हिंदुस्तान अखबार के चक्कर में जिले भर में बदनाम हो गया एक ग्रामीण पत्रकार

बरेली हिन्दुस्तान ने एक एजेंट पर टारगेट पूरा करने का दबाव बनाया. इसके तहत लाखों के विज्ञापन छपवा दिए. जब पेमेंट नहीं मिला तो एजेंट की ही तस्वीर छापकर दो बार पूरे जिले को बता दिया कि इसका हिन्दुस्तान के साथ कोई लेना-देना नहीं है. मामला बदायूं जिले का है. यहां के थाना सिविल लाइंस व ब्लाक सलारपुर इलाके के गांव बरातेगदार में रहने वाले नीरज राठौर जिले में हिंदुस्तान अखबार की लांचिंग के समय से ही स्थानीय एजेंट और स्थानीय पत्रकार हैं. उनकी डेटलाइन सिलहरी से तमाम खबरें भी प्रकाशित हो चुकी हैं.

साल 2014 से जून 2017 तक यहां तैनात रहे तत्कालीन ब्यूरो इंचार्ज जगमोहन शर्मा से नीरज राठौर के खास संबंध थे. संस्थान ने अमर उजाला और दैनिक जागरण की तर्ज पर समूचे ब्लाक के प्रधानों व सचिवों का विज्ञापन छापने का टारगेट नीरज को दे डाला. ब्यूरो प्रभारी ने भी संस्थान को आश्वस्त किया कि नीरज से टारगेट पूरा करवा लिया जाएगा. जून में जगमोहन को कुछ आरोपों के कारण संस्थान ने निकाल दिया. नतीजतन नीरज अकेले पड़ गये और पेमेंट अटक गया.

संस्थान ने इसी आरोप में नीरज के खिलाफ पहले मुकदमा दर्ज कराने का निर्णय लिया. पर वादी बनने के लिए एचआर, विज्ञापन विभाग या संपादकीय विभाग में कोई राजी नहीं हुआ. ऐसे में विज्ञापन छापकर नीरज को तीन लाख चार हजार 687 रुपये का बकाएदार बता दिया. यह भी कहा गया है कि नीरज से संबंधित किसी भी लेनदेन का जिम्मेदार हिन्दुस्तान नहीं होगा. यह भी माना जा रहा है कि अन्य बकाएदार एजेंटों पर दबाव बनाने के लिए हिन्दुस्तान ने यह कदम उठाया है.

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