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पीटीआई यूनियन और प्रबंधन की साठगांठ!

: कानाफूसी : पीटीआई के साथियों को यह खबर जानकर नए साल पर हैरानी हो सकती है लेकिन खबर सत्‍य है। पीटीआई यूनियन और मजीठिया वेज बोर्ड के कथित हीरो ने सन 2002 में प्रबंधन के साथ एक समझौता किया था। इसके अनुसार यूनियन ने प्रबंधन को तीन साल तक कॉन्‍ट्रैक्‍ट पर कर्मचारियों को रखने की अनुमति दी थी। अब यही यूनियन के सर्वेसर्वा कह रहे हैं कि कॉन्‍ट्रैक्‍ट वाले साथियों का वेतन 35 हजार से ऊपर नहीं होना चाहिए। इन नेताओं से पूछना चाहिए कि प्रबंधन के साथ किन हालातों में यह समझौता किया गया और अगर तीन साल तक ही समझौता था तो फिर इतने साल तक कॉन्‍ट्रैक्‍ट पर लोगों को कैसे रखा जा रहा है। वैसे सभी साथियों को मुबारक कि यूनियन कॉन्‍ट्रैक्‍ट के साथियों के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी करने वाली है।

: कानाफूसी : पीटीआई के साथियों को यह खबर जानकर नए साल पर हैरानी हो सकती है लेकिन खबर सत्‍य है। पीटीआई यूनियन और मजीठिया वेज बोर्ड के कथित हीरो ने सन 2002 में प्रबंधन के साथ एक समझौता किया था। इसके अनुसार यूनियन ने प्रबंधन को तीन साल तक कॉन्‍ट्रैक्‍ट पर कर्मचारियों को रखने की अनुमति दी थी। अब यही यूनियन के सर्वेसर्वा कह रहे हैं कि कॉन्‍ट्रैक्‍ट वाले साथियों का वेतन 35 हजार से ऊपर नहीं होना चाहिए। इन नेताओं से पूछना चाहिए कि प्रबंधन के साथ किन हालातों में यह समझौता किया गया और अगर तीन साल तक ही समझौता था तो फिर इतने साल तक कॉन्‍ट्रैक्‍ट पर लोगों को कैसे रखा जा रहा है। वैसे सभी साथियों को मुबारक कि यूनियन कॉन्‍ट्रैक्‍ट के साथियों के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी करने वाली है।

पीटीआई यूनियन की गीदड़ भभकी : हाल ही में पीटीआई यूनियन की बैठक में यूनियन के सर्वेसर्वा और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्‍ठ वकील कोलिन गोंजाल्विस के शब्‍दों में मजीठिया वेतन बोर्ड की लड़ाई के हीरो एमएस यादव ने प्रबंधन को धमकी दी है कि अगर कॉन्‍ट्रैक्‍ट वाले सााथियों को मजीठिया के अनुसार एरियर नहीं दिया तो यूनियन भी सुप्रीम कोर्ट चली जाएगी। यादव जी और कॉन्‍ट्रैक्‍ट वाले साथियों को बधाई। देर आयद दुरुस्‍त आयद। यादव जी, जो अपने यहां मजीठिया पूरी तरह लागू करने के लिए सीना ठोंक रहे थे, ने आधिकारिक तौर पर मान लिया कि उनकी यूनियन ने कॉन्‍ट्रैक्‍ट वाले सााथियों से पैसा तो ले लिया लेकिन उन्‍हें मजीठिया का पूरा लाभ नहीं दिलवाया। बीच में यह भी हवा चली थी कि कॉन्‍ट्रैक्‍ट वाले सााथियों का एरियर खाने के लिए प्रबंधन और यूनियन के बीच कोई समझौता हुआ है। हालांकि इसकी कोई पुष्टि नहीं हो पा रही है लेकिन प्रबंधन की गतिविधियों से साफ है कि ऐसा कोई समझौता हुआ था क्‍योंकि इसी दौरान लखनऊ के एक बड़े अधिकारी को सेवानिवृत होना था लेकिन वे अभी तक जमे हुए हैं।

फिर यादव जी का ये बिना बरसात वाली बारिश का क्‍या राज है। पहला तो ये कि जब श्री गोंजाल्विस को यह पता चला कि उनका हीरो जीरो निकला और पीटीआई में तो मजीठिया पूरी तरह लागू हुआ ही नहीं तो वे दुखी हो गए। दूसरा ये कि सालों से कार्यविस्‍तार ले लेकर पीटीआई को एक नंबर से छठे नंबर का संस्‍थान बनाने वाले महाराज किशन राजदान यानि कि एम के राजदान की इस बार दाल गलने वाली नहीं लग रही। समझा जाता है कि राजदान का पत्ता इस बार साफ हाने वाला है। न सिर्फ एमके राजदान पांच सालों से सेवा विस्‍तार ले रहे हैं बल्कि खबर ये भी है कि यूनियन के भी कई पदाधिकारी प्रबंधन से सेवा विस्‍तार लेकर मजे ले रहे हैं। इस तरह पीटीआई दुनिया का शायद पहला संस्‍थान होगा जहां प्रबंधन के अधिकारी से लेकर यूनियन के पदाधिकारी भी सेवा विस्‍तार पर हैं। कोलिन साहब के हीरो की बात तो अलग ही है। इनके कारनामे जग जाहिर है। वैसे इनके हाथ लंबे हैं। अब अच्‍छा है अगर किसी बहाने ये अपना हाथ प्रबंधन की ओर बढ़ा रहे हैं… शायद कुछ और मिल जाएगा।

फेसबुक पर ‘मजीठिया मंच’ के फेसबुक वॉल से साभार. कानाफूसी कैटगरी की खबरें सुनी सुनाई बातों पर आधारित होती हैं. इन पर भरोसा करने से पहले अपने स्तर पर तथ्यों की जांच पड़ताल कर लें.

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