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सियासत

नटवर सिंह को खून के आंसू रुलाने वाली सोनिया गांधी खुद किताब लिखकर एक और भूल करेंगी

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी अब नटवर सिंह की प्रतिक्रिया में जवाबी किताब लिखेंगी। अवश्य लिखिए। हमें उसकी प्रतीक्षा रहेगी। नटवर सिंह को जिस तरह सोनिया गांधी के सिपाहसालारों ने बाहर किया था वह दृश्य मैं उसी तरह नहीं भूलता जैसे सीताराम केसरी को अध्यक्ष पद से हटाने और कार्यालय से भगाने का दृश्य। जो व्यक्ति जीवन भर उस परिवार के साथ रहा, राजनयिक के बाद नेता बनने के साथ हमेशा कांग्रेस में रहा….उसे वोल्कर रिपोर्ट के बाद यानी इराक से तेल के खेल में जिस तरह बलि का बकरा बनाया गया उसका जवाब देने का अधिकार तो उसे है। आखिर नटवर सिंह पर गलत तरीके से सद्दाम हुसैन से तेल का कूपन लेकर धन कमाने और अपने रिश्तेदारों को कमाने देने का आरोप है। उनके बेटे को इसका मुख्य सूत्रधार बताया गया था। कल रात मैंने एक टिप्प्णी लिखी थी।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी अब नटवर सिंह की प्रतिक्रिया में जवाबी किताब लिखेंगी। अवश्य लिखिए। हमें उसकी प्रतीक्षा रहेगी। नटवर सिंह को जिस तरह सोनिया गांधी के सिपाहसालारों ने बाहर किया था वह दृश्य मैं उसी तरह नहीं भूलता जैसे सीताराम केसरी को अध्यक्ष पद से हटाने और कार्यालय से भगाने का दृश्य। जो व्यक्ति जीवन भर उस परिवार के साथ रहा, राजनयिक के बाद नेता बनने के साथ हमेशा कांग्रेस में रहा….उसे वोल्कर रिपोर्ट के बाद यानी इराक से तेल के खेल में जिस तरह बलि का बकरा बनाया गया उसका जवाब देने का अधिकार तो उसे है। आखिर नटवर सिंह पर गलत तरीके से सद्दाम हुसैन से तेल का कूपन लेकर धन कमाने और अपने रिश्तेदारों को कमाने देने का आरोप है। उनके बेटे को इसका मुख्य सूत्रधार बताया गया था। कल रात मैंने एक टिप्प्णी लिखी थी।

उस प्रकरण के प्रत्येक पहलू पर तब मैंने रोज लिखा था। नटवर सिंह के खिलाफ क्या नहीं हुआ। आयकर, प्रवर्तन निदेशालय, सतर्कता आयोग…..सब लगे थे। हालांकि नटवर सिंह ने किताब लिखने का निर्णय शायद तब किया जब उन्हें यह विश्वास हो गया कि अब कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार जाने वाली है। लेकिन आपने उसका ऐसा घातक अपमान किया, उसे मुख्यधारा से बाहर फेंक दिया, उसे जेल भिजवाने तक का आधार बना दिया…..और अब आप चाहतीं हैं कि वह किताब के कुछ अंश बाहर न लायें। क्यों?

हालांकि मैं नटवर सिंह के इस दावे को पूरी तरह स्वीकार नहीं करता हूं कि सोनिया गांधी केवल राहुल गांधी के दबाव में प्रधानमंत्री नहीं बनी। दबाव भी रहा होगा। लेकिन उस समय का आंदोलन न भूलिए। खैर, इस पर आगे चर्चा करेंगे। हमें सोनिया गांधी की किताब की प्रतीक्षा रहेगी। आखिर 18 मई 2004 को उनने अंतरात्मा की आवाज से प्रधानमंत्री पद न स्वीकार करने की घोषणा की थी…..। उसे ही सही साबित करेंगी। लेकिन करें तो सही। क्या वह इसका भी खंडन करेंगी कि प्रधानमंत्री कार्यालय से महत्वपूर्ण फाइलें उनके घर जातीं थीं? क्या वह यह भी गलत साबित करेंगी कि कांग्रेस में उनके शब्द ही नियम और सिद्धांत थे और हैं?…..देखना है। लेकिन यह पहली बार होगा जब उस परिवार का कोई व्यक्ति अपनी सफाई में किताब लिखेगा। जीवन की एक और भूल!!

वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार के फेसबुक वॉल से.

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