पत्रकारिता में हैं तो ‘व्हाइट कॉलर सिंड्रोम’ नहीं होना चाहिए : प्रियंका दुबे

माखनलाल चतुर्वेदी विवि में हुआ व्याख्यान का आयोजन, बीबीसी संवाददाता प्रियंका दुबे ने किया विद्यार्थियों का मार्गदर्शन, अच्छा हिंदी पत्रकार बनने के लिए भी बहुत अच्छी इंग्लिश आनी चाहिए, पत्रकारिता के लिए पढ़ने और जनसंवाद का संस्कार जरूरी है…

भोपाल। पत्रकारिता की पढ़ाई करने आना खुद में एक चुनौती रही। पढ़ाई के दौरान खूब दौड़-भाग की, खबरें की और उन्हें अपने लैब जर्नल में प्रकाशित किया। पैदल चलकर पैसे बचाये और किताबें खरीदीं। मैंने पढ़ाई के दौरान इंटर्नशिप की, काम किया और जो कमाया उससे अखबार और किताबें खरीदीं। यह कहना है बीबीसी की राष्ट्रीय संवाददाता प्रियंका दुबे का। यह बातें उन्होंने शनिवार को पत्रकारिता विभाग द्वारा आयोजित विशेष व्याख्यान में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहीं। कार्यक्रम का संचालन विभागाध्यक्ष डॉ राखी तिवारी ने किया।

माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवम संचार विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग की एलुमिनी, खोजी पत्रकारिता के लिए राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त व वर्तमान में बीबीसी की वरिष्ठ संवाददाता प्रियंका ने विद्यार्थियों को बेहतर पत्रकारिता के टिप्स भी दिए।

उन्होंने बताया कि अच्छा हिंदी पत्रकार बनने के लिए भी बहुत अच्छी इंग्लिश आनी चाहिए। राष्ट्रीय स्तर के अखबार और मैगज़ीन पढ़ना जरूरी है। शब्दकोश से अपनी शब्द शक्ति बढ़ाएं। साहित्य भी आवश्यक रूप से पढ़ें। हिंदी की पत्रकारिता के लिए कम से कम हिंदी के दस साहित्यकार को जरूर पढ़िए। शायरी और कविताएं पढ़ें। पत्रकारिता का छात्र होने के नाते एक छोटी सी निजी लाइब्रेरी बनाइये। इससे तंज और इज़हार करने की शक्ति बढ़ती है। इसके लिए अच्छे शायर को पढ़िए।

अपने व्याख्यान के बाद सुश्री प्रियंका ने मौजूद विद्यार्थियों की जिज्ञासा का निराकरण किया। उन्होंने न्यूज़ स्टोरी आईडिया उदाहरण स्वरूप बताते हुए फील्ड रिपोर्टिंग करने की रूपरेखा बताई। उन्होंने रामनाथ गोयनका अवार्ड प्राप्त खबर का उदाहरण देते हुए चुनौतियों के बारे में बताया।

विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए सुश्री प्रियंका ने कहा कि यदि कोई विद्यार्थी कोई किताब पढ़ना चाहता है और नहीं खरीद पा रहा है तो वे मदद करेंगी। उन्होंने मेल आईडी विद्यर्थियों के साथ साझा करते हुए कहा कि उन्हें किताब का नाम भेज सकते हैं। वे वो किताब विद्यार्थी को भेज देंगी।

प्रियंका के टिप्स :

-पत्रकार में आमजन से जुड़ाव व सहानुभूति व करुणा का भाव आवश्यक है।

-काम बहुत है, अच्छे काम करने वाले बहुत कम है। इसीलिए संभावनाएं बहुत है।

-पत्रकारिता ‘इमेज’ का पेशा है। संवेदनशील रिपोर्टिंग के लिए संयम रखें। सवाल करते वक़्त सब्र रखें। डबल सोर्सिंग जरूर करें। -सबका पक्ष रखें। पाठक बेईमानी सूंघ लेता है। पक्ष संतुलन के साथ रखें।

-रिपोर्ट में विचार नहीं रखें। पूर्वग्रह से ग्रसित नहीं हो। अपनी खबर की निष्पक्षता पर गर्व कर पाएं ऐसी खबरें करें।

-आजकल ऑनलाइन खबरें और अच्छे लेख उपलब्ध हैं उन्हें जरूर पढ़ें।

-आपकी अच्छी स्टोरी ही आपका रिज्यूमे है। पीआर से अधिक ज्ञान व अपने काम को महत्व दें।

-अपनी स्टोरी को सोशल मीडिया पर बार-बार पब्लिश करने में न झिझकें।

-मुद्दे चुनें और उन पर फ़ेलोशिप प्राप्त करने का प्रयास करें।

-अगर आप छोटे शहर से आते हैं तो अपने ज्ञान को अपना बैकअप बनाएं।

-छोटा काम ही बड़े काम की सीढ़ी है। अपने ‘बॉडी ऑफ वर्क’ का विकास करें। प्रोफाइल मजबूत करें।

-पत्रकार को स्ट्रीट स्मार्ट होना चाहिए। रेगुलर स्टोरी के साथ एक्सक्लूसिव स्टोरी कीजिये।

-अपने ब्लॉग और वीलॉग बनाएं।

-अच्छी रिपोर्ट एक अच्छी रिपोर्ट है वो भाषा की गुलाम नहीं है। पत्रकारिता में विनम्र और दृढ़ रहें।

-गरीबी से जी लीजिये पर ‘चिन्दी चोरी’ मत कीजिये। धन कमाने के लिए यह पेशा नहीं है। शुरुआत में पैसा कमाने की कामना है तो यह उम्मीद छोड़ दें। अच्छा काम करेंगे तो आपकी तनख्वाह सम्मानजनक हो जाएगी।

-‘व्हाइट कॉलर सिंड्रोम’ नहीं होना चाहिए। आपको लोगों का आदमी होना चाहिए। जनता से जुड़िए।

-मेरी आवाज जनता की आवाज़ होना चाहिए। यह आपका राष्ट्रवाद होना चाहिए। इस देश के नागरिक से दूरी नहीं होना चाहिए। समानता आपके व्यवहार में होना चाहिए।

-सबकी गरिमा का सम्मान करें। यदि कोई आपको अपना दुख दर्द बता रहे हैं तो वो उनकी कृतज्ञता है। हमेशा लोगों का सम्मान करें।

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