जांच पड़ताल को दरकिनारकर हुई कानूनी कार्रवाई इनदिनों चर्चाओं में है। वास्तविक दोषी तक पहुंचने में नाकाम रही कानून प्रक्रिया ने निर्दोषों पर कहर ढा दिया। जेल में बन्द निर्दोष आरोपी किसी भी तरह से जांच की प्रक्रिया से गुजरने को तैयार हैं। अपनी समस्या को जन-जन तक पहुंचाकर न्याय की भीख मांग रहे हैं। 

बघौली : बीते वर्ष 2014 में हुए पिपरीडीह हत्याकाण्ड में कई थानेदारों की जांच पड़ताल को दरकिनारकर हुई कानूनी कार्रवाई इनदिनों चर्चाओं में है। वास्तविक दोषी तक पहुंचने में नाकाम रही कानून प्रक्रिया ने निर्दोषों पर कहर ढा दिया। जेल में बन्द निर्दोष आरोपी किसी भी तरह से जांच की प्रक्रिया से गुजरने को तैयार हैं। अपनी समस्या को जन-जन तक पहुंचाकर न्याय की भीख मांग रहे हैं। 

बघौली पुलिस थाने के अन्तर्गत ग्रामसभा थोकमाधौ के मजरा पिपरीडीह में 29 मई 14 को घर के बाहर चारपाई पर सो रहे झब्बूलाल (60) पुत्र भिखारी की गोली लगने से मौत हुई थी जिसमें मृतक के परिजन ने गांव के ही संजय द्विवेदी पुत्र घासीराम, मनीष द्विवेदी पुत्र स्व राकेश द्विवेदी व डीह निवासी रमाकान्त शुक्ला पुत्र रामनरेश उर्फ बड़कौनू पर बघौली पुलिस थाने में अपराध संख्या 157/14 धारा 302आईपीसी के तहत मामला दर्ज कराया था। 

घटना को लेकर चर्चाओं पर गौर करें तो यह मामला पूरी तरह फर्जी था। योजनाबद्ध तरीके से इन तीनों लोगों को फंसाने के लिए फायर मार कर केस बनाया जा रहा था। निशाना चूकने से घटना असलियत में हो गई। इस केस को बनाने वाले को पुलिस ने बहुत ढूंढा मगर आज तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई। अपना बचाव करते हुए जानबूझकर पुलिस के सक्षम अधिकारी ने निर्दोष पर कानून का चाबुक चला दिया। आखिरकार वह तीनों लोग जेल पहुंच गए, जिनका इस घटना से कोई लेना-देना नहीं था। 

कारण पर गौर करें। पहला यह कि घटना प्रधानी चुनाव की रंजिश से जुड़ी हुई थी। दूसरा यह कि आरोपी संजय आदि गांव न रहकर बघौली कस्बे में रहने लगे थे। उनकी जमीन पर लोगों ने मनमर्जी से निर्माण कराना शुरू कर दिया था। एक दिन उन्होंने उसका विरोध किया और अपनी जमीन से कब्जेदारों को हटवा दिया था। 

बघौली पुलिस थाने में तैनात रहे थानाध्यक्ष लालता प्रसाद साहू के कार्यकाल में हुई घटना की विधिवत जांच में घटना के आरोपी निर्दोष पाए गए। थानाध्यक्ष रहे आरपी सोनकर ने जांच के दौरान घनश्याम को दोषी पाया। परशुराम कुशवाहा ने इस मामले की तफ्तीश की, जिसमें भी किसी भी तरह पीड़ित की तहरीर खरी नहीं पाई गई। 

मौजूदा थानाध्यक्ष जावेद अहमद ने नामित तीनों लोगों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं पाया। घनश्याम की खोजबीन की, न मिलने पर अदालत से एनपीडब्लयू जारी कराया। घनश्याम ने अदालत में समर्पण की बात कही और हाजिर न होने पर दफा 82 की कार्यवाही हुई। घनश्याम ने वादी से मिलकर हाईकोर्ट में प्रार्थनापत्र दिला दिया। जहां से पुलिस कप्तान हरदोई को जांच के लिए आदेशित किया गया लेकिन जांच एएसपी प्रदीप गुप्ता के द्वारा की गई जिसमें केवल वादी के बयानों के आधार पर निदोर्षों को जेल में ठूंस दिया गया। चालीस दिनों बाद भी जमानत नहीं हो पाई है।

हत्या के आरोपी संजय द्विवेदी ने जेल से भेजे गए पत्र में पूरी घटना को दर्शाते हुए लिखा है कि उसको किसी भी कसौटी पर जांच कर लिया जाए वह निर्दोष है। पत्र में समाज के सभी लोगों तक अपनी बात पहुंचाने और सहयोग की अपील की गई है। 

संजय द्विवेदी की पत्नी सर्वेश ने शासन-प्रशासन के उच्चाधिकारियों को लिखे गए पत्र में दशार्या है कि हाईकोर्ट ने हरदोई एसएसपी को स्वयं विवेचना करने के लिए निर्देशित किया था। जो जांच 13 महीनों में नहीं हो पाई, उसे एक महीने में पूरी कर कानून की धारा 164 के बयान पर हुई कार्यवाई में न्याय की गुहार लगाई है। 

संजय द्विवेदी और उसका भतीजा मनीश घर के जिम्मेदार थे। उन दोनों के जेल में होने से परिवार घर-गृहस्थी से लेकर कानूनी मसलों के लिए दर-बदर भटकने को मजबूर है। नेहा व सोनम का रो- रोकर बुरा हाल है। दिव्यम की पापा की याद में हो रही बेचैनी घरेलू परेशानी का कराण बनी हुई है। 

सुधीर अवस्थी ‘परदेशी’ से संपर्क : [email protected]

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