रवीश ने ‘हिंदुस्तान’ की आज कर दी तगड़ी समीक्षा, शशिजी आप भी पढ़ लें!

Ravish Kumar : रफाल पर ख़बर तो पढ़ी लेकिन क्या हिन्दुस्तान के पाठकों को सूचनाएँ मिलीं… हिन्दुस्तान अख़बार ने रफाल मामले को लेकर पहली ख़बर बनाई है। ख़बर को जगह भी काफी दी है। क्या आप इस पहली ख़बर को पढ़ते हुए विवाद के बारे में ठीक-ठीक जान पाते हैं? मैं चाहता हूं कि आप …

शोभना भरतिया के हिन्दुस्तान अखबार में करोड़ों रुपये का पीएफ घोटाला!

प्रधानमंत्री व केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त करा रहे हैं पूरे मामले की जांच, मजीठिया क्रांतिकारी निर्मल कान्त शुक्ला ने की साक्ष्यों सहित पीएम, श्रम मंत्री, केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त से शिकायत, जांच अधिकारी के नोटिस पर हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड ने दस्तावेज व रिकार्ड देने को मांगा समय कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद …

क्या खनन घोटाले में हिंदुस्तान अखबार के संपादक शशिशेखर का भी नाम है?

खनन घोटाले में एक बड़े संपादक का नाम होने की चर्चाएं तो काफी दिनों से हैं लेकिन ये संपादक महोदय कोई और नहीं बल्कि दैनिक हिंदुस्तान अखबार के प्रधान संपादक शशि शेखर जी हैं, इसको लेकर बातें-चर्चाएं बस चंद घंटों पहले शुरू हुई हैं. इंडिया स्पीक्स डेली डॉट कॉम नामक वेबसाइट ने तो खुलकर छाप …

कोर्ट से बहाल सैकड़ों मीडियाकर्मियों को एचटी प्रबंधन ने खाली मैदान व गोदाम में कराया ज्वाइन (देखें वीडियो)

हिंदुस्तान टाइम्स कर्मचारियों के साथ एक और बड़ा धोखा… सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 272 कर्मचारियों को हिंदुस्तान टाइम्स ने विदाउट प्रोड्यूस अप्वाइंटमेंट लेटर जारी किए हैं जिसमें कर्मचारी को 14 जनवरी से नौकरी पर रखने के लिए जिस स्थान का ऐड्रस (खसरा नंबर 629 कादीपुर विलेज दिल्ली) लिखा है, वहां गोदाम और खाली …

हिंदुस्तान, मेरठ के नीरज शुक्ला और सुभाष सिंह के खिलाफ लेबर कोर्ट में मुकदमा

मेरठ : हिन्दुस्तान अखबार के खिलाफ ऋषभ अग्रवाल ने श्रम विभाग में वाद दायर कर रखा है. श्रम विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर सुमित कुमार के समक्ष ऋषभ अग्रवाल 29 दिसम्बर को उपस्थित हुए. उन्होंने हिंदुस्तान अखबार के बिजनेस हेड नीरज शुक्ला और सुभाष सिंह मोहरी द्वारा किये गये उत्पीड़न, अनुचित व्यवहार व जबरदस्ती नौकरी से …

एचटी बिल्डिंग के सामने धरना देते हुए मरे मीडियाकर्मी का पुलिस ने लावारिस के रूप में किया अंतिम संस्कार

रविंद्र को नहीं मिल पाया अपनों का कंधा… साथियों का आरोप- HT प्रबंधन के दबाव में पुलिस ने लावारिस के रुप में किया अंतिम संस्‍कार… नई दिल्‍ली। 13 साल तक न्‍याय के लिए संघर्ष करने के बाद बुधवार की अंधेरी रात में मौत की आगोश में हमेशा-हमेशा के लिए सो जाने वाले हिंदुस्‍तान टाइम्‍स के कर्मी रविंद्र ठाकुर को ना ही परिजनों का और ना ही अपने संघर्ष के दिनों के साथियों का कंधा मिल पाया। मंगलवार धनतेरस के दिन दिल्‍ली पुलिस ने उसकी पार्थिव देह का अं‍तिम संस्‍कार कर दिया। उसके अंतिम संस्‍कार के समय न तो उसके परिजन मौजूद थे और न ही उसके संस्‍थान के साथी।

ब्रेकिंग न्यूज़ लिखते-लिखते जब हम खुद ही ब्रेक हो गए…

Ashwini Sharma :  ”ब्रेकिंग न्यूज़ लिखते लिखते जब हम खुद ही ब्रेक हो गए…, अपनों ने झाड़ा पल्ला जो बनते थे ख़ुदा वो भी किनारे हो गए..” साल 2005 में मुंबई इन टाइम न्यूज़ चैनल के बंद होने के बाद मैंने ये पंक्तियां लिखी थीं..तब मेरे साथ इन टाइम के बहुत से पत्रकार बेरोज़गार हुए थे..कुछ को तो नौकरी मिल गई लेकिन कुछ बदहाली के दौर में पहुंच गए..वैसे ये कोई नई बात नहीं है कई चैनल अखबार बड़े बड़े दावों के साथ बाज़ार में उतरते हैं..बातें बड़ी बड़ी होती हैं लेकिन अचानक गाड़ी पटरी से उतर जाती है..जो लोग साथ चल रहे होते हैं वो अचानक मुंह मोड़ लेते हैं..जो नेता अफसर कैमरा और माइक देखकर आपकी तरफ लपकते थे वो भी दूरी बना लेते हैं..

निष्ठुर एचटी प्रबंधन ने नहीं दिया मृतक मीडियाकर्मी के परिजनों का पता, अब कौन देगा कंधा!

नई दिल्ली। अपने धरनारत कर्मी की मौत के बाद भी निष्ठुर हिन्दुस्तान प्रबंधन का दिल नहीं पिघला और उसने दिल्ली पुलिस को मृतक रविन्द्र ठाकुर के परिजनों के गांव का पता नहीं दिया। इससे रविन्द्र को अपनों का कंधा मिलने की उम्मीद धूमिल होती नजर आ रही है।

एचटी बिल्डिंग के सामने सिर्फ एक मीडियाकर्मी नहीं मरा, मर गया लोकतंत्र और मर गए इसके सारे खंभे : यशवंत सिंह

Yashwant Singh : शर्म मगर इस देश के मीडिया मालिकों, नेताओं, अफसरों और न्यायाधीशों को बिलकुल नहीं आती… ये जो शख्स लेटा हुआ है.. असल में मरा पड़ा है.. एक मीडियाकर्मी है… एचटी ग्रुप से तेरह साल पहले चार सौ लोग निकाले गए थे… उसमें से एक ये भी है… एचटी के आफिस के सामने तेरह साल से धरना दे रहा था.. मिलता तो खा लेता.. न मिले तो भूखे सो जाता… आसपास के दुकानदारों और कुछ जानने वालों के रहमोकरम पर था.. कोर्ट कचहरी मंत्रालय सरोकार दुकान पुलिस सत्ता मीडिया सब कुछ दिल्ली में है.. पर सब अंधे हैं… सब बेशर्म हैं… आंख पर काला कपड़ा बांधे हैं…

हिंदुस्तान अखबार के चक्कर में जिले भर में बदनाम हो गया एक ग्रामीण पत्रकार

बरेली हिन्दुस्तान ने एक एजेंट पर टारगेट पूरा करने का दबाव बनाया. इसके तहत लाखों के विज्ञापन छपवा दिए. जब पेमेंट नहीं मिला तो एजेंट की ही तस्वीर छापकर दो बार पूरे जिले को बता दिया कि इसका हिन्दुस्तान के साथ कोई लेना-देना नहीं है. मामला बदायूं जिले का है. यहां के थाना सिविल लाइंस व ब्लाक सलारपुर इलाके के गांव बरातेगदार में रहने वाले नीरज राठौर जिले में हिंदुस्तान अखबार की लांचिंग के समय से ही स्थानीय एजेंट और स्थानीय पत्रकार हैं. उनकी डेटलाइन सिलहरी से तमाम खबरें भी प्रकाशित हो चुकी हैं.

‘हिंदुस्तान’ के पत्रकार ने पत्र लिखकर आशंका जताई- ‘प्रबंधन के लोग मुझे जान से मारने की साजिश रच रहे हैं!’

सेवा में,

श्री विकास यादव

रीजनल एच.आर. मैंनेजर

हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लि0

मेरठ

विषयः-  गैरकानूनी जांच के बहाने हत्या का षड्यंत्र रचते हुए अपने परिसर में बुलाने को बाध्य करने के सम्बन्ध में।

मजीठिया वेज बोर्ड हड़पने वाले ‘हिंदुस्तान’ प्रबंधन ने डोमेस्टिक इनक्वायरी के नाम पर मीडियाकर्मी की प्रताड़ना शुरू की

सेवा में,
श्री विकास यादव
रीजनल एच.आर. मैनेजर
हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लि.
मेरठ ।

विषयः-  NON-LEGAL CHARGE SHEET-CUM-INTIMATION OF DOMESTIC ENQUIRY

महोदय,

आपके पत्र दिनांक 21.08.2017, जिसके द्वारा मुझे दिनांक 26.08.2017 को हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लि. के बरेली कार्यालय में डोमेस्टिक इन्क्वायरी में तलब करने की बात कही गयी है, के क्रम में सादर निवेदन करना है कि हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लि. ने उप श्रमायुक्त बरेली के आदेश दिनांक 31.03.2017 के बाद भी मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन व भत्ते आदि के एरियर की बकाया धनराशि 3251135.75/-रू0 मय बयाज अदा नहीं की है। धनराशि 3251135.75/-रू0 को अदा करने के वजाय मुझे शारीरिक, मानसिक, आर्थिक एवं सामाजिक रूप से परेशान करने को कथित मनगढंत, विधि विरूद्ध जांच की बात की जा रही है।

बहुत बड़े ‘खिलाड़ी’ शशि शेखर को पत्रकार नवीन कुमार ने दिखाया भरपूर आइना! (पढ़िए पत्र)

आदरणीय शशि शेखर जी,

नमस्कार,

बहुत तकलीफ के साथ यह पत्र लिख रहा हूं। पता नहीं यह आपतक पहुंचेगा या नहीं। पहुंचेगा तो तवज्जो देंगे या नहीं। बड़े संपादक तुच्छ बातों को महत्त्व नहीं दे। तब भी लिख रहा हूं क्योंकि यह वर्ग सत्ता का नहीं विचार सत्ता का प्रश्न है। एक जिम्मेदार पाठक के तौर पर यह लिखना मेरा दायित्व है। जब संपादक अपने अखबारों को डेरे में बदलने लगें और तथ्यों के साथ डेरा प्रमुख की तरह खेलने लगें तो पत्रकारिता की हालत पंचकुला जैसी हो जाती है और पाठक प्रमुख के पालित सेवादारों के पैरों के नीचे पड़ा होता है।

गैस सिलेंडर खत्म होने के बारे में दस दिन पहले ही ‘हिंदुस्तान’ ने आगाह कर दिया था!

गोरखपुर में गैस सिलेंडर खत्म होने से तीस बच्चों की मौत के मामले में नया तथ्य यह सामने आया है कि हिदुस्तान अखबार ने गोरखपुर एडिशन में गैस सिलेंडर खत्म होने के बारे में दस दिन पहले ही आगाह कर दिया था और इससे जु़ड़ी खबर में सारे तथ्यों का हवाला दिया था. बावजूद इसके भ्रष्ट, काहिल और जनविरोधी अफसर चुप्पी साधे रहे. सामूहिक बाल संहार का इंतजार करते रहे. यहां तक कि गैस सिलेंडर खत्म होने वाले दिन भी हिंदुस्तान अखबार में एक विस्तृत खबर का प्रकाशन किया गया.

धिक्कार है ‘हिंदुस्तान’ अखबार और इसके संपादक विश्वेश्वर कुमार पर!

बनारस से छप कर हिंदुस्तान अखबार गाजीपुर पहुंचता है. बनारस के संपादक हैं विश्वेश्वर कुमार. बेहद विवादित शख्सियत हैं. जहां रहें, वहीं इनके खिलाफ लोगों ने विद्रोह का बिगुल फूंका. भागलपुर में तो लोगों ने इनके खिलाफ लिखकर सड़कों को पोस्टरों बैनरों से पाट दिया था. ये समाचार छापने में राग-द्वेष का इस्तेमाल करते हैं. ये ‘तेरा आदमी मेरा आदमी’ के आधार पर आफिस का कामकाज देखते हैं. ताजी हरकत इनकी ये है कि इन्होंने अपने ही अखबार के रिपोर्टर को एक पूर्व मंत्री द्वारा धमकाए जाने की खबर को अखबार में नहीं छापा.

शशि शेखर जी, आपके अखबार ने ‘इंसाफ इंडिया’ संग जो नाइंसाफी की है, क्या उसकी भरपाई करेंगे?

‘इंसाफ इंडिया’ एक समाजिक न्याय पर काम करने वाला संगठन है. लेकिन दैनिक हिन्दस्तान अखबार ने इसे सिमी की तर्ज पर उभरता हुआ संगठन बता कर लंबा चौड़ा आर्टकिल छाप दिया. इस संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि हिंदुस्तान अखबार ने खबर में संगठन पर कई गंभीर, मंगढ़त और बेबुनियाद आरोप लगाए हैं. इसके चलते अखबार प्रबंधन को लीगल नोटिस भेजा गया है.

खुद अपनी तारीफ लिख और इसे विज्ञापन के रूप में छपवा कर मुकेश सिंह नामक शख्स साहित्यकार बन गया!

लोग जाने कौन कौन सा रोग पाल लेते हैं. खासकर वे लोग जो पैसा तो कमा लिए हैं, पर उनके दिल की कामना पूरी नहीं हुई. किसी की इच्छा साहित्यकार बनने की होती है तो किसी की सेलिब्रिटी. ऐसे में ये लोग अपनी आरजू के लिए भरपूर पैसा बहाकर खुद से ही खुद को साहित्यकार / सेलिब्रिटी घोषित कर लेते हैं.

हिन्दुस्तान का सालाना सकल राजस्व 1294 करोड़, फिर भी छठी कैटेगिरी

हिन्दुस्तान समाचार पत्र लगातार झूठ पर झूठ बोलने पर आमादा है। हिन्दुस्तान ने मजीठिया का लाभ देने से बचने के लिए अपने को गलत व मनमाने तरीके से 6वीं कैटेगिरी में दर्शाया है जबकि ये अखबार नंबर वन कैटेगिरी में आता है। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के संबंध में भारत सरकार से जारी गजट के पृष्ठ संख्या 11 पर खंड 2 के उपखंड (क) में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि किसी भी समाचार पत्र प्रतिष्ठान की विभिन्न इकाइयों/शाखाओं/कंपनियों को समाचार पत्र की एकल इकाई ही माना जाएगा, चाहे उनके नाम अलग-अलग ही क्यों न हों।

इन दोनों बड़े अखबारों में से कोई एक बहुत बड़ा झुट्ठा है, आप भी गेस करिए

हिंदुस्तान और दैनिक जागरण अखबारों ने एक रोज पहले पन्ने पर लीड न्यूज जो प्रकाशित की, उसके फैक्ट में जमीन-आसमान का अंतर था. हिंदुस्तान लिख रहा है कि यूपी में सड़कों के लिए केंद्र ने पचास हजार करोड़ रुपये का तोहफा दिया वहीं दैनिक जागरण बता रहा है कि सड़कों के लिए राज्य को दस हजार करोड़ रुपये मिलेंगे. आखिर दोनों में से कोई एक तो झूठ बोल रहा है.

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में ‘हिंदुस्तान’ अखबार को क्लीनचिट देने वाली शालिनी प्रसाद की झूठी रिपोर्ट देखें

यूपी में अखिलेश यादव सरकार के दौरान श्रम विभाग ने झूठी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को दी है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि एचटी मीडिया और एचएमवीएल कंपनी यूपी में अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ की सभी यूनिटों में मजीठिया वेज बोर्ड को लागू करके सभी कर्मचारियों को इसका लाभ देकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूरी तरह अनुपालन कर रही है. श्रम विभाग की यह रिपोर्ट उत्तर प्रदेश की तत्कालीन श्रमायुक्त शालिनी प्रसाद ने 06 जून 2016 को सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड के मामले में अखबार मालिकों के विरुद्ध विचाराधीन अवमानना याचिका संख्या- 411/2014 में सुनवाई के दौरान शपथपत्र के साथ दाखिल की है.

बिना रजिस्ट्रेशन हिंदुस्तान अखबार का मुंगेर संस्करण छापने पर मालिक, संपादक, प्रकाशक समेत कइयों के खिलाफ मुकदमा लिखने के आदेश

बिहार के मुंगेर से सूचना है कि दैनिक हिन्दुस्तान प्रबंधन द्वारा अखबार के फर्जी संस्करण का मुद्रण, प्रकाशन और वितरण के मामले में अदालत ने दैनिक हिन्दुस्तान के मालिक और अन्य के विरूद्ध धारा 420 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है. मुंगेर से पत्रकार श्रीकृष्ण प्रसाद ने बताया कि बिना रजिस्ट्रेशन ही फर्जी तरीके से दैनिक हिन्दुस्तान अखबार का मुंगेर संस्करण 20 अप्रैल 2012 को लांच किया गया और अब तक अखबार अवैध तरीके से छापा व बांटा जा रहा है.

‘हिन्दुस्तान’ अखबार को मजीठिया क्रांतिकारियों ने हराया, जीएम व संपादक की आरसी कटी

बरेली से बड़ी खबर आ रही है कि उपश्रमायुक्त ने हिन्दुस्तान के महाप्रबंधक और स्थानीय संपादक के खिलाफ मजीठिया बेज बोर्ड के अनुसार तीन कर्मचारियों के वेतन व एरियर की बकाया वसूली के लिए आरसी जारी कर जिलाधिकारी को भेज दी है। हिन्दुस्तान प्रबंधन को सोमवार को श्रम न्यायालय में करारी हार का सामना करना पड़ा। इस खबर से हिन्दुस्तान के उच्च प्रबंधन में हड़कंप मच गया है। हालांकि हिन्दुस्तान प्रबंधन सोमवार को आरसी का आदेश रिसीव होने तक उसे रुकवाने के लिए आला अफसरों के जरिये दबाव बनाने में लगा रहा।

हिन्दुस्तान अखबार ने किया पीएफ-डीए घोटाला, पीएम से शिकायत

हिन्दुस्तान अपने हजारों कर्मचारियों को महंगाई भत्ता न देकर पीएफ के अपने हिस्से के करोड़ों रुपये डकार गया। कर्मचारियों के पीएफ का जो बाजिब पैसा उसे भविष्यनिधि खाते में जमा होने चाहिए, वह आज तक हिन्दुस्तान अख़बार के प्रबंधन ने जमा ही नहीं किया है। केंद्र सरकार को ठेंगा दिखाकर हिन्दुस्तान अखबार अपने किसी भी कर्मचारी को डीए(महंगाई भत्ता) नहीं दे रहा है। ताकि पीएफ का पैसा पूरा न देना पड़े, इस घोटाले का खुलासा मजीठिया के योद्धा हिन्दुस्तान बरेली के चीफ रिपोर्टर पंकज मिश्रा, सीनियर कॉपी एडिटर मनोज शर्मा, सीनियर सब एडिटर निर्मल कान्त शुक्ला, सीनियर कॉपी एडिटर राजेश्वर विश्वकर्मा ने किया है।

हिन्दुस्तान टाईम्स के बिकने की खबर राज्यसभा में भी गूंजी

शोभना भरतिया के स्वामित्व वाले अखबार हिन्दुस्तान टाईम्स के रिलायंस के मुकेश अंबानी द्वारा खरीदे जाने का मुद्दा बुधवार को राज्यसभा में भी गूंजा। हालांकि अभी तक हिन्दुस्तान टाईम्स के बिकने की खबर पर न तो हिन्दुस्तान टाईम्स प्रबंधन ने अपना पक्ष रख रहा है और ना ही रिलायंस की ओर से आधिकारिक बयान आया है।

‘हिंदुस्तान’ अखबार से 6 करोड़ वसूलने के लखनऊ के अतिरिक्त श्रमायुक्त के आदेश की कापी को पढ़िए

लखनऊ के श्रम विभाग ने हिंदुस्तान के 16 पत्रकारों व कर्मचारियों को क़रीब 6 करोड़ रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया है. लखनऊ के एडिशनल कमिशनर बी.जे. सिंह व सक्षम अधिकारी डॉ. एमके पाण्डेय ने 6 मार्च को हिंदुस्तान के ख़िलाफ़ आरसी जारी कर दी और पैसा वसूलने के लिए ज़िलाधिकारी को अधिकृत कर …

हिन्दुस्तान रांची के हेचआर हेड ने मजीठिया मांगने वाले दो कर्मियों के साथ की बदतमीजी, कॉलर पकड़ हड़काया, गाली दी

हिन्दुस्तान अखबार प्रबंधन इन दिनों मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार बकाया मांगने वालों के खिलाफ लगातार दमन की नीति अपना रहा है और अपने ही किये वायदे से मुकर रहा है। रांची में मजीठिया वेज बोर्ड के अनुरूप वेतन और भत्ते मांगने वाले दो कर्मचारियों ने जब श्रम आयुक्त कार्यालय में क्लेम लगाया तो इनका ट्रांसफर कर दिया गया। जब ये लोग कोर्ट से जीते तो हिन्दुस्तान प्रबंधन को उन्हें वापस काम पर रखना पड़ा। तीन दिन बाद ही जब ये कर्मचारी कार्यालय आकर काम करने लगे तो उन्हें कार्मिक प्रबंधक ने कालर पकड़ कर अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुये जबरी ट्रांसफर लेटर थमाने का प्रयास किया।

यह शख्स जहां रहा वहां या तो बंटवारा हुआ, या वो अखबार तबाह होता चला गया!

Deshpal Singh Panwar : अगर ये खबर सच है कि हिंदुस्तान टाइम्स समूह को मुकेश अंबानी खरीद रहे हैं तो तय है कि अच्छे दिन (स्टाफ के लिए पीएम के वादे जैसे) आने वाले हैं। वैसे इतिहास खुद को दोहराता है… कानाफूसी के मुताबिक एक शख्स जो इस समूह के हिंदी अखबार में चोटी पर है वो जहां रहा वहां या तो बंटवारा हुआ, या वो अखबार तबाह होता चला गया।

मुंबई के बाद अब दिल्ली एचटी को भी रिलायंस को बेचे जाने की चर्चा

देश भर के मीडियामालिकों में हड़कंप, कहीं मुफ्त में ना अखबार बांटने लगे रिलायंस…

देश के सबसे बड़े उद्योगपति रिलायंस वाले मुकेश अंबानी द्वारा मुंबई में एचटी ग्रुप के अखबार मिन्ट और फ्लैगशिप हिन्दुस्तान टाईम्स खरीदने की चर्चा के बाद अब यह चर्चा भी आज तेजी से देश भर के मीडियाजगत में फैली है कि मुकेश अंबानी ने दिल्ली में भी हिन्दुस्तान टाईम्स के संस्करण को खरीद लिया है। हालांकि अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो पायी है। हिन्दुस्तान टाईम्स के दिल्ली संस्करण में कर्मचारियों के बीच आज इस बात की चर्चा तेजी से फैली कि रिलायंस प्रबंधन और हिन्दुस्तान टाईम्स प्रबंधन के बीच कोलकाता में इस खरीदारी को लेकर बातचीत हुयी जो लगभग सफल रही और जल्द ही हिन्दुस्तान टाईम्स पर रिलायंस का कब्जा होगा।

मीडियाकर्मियों ने मांगी छुट्टी तो ‘हिन्दुस्तान’ के संपादक ने दी गालियां!

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर प्रबंधन से मांगने पर स्वामी भक्त संपादकों को भी बुरा लग रहा है। सबसे ज्यादा हालत खराब हिन्दुस्तान अखबार की है। खबर है कि हिन्दुस्तान अखबार के रांची संस्करण के दो कर्मियों अमित अखौरी और शिवकुमार सिंह ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन प्रबंधन से मांगा तो यहां के स्वामी भक्त स्थानीय संपादक  दिनेश मिश्रा को इतना बुरा लगा कि उन्होंने पहले मजीठिया कर्मियों को ना सिर्फ बुरा भला कहा बल्कि एक कर्मचारी को तो गालियां भी दीं। बाद में इन दोनों कर्मचारियों ने विरोध किया तो उन्हें मौखिक रूप से स्थानीय संपादक ने कह दिया कि आप दोनों कल से मत आईयेगा।

विश्वेश्वर कुमार ने क्राइम बीट इंचार्ज अभिषेक त्रिपाठी की ली बलि

वाराणसी : अब बनारस में दिखा मजीठिया बाबा का प्रकोप। मजीठिया वेज बोर्ड का जिन्न समाचारपत्र कर्मचारियों की बलि लगातार ले रहा है। केंद्र व राज्य सरकारों को अपने ठेंगे पर नचा रहे अखबार मालिकों के सम्मुख सुप्रीम कोर्ट से क्या राहत मिलेगी, यह तो कोई नहीं जानता। लेकिन यह राहत कब मिलेगी और तब तक लोकत्रंत का तथाकथित चौथा पाया किस कदर टूट चुका होगा, इसका अहसास होने लगा है।