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प्रणय-राधिका का मालिकाना हक-पद बना रहेगा, NDTV के खिलाफ सेबी के आदेशों पर सैट की रोक

एनडीटीवी को सिक्योरिटी अपीलेट ट्रिब्यूनल (सैट) से राहत मिल गई है।सैट ने कंपनी के तीन प्रमोटर, प्रणय रॉय, राधिका रॉय और उनकी होल्डिंग कंपनी को कैपिटल मार्केट से दो साल के लिए प्रतिबंधित करने और और प्रणय रॉय और राधिका रॉय को कंपनी के बोर्ड आफ डायरेक्टर से तत्काल हटने के सेबी के आदेश को स्थगित कर दिया है।सैट ने रॉय दंपति और आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड की अपीलों को 16 सितंबर 2019 को सुनवाई के लिए लिस्ट किया है।सैट ने यह भी निर्देश दिया कि इस दौरान अपील दायर करने वाले लोग एनडीटीवी में अपनी हिस्सेदारी बेचने का प्रयास नहीं कर सकते हैं।प्रणव एवं राधिका रॉय ने वर्ष 1988 में एनडीटीवी की स्थापना की थी।

सैट ने सुनवाई के दौरान कहा कि दो साल तक के लिए प्रणय और राधिका रॉय पर एनडीटीवी में निदेशक या महत्वपूर्ण प्रबंधन स्तरीय पद पर बने रहने की रोक न तो शेयरधारकों के हित में है और न ही एनडीटीवी के निदेशकों के हित में. इसी लिए सैट ने इस आदेश पर रोक लगा दी।

गौरतलब है कि 14 जून को सेबी ने एनडीटीवी के तीन प्रमोटरों को दो साल के लिए कैपिटल मार्केट से प्रतिबंधित कर दिया था।साथ ही इस अवधि के दौरान प्रणय रॉय और राधिका रॉय पर कंपनी के बोर्ड में या शीर्ष प्रबंधन स्तर पर बने रहने पर भी रोक लगाई गई थी। रॉय दंपति के किसी अन्य लिस्टेड कंपनी के बोर्ड या प्रबंधन स्तर के पद पर एक साल तक नियुक्ति की भी रोक लगाई गई थी।सेबी ने रॉय दंपत्ति को आरआरपीआर होल्डिंग्स के माइनॉरिटी शेयरधारकों को तीन ऋण करारों के बारे में सूचित न करने पर भी आड़े हाथों लिया था।

सैट ने प्रणय-राधिका तथा आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड की अपील पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। सैट ने कहा कि प्रणय रॉय और राधिका रॉय के निदेशक पद या मुख्य प्रबंधक पोस्ट पर बैठने का मसला किसी भी रूप में शेयरहोल्डरों और निवेशकों के हितों से जुड़ा हुआ नहीं है। इसलिए इससे जुड़े आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगायी जाती है। इसका अर्थ है कि दोनों पति-पत्नी का अपनी कंपनी पर अब मालिकाना हक बना रहेगा और दोनों अपने पदों पर बने रह सकते हैं।

सेबी को 2017 में एनडीटीवी की एक शेयरधारक क्वांटम सिक्यॉरिटीज से शिकायत मिली थी कि प्रमोटरों ने लोन अग्रीमेंट के मटीरियल इन्फर्मेशन का खुलासा नहीं करके नियमों का उल्लंघन किया है। सेबी ने इस शिकायत पर अक्टूबर 2008 से नवंबर 2017 के दौरान एनडीटीवी की गतिविधियों की जांच की जब रॉय दंपती और आरआरपीआर होल्डिंग्स एनडीटीवी के प्रमोटर थे। 2009 की पहली तिमाही के आखिर में इन प्रमोटरों का एनडीटीवी में 63.17 प्रतिशत शेयर था।

सेबी का कहना था कि प्रणय रॉय और राधिका रॉयने सारे काम निवेशकों को अंधेरे में रख कर किया है। उसने इस सिलसिले में तीन ऋण का उदाहरण दिया है।इसमें एक आईसीआसीआई से लिया गया था जबकि दो लोन एक दूसरे छोटे निकाय विश्वप्रधान कामर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (वीसीपीएल) से लिया गया था।सेबी ने कहा कि एनडीटीवी के प्रमोटरों ने कुल तीन लोन अग्रीमेंट किए- एक आईसीआईसीआई बैंक के साथ और दो वीसीपीएल के साथ। इन अग्रीमेंट्स में मटीरियल और प्राइस सेंसिटिव इन्फर्मेशन थे। सेबी ने पिछले साल वीसीपीएल को निर्देश दिया था कि वह एनडीटीवी को ओपन ऑफर दे क्योंकि उसने लोन अग्रीमेंट्स के जरिए एनडीटीवी पर पिछले दरवाजे से नियंत्रण हासिल कर लिया। दिल्ली की होलसेल ट्रेडिंग कंपनी वीसीपीएल ने सेबी को कहा कि उसने रिलायंस स्ट्रैटिजिक इन्वेस्टमेंट लि. से लोन दिलाया था जो रिलायंस इंडस्ट्री लि. (आरआईएल) की सब्सिडियरी है। वीसीपील पर नाहटा ग्रुप का मालिकाना हक है।दिल्ली की थोक व्यापार कंपनी वीसीपीएल का गठन 2008 में हुआ था. इसका स्वामित्व रिलायंस इंडस्ट्रीज से नहाटा समूह के पास चला गया था।बाद में मुकेश अंबानी की कंपनी ने इसी कंपनी से 2010 में इन्फोटेक ब्रॉडबैंड का अधिग्रहण किया था, जिसके जरिए वह दूरसंचार कारोबार में उतरी थी।

इलाहाबाद के वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट.

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