मुसलमान होते हैं कैसे?

मैंने एक बार एक व्यक्ति से पूछा कि मुसलमान कैसे होते हैं? तो उसने बताया कि जो दंगा-फसाद और आतंक फैलाए वो मुसलमान है, जो 6-7 शादियां करके ज्यादा बच्चे पैदा करे वो मुसलमान है, जो हिंदू लड़की से शादी करके धर्म परिवर्तन करवाए, वो मुसलमान होता हैं और भी बहुत कुछ बोला था लेकिन मुझे याद नहीं है। उस व्यक्ति की बातों ने मेरे दिमाग पर गहरा असर किया। मैं सोचने लगा कि वाकई अगर मुसलमान ऐसे होते हैं तो मुझे उनसे दूर रहना चाहिए। उस व्यक्ति की बातें मेरे दिमाग में चल ही रही थीं कि मैं चाय पीने चला गया।

वो चायवाला एक मुसलमान था। मैं डर गया और वहां से जाने लगा लेकिन उस चायवाले ने मुझको जबरन चाय ला दी और इतनी तमीज से बात की कि मुझे लगा ही नहीं कि ये मुसलमान हैं क्योंकि उस व्यक्ति ने तो मुझे अलग ही बताया था मुसलमानों के बारे में। लेकिन ये तो बिल्कुल उसका विपरीत था। अब मुझे मुसलमानों के बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ गई। मैंने कई लोगों से पूछा। बहुत से लोगों ने मुझे उस व्यक्ति की तरह ही बताया।

मेरे मन में उत्सुक्ता बढती गई। फिर मैंने इंटरनेट पर देखा। अखबार पढ़े, जिसमें कई नेताओं के बयान थे कि ज्यादातर दंगों का कारण मुसलमान होते हैं। मुझे बहुत बुरा लग रहा था। मैं सोच रहा था कि बचपन नें मुझे पढ़ाया गया था कि हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई आपस में सब भाई-भाई, और हम भारत में रहते हैं, जहां पर सभी धर्मों को एक समान माना जाता है क्योंकि भारत धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है लेकिन जैसे ही मैं बड़ा हुआ तो ये सारी बचपन की पढ़ाई गलत क्यों साबित हो गई। इस्लाम भी एक धर्म है और वो हमारे देश का हिस्सा है तो फिर हम उनके बारे में ऐसी गलत धारणा क्यों रखते हैं। 

आखिर क्या वजह है इसकी, मुसलमान और आतंकवाद एक दूसरे के पर्याय बन गए और हिंदू और मुस्लिम विलोम बन गए। फिर मैंने कई जगह पढ़ा और सोचा कि वाकई आज जो आतंकवाद फैल रहा है, जिस तरह की घटनाएं हो रही हैं, उनमें से बहुत सी घटनाओं का कारण मुसलमान है।

फिर मैंने सोचा कि नहीं ऐसा नहीं है। भारत में अभी तक 12 में से 3 राष्ट्रपति मुस्लिम थे। कई बड़े-बड़े नेता मुस्लिम हैं। बॉलीवुड और खेल की दुनिया में भी ना जाने कितने मुस्लिम हैं। और ऐसे कई नाम और व्यक्ति हैं, जिन्होंने मुसलमान होकर भी देश के लिए बहुत कुछ किया है। फिर भी हम ऐसा क्यों कहता हैं कि मुसलमान ने हमें आतंकवाद के अलावा और कुछ नहीं दिया और सारे दंगे-फसाद की जड़ मुसलमान ही हैं? 

मुझे याद है, शाहरूख खान की एक फिल्म है माय नेम इज़ खान। और इस फिल्म में एक डायलॉग है MY NAME IS KHAN AND I AM NOT A TERRORIS. इस डायलॉग ने दुनियाभर के मुसलमानों को इस फिल्म को देखने के लिए मजबूर कर दिया था। उसका कारण पता है क्यों? क्योंकि शाहरूख ने दुनियाभर के मुसलमानों की बात को उस फिल्म के एक डायलॉग में कह दिया था। और मुझे इतना तो विश्वास है कि दुनिया का हर मुसलमान यही चाहता है कि उसे कोई भी घृणा की नजरों से न देखे।

 प्रियंक द्विवेदी

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Comments on “मुसलमान होते हैं कैसे?

  • कमलेश कुमार says:

    बहुत ही अच्छा लेख लिखा हेै प्रियंक जी ने… अगर सभी ऐसा ही सोचने लगे तो शायद लोगों के दिलो- दिमाग से हीन भावना निकल जाएगी…और फिर से हम कहेंगे हिंदू, मुस्लिम, सिख ईसाई आपस में हम भाई-भाई….. 🙂

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  • Awesome brother hum musalman bhi insan hi he lekin kuchh logo ke karan hame hevan bana diya gaya he agar apke jesi soch sabhi me aa jaye to Bharat me aman hi aman hoga

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  • Pawan Kumar says:

    Bahut galat kaha aapne. Musalman jaha bhi majority me ho jaate hai waha dusro Ko jeene nahi dete. Kisi bhi Muslim Desh ka example dekh lo. Muslim tab tak shaat hai jab tak we sankhya me Kam hai. Thodi sankhya jyada Hui to samjho dange fasad hona shuru ho Gaye. Shayad tum Indian media ya local news paper hi Padhte ho. Kabhi Bangladeshi Hinduo ke baare me padha hai.? Padh Lena.
    Musalman Desh ka nahi , sirf Islam ke hote hai. Aur ek do example jo tum news papers se utha kar laate ho Sab fake hote hai. Jo baat jagjahir hai oose prove karne ki jarurat nhi hoti.
    Jin musalmano ki baat tum kar rahe ho, jaise ki APJ Abdul Kalam, Geeta padha karte the na ki Shaitani kitab (Quraan).
    Aur jitne bhi musalman Jinhone dusro ke dilo me jagah banayi hai, Sab Islam ki asliyat Ko samajh chuke the.
    Lekin unhone Dharm ke Naam par kuch nahi Kiya ulta khud achha Bankar Islam Ko achha batane ki koshish ki.
    Mature Bano aur Islam Ko pahchano aur iska bahishkar karna aaj se hi shuru kar do. Warna hinduo ke ke haal Bangladeshi aur Pakistani hinduo jaise ho jayenge , ismae koi Shak nahi hai.

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