प्रवीण साहनी, सौरभ साहनी और राहुल भाटिया की गिरफ्तारी पर रोक, सीएम ने मुंह खोला

समाचार प्लस चैनल के सीईओ उमेश कुमार के बेहद करीबी प्रवीण साहनी, सौरभ साहनी और राहुल भाटिया की गिरफ्तारी पर कोर्ट ने रोक लगा दी है. नैनीताल हाईकोर्ट ने समाचार प्लस चैनल के सीईओ उमेश शर्मा के आईएएस स्टिंग प्रकरण में त्रिवेंद्र सरकार को बड़ा झटका दिया.

कोर्ट ने स्टिंग प्रकरण में प्रवीण साहनी और सौरभ साहनी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी. इससे पहले कोर्ट ने इस केस में राहुल भाटिया की गिरफ्तारी पर भी रोक लगा दी थी. हाई कोर्ट ने सुनवाई में माना कि प्रदेश में भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए ऐसे स्टिंग की जरूरत है. राजनेताओं और भ्रष्ट अधिकारियों को बेनकाब करने के लिए ये सही कदम है.

इस बीच स्टिंग प्रकरण पर सीएम त्रिवेंद्र रावत ने मुंह खोला है. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि स्टिंग ऑपरेशन करना कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन आपकी नीयत क्या है, यह बड़ा सवाल है. हाईकोर्ट के फैसले पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आप स्टिंग क्यों करना चाहते हैं, ये मकसद साफ होना चाहिए. कोई भी काम करने से पहले उसमें निहित भावना पर ध्यान दिया जाना चाहिए.

सीईओ उमेश जे कुमार को गुरुवार को मिली सात घंटे की कस्टडी रिमांड के बाद भी पुलिस खाली है. उसके मसूरी डायवर्जन पर मैक्स अस्पताल के सामने स्थित घर की तीन घंटे चली सघन तलाशी में भी पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा. राजपुर पुलिस ने उमेश को जिला कारागार से अभिरक्षा में लेने के बाद दून मेडिकल कॉलेज में मेडिकल कराया.

इसके बाद उसे लेकर राजपुर थाने आ गई. यहां सीओ मसूरी बीएस चौहान, विवेचक अरविंद सिंह ने करीब एक घंटे तक उमेश कुमार से पूछताछ की. पुलिस ने उससे मोबाइल फोन व अन्य उपकरणों के पासवर्ड जानने की कोशिश की, लेकिन उमेश ने मुंह नहीं खोला. इसके बाद पुलिस उसे लेकर करीब एक बजे उसके मसूरी रोड पर मैक्स अस्पताल के सामने स्थित आवास पर पहुंची.

उधर, भड़ास पर अपलोड उमेश कुमार और आयुष गौड़ वार्ता के आडियो टेप में हो रही बातचीत का उमेश की आवाज से मिलान कराने के लिए पुलिस ने एसीजेएम चतुर्थ शहजाद ए वाहिद की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर वॉयस सैंपल लेने की अनुमति मांगी है. ब्लैकमेलिंग के आरोपी उमेश कुमार शर्मा की पुलिस ने फिर से पांच दिन की कस्टडी रिमांड मांगी है.

राजपुर पुलिस द्वारा उमेश जे कुमार की पांच दिन की और कस्टडी रिमांड मांगने के लिए अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि अभी उमेश की निशानदेही पर पूर्व में हुए स्टिंग में प्रयुक्त इलेक्ट्रानिक गैजेट्स की बरामदगी के साथ गाजियाबाद से मिले फोन और लैपटॉप आदि को अनलॉक भी कराना है.

अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए संयुक्त निदेशक विधि जेएस बिष्ट ने कहा कि उमेश के पकड़े जाने के बाद भड़ास4मीडिया पर अपलोड एक आडियो क्लिप में एक अफसर के स्टिंग की योजना बनाते हुए दो लोगों की बातचीत हो रही है. इसमें एक शख्स के उमेश कुमार होने का संदेह है. इसकी पुष्टि उसके उमेश के वायस सैंपल से आडियो क्लिप के मिलान के बाद ही हो पाएगी. वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता एमएम लांबा ने दोबारा कस्टडी रिमांड दिए जाने का विरोध किया.

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