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निजी हाथों में मुनाफा देते पीएम

Nitin Thakur : डिजिटल इंडिया का अगुवा रिलायंस बना.. जबकि मौका बीएसएनएल के पास भरपूर था. कैशलेस इकोनामी का अवतार “रूपे” को बनना चाहिए था लेकिन बाजी पेटीएम के हाथ लगने दी गई. सरकारी संस्थानों को जानबूझकर प्राइवेट कंपनियों का पिछलग्गू बनाकर सरकार फायदा किसे पहुंचा रही है? अगर पालिसी में चेंज आ ही रहा है तो इसका मुनाफा सरकारी उपक्रमों को मिलने के बजाय निजी हाथों में क्यों दे रहे हैं?

<p>Nitin Thakur : डिजिटल इंडिया का अगुवा रिलायंस बना.. जबकि मौका बीएसएनएल के पास भरपूर था. कैशलेस इकोनामी का अवतार "रूपे" को बनना चाहिए था लेकिन बाजी पेटीएम के हाथ लगने दी गई. सरकारी संस्थानों को जानबूझकर प्राइवेट कंपनियों का पिछलग्गू बनाकर सरकार फायदा किसे पहुंचा रही है? अगर पालिसी में चेंज आ ही रहा है तो इसका मुनाफा सरकारी उपक्रमों को मिलने के बजाय निजी हाथों में क्यों दे रहे हैं?</p>

Nitin Thakur : डिजिटल इंडिया का अगुवा रिलायंस बना.. जबकि मौका बीएसएनएल के पास भरपूर था. कैशलेस इकोनामी का अवतार “रूपे” को बनना चाहिए था लेकिन बाजी पेटीएम के हाथ लगने दी गई. सरकारी संस्थानों को जानबूझकर प्राइवेट कंपनियों का पिछलग्गू बनाकर सरकार फायदा किसे पहुंचा रही है? अगर पालिसी में चेंज आ ही रहा है तो इसका मुनाफा सरकारी उपक्रमों को मिलने के बजाय निजी हाथों में क्यों दे रहे हैं?

चर्चित सोशल मीडिया राइटर नितिन ठाकुर की एफबी वॉल से.

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