चंदा कोचर के घोटाले से तीन ‘नीरव मोदी’ तैयार हो रहे हैं

दीपक कोचर, चंदा कोचर और वेणुगोपाल धूत चल दिए नीरव मोदी की राह पर उन्मेष गुजराथी, दबंग दुनिया मुंबई। आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर के घोटाले से तीन ‘नीरव मोदी’ तैयार हो रहे हैं। चंदा कोचर पर आरोप है कि उन्होंने बैंकों के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अपने पति के दोस्त वीडियोकॉन के …

सैनिकों और अर्ध-सैनिक बलों को बलि का बकरा बनाना देश के लिए घातक सिद्ध होगा

श्याम सिंह रावत

नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री बनना एक बहुत बड़ी राष्ट्रीय आपदा थी, जिसके दुष्परिणाम हर क्षेत्र में एक-एक कर सामने आ रहे हैं। उनकी 56″ की छाती कश्मीरी आतंकवादियों से निपटने में तो नाकाम हो चुकी है लेकिन देश के अन्य हिस्सों में उत्पात मचा रहे उपद्रवियों को सबक सिखाने में भी वे पूरी तरह असफल साबित हो रहे हैं। हालांकि कानून और व्यवस्था राज्यों का मामला है लेकिन जिस तरह कुछ एकदम स्थानीय स्तर के मामलों में स्थिति को नियंत्रित करने के स्थान पर उसे और भी विकराल बनने की छूट देकर देश के दूसरे हिस्सों में भी फैलने दिया गया, उसमें केद्र के हस्तक्षेप की पर्याप्त गुंजाइश होते हुए भी उसका आंख-कान बंद कर लेना किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जा सकता।

पीएम के गृहनगर में भाजपा फ्लॉप, गुजरात में 6 मंत्री चुनाव हारे, हिमाचल में भाजपा के भावी सीएम हारे

पीके खुराना

जीत-हार के चुनावी सबक : हिमाचल प्रदेश और गुजरात के चुनाव अपने आप में अनोखे रहे। पहली बार ऐसा हुआ कि चुनाव के दौरान और चुनाव के बाद हम सबको गहराई से सोचने पर विवश किया। बहुत से विश्लेषण हुए और विद्वजनों ने अपनी-अपनी राय रखी। सच तो यह है कि हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभा के चुनाव परिणामों में मतदाताओं ने सत्तारूढ़ दल, विपक्ष और चुनाव आयोग को अलग-अलग संदेश दिये हैं। आइये, इन संदेशों को समझने का प्रयत्न करते हैं। नरेंद्र मोदी ने गुजरात जीत कर दिखा दिया है लेकिन उनकी जीत में हार का कसैला स्वाद भी शामिल है।

कश्मीर समस्या का एकमात्र हल

पी.के. खुराना

2014 के लोकसभा चुनावों से पहले नरेंद्र मोदी ने कई नारे उछाले थे, उनमें से एक नारा था — “मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सीमम गवर्नेंस”। मोदी ने तब यह नारा देकर लोगों का दिल जीता था क्योंकि इस नारे के माध्यम से उन्होंने आश्वासन दिया था कि आम नागरिकों के जीवन में सरकार का दखल कम से कम होगा। लेकिन आज हम जब सच्चाई का विश्लेषण करते हैं तो पाते हैं कि यह भी एक जुमला ही था। अमित शाह ही नहीं खुद मोदी भी गुजरात के विधानसभा चुनाव के लिए गुजरात में प्रचार कर रहे हैं। अमित शाह के साथ बहुत से विधायक, सांसद, केंद्रीय मंत्री और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी राज्य में दिन-रात एक किये दे रहे हैं। लगता है मानो देश की सारी सरकारें गुजरात में सिमट आई हैं। गुजरात विधानसभा चुनावों के कारण संसद का सत्र नहीं बुलाया जा रहा है ताकि संसद में असहज सवालों से बचा जा सके, वे सवाल मतदाताओं की निगाह में न आ जाएं। इसी प्रकार चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय को प्रभावित करने के सफल-असफल प्रयास न तो गवर्नेंस हैं और न ही “मिनिमम गवर्नमेंट” के उदाहरण हैं।

चार महीने पहले रेल टिकट कटाने वाले इंजीनियर का दिवाली पर घर जाने का सपना ‘वेटिंग’ ही रह गया!

Yashwant Singh : हरिद्वार में कार्यरत इंजीनियर गौरव जून महीने में तीन टिकट कटाए थे, दिल्ली से सहरसा जाने के लिए, अपनी बहनों के साथ। ट्रेन आज है लेकिन टिकट वेटिंग ही रह गया। चार्ट प्रीपेयर्ड। लास्ट मोमेंट में मुझे इत्तिला किया, सो हाथ पांव मारने के बावजूद कुछ कर न पाया। दिवाली अपने होम टाउन में मनाने की उनकी ख्वाहिश धरी रह गई। दिवाली के दिन अपने जिला-जवार में होने की चार महीने पहले से की गई तैयारी काम न आई।

मोदी को भगवान न बनाओ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मंदिर बनाने की घोषणा क्रांति की जमीन मेरठ में एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने की है। सिचाई विभाग से रिटायर इंजीनियर जेपी सिंह की माने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू लोगों के सिर पर चढ़कर बोल रहा है। ऐसे में उनके नाम का मंदिर बनना चाहिए। ऊपरी तौर पर देखा जाए तो इस ऐलान के पीछे किसी की व्यक्तिगत इच्छा और भावना ही दिखाई देती है। पर रिटायर इंजीनियर की घोषणा एक लोकतांत्रिक देश में किसी नेता को भगवान बनाने की कोशिश भी दिखाई देती है। मामले को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जा सकता।

नए साल में मोदी सरकार के खिलाफ क्यों बिगुल बजाएंगे अन्ना हजारे, पढ़िए उनके दिल की बात

सरकार या प्रधानमंत्री ही जनता के साथ धोखाधडी करने लगे तो इस देश और समाज का क्या होगा : अन्ना हजारे लोकपाल, लोकायुक्त जैसे कानून जो कानून जनता को जलद गतीसे किफायतशीर न्याय दे सके। शासन-प्रशासन मे बढ़ते भ्रष्टाचार को नियंत्रण में लाये। शासन-प्रशासन में बढ़ते अनियमितताओं और मनमानी को प्रतिबंध लगे। स्वच्छ शासन और प्रशासन निर्माण हो। शासन और प्रशासन जनता को जवाबदेही हो। क्यों की जनता इस देश कि मालिक है। शासन-प्रशासन में बैठे सभी लोग जनता के सेवक है। शासन-प्रशासन व्यवस्था लोकतांत्रिक हो। इसलिए सरकार के काम मे जनता का सहभाग ऐसे ना कहते हुए लोगों के काम मे सरकार का सहभाग हों। यह परिवर्तन लाने की शक्ती शक्ती लोकपाल, लोकायुक्त कानून में हैं।

अमित शाह की ओर से पीयूष गोयल ने ‘द वायर’ पर 100 करोड़ का आपराधिक मुकदमा ठोकने की बात कही

‘द वायर’ की पड़ताल ने कांग्रेस से लेकर बीजेपी तक को हिला दिया है

Nitin Thakur : अमित शाह के बेटे की कमाई का हिसाब किताब जान लीजिए। जब आपकी नौकरियां जा रही थीं, तब कोई घाटे से 16 हज़ार गुना मुनाफे में जा रहा था। द वायर की पड़ताल ने कांग्रेस से लेकर बीजेपी तक को हिला दिया है।

तुम्हारे पास रॉबर्ट वाड्रा है, हमारे पास जय शाह!

Atul Chaurasia : जिनको लगता है कि मोदीजी ने भ्रष्टाचार मुक्त, स्वच्छ सरकार दे रखी है देश को उसे अमित शाह के बेटे जय शाह का प्रकरण जानना चाहिए. साथ ही आनंदी बेन पटेल के बेटे और बेटी का भी मामला जोड़ लीजियेगा। पिछली सरकार में दामादों की चांदी थी इस बार गुजरातियों के हाथ सोना-चांदी है।

अडानी के खदानों पर रिपोर्टिंग करने आई आस्ट्रेलियाई पत्रकारों की टीम को गुजरात पुलिस ने भगाया

आस्ट्रेलिया से ‘4कॉर्नर’ मीडिया हाउस की एक टीम अडानी के खदानों पर रिपोर्टिंग करने के लिए गुजरात आई थी. दरअसल आस्ट्रेलिया में सबसे बड़ी कोयला खदान परियोजना पर अडानी ग्रुप काम कर रहा है. इसी परियोजना के लिए पर्यावरण तथा अन्य ट्रैक रिकॉर्ड की जांच करने आस्ट्रेलिया की मीडिया टीम भारत आई थी. जब अडानी ग्रुप के आकाओं को आस्ट्रेलियाई पत्रकारों के आने और उन्हीं के ग्रुप के चाल-चलन को लेकर कवरेज करने की बात पता चली तो फौरन हरकत में आ गए और सत्ता-सिस्टम में अपने संबंधों का इस्तेमाल करते हुए पुलिस को सक्रिय कर दिया. गुजरात पुलिस ने भारी सक्रियता दिखाते हुए आस्ट्रेलियाई पत्रकारों को जमकर धमकाया जिसके कारण टीम लौट गई. लेकिन लगे हाथ वह पूरी रिपोर्ट भी तैयार कर ले गई. इस बात का खुलासा चैनल के प्रोमो में पत्रकार स्टीफन ने किया है.

क्या वाकई नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया है?

Dilip Khan : हार्ड वर्क वाले अर्थशास्त्री मोदी जी जब सत्ता में आए तो इन्होंने आर्थिक सलाह परिषद को ख़त्म कर दिया। जब अर्थव्यवस्था की बैंड बजने लगी तो दो दिन पहले यूटर्न लेते हुए परिषद को फिर से बहाल कर दिया। अर्थशास्त्री नरेन्द्र मोदी ने आंकड़ों को ‘खुशनुमा’ बनाने के लिए GDP गणना के पुराने नियम ही ख़त्म कर दिए। लेकिन गणना के नए नियमों के मुताबिक़ भी GDP दर तीन साल के न्यूनतम पर आ गई है। पुराना नियम लागू करे तो 3% का आंकड़ा रह जाता है।

पत्रकारों को मिल रही गौरी लंकेश जैसा हश्र होने की धमकियां

Anil Jain : गौरी लंकेश की हत्या के बाद जैसी आशंका जताई गई थी, वैसा ही हो रहा है। त्रिपुरा में शांतनु भौमिक की हत्या इसकी पहली मिसाल है। पत्रकारों और लेखकों को धमकाने का सिलसिला शुरू हो चुका है। नीचे दिया गया स्क्रीन शॉट मेरे मित्र और पुराने सहकर्मी अनिल सिन्हा को मिले वाट्सएप मैसेज का है।

‘पेट्रो लूट’ का पैसा चुनावों में आसमान से बरसेगा और ज़मीन पर शराब बनकर वोट ख़रीदेगा : रवीश कुमार

Ravish Kumar : सजन रे झूठ मत बोलो, पेट्रोल पंप पर जाना है… पेट्रोल के दाम 80 रुपये के पार गए तो सरकार ने कारण बताए।  लोककल्याणकारी कार्यों, शिक्षा और स्वास्थ्य पर ख़र्च करने के लिए सरकार को पैसे चाहिए। व्हाट्स अप यूनिवर्सिटी और सरकार की भाषा एक हो चुकी है। दोनों को पता है कि कोई फैक्ट तो चेक करेगा नहीं। नेताओं को पता है कि राजनीति में फैसला बेरोज़गारी, स्वास्थ्य और शिक्षा के बजट या प्रदर्शन से नहीं होता है। भावुक मुद्दों की अभी इतनी कमी नहीं हुई है, भारत में।

मोदी राज में भी महंगाई डायन बनी हुई है!

अजय कुमार, लखनऊ
2014 के लोकसभा चुनाव समय बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेन्द्र मोदी ने तत्कालीन यूपीए की मनमोहन सरकार के खिलाफ मंहगाई को बड़ा मुद्दा बनाया था। चुनाव प्रचार के दौरान सबसे पहले हिमाचल प्रदेश की रैली में महंगाई का मुद्दा छेड़कर मोदी ने आम जनता की नब्ज टटोली थी। मंहगाई की मार झेल रही जनता को मोदी ने महंगाई के मोर्चे पर अच्छे दिन लाने का भरोसा दिलाया तो मतदाताओे ने मोदी की झोली वोटों से भर दी। आम चुनाव में दस वर्ष पुरानी यूपीए सरकार को जड़ से उखाड़ फेंकने में मंहगाई फैक्टर सबसे मोदी का सबसे कारगर ‘हथियार’ साबित हुआ था, लेकिन आज करीब साढ़े तीन वर्षो के बाद भी मंहगाई डायन ही बनी हुई है।

प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी पर गुजराती में बन रही है फिल्म ‘हू नरेंद्र मोदी बनवा मांगू छू’

बॉलीवुड निर्देशक अनिल अनिल नरयानी का कहना है कि प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी पर आधारित उनकी आने वाली गुजराती फिल्म ”हूं नरेन्द्र मोदी बनवा मांग छू” बच्चों के लिये बेहद प्रेरणाश्रोत होगी। अनिल नरयाणी इन दिनों फिल्म ”हू नरेंद्र मोदी बनवा मांगू छू” बना रहे हैं। अनिल नरयानी ने फिल्म की चर्चा करते हुये कहा, “‘हू नरेंद्र मोदी बनवा मांगू छू’ हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन की कहानी पर आधारित है।

जंगल से आदिवासियों को बेदखल कर कारपोरेट को बसाने का अभियान मोदी सरकार ‘नक्सल सफाया’ के नाम पर चला रही है : वरवर राव

1940 में आंध्र-प्रदेश के वारंगल में जन्मे वरवर राव ने कोई 40 सालों तक कॉलेजों में तेलुगू साहित्य पढ़ाया है और लगभग इतने ही सालों से वे भारत के सशस्त्र माओवादी आंदोलन से भी जुड़े हुए हैं। वैसे वरवर राव को भारतीय माओवादियों के संघर्ष का प्रवक्ता माना जाता है, सरकारी दावे के अनुसार वे सशस्त्र माओवादियों के नीतिकार भी हैं, परंतु वरवर राव अपने को क्रांतिकारी कवि कहलाना ज्यादा पसंद करते हैं। सत्ता के खिलाफ लिखने-पढ़ने, संगठन बनाने और पत्र-पत्रिकायें प्रकाशित करने वाले वरवर राव टाडा समेत देशद्रोह के आरोप में लगभग 10 वर्षों तक जेल में रहे हैं और अभी लगभग 50 मामलों पर विभिन्न कोर्टों में सुनवाई चल रही है तो कुछ मामलों पर जमानत पर हैं।

मोदी सरकार के लिए रवीश कुमार ने कहा- ”असफल योजनाओं की सफल सरकार, अबकी बार ईवेंट सरकार”

Ravish Kumar : असफल योजनाओं की सफल सरकार- अबकी बार ईवेंट सरकार… 2022 में बुलेट ट्रेन के आगमन को लेकर आशावाद के संचार में बुराई नहीं है। नतीजा पता है फिर भी उम्मीद है तो यह अच्छी बात है। मोदी सरकार ने हमें अनगिनत ईवेंट दिए हैं। जब तक कोई ईवेंट याद आता है कि अरे हां, वो भी तो था,उसका क्या हुआ, तब तक नया ईवेंट आ जाता है। सवाल पूछकर निराश होने का मौका ही नहीं मिलता।

मोदी की नीतियों से महिलाओं की सेविंग पर पड़ रही तगड़ी मार, पढ़िए ये खुलासा

Vikas Mishra : मेरी पत्नी का सेविंग अकाउंट था इंडियन ओवरसीज बैंक में। गुप्त खाता। जिसमें जमा रकम का मुझे घर में लिखित कानून के मुताबिक पता नहीं होना था, लेकिन श्रीमतीजी के मोबाइल में बैंक से अक्सर खातों से कुछ रुपये निकलने के मैसेज आने लगे। कभी एसएमएस चार्ज के नाम पर, कभी एटीएम चार्ज के नाम पर। बीवी आगबबूला। मैं बैंक पहुंचा तो पता चला कि सेविंग अकाउंट में ब्याज घटकर 3 फीसदी हो गया है। एसएमएस चार्ज हर महीने देना है, हर छह महीने में एटीएम चार्ज देना है। दूसरे बैंक के एटीएम से पैसे निकाले तो उसका चार्ज। चाहे एटीएम का इस्तेमाल हो या न हो उसका भी चार्ज। खैर, मैंने पत्नी का वो अकाउंट बंद करवा दिया।

रिजर्व बैंक के आंकड़े दे रहे गवाही, कालाधन रखना अब ज्यादा आसान हुआ!

Anil Singh : 2000 के नोट 1000 पर भारी, कालाधन रखना आसान! आम धारणा है कि बड़े नोटों में कालाधन रखा जाता है। मोदी सरकार ने इसी तर्क के दम पर 1000 और 500 के पुराने नोट खत्म किए थे। अब रिजर्व बैंक का आंकड़ा कहता है कि मार्च 2017 तक सिस्टम में 2000 रुपए के नोटों में रखे धन की मात्रा 6,57,100 करोड़ रुपए है, जबकि नोटबंदी से पहले 1000 रुपए के नोटों में रखे धन की मात्रा इससे 24,500 करोड़ रुपए कम 6,32,600 करोड़ रुपए थी।

जगदीश चंद्रा ने मोदी मंत्रिमंडल में भारी फेरबदल को लेकर कई चौंकाने वाली जानकारी दी (देखें वीडियो)

जी ग्रुप के रीजनल न्यूज चैनलों के सीईओ जगदीश चंद्रा ने अपने ‘अ डायलाग विथ जेसी’ में मोदी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कई चौंकाने वाली जानकारी दी है. जगदीश चंद्रा के मुताबिक रेल और जहाज वाले मंत्रालय मिलाकर एक किए जा सकते हैं ताकि टूरिज्म को समुचित बढ़ावा दिया जा सके और इन दोनों प्रमुख परिवहन के यात्रियों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं दी जा सके. जेसी का तो यहां तक कहना है कि इन दोनों एकीकृत मंत्रालयों के मंत्री नितिन गडकरी बनाए जाएंगे.

‘विकास संवाद’ विमर्श : मोदी में सम्मोहन पैदा करने की निरंतर कोशिशें कर रहा है भारतीय मीडिया!

विकास संवाद संस्था द्बारा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी एक ऐसे ही महीन विषय पर तीन दिवसीय संगोष्ठी राजा राम की नगरी ओरछा (अमर रिसार्ट) में 18 से 20 अगस्त तक आयोजित हुई। यह 11वां राष्ट्रीय मीडिया संवाद था। विषय ‘मीडिया, बच्चे और असहिष्णुता’ रखा गया। इसमें देश के मूर्धन्य पत्रकारों सहित तकरीबन 125 पत्रकारों ने सहभागिता निभाई। सर्वप्रथम सभी के परिचय के साथ विकास संवाद के राकेश दीवान ने इसकी भूमिका रखते हुए बच्चों के स्कूली बोझिल वातावरण का जिक्र किया जोकि न सिर्फ शिक्षा बल्कि उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल रहा है।

जानिए, पीएम के आज के भाषण की क्यों हो रही है आलोचना…

Priyabhanshu Ranjan : नोटबंदी से कितना काला धन पकड़ में आया, उस पर ऐसा आंकड़ा दिया जिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। RBI तो अब तक नोट गिन ही नहीं सका है। ऊपर से मोदी ने एक निजी संस्था के आंकड़े बताए हैं। नोटबंदी से तबाह हुए छोटे और मझौले व्यापारियों की समस्या सुलझाने पर कुछ नहीं बोला। गोरखपुर में बच्चों की मौत और गुंडे गौरक्षकों के आतंक पर गोल-मोल बोल कर निकल लिए। पर ‘तीन तलाक’ पर खुलकर बोलना नहीं भूले, जैसे कि तलाक दिलवाना ही सरकार की प्राथमिकता हो।

महेश शर्मा का मंत्रालय बाबुओं के कब्जे में!

केंद्रीय संस्कृति एवं कला मंत्री महेश शर्मा का मंत्रालय कला एवं संस्कृति के सिवा सभी कार्य दक्षता से कर रहा है। चर्चा है कि इस दक्षता के लिए अवार्ड वापसी के नेता अशोक वाजपेयी से चुपके से हाथ मिलाकर शांति का समझौता कर लिया है। संस्कृति मंत्रालय के सभी स्वायत्त संसथान जैसे संगीत नाटक अकादमी, ललित कला अकादेमी, साहित्य अकादमी पर मंत्रालय के बाबू अशोक वायपेयी के फॉर्मूले से कब्ज़ा जमा कर बैठे हैं और मंत्री साहब किसी के खिलाफ कोई कार्यवाही करने को तैयार नहीं हैं।

जब केजरी पार्टी ‘पीटी’ जा रही थी तो कांग्रेसी उपदेश देते थे, अब कांग्रेसी ‘मारे’ जा रहे तो आपिये आइना दिखाने लगे!

Sheetal P Singh : अनुभवी लोग… अहमद पटेल पर बन आई तो अब बहुतों को लोकतंत्र याद आ रहा है ………आना चाहिये पर शर्म भी आनी चाहिये कि जब बीते ढाई साल यह बुलडोज़र अकेले केजरीवाल पर चला तब अजय माकन के नेतृत्व में कांग्रेसी राज्यपाल के अधिकारों के व्याख्याकारों की भूमिका में क्यों थे? जब एक बेहतरीन अफ़सर राजेन्द्र कुमार को सीबीआई ने बेहूदगी करके सिर्फ इसलिये फँसा दिया कि वह केजरीवाल का प्रिंसिपल सेक्रेटरी था तब भी लोकतंत्र की हत्या हुई थी कि नहीं? जब दिल्ली के हर दूसरे आप विधायक को गिरफ़्तार कर करके पुलिस और मीडिया परेड कराई गई तब भी यमुना दिल्ली में ही बह रही थी! तब कांग्रेसी बीजेपी के साथ टीवी चैनलों में बैठकर केजरीवाल को अनुभवहीन साबित कर रहे थे! अब अनुभव काम आया?

2019 में मोदी के लिए असली सिरदर्द केजरीवाल बनेंगे!

Vikram Singh Chauhan : अरविंद केजरीवाल बहुत बहादुर है, शेर हैं। वे मोदी के सामने झुके नहीं। दिल्ली में रहकर मोदी के 56 इंच के सीने पर मूंग दल रहे हैं। मोदी जहाँ गए वहां जाकर चुनाव लड़ने की चुनौती दी और बिना पहले के जनाधार और संगठन के चुनाव लड़कर मोदी का होश उड़ा दिया, हिंदुत्व ने उसे हरा दिया। वे भारत के एक अकेले ऐसे मुख्यमंत्री होंगे जिसके साथ वर्तमान ने अन्याय किया पर इतिहास न्याय करेगा। मीडिया पहले दिन से उनकी सुपारी ली हुई है।

अमित शाह की संपत्ति और स्मृति इरानी की डिग्री वाली खबरें टीओआई और डीएनए से गायब!

Priyabhanshu Ranjan : स्मृति ईरानी भी कमाल हैं। 2004 के लोकसभा चुनाव के वक्त अपने हलफनामे में अपनी शैक्षणिक योग्यता B.A बताती हैं। 2017 के राज्यसभा चुनाव में अपने हलफनामे में खुद को B. Com. Part 1 बताती हैं। 2011 के राज्यसभा चुनाव और 2014 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने खुद को B. Com. Part 1 ही बताया था। बड़ी हैरानी की बात है कि 2004 में खुद को B.A बताने वाली स्मृति जी 2011, 2014 और 2017 में खुद को B. Com. Part 1 बताती हैं।

एक अपने भारत में हैं ‘शरीफ’ नेता मोदी जी, पनामा पेपर्स खा-चबा गए!

Yashwant Singh : एक अपने भारत में हैं ‘शरीफ’ नेता मोदी जी. पनामा पेपर्स ऐसे खा चबा गए, जैसे कुछ हुआ ही न हो. भाजपाई सीएम रमन सिंह के बेटे से लगायत अमिताभ, अडानी आदि की कुंडली है वहां, लेकिन मजाल बंदा कोई जांच वांच करा ले. और, बनेगा सबसे बड़ा भ्रष्टाचार विरोधी. पड़ोसी पाकिस्तान से सबक ले लो जी.

भारतीय राजनीति का निहायत खूंखार और ‘किलर इंस्टिंक्ट’ वाला मोदी-शाह युग!

Amitaabh Srivastava : कांग्रेस कमाल की पार्टी हो गई है। हमेशा दूसरों पर आरोप, आत्ममंथन से सख्त परहेज़। बीजेपी पर आरोप लगा रही है कि गुजरात में 10-10 करोड़ में उसके विधायक खरीद रही है। आपके विधायकों का ईमान इतना ढुलमुल है, यह ज़्यादा बड़ी चिंता नहीं होनी चाहिए? कितने जहाजों में कितनी बार फेरे लगेंगे टोली बचाये रखने के लिए? कहां गयीं वो वफादारी की बातें? राहुल गांधी फिर कह देंगे हमें सब पहले से ही मालूम था।

मोदी राज में हगने पर भी जीएसटी!

Yashwant Singh : शौचालय जाने पर जीएसटी वसूलने वाले आज़ादी के बाद के पहले प्रधानमंत्री बने मोदी। पंजाब में रोडवेज बस स्टैंड पर सुलभ शौचालय की रसीद है ये। 5 रुपये शौच करने का चार्ज और एक रुपया जीएसटी। कुल 6 रुपये। महंगाई इतनी, गरीब खा न पाए, और, अगर हगने जाए तो टैक्स लिया …

यूपी में बीजेपी की सियासी बेचैनी : अखिलेश, माया और राहुल मिल कर दे सकते हैं मात!

संजय सक्सेना, लखनऊ

उत्तर प्रदेश में बीजेपी लगातार जीत का परचम फहराती जा रही है। यूपी में उसकी सफलता का ग्राफ शिखर पर है, लेकिन शिखर पर पहुंच कर भी बीजेपी एक ‘शून्य’ को लेकर बेचैन नजर आ रही है। उसे चुनावी रण में हार का अंजाना सा डर सता रहा है। इस डर के पीछे खड़ी है अखिलेश-माया और राहुल की तिकड़ी, जो फिलहाल तो अलग-अलग दलों से सियासत कर रहे हैं, मगर मोदी के विजय रथ को रोकने के लिये तीनों को हाथ मिलाने से जरा भी गुरेज नहीं है। बीजेपी का डर लखनऊ से लेकर इलाहाबाद तक में साफ नअर आता है। असल में 2014 के लोकसभा चुवाव मे मिली शानदार जीत का ‘टैम्पो’ बीजेपी 2019 तक बनाये रखना चाहती है।