मद्रास हाईकोर्ट ने अख़बारों के वितरण पर रोक से इनकार किया

Jp singh

अखबार को छूने से नहीं फैलता संक्रमण, एहतियात के लिए धो सकते हैं हाथ…

कोरोना वायरस के साथ ही दुनिया भर में इससे जुड़ी अफवाहें भी बहुत तेजी से फैली हैं। सोशल मीडिया पर एक मैसेज बहुत तेजी से फैला कि अखबार छूने से कोरोना वायरस फैल सकता है। अखबार को छूने से संक्रमण हो सकता हैं। इसके बाद अखबार ही नहीं होम डिलिवरी के जरिये घर-घर पहुंचने वाला हर सामान छूने को लेकर लोगों के मन में सवाल उठने लगे।

हाकरों ने अखबार उठाना बंद कर दिया और अधिसंख्य पाठकों ने अखबार मंगाना बंद कर दिया। कोरोना वायरस के चलते देश भर में अखबारों की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है।.जान है तो जहान है कि भावना व्याप्त हो गयी। इस बीच मद्रास उच्च न्यायालय ने गुरुवार को राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन से प्रिंट मीडिया को दी गई छूट के खिलाफ दायर एक याचिका को खारिज करते हुए कहा कि केवल आशंका कि समाचार पत्र कोरोना वायरस फैला सकते हैं, नागरिकों के सूचना के अधिकार को प्रतिबंधित करने का आधार नहीं हो सकता है।

दरअसल अखबारों के प्रकाशन में इस्तेमाल होने वाला कागज कोरोना वायरस के खतरे से सुरक्षित है। अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसीपी) के अनुसार, जीवित कोशिकाओं के बाहर ज्याेदातर सतहों पर कोरोना वायरस लंबे समय तक जिंदा नहीं रह पाता है। कई वायरोलॉजिस्टस का कहना है कि जब आप अखबार छूते हैं तो संक्रमण फैलने की आशंका न के बराबर होती है। स्वा‍स्य्है विशेषज्ञों का कहना है कि करेंसी नोट, अखबार और पतले फैब्रिक के जरिये संक्रमण फैलने की आशंका ना के बराबर है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना वायरस करेंसी नोट, कपड़े और पतले कागज पर लंबे समय तक जिंदा नहीं रह सकता है, क्योंरकि इन सभी चीजों की सतह से हवा गुजर सकती है। ऐसे में वायरस को अपनी ऊपरी सुरक्षा परत को बचाए रखना मुश्किल हो जाता है और वो खत्म हो जाता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि ऐसी चीजों में रिक्त स्थान या छेद सूक्ष्म जीव को फंसा सकते हैं और इसे आगे फैलने से भी रोक सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया गया है कि खिड़की-दरवाजे, फर्नीचर, लिफ्ट के बटन, सीढ़ियों की रेलिंग, पानी की बोतल और कांच के बर्तन छूने के बाद हाथों को साबुन से जरूर धोएं। लकड़ी, कांच, प्लास्टिक और धातु पर कोरोना वायरस के लंबे समय तक जीवित रहने के वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर विशेषज्ञों ने यह सलाह दी है।इंडियन काउंसिल ऑफ मेडियन रिसर्च (आईसीएमआर) के मुताबिक, लोगों को ऐसी अफवाहों पर ध्याडन की देने की कोई जरूरत नहीं है।इस महामारी से सबसे ज्याहदा प्रभावित देशों में भी अखबारों का प्रकाशन और वितरण बंद नहीं किया गया है।

मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस एन किरुबाकरन और जस्टिस आर हेमलता की पीठ ने अखबारों को बाँटने की दी गयी छूट के खिलाफ याचिका खारिज करते हुए कहा कि केवल आशंका या कम से कम संभावना, अखबारों के प्रकाशन पर रोक लगाने का आधार नहीं हो सकती क्योंकि यह न केवल प्रकाशक, संपादक बल्कि पाठकों के भी भारत के संविधान द्वारा अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के समान होगा।

याचिकाकर्ता द्वारा दायर विभिन्न शोध रिपोर्टों की पृष्ठभूमि में दावा किया गया था कि कागज, विशेष रूप से समाचार पत्र, कोरोना वायरस के संभावित वाहक हो सकते हैं। याचिकाकर्ता ने प्रस्तुत किया कि यदि समाचार पत्र प्रकाशित होते हैं और इसे पाठकों को दिया जाता है, तो वायरस फैलने की संभावना होती है, अगर पेपर डिलीवरी बॉय कोरोना वायरस से संक्रमित हो तो। अपने दावों को साबित करने के लिए, उन्होंने द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ़ मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन पर भरोसा किया, जिससे यह दावा किया गया कि वायरस अखबार पर 4-5 दिनों के लिए जीवित रह सकता है।

ऐसी सभी धारणाओं को खारिज करते हुए, पीठ ने कहा कि ऐसे सभी शोध प्रकृति में प्रारंभिक हैं और इस तरह, ये अटकलें निर्णायक नहीं हैं। पीठ ने कहा कि यह अभिलेखों और मीडिया से भी स्पष्ट है कि समाचार पत्रों के माध्यम से या कागज की सतह के माध्यम से वायरस का प्रसार इतना व्यापक नहीं है। जैसा कि अतिरिक्त एडवोकेट जनरल ने इस क्षेत्र में शोध को बहुत सीमित और न्यूनतम बताया है। जब प्रारंभिक अनुसंधान पर आधारित और उपलब्ध आंकड़ों के अभाव में, शोध बड़े पैमाने पर नहीं किए गए हैं और निर्णायक रूप से यह तय नहीं किया गया है, अगर प्रिंट मीडिया पर प्रतिबंध लगाया जाता है, तो यह देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों के खिलाफ जाएगा।

पीठ ने यह भी कहा कि जिन देशों में ये शोध हुए थे, उन देशों ने भी अखबारों के प्रकाशन पर रोक नहीं लगाई थी। पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि सूचना का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और इसलिए, प्रिंट मीडिया को प्रकाशन से प्रतिबंधित करने का कोई भी कदम नागरिकों के मौलिक अधिकारों के खिलाफ जाएगा।

वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट.



भड़ास व्हाट्सअप ग्रुप- BWG-10

भड़ास का ऐसे करें भला- Donate






भड़ास वाट्सएप नंबर- 7678515849

Leave a Reply

Your email address will not be published.

*

code