रांची के भास्कर कार्यालय में हंगामा, लेबर कोर्ट में की गई शिकायत से मुकरने के लिए कर्मचारियों पर डाला जा रहा दबाव

रांची से एक बड़ी ख़बर आ रही है कि दैनिक भास्कर के ऑफिस में मजीठिया को लेकर हंगामा मचा हुआ है। भास्कर की अन्य यूनिटों की तरह रांची भास्कर कर्मियों से भी मजीठिया नहीं चाहिए के घोषणा-पत्र पर जोर-जबरदस्ती कर साइन करा लिए गए थे। जिन कर्मियों ने साइन करने से इंकार किया उनको तबादले और नौकरी से निकालने की धमकी दी गई। प्रबंधन की धमकियों के सामने न झुकते हुए एडिटोरियल और मार्केटिंग के 34 लोगों ने इसकी शिकायत लेबर कोर्ट में की जिस पर कार्यवाही करते हुए कोर्ट ने भास्कर के सभी उच्च अधिकारियों को 10 जुलाई को सुनवाई के लिए तलब कर लिया। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को है।

प्रबंधन ने भास्कर कर्मियों के इस हरकत को गंभीरता से लिया और एडिटोरियल कर्मियों के द्वारा उठाए गए कदम को संपादक की नाकामी मानते हुए ठीकरा उन्ही के सर फोड़ दिया। आज संपादक अमरकांत ने एडिटोरियल के विजय बिहारी, प्रवीण दुबे, मनोज सिंह, राहुल चौधरी, गुंजेश और राकेश सिंह को बुला कर पूछा कि उन्होने ऐसा क्यों किया। कर्मचारियों ने जवाब दिया कि वे भावावेश में आ गए थे क्योंकि उन्हे वेतन बहुत कम मिलता है। संपादक कर्मचारियों को समझाते रहे कि जो हुआ सो हुआ वे भी उन्ही की तरह नीचे से ऊपर उठ कर आए हैं। उन्होने कहा कि सबकी बेहतरी इसी में है कि इस मामले बाहर निकने का रास्ता सोचा जाए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो प्रबंधन कर्मचाियों का या तो तबादला कर देगा या उन्हे नौकरी से निकाल देगा।  

सोमवार को लेबर कोर्ट में मामले की सुनवाई है। बाहर निकलने का चोर रास्ता खोजने के लिए भास्कर प्रबंधन द्वारा दो लीगल एडवाइज़रों को आज ऑफिस में बुलाया गया। एडवाइजरों की सलाह पर लेबर कोर्ट में शिकायत करने वाले एडिटोरियल और मार्केटिंग के कर्मचारियों पर दवाब बनाया जा रहा है कि वो कोर्ट में कह दें कि शिकायत पत्र पर साइन उनके नहीं हैं। प्रबंधन द्वारा इस प्रकार दवाब बनाए जाने से कर्मियों में रोष है क्योंकि घोषणा पत्र पर भी साइन ऐसे ही दवाब डाल कर करवाए गए थे। ऑफिस में एक गहमा गहमी का माहौल है क्योंकि कर्मचारियों को मजीठिया के संबंध में कोई आश्वासन अभी भी नहीं दिया जा रहा है।

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Comments on “रांची के भास्कर कार्यालय में हंगामा, लेबर कोर्ट में की गई शिकायत से मुकरने के लिए कर्मचारियों पर डाला जा रहा दबाव

  • साथियो, जागरण कर्मियों ने अंग्रेजी में जिस तरह के प्रारूप के आधार पर अपने साथियों के हस्ताक्षर लेकर वकील को यूनियन की तरफ से मुकदमा कायम करने के लिए अधिकृत किया है उसका प्रारूप नीचे दिया जा रहा है। यह नाम सिर्फ वकील तक ही सीमित रहेगा पर लड़ाई के आगे बढ़ने पर आपको अपनी पहचान के साथ सामने आना पड़ सकता है। एकजुट रहेंगे बड़े पैमाने पर साथ रहेंगे तो जीत पक्की है। तो मीडिया के साथियो, अपने हक के लिए आवाज बुलंद करो।
    We the following employee of —- Unit of —–Prakashan Limited do here by authorize Advocate —- to file our case before the Hon’ble Supreme Court of India against the management of the newspaper for not implementing the recommendations of Majithia Wage board.
    Hon’ble Supreme Court has already directed the newspaper management vide its order dated 07.02.2014 to implement it. However, the management continues to defy directions.
    इसके आगे आपको पांच खाने बनाने हैं। पहला सीरियल नंबर, नाम, विभाग, कर्मचारी कोड और हस्ताक्षर। सब कुछ अंग्रेजी में रहेगा।

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  • बिना सुप्रीम कोर्ट में अदालत की अवमानना का मुकदमा डाले अखबार मालिकान अपनी हरकतों से बाज आने वाले नहीं। एक बार सुप्रीम कोर्ट को ठप्पा लग गया तो निचली अदालतों को मैनेज करना आसान नहीं होगा। डरे तो गये काम से। एकजुट रहो और लड़ो। एकजुटता भंग न होने पाये। आप पाएंगे कि संख्याबल बढ़ता ही जा रहा है और नये संगी-साथी मिलते जाएंगे।

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  • Bhaiyon, Indian Express Ltd. mein bhi Majithia Wage board manmaaney tareekey se diya jaa rahaa hai. Inhoney apney ko kahin Group-3, kahin 4 aur kahin 5 mein de diya hai. Aurangabaad aur Lucknow mein jabardasti Gr-5 aur uss par bhi manmaaney tareekey sey jabardasti bagair jaankaari ke bank A/c mein salary daal diya hai. Kissi bhi karmchari ko kuchh nahin badha hai. Uss par bhi Fitment aisa ki kahnaa hi mushkil hai. Ek nai cheej dekhney ko mil rahi hai- “Protect Pay”. Majithia mein yah Pay ka zikra kahin nahin hai. Par Indian Express ney iss tarah ka diya hai… Aap “Jujharoo” aur Bhadas ke “Sampadak mahoday” sey guzaarish hai ki iss sambandh mein Margdarshan karein…. badi kripa hogi…
    regards

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  • Sanjay420 says:

    डरना नहीं झकना नहीं….इन मालिकों को औकात याद दिला दो भाईयों यही समय है…हाईकोर्ट में सीधे याचिका फाइल करो जैसा गुजरात में भास्कर के रिपोर्टस ने की है…भास्कर प्रबंधन तिनके के समान उड़ जाएंगा ..फट्‌टू है साले…बनिये कहीं के…डरो मत भूखों नहीं मरने वाले

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  • INSAF INDIA says:

    supreme court ke aadesh ko nahi manane wale malik chor hain. desh me ab imandari nahi bachi hai. akhir patrakaron ke achhe din kaise ayenge. Modi sarkar bhi katghare me hai. sahara media ke karamchariyon ko vetan der se kar pratarit kiya ja raha hai. yade sahara aapne ko pariwar mata hai toh kuchha jamine patrakaron ke hit me bhi beche. hajaron karor sebi ko de rahe ho. matra ek do karore media ke liye chahiye.

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