हिंदी खबर चैनल के उत्तराखंड हेड पवन लालचंद कार्यमुक्त

गुणानंद जखमोला-

लगभग 15 दिन पहले किसी साथी पत्रकार का फोन आया कि हिन्दुस्तान ने देहरादून से स्टाफर फोटोग्राफर प्रवीण डंडरियाल, डेस्क पर कार्यरत नरेंद्र शर्मा और प्रदीप बहुगुणा को विदाई दे दी है। सात अन्य को भी निकाल दिया गया है।

मेरे सभी साथी चाहते हैं कि मैं मार्केट में बदनाम हूं तो मैं ही ये पोस्ट भी लिखूं। मुझे लगा मैं सच में बदनाम हो गया हूं सच लिखने के लिए। मुझे अपने पर गुस्सा आया कि मैं ही क्यों लिखूं। दूसरे क्यों नहीं लिखते। गालियां अकेले मैं ही क्यों खाऊं। सो नहीं लिखा।

गुस्सा यह भी था कि सब पत्रकार चुप बैठे हैं। डरपोक कहीं के। जब पत्रकार अपनी आवाज नहीं उठाते हैं तो मैं क्यों भगत सिंह बना फिरूं इनके लिए। यही सोचकर नहीं लिखा।

लिखने से होगा भी क्या? दुश्मन ही बढ़ रहे हैं मेरे। सच की कीमत चुका रहा हूं। अभी 50 लाख रुपये के मानहानि के दावे से निपटा हूं। कोरोना महामारी के बीच पिछले तीन महीने में देहरादून से लेकर ऋषिकेश के थानों और पुलिस चौकियों के चक्कर काटे हैं। अब जाकर कुछ राहत मिली है और फिर शुरू। पर कमबख्त दिल ही नहीं मानता।

देहरादून के सहारा में मैं अकेला पत्रकार हूं जो नैनीताल हाईकोर्ट में सहारा के खिलाफ केस लड़ रहा है।

अब भडास पर खबर है तो मैं हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला देहरादून से निकाले गए पत्रकारों को बेरोजगार दिवस की बधाई दे रहा हूं। अमर उजाला में कोरोना की खबर लिखी तो वो भी भड़क गए। आज अमर उजाला के कई साथी कोरोनाग्रस्त हैं। भुगतो।

जब मैंने हिन्दी खबर चैनल पर वेतन न दिए जाने पर एक खबर लिखी तो साथी लोग भड़क गए थे। आज वहां से पवन लालचंद की भी विदाई हो गई, जबकि वो एक अच्छे पत्रकार हैं। दरअसल, मीडिया में अब अच्छे पत्रकारों की जरूरत नहीं है। …. टाइप पत्रकार चाहिए या दलाल टाइप। जो ऐसा कुछ नहीं है, वो अब गिने-चुने बचे हैं। ऐसे में पत्रकारों को भी बेरोजगार दिवस की बधाई।

वरिष्‍ठ पत्रकार गुणानंद जखमोला की फेसबुक वॉल से साभार.

  • भड़ास की पत्रकारिता को जिंदा रखने के लिए आपसे सहयोग अपेक्षित है- SUPPORT

 

 

  • भड़ास तक खबरें-सूचनाएं इस मेल के जरिए पहुंचाएं- bhadas4media@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *