कश्मीर के दो पत्रकार साथियों मजीद मकबूल और सैयद शहरयार को रेड इंक अवार्ड मिलना बहुत उम्मीद बंधाता है

Navin Kumar-

हां जुल्मतों के दौर में भी गीत गाए जाएंगे.. कश्मीर हमेशा से मेरे दिल के बहुत करीब रहा है। वहां पहाड़ हैं लेकिन वो हिमाचल के पहाड़ की तरह नहीं है। वहां बर्फ है लेकिन वो उत्तराखंड की बर्फ की तरह नहीं है। वहां मैदान भी हैं लेकिन वो झारखंड के मैदानों की तरह नहीं है। वहां बोलना ही नहीं सोचना भी मुश्किल है। इन हालात में एक कश्मीरी के लिए कश्मीर पर लिखना कितना मुश्किल होगा इसका अंदाज भी हम दिल्ली में बैठकर नहीं लगा सकते।

कश्मीर वो सहमा हुआ बच्चा है जिसे डर है कि किसी भी पल उससे मां का आंचल छूट जाएगा।

ऐसे में कश्मीर के दो साथियों को रेड इंक अवार्ड मिलना बहुत उम्मीद बंधाता है। मजीद मकबूल और सैयद शहरयार दोनों को जबरदस्त वाला सलाम और बधाई और बधाई.

Mumbai Press Club को जिसने सागर किनारे से श्रीनगर को यह पैगाम भेजा है कि हमने दर्द में साथ मिलकर रोने का इल्म ओ हुनर हुकूमत की ठोकरों पर कुर्बान नहीं किया है।



 

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