बड़े बे-आबरू हो के रुख़सत हुए दरोगाजी, आधी रात को समेटना पड़ा बोरिया-बिस्तर

इलाहाबाद। गंभीर अपराधों को लेकर प्रदेश में सुर्खियां बटोरने और मनमानी कार्यप्रणाली के लिए कुख्यात हो चले नवाबगंज एसओ को आखिरकार अफसरों के कोपभाजन का शिकार होना ही पड़ा। आधी रात को सख्त निर्देश मिलने के बाद एसओ को उसी वक्त अपना बोरिया बिस्तर समेटना पड़ा। रात को चैन की नींद सोए नवाबगंज एसओ पंकज सिंह को शायद सपने में भी आभास नहीं था कि आने वाली उनकी सुबह यमुनापार के पथरीले इलाके शंकरगढ़ में बीतेगी।

याद दिला दें कि कौडि़हार के कछारी इलाके करीमुद्दीनपुर गांव में दिनदहाड़े घुड़सवार बदमाशों की अधाधुंध फायरिंग से चार लोगों के घायल होने और बाद में वहां पीएसी, घुड़सवार फोर्स की तैनाती का मामला रहा हो या भगौतीपुर के सरखेलपुर में दलित युवक बजरंगी के बेगारी से इंकार करने पर उसे जिंदा दफनाने की कोशिश का मामला। मेंडारा में वर्चस्व को लेकर दिनदहाड़े फायरिंग में समूचे गांव में दहशत और स्थानीय पुलिस की अनदेखी के चलते दुबारा उसी गांव में उसी रात दोनों गुटों की जबर्दस्त फायरिंग में दलित युवक अनूप की मौत।

सम्हई के बगल उपाध्याय का पूरा गांव में एक मासूम बच्चे के पेड़ से गिरे अमरूद खाने के बाद दो परिवारों के बीच मामूली कहासुनी का जातीय संघर्ष में बदल जाना और एक बुजुर्ग महिला की मौत व आधे दर्जन मकानों में पथराव, राजमार्ग पर चक्काजाम सरीखे आधे दर्जन से ज्यादा मामले सुर्खियों में रहे। खास बात यह रही कि इन मामले में पुलिस अफसरों की चुप्पी से कई तरह की चर्चाओं को बल मिलने लगा था।

प्रदेश के एक बाहुबली और कैबिनेट मंत्री की कथित नजदीकी के चलते अफसरों पर उनके रसूख और दबाव की भी इलाके में खासी चर्चा रही। इन सबको लेकर बड़ा ही गलत संदेश जा रहा था। 14 सितंबर को रात करीब बारह बजे अचानक जिले के एक बड़े अफसर के फरमान के बाद विवादास्पद एसओ को आखिरकार नवाबगंज थाने से हटना ही पड़ा।

पंकज सिंह को शंकरगढ़ भेजा गया है जबकि नवाबगंज में थानेदार की कमान अंजनी कुमार राय को दी गई है। थानेदार राय इसके पहले क्राइम ब्रांच में थे।

 

इलाहाबाद से शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट।



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