‘पीटीआई का यादव हीरो नहीं, बेइमान है… जिसने भी आलेख लिखा है, वह स्वयं यादव का चेला होगा’

भड़ास में पीटीआई में रिट्रेंचमेंट के बारे में जो खबरन लगी है उसमें अनेक भ्रांतियां और तथ्य परक त्रुटियां हैं। मिसाल के तौर पर रिट्रेंचमेंट की नोटिस दिन में लगभग 11 बजे दिल्ली में लगने के बाद उस पर कार्रवाई के लिए पूरे फेडरेशन, जो सीक्रेट बैलेट से इस वर्ष फरवरी में चुनकर के आया है, की लीडरशिप दिल्ली चेन्नई मुंबई कोलकाता सभी जगह सक्रिय हो गई। ये लोग अपने सारे कर्मचारियों के साथ मैनेजमेंट से दो-दो हाथ करने की तैयारी कर रहे हैं। Continue reading

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पीटीआई में ‘कत्लेआम’ पर कई पत्रकार संगठनों ने प्रबंधन को धिक्कारा

हैदराबाद : पीटीआई में छंटनी की भारतीय पत्रकार संघ ने की कड़ी निंदा। भारतीय पत्रकार संघ (आईजेयू) और श्रमजीवी पत्रकारों के अधिकतर संगठनों ने समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) प्रबंधन द्वारा शनिवार को देशभर में की गयी 297 कर्मचारियों की मनमानी और अवैध छंटनी की कड़ी निंदा की है। Continue reading

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पीटीआई से निकाले गए सभी लोगों की लिस्ट देखें

Sanjaya Kumar Singh : पीटीआई ने आईजोल से लेकर त्रिवेन्द्रम तक के अपने केंद्रों में काम करने वाले करीब तीन सौ लोगों को एक झटके में नौकरी से निकाल दिया है और सबकी सूचना वेबसाइट पर डाल दी है। कर्मचारियों को बताया गया है कि उनके पैसे खाते में ट्रांसफर कर दिए गए हैं। निकाले गए लोगों में पत्रकार नहीं दिखा पर जो निकाले गए हैं उनकी नौकरी की कीमत पीटीआई में दी गई सेवा अवधि की आधी तनख्वाह लगाई गई है। Continue reading

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पीटीआई से 300 से ज्यादा कर्मियों की छंटनी की खबर किसी अखबार में छपी?

Sanjaya Kumar Singh : यह संयोग ही है कि सारी खबरें एक ही दिन हैं… पीटीआई ने कल अचानक अपने करीब 300 कर्मचारियों को नौकरी से निकल दिया। उनका हिसाब उनके घर भिजवा दिए और पैसे खातों में ट्रांसफर कर दिए। साथ में लिख दिया कि कंपनी की तरफ कुछ बकाया हुआ तो ग्रेच्युटी में समायोजित कर लिया जाएगा। ग्रेच्युटी के लिए फॉर्म भरकर जमा कराएं और पीएफ के पैसे निकालने हों तो उसके लिए भी आवेदन करें आदि आदि। आज यह खबर अखबारों में छपी कि नहीं पता नहीं। मैंने देखा भी नहीं क्योंकि पीटीआई की साइट पर जाकर मैंने कल ही पूरी खबर पढ़ ली थी। Continue reading

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पीटीआई में कत्लेआम, देशभर से 312 लोग निकाले गए, देखें लिस्ट

पीटीआई में भारी भरकम छंटनी की खबर है। 312 मीडियाकर्मियों की नौकरी गई। इनमें अधिकतर गैर-पत्रकार कर्मी हैं। मीडिया में यह आईबीएन7 और सीएनएन-आईबीएन से भी बड़ा कत्लेआम है। एक झटके में देश की सबसे बड़ी समाचार एजेंसी पीटीआई से 312 लोगों को निकाल बाहर किया गया है। छंटनी का शिकार संपादकीय विभाग से इतर काम करने वाले हुए हैं। Continue reading

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स्मृति ईरानी की फटकार के बाद पीटीआई ने गलत फोटो देने वाले फोटोग्राफर को नौकरी से निकाला

देश की सबसे बड़ी न्यूज एजेंसी प्रेस ट्रस्ट आफ इंडिया यानि पीटीआई को अपने एक फोटोग्राफर को नौकरी से निकालना पड़ा. फोटोग्राफर ने चेन्नई की बाढ़ की तस्वीरों को गुजरात का बताकर एजेंसी के हवाल कर दिया और एजेंसी ने इसे रिलीज भी कर दिया. जब इस गलती की तरफ किसी ने सूचना-प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी का ध्यान दिलाया तो उन्होंने पीटीआई वालों से ट्विटर पर ही पूछ लिया कि ये बड़ी गलती क्यों की गई? उन्होंने पूछा कि पीटीआई के लोग चेन्नई के बाढ़ की तस्वीरों कों गुजरात का बताकर क्यों प्रचारित प्रसारित कर रहे हैं? इस पर पीटीआई वालों ने खेद जताते हुए कहा कि संबंधित फोटोग्राफर की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं.

देखिए संबंधित ट्वीट्स…

Smriti Z Irani (@smritiirani) It would be prudent @PTI_News to get an explanation as to how this happened.

Press Trust of India (@PTI_News) PTI deeply regrets the error and has terminated the services of the concerned photographer; @smritiirani and @shashidigital

Shashi Shekhar (@shashidigital) We regret that @airnewsalerts Ahmedabad picked up this photo based on erroneous reporting. We will take action. 

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पीटीआई वाले कब जात-पात से उपर उठेंगे?

एक तरफ जहां राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मीरा कुमार रायसीना हिल्स की दौड़ को ‘दलित बनाम दलित’ निरूपित किए जाने से असहमत हैं और ‘जाति को जमीन में गहरे गाड़ देने’ की बात कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ मीडिया अभी भी ‘दलित’ और ‘अल्पसंख्यक’ जैसे जातिसूचक शब्दों के खेल से बाहर नहीं निकल पा रहा है. मीडिया में बैठे तमाम तथाकथित सेकुलर बुद्धिजीवी ऊपरी तौर पर भले ही इनसे हमदर्दी जताते हों, लेकिन इनकी असलियत क्या है, इसका एक और मुजाहिरा हाल ही में आई उन खबरों से हुआ है, जिसमें बताया गया है कि कैसे ‘मीडिया के लोग’ एक दलित होने के नाते रामनाथ कोविंद की बाइट लेने या दिखाने से गुरेज करते थे, जब वे कुछ अरसा पहले भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता हुआ करते थे.

खैर, मीडिया के ऐसे कई किस्से हैं, लेकिन जब टीआरपी की होड़ से दूर और ‘निष्पक्ष’ कही जाने वाली समाचार एजेंसियां भी खबरों को ‘दलित’ और ‘अल्पसंख्यक’ को कोष्ठक में बंद करके पेश करती हैं, तो ताज्जुब होना लाजिमी है. प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा ने बुधवार, 28 जून की दोपहर बलिया डेटलाइन से एक खबर जारी की, जो एक ‘दलित’ नाबालिग लड़की के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म से संबंधित है. खबर यदि लड़की की जातीय पहचान के बगैर भी जारी की गई होती, तो दुष्कर्म का अपराध उतना ही गंभीर होता, जितना है. लेकिन खबर में जान-बूझकर ‘दलित’ शब्द डालना, ये बताता है कि खबर को एक खास ऐंगल देने के लिए ऐसा किया गया.

ऐसा करना इसलिए भी शरारतपूर्ण लगता है, क्योंकि आरोपियों के जो नाम खबर में दिए गए हैं, उसके मुताबिक, उनमें से एक का सरनेम पासवान है, जो कि स्वयं भी एक दलित जाति से आता है. अब ये खबर मूलत: ऐसी है, जिसमें पीड़िता और आरोपी दोनों एक ही जाति के हैं, लेकिन हेडिंग और इंट्रो में ‘दलित किशोरी’ लिखकर उसे ऐसा रंग देने की कोशिश की गई है, मानो किसी सवर्ण जाति के दबंगों ने यह अपराध किया हो. और यह कोई पहली बार नहीं है. पीटीआई-भाषा पर अक्सर ऐसी खबरें आती हैं, जिनमें दलित ऐंगल जान-बूझकर जोड़ा गया प्रतीत होता है. सवाल है कि अगर जाति का जिक्र करना इतना ही जरूरी है, तो क्यों नहीं बाकी पीड़िताओं की जातियों का जिक्र किया जाता? क्या सिर्फ जाति के अगड़ी-पिछड़ी होने से अपराध की गंभीरता कम या ज्यादा हो जाती है? ऐसा खेल कोई राजनीतिक पार्टी या ‘बिकाऊ खबरों वाले चैनल’ करें, तो बात समझ में आती है, लेकिन क्या एक समाचार एजेंसी, जो देश भर के अखबारों को खबरें मुहैया कराती है, ऐसा कर सकती है? उम्मीद है कि एजेंसी में ऊंचे व जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग इस ओर ध्यान देंगे और किसी राजनीतिक खेल में ‘खिलौना’ बनने से दूर रहेंगे.

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PTI में आठ साल पूरे कर चुके प्रियभांशु रंजन बोले- योगी के बाल, गोशाला की गाय, मोदी की नींद जानने के लिए जर्नलिज्म में नहीं आया

Priyabhanshu Ranjan : 8 Years In Journalism. 8 Years With The Press Trust of India. योगी के बाल नहीं बढ़ने की वजह जानने, गोशाला की गायें गिनने या मोदी के सोने के घंटे जानने के लिए जर्नलिज्म में नहीं आया था। पूरी तरह सोच समझकर असल खबरों से जुड़ा काम करने के लिए जर्नलिज्म में आया था। ये काम आज भी कर रहा हूं। शान से कर रहा हूं। शायद इसलिए 8 साल बाद भी PTI में हूं। मीडिया में जब तक रहूंगा, PTI या इसकी तरह ही गंभीर काम में यकीन रखने वाली किसी संस्था में रहूंगा।

ऐसा नहीं है कि मैंने PTI को छोड़कर कहीं और नौकरी करने की कोशिश नहीं की। बिल्कुल की। जब जर्नलिज्म में बमुश्किल दो साल हुए थे, उस वक्त दो बड़े न्यूज़ चैनलों के एडिटर से मिला था। पर बात बनी नहीं और फिर मैंने कभी कहीं कोशिश भी नहीं की।

कोशिश नहीं करने की एक वजह शायद ये भी रही कि PTI देश के उन चुनिंदा मीडिया हाउस में है, जहां Working Journalist Act पर बहुत हद तक अमल होता है, जिससे सैलरी, इंक्रीमेंट, प्रमोशन और छुट्टियों के लिए मगजमारी नहीं करनी पड़ती। बहरहाल, मोदी को PM कैंडिडेट घोषित करने के बाद जिस तरह न्यूज़ चैनलों में मोदी भक्ति का दौर शुरू हुआ, उससे शायद मेरा मोहभंग हो गया और मुझे गंभीर काम की जरूरत और अहमियत समझ आ गई। लिहाज़ा, अब तय किया है कि जब तक जर्नलिज्म में हूं, अपने काम के स्तर से समझौता नहीं करूंगा।

Note: ये भाषण उनके लिए लिखा जो मिलते ही सवाल दागते हैं कि अरे प्रियभांशु, अभी भी PTI में ही हो।

पीटीआई में आठ साल पूरा कर चुके युवा और प्रतिभाशाली पत्रकार प्रियभांशु रंजन की एफबी वॉल से.

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पीटीआई यूनियन लीडर एमएस यादव की कारस्तानी : फेडरेशन की एक करोड़ की संपत्ति बेटे को सौंपा!

देश की जानी मानी न्यूज़ एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया की फेडरेशन ऑफ़ पीटीआई एम्प्लाइज यूनियंस के महासचिव महाबीर सिंह यादव पर कई गंभीर किस्म के आरोप लगे हैं. महाबीर सिंह यादव उर्फ एमएस यादव की मनमानी के कई किस्से सामने आ रहे हैं. लगभग एक करोड़ रूपये से अधिक कीमत की फेडरेशन की प्रॉपर्टी को इन महाशय ने गलत तरीके से अपने बेटे के नाम पर करा दिया. एमएस यादव की हरकतों से पीटीआई इंप्लाइज फेडरेशन का अस्तित्व खतरे में है.

आप सभी लोगों को मालूम है कि ‘पीटीआई फेडरेशन’ न्यूज़ पेपर इंडस्ट्री में सबसे प्रभावशाली और ताकतवर यूनियन रही है जिसके बदौलत न सिर्फ वेज बोर्ड की लड़ाइयां लड़ी गईं बल्कि मीडियाकर्मियों के हक-हित की सतत दावेदारी की जाती रही. इन्हीं जैसी यूनियनों के कारण मणिसाना और अब मजीठिया वेजबोर्ड का गठन हुआ. ये वेज बोर्ड लागू हुए और जहां नहीं हुआ उसकी लड़ाई जारी है.

लेकिन इसी पीटीआई फेडरेशन के महासचिव एमएस यादव ने अनैतिक रूप से फेडरेशन की संपत्ति और बैंक में रखे पैसे का दुरूपयोग किया है. इनकी कारस्तानी से फेडरेशन में दरार पैदा हो चुका है. इन सब कुकृत्यों के कारण महासचिव को फेडरेशन प्रेसीडेंट जॉन गोनसाल्वेस ने महासचिव के पद से सस्पेंड करते हुए शो कॉज नोटिस जारी किया. इनसे जवाब माँगा गया. इसका जवाब यादव ने दिया. लेकिन उस जवाब से फेडरेशन प्रेसीडेंट और अन्य पदाधिकारी संतुष्ट नहीं दिखे. प्रेसीडेंट ने फेडरेशन की मीटिंग में महासचिव द्वारा प्रॉपर्टी और पैसों का हिसाब न देने पर कानूनी कार्यवाही करके सारा पैसा वसूलने की तैयारी की है.

पढ़ें-देखें कुछ संबंधित दस्तावेज….


गुरु दास की रिपोर्ट. संपर्क : gurudas929@gmail.com

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वरिष्ठ पत्रकार विजय जोशी ने पीटीआई के प्रधान संपादक के रूप में कामकाज संभाला

नयी दिल्ली : प्रेस ट्रस्ट आफ इंडिया (पीटीआई) ने वरिष्ठ पत्रकार विजय जोशी को समाचार एजेंसी का प्रधान संपादक नियुक्त किया. इन्हें एशिया और पश्चिम एशिया में पत्रकारिता का तीन दशक से अधिक समय का अनुभव प्राप्त है. 54 वर्षीय जोशी ने एमके राजदान की जगह ली है जो सितंबर में प्रधान संपादक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे. जोशी पहले 80 के दशक में पीटीआई में सेवाएं दे चुके हैं और उन्होंने अपने करियर का लंबा अरसा द एसोसिएटिड प्रेस (एपी) में बिताया है जहां वह भारत, सिंगापुर, मिस्र, मलेशिया और थाइलैंड में विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं.

कुछ दिन पहले तक वह एपी के दक्षिण पूर्व एशिया के समाचार निदेशक थे और टेक्स्ट, वीडियो और फोटो संचालन के कामकाज को देख रहे थे. इससे पहले वह चार साल तक एपी की एशिया टेक्स्ट रिपोर्ट का काम देख चुके हैं. पीटीआई के अध्यक्ष रियाद मैथ्यू ने कहा, ‘विजय हमारे साथ आये हैं, जिससे हम बहुत खुश हैं. उन्हें परंपरागत और नये मीडिया का अपार अनुभव है. हमें इस बात में कोई संदेह नहीं है कि वह पीटीआई को महती उंचाइयों पर ले जाएंगे.’

पीटीआई के प्रधान संपादक के तौर पर जोशी भारत में और दुनिया के प्रमुख देशों की राजधानियों में स्थित ब्यूरो में कार्यरत करीब 900 संवाददाताओं, संपादकों और अंशकालिक पत्रकारों के कामकाज को देखेंगे. जोशी ने कहा, ‘इतने प्रतिभाशाली और गुणी पत्रकारों के साथ काम करना सम्मान की बात है, जो राष्ट्र को हर महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बारे में सूचित करने की जिम्मेदारी अदा करते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘भारत लौटना बहुत ही उत्साहजनक है.’

जोशी ने कहा, ‘राजनीति, अर्थव्यवस्था, विज्ञान, जीवनशैली और मीडिया के क्षेत्र में देश बड़े बदलावों से गुजर रहा है. भारत के प्रमुख समाचार संस्थान की अगुवाई करना महत्वपूर्ण है क्योंकि वह सर्वश्रेष्ठ तरीके से काम करता रहता है. निष्पक्षता से और तेजी से खबरें देता है.’

जोशी ने 1985 में हैदराबाद में इंडियन एक्सप्रेस में उप-संपादक के रूप में कॅरियर की शुरुआत की थी और दिसंबर 1986 में पीटीआई में आ गये. पीटीआई में दो साल से अधिक समय तक रहने के बाद वह नयी दिल्ली में एपी में सेवाएं देने लगे. पीटीआई में इस अवधि में उन्होंने संवाददाता और कॉपी एडिटर की भूमिका में काम किया. जोशी को 1994 में एपी के सिंगापुर ब्यूरो में समाचार संपादक के रूप में प्रोन्नत किया गया और तीन साल बाद उन्हें पश्चिम एशिया को कवर करने वाले पत्रकारों के एक बड़े दल में काहिरा भेज दिया गया. मिस्र में अपने तीन साल के कार्यकाल में उन्हें इराक, ईरान, जॉर्डन, लेबनान और लीबिया में भी काम करने भेजा गया.

उसके बाद 2000 के दशक में जोशी ने एपी थाइलैंड में समाचार संपादक के रूप में काम किया और मलेशिया तथा सिंगापुर के ब्यूरो प्रमुख भी रहे. उन्हें जनवरी 2011 में एशिया-प्रशांत क्षेत्र का सहायक संपादक नियुक्त किया गया और फिर दक्षिण पूर्व एशिया का समाचार संपादक बनाया गया. रुचि के चलते जोशी ने उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद से भूगर्भशास्त्र में बैचलर की डिग्री अर्जित की और आंध्र विश्वविद्यालय से समुद्री भूगर्भशास्त्र में स्नातकोत्तर किया. लेकिन उनका रूझान पत्रकारिता की ओर हो गया. उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में डिग्री लेकर इस क्षेत्र में कॅरियर शुरू किया.

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51 साल बाद पीटीआई से रिटायर हो जाएंगे एमके राजदान

न्‍यूज एजेंसी पीटीआई के एडिटर-इन-चीफ एमके राजदान की 51 वर्षों की लंबी पारी इस महीने समाप्‍त होने वाली है. श्री राजदान 30 सितंबर को पीटीआई से रिटायर होने जा रहे हैं. वे पिछले 21 सालों से पीटीआई के एडिटर-इन-चीफ के पद पर कार्यरत थे. साथ ही सीईओ की अतिरिक्‍त जिम्‍मेदारी देख रहे थे. नई सरकार बनने के बाद उन्‍हें इसी साल जुलाई माह में सीईओ के अतिरिक्‍त प्रभार से कार्यमुक्‍त कर दिया गया था.

पीटीआई के सीईओ पद पर वेंकी वेकटेंश को नियुक्‍त किया गया है, जो फिलहाल अपनी जिम्‍मेदारी संभाल रहे हैं. राजदान पीटीआई से वर्ष 1965 में जुड़े थे. तब से अब तक लगतार विभिन्‍न पदों पर यहीं कार्यरत रहे. श्री राजदान की पुत्री निधि राजदान भी जानी मानी पत्रकार हैं तथा एनडीटीवी को अपनी सेवाएं दे रही हैं. 

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प्रियंका टिक्कू को गद्दी पर बिठाकर पीटीआई की सत्ता अपने हाथ में रखना चाहते हैं एमके राज़दान!

यशवंतजी
नमस्कार,

आशा करती हूँ आप कुशल होंगे. Bhadas4media पर प्रकाशित PTI की एक स्टोरी पढ़ी. काफी सटीक थी, पर ये पूरी कहानी नहीं है. पूरी कहानी कुछ और है बल्कि यहां ये कहना गलत नहीं होगा कि समझिए एक तरह से PTI की कब्र खोदी जा रही है और उसे सुपुर्दे खाक प्रियंका टिक्कू ही करेंगी. दरअसल प्रियंका टिक्कू पीटीआई के सीईओ और एडिटर इन चीफ एम के राज़दान की बहुत ख़ास हैं और ये कोई गुप्त बात भी नहीं है. राज़दान साहब पीटीआई को अपनी जागीर समझते हैं और जब पीटीआई बोर्ड ने उनको बाहर का रास्ता दिखा दिया तो वे प्रियंका टिक्कू को वहां बिठाना चाहते है. ये बात पीटीआई में सबको पता है पर अपनी नौकरी किसको प्यारी नहीं होती. मैं ये सब आपको इसलिए लिख पा रही हूँ क्योंकि मैं वहां से अब इस्तीफ़ा दे चुकी हूं.

प्रियंका टिक्कू की वजह से सिर्फ मैं ही नहीं, पिछले डेढ़ साल में 9-10 लोगों ने पीटीआई छोड़ा है. टिक्कू, विदेश मंत्रालय कवर करती हैं और आप इस मंत्रालय के किसी भी रिपोर्टर से उसके बारे में पूछ सकते हैं. उसका पूरा पत्रकारिता का तजुर्बा करीब 19 साल का है जिसमे 5 साल उसने कोई काम ही नहीं किया, क्योंकि उस दौरान वह अपने पति के साथ अमेरिका में थी. शायद आपको भी पता होगा कि पीटीआई में कई एडिटर लेवल के लोग हैं जिनका तजुर्बा प्रियंका टिक्कू से कई गुना ज़्यादा है.

पीटीआई में कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने वहां 20 साल से ज़्यादा काम किया है और रिपोर्टिंग व डेस्क दोनों का उनको खूब तजुर्बा है पर राज़दान साहब को तो पीटीआई से कोई मतलब नहीं है, उनको तो अपना आदमी बैठना है जिससे उनकी सत्ता बनी रहे, चाहें वहां लोग नौकरी छोड़ कर जाते रहें और संस्थान बर्बाद ही क्यों ना हो जाए. प्रियंका अपने रिपोर्टरों पर ऐसे चिल्लाती है जैसे वो उनके ज़र खरीद ग़ुलाम हों. मैंने भी काफी सुना, पर जब बात बरदाश्त के बाहर हो गई, तो इस्तीफ़ा दे दिया. ज़रा सोचिये, आपका ब्यूरो चीफ आपको दिल्ली चुनाव कवर करने के लिए बोले और उसको ये भी न मालूम हो कि दिल्ली में कितनी विधान सभा की सीटें हैं तो आपको कैसा लगेगा. कुछ ऐसा ही हो रहा है पीटीआई के नेशनल ब्यूरो में.

हालात तो ये हैं कि नेशनल ब्यूरो से करीब करीब सारे अच्छे रिपोर्टर नौकरी छोड़ चुके हैं और उसका कारण मैडम प्रियंका हैं. यशवंतजी, मेरा आप से बस इतना विनम्र निवेदन है कि अगर आप ये सच भी भड़ास पर डाल देंगे तो आप मुझ जैसे उन लोगों पर बड़ा एहसान करेंगे जिन्होंने अपना चैन और सुख इस महिला की वजह से खोया था. आपने भी अपने प्रोफेशनल करियर में ऐसे लोगों को देखा होगा जो सिर्फ चाटुकारिता कर कर के आगे बढ़ते हैं और उनको आगे बढ़ाने के लिया कई लोगों को या तो किनारे कर दिया जाता है या साफ़ कर दिया जाता है. बस हमारा भी ऐसा ही कुछ दर्द है और मेरा पूरा विश्वास है की आप इस को पूरी तरह से समझेंगे. एक बार फिर यह आशा करते हुए आप से विदा लेती हूँ की आप हमारी कहानी भी अपनी वेबसाइट के द्वारा जनता के सामने लाएंगे.  एक और निवेदन है कि अगर आप मेरा नाम गुप्त रखेंगे तो बड़ी कृपा होगी.

धन्यवाद

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

मूल खबर….

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पीटीआई के एडीटर इन चीफ पद के लिए प्रियंका टिक्कू मुख्य दावेदार

समाचार एजेंसी PTI में लंबे अंतराल बाद सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है और उसका पहला चरण हो भी चुका है. PTI बोर्ड ने पहले ही हिंदुस्तान टाइम्स के चीफ लर्निंग ऑफिसर रहे वेंकी वेंकटेश को एमके राजदान की जगह नया सीईओ नियुक्त कर दिया है. अब एडीटर इन चीफ की तलाश की जा रही है. गौरतलब है कि एमके राजदान ही अब तक दोनों पद संभाल रहे थे. राजदान ने इन शीर्ष पदों समेत पीटीआई में 50 साल की अपनी लंबी पारी खेली है.

नए एडीटर इन चीफ को तलाश करने की जिम्मेदारी एकोर्ड इंडिया नाम की संस्था को दी गई है जो इस तरह की उच्चस्तरीय नियुक्तियों में अपनी सेवाएं देती हैं. खबर है कि पीटीआई में संपादक और उसके नेशनल ब्यूरो की चीफ प्रियंका टिक्कू नए एडीटर इन चीफ पद के लिए एक मुख्य उम्मीदवार हैं. पीटीआई एक ऐसा संगठन है जिसका उद्येश्य लाभ कमाना नहीं है और यह एक ऐसे बोर्ड द्वारा चलाया जाता है जिसमें देश के लगभग सारे शीर्ष समाचार संस्थान शामिल हैं। उन संस्थानों में टाईम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स, द टेलीग्राफ और वीक जैसे समाचार संस्थान भी शामिल हैं.

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पीटीआई के नए संपादक के लिए जेटली की सिफारिश डस्टबिन में गई

Sanjaya Kumar Singh : कई बार विस्तार प्राप्त कर चुके समाचार एजेंसी पीटीआई के संपादक आखिरकार रिटायर हो रहे हैं और पीटीआई बोर्ड, इस एजेंसी चलाने के लिए प्रशासक नहीं, संपादक तलाश रहा है। इस खबर को पढ़िए आप समझ जाएंगे कि देश की सबसे बड़ी समाचार एजेंसी कितनी गंभीरता से चल रही है। इसकी हिन्दी सेवा ‘भाषा’ के संपादक कुमार आनंद हुआ करते थे और उनके इस्तीफा देने के बाद से भाषा के संपादक का भी पद वर्षों से खाली पड़ा है।

दरअसल पीटीआई बोर्ड के सक्रिय न होने के कारण मौजूदा प्रशासक ही सारा काम काज देखते रहे हैं और एक्सटेंशन पर चल रहा व्यक्ति कितना काम करता है और कितनी नौकरी करता है यह सब किसी से छिपा नहीं है। अब पीटीआई बोर्ड अगर किसी निष्पक्ष, पेशेवर को संपादक बनाना चाहता है तो अच्छी बात है और पीटीआई की स्वायत्ता बनी रहे तो देश में मीडिया की आजादी की लौ जलती रह सकती है।

इस खबर में बोर्ड सदस्य के रूप में टाइम्स के विनीत जैन का नाम आना और यह बताया जाना कि संपादक के नियुक्ति के मामले में उन्होंने स्टैंड लिया और फिर उनका ट्वीट कर कहना कि उन्होंने स्टैंड नहीं लिया – बोर्ड के सदस्यों की दशा दिशा भी बताता है।

Om Thanvi : भाजपा की सिफ़्त रही है कि सत्ता के दौर में अपने समर्थक मीडिया में रोप जाए। पीटीआइ में प्रधान संपादक का पद खाली हो रहा है। यह देश की सबसे अहम एजेंसी है। सुनते हैं, अरुण जेटली ने अपने घोड़े दौड़ा दिए। पर इस बार दाल गल नहीं रही। पोल अब पहले ही खुल जाती है।

Mahendra Mishra : सरकार की पीटीआई को जेबी एजेंसी बनाने की कोशिश नाकाम। बोर्ड ने ठुकराए जेटली के सुझाए नाम। इसके साथ ही यह बात भी साफ़ हो गई कि मीडिया पर सरकार की पकड़ ढीली होनी शुरू हो गई है।

Mukesh Kumar : मीडिया में अपने आदमी रोपने का काम काँग्रेसी भी खूब करते हैं, मगर जितने सुनियोजित ढंग से संघ परिवार करता है, वैसा कोई नहीं। मीडिया का भगवाकरण ऐसे ही नहीं हुआ है।

स्रोत : फेसबुक

पूरे मामले को विस्तार से जानने के लिए द वायर डॉट इन पर प्रकाशित मशहूर पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन का आर्टकिल पढ़ें, नीचे क्लिक करें:

In Setback to Jaitley, PTI Board Rebuffs Political Nominees for Editor’s Job

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PTI Employees Unions Fed takes up Majithia wage board issue

Federation of PTI Employees Unions expressed shock that many newspapers in Rajasthan have not implemented Justice Majithia Wage Board recommendation. 

Addressing its National Executive Meeting here, M S Yadav, General Secretary of Federation, and the Confederation of Newspapers and News Agency Employees Organisation, said the Federation and CNNEO would help the newspapers’ employees in Rajasthan to get justice so that they would have wage revision. 

The Federation and CNNEO discussed the issue in detail and planned to help employees of newspapers in the state, Yadav said, adding that he would also meet such journalists and non-journalists. 

The Federation meeting addressed by its President John Gonsalves, Vice President Sapan Acharya (Eastern Region), Vice President-South C Reddy also discussed “regularisation of contractual employees”, pension issues, LTA and Majithia wage awards pending arrear instalments.

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एएनआई का एकाधिकार खत्म करने को पीटीआई तैयार, ब्राडकास्ट वर्जन लाने की घोषणा

अब तक एएनआई का ब्राडकास्ट न्यूज एजेंसी के क्षेत्र में एकाधिकार है. पर प्रिंट मीडिया को न्यूज फीड देने वाली लीडिंग न्यूज एजेंसी प्रेस ट्रस्ट आफ इंडिया ने अब इसे टक्कर देने की घोषणा कर दी है. पीटीआई ने ब्राडकास्ट वर्जन लांच करने की घोषणा की है. इस चर्चित न्यूज एजेंसी ने अगले आठ से दस हफ्तों के भीतर ब्राडकास्ट वर्जन के लिहाज से कामधाम शुरू कर देने की तैयारी की है. आंतरिक तैयारियां और कामकाज तेजी से चल रहा है.

माना जा रहा है कि जो पीटीआई के रिपोर्टर हैं, वही ब्राडकास्ट के लिए भी काम करेंगे. यानि जो अब तक कलम से लिखते थे, उन्हें कैमरे भी उठाने पड़ सकते हैं. इन रिपोर्टरों को नए सिरे से ट्रेनिंग दी जाएगी. साथ ही कैमरामैनों की भी भर्ती की जाएगी.

खबर अंग्रेजी में…

Leading Newswire agency PTI has announced to launch Broadcast version of its newswire services. The agency has done the internal announcement and operations are likely to start in 8-10 weeks. Existing PTI reporters will work for this agency as well and soon they will be seen with camera crews. For this, some of them will be imparted requisite training and in some cases, they will hire new resources.

Currently, ANI has near monopoly in Broadcast Newswire services but considering the reach, range and expertise of PTI and its staff, this upcoming agency is going to be a game changer. And PTI management is planning to focus on Business Channels apart from regular political and general stuff.

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पीटीआई यूनियन और प्रबंधन की साठगांठ!

: कानाफूसी : पीटीआई के साथियों को यह खबर जानकर नए साल पर हैरानी हो सकती है लेकिन खबर सत्‍य है। पीटीआई यूनियन और मजीठिया वेज बोर्ड के कथित हीरो ने सन 2002 में प्रबंधन के साथ एक समझौता किया था। इसके अनुसार यूनियन ने प्रबंधन को तीन साल तक कॉन्‍ट्रैक्‍ट पर कर्मचारियों को रखने की अनुमति दी थी। अब यही यूनियन के सर्वेसर्वा कह रहे हैं कि कॉन्‍ट्रैक्‍ट वाले साथियों का वेतन 35 हजार से ऊपर नहीं होना चाहिए। इन नेताओं से पूछना चाहिए कि प्रबंधन के साथ किन हालातों में यह समझौता किया गया और अगर तीन साल तक ही समझौता था तो फिर इतने साल तक कॉन्‍ट्रैक्‍ट पर लोगों को कैसे रखा जा रहा है। वैसे सभी साथियों को मुबारक कि यूनियन कॉन्‍ट्रैक्‍ट के साथियों के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी करने वाली है।

पीटीआई यूनियन की गीदड़ भभकी : हाल ही में पीटीआई यूनियन की बैठक में यूनियन के सर्वेसर्वा और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्‍ठ वकील कोलिन गोंजाल्विस के शब्‍दों में मजीठिया वेतन बोर्ड की लड़ाई के हीरो एमएस यादव ने प्रबंधन को धमकी दी है कि अगर कॉन्‍ट्रैक्‍ट वाले सााथियों को मजीठिया के अनुसार एरियर नहीं दिया तो यूनियन भी सुप्रीम कोर्ट चली जाएगी। यादव जी और कॉन्‍ट्रैक्‍ट वाले साथियों को बधाई। देर आयद दुरुस्‍त आयद। यादव जी, जो अपने यहां मजीठिया पूरी तरह लागू करने के लिए सीना ठोंक रहे थे, ने आधिकारिक तौर पर मान लिया कि उनकी यूनियन ने कॉन्‍ट्रैक्‍ट वाले सााथियों से पैसा तो ले लिया लेकिन उन्‍हें मजीठिया का पूरा लाभ नहीं दिलवाया। बीच में यह भी हवा चली थी कि कॉन्‍ट्रैक्‍ट वाले सााथियों का एरियर खाने के लिए प्रबंधन और यूनियन के बीच कोई समझौता हुआ है। हालांकि इसकी कोई पुष्टि नहीं हो पा रही है लेकिन प्रबंधन की गतिविधियों से साफ है कि ऐसा कोई समझौता हुआ था क्‍योंकि इसी दौरान लखनऊ के एक बड़े अधिकारी को सेवानिवृत होना था लेकिन वे अभी तक जमे हुए हैं।

फिर यादव जी का ये बिना बरसात वाली बारिश का क्‍या राज है। पहला तो ये कि जब श्री गोंजाल्विस को यह पता चला कि उनका हीरो जीरो निकला और पीटीआई में तो मजीठिया पूरी तरह लागू हुआ ही नहीं तो वे दुखी हो गए। दूसरा ये कि सालों से कार्यविस्‍तार ले लेकर पीटीआई को एक नंबर से छठे नंबर का संस्‍थान बनाने वाले महाराज किशन राजदान यानि कि एम के राजदान की इस बार दाल गलने वाली नहीं लग रही। समझा जाता है कि राजदान का पत्ता इस बार साफ हाने वाला है। न सिर्फ एमके राजदान पांच सालों से सेवा विस्‍तार ले रहे हैं बल्कि खबर ये भी है कि यूनियन के भी कई पदाधिकारी प्रबंधन से सेवा विस्‍तार लेकर मजे ले रहे हैं। इस तरह पीटीआई दुनिया का शायद पहला संस्‍थान होगा जहां प्रबंधन के अधिकारी से लेकर यूनियन के पदाधिकारी भी सेवा विस्‍तार पर हैं। कोलिन साहब के हीरो की बात तो अलग ही है। इनके कारनामे जग जाहिर है। वैसे इनके हाथ लंबे हैं। अब अच्‍छा है अगर किसी बहाने ये अपना हाथ प्रबंधन की ओर बढ़ा रहे हैं… शायद कुछ और मिल जाएगा।

फेसबुक पर ‘मजीठिया मंच’ के फेसबुक वॉल से साभार. कानाफूसी कैटगरी की खबरें सुनी सुनाई बातों पर आधारित होती हैं. इन पर भरोसा करने से पहले अपने स्तर पर तथ्यों की जांच पड़ताल कर लें.

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