स्व. दिग्विजय सिंह की बेटी श्रेयसी को निशानेबाजी में रजत पदक और पुराने दिनों की याद

Om Thanvi : श्रेयसी को डंडी (स्काटलैंड) में निशानेबाजी में रजत पदक मिला, हमारे घर में यह निजी उल्लास का मौका भी है। श्रेयसी को तब से देखा है, जब उसने तमंचा तक नहीं छुआ था। बाद में उसमें बन्दूक की गजब लगन जागी। श्रेयसी के पिता मेरे अजीज मित्र थे – दिग्विजय सिंहः समाजवादी धारा के नेता, जेएनयू के अध्येता, चंद्रशेखर और फिर अटलबिहारी वाजपेयी की गठबंधन सरकार में मंत्री।

दिल्ली में किसी राजनेता से मेरा घरापा कभी कायम नहीं हुआ, दिग्विजय सिंह और शरद यादव से पहली मुलाकात में हो गया, हालांकि बाद में इन दोनों में आपसी दुराव भी रहा। नेताओं की सोहबत से दूर भागता था (अब भी दूर रहता हूँ), पर (अनुराग चतुर्वेदी, हरिवंश आदि मित्रों के साथ) दिग्विजय सिंह के यहां मंडली जुटती तो गप्प मारते हुए कभी-कभी सुबह के तीन-चार भी बज जाते थे।

चार वर्ष पहले लंदन में दिग्विजय सिंह की तबीयत अचानक बिगड़ी। वे भारतीय राइफल एसोसिएशन के अध्यक्ष थे। एक प्रतिनिधिमंडल में दौरे पर थे और वापस नहीं लौटे। हम लोगों के लिए उनका इस तरह, और इस उम्र में, जाना सदमे से कम न था। आज राष्ट्रमंडल स्पर्धा में श्रेयसी के प्रदर्शन ने दिग्विजय जहां हैं उनको बड़ी खुशी दी होगी। हमारे लिए, देश के लिए श्रेयसी गौरव हैं। वे इसी तरह जुटी रहें, इंशाअल्लाह एक रोज ओलंपिक में भी नाम रोशन करेंगी। श्रेयसी, बधाई! ढेर शुभाशंसा। आगे बढ़ो। फतह होगी।

जनसत्ता के संपादक ओम थानवी के फेसबुक वॉल से.



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